NASA के Artemis II मिशन में इस बार कुछ ऐसा हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ. पहली बार एस्ट्रोनॉट्स अपने साथ iPhones लेकर चांद की यात्रा पर गए हैं. लॉन्च से पहले एस्ट्रोनॉट्स को अपने स्पेस सूट में iPhones रखते हुए भी देखा गया. दरअसल, ये iPhones सिर्फ स्टाइल के लिए नहीं हैं बल्कि इनका इस्तेमाल मिशन के दौरान खास पलों को कैद करने और शानदार क्वालिटी की तस्वीरें लेने के लिए किया जाएगा. दिलचस्प बात ये है कि Jared Isaacman ने 2026 में एक नई पॉलिसी के तहत एस्ट्रोनॉट्स को अपने साथ मॉडर्न स्मार्टफोन्स ले जाने की अनुमति दी है.
Artemis II क्या है?
Artemis II एक खास स्पेस मिशन है, जो करीब 10 दिन तक चलेगा. इसमें चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों ओर घूमकर वापस धरती पर लौटेंगे. खास बात ये है कि इस मिशन में वे चांद पर लैंड नहीं करेंगे, लेकिन फिर भी ये मिशन बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई सालों बाद इंसान फिर से डीप स्पेस की तरफ बढ़ रहे हैं.
इस बार एस्ट्रोनॉट्स अपने साथ सिर्फ हाई-टेक स्पेस इक्विपमेंट ही नहीं, बल्कि iPhones भी लेकर गए हैं. पहले के मिशन में जहां सिर्फ खास कैमरे इस्तेमाल होते थे, वहीं अब iPhones का इस्तेमाल इसे थोड़ा अलग और मॉडर्न बना रहा है.
NASA astronauts are given silver iPhone 17 Pro Max for the Artemis II flight!
The same phone we use could be used to take pictures of the Moon
Look at how it’s floating in zero gravity, this could be the ultimate Shot on iPhone commercial 😭 pic.twitter.com/gQzrR6miDP
— Shishir (@ShishirShelke1) April 2, 2026
iPhones को साथ क्यों रखा गया है?
दरअसल, वजह है इसकी आसान इस्तेमाल करने की क्षमता और बेहतर डॉक्यूमेंटेशन. अब एस्ट्रोनॉट्स iPhone जैसे स्मार्टफोन से हाई-क्वालिटी फोटो और वीडियो कैप्चर कर सकते हैं, मिशन के दौरान अपने खास पलों को रिकॉर्ड कर सकते हैं और स्पेसक्राफ्ट के अंदर की एक्टिविटीज को आसानी से डॉक्यूमेंट कर सकते हैं.
एक और दिलचस्प बात ये है कि एस्ट्रोनॉट्स पहले से ही iPhone जैसे डिवाइस इस्तेमाल करने के आदी होते हैं. इसलिए उन्हें इसे ऑपरेट करने में कोई दिक्कत नहीं होती. वो आसानी से अपने मिशन के दौरान पर्सनल और बिहाइंड-द-सीन मोमेंट्स कैप्चर कर सकते हैं.
स्पेस में iPhone 17 Pro Max, लेकिन कुछ नियमों के साथ
स्पेस में iPhone 17 Pro Max इस्तेमाल तो हो रहा है, लेकिन वैसे नहीं जैसे हम धरती पर करते हैं. मिशन के दौरान इन फोन्स को लगातार Airplane Mode में रखा जाता है. इसकी वजह भी काफी दिलचस्प है. स्मार्टफोन्स से निकलने वाले सिग्नल्स स्पेसक्राफ्ट के सिस्टम में दखल दे सकते हैं. इसलिए कनेक्टिविटी बंद रखकर इन्हें सिर्फ एक कैमरा और रिकॉर्डिंग डिवाइस की तरह इस्तेमाल किया जाता है.
दिखने में ये बिल्कुल नॉर्मल iPhone जैसा ही लगता है, लेकिन इसका इस्तेमाल पूरी तरह कंट्रोल में होता है. अभी तक NASA ने ये साफ नहीं किया है कि ये फोन्स खास तौर पर मॉडिफाइड हैं या फिर मार्केट में मिलने वाले नॉर्मल वर्जन ही हैं. लेकिन एक बात जरूर साफ है कि स्पेस मिशन्स में अब छोटे, पावरफुल और आम कंज्यूमर टेक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.
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