Taiwan Election Anti India: ताइवान में हिंदुस्तानीय प्रवासी मजदूरों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. दक्षिणी ताइवान में स्थानीय चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार ने ऐसा चुनावी पोस्टर लगवाया, जिसमें हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय ध्वज और पगड़ी पहने एक व्यक्ति की तस्वीर पर ‘नो’ का निशान बनाया गया था. इस पोस्टर को सोशल मीडिया पर नस्लीय भेदभाव और सांस्कृतिक अपमान के रूप में देखा जा रहा है.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब ताइवान हिंदुस्तान से मजदूरों को बुलाने की तैयारी कर रहा है. दोनों देशों के बीच 2024 में प्रवासी श्रमिकों को लेकर एक समझौता (MoU) भी हुआ था. हालांकि, ताइवान की विपक्षी पार्टी KMT लगातार इस योजना का विरोध कर रही है और हिंदुस्तानीय मजदूरों को लेकर डर का माहौल बना रही है.
कौन है पोस्टर लगाने वाला उम्मीदवार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पोस्टर काओशुंग सिटी के सियाओगांग डिस्ट्रिक्ट के बरो वार्डन और स्वतंत्र उम्मीदवार ली होंग-यी ने लगवाया था. वह आने वाले सिटी काउंसिल चुनाव लड़ रहे हैं. पोस्टर में हिंदुस्तानीय झंडे और पगड़ी पहने व्यक्ति की तस्वीर पर लाल रंग का प्रतिबंध वाला निशान लगाया गया था. ली होंग-यी ने कहा कि उनका मकसद हिंदुस्तान से मजदूर बुलाने की ताइवान की योजना का विरोध करना था. हालांकि, पोस्टर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई. कई लोगों ने इसे सीधे तौर पर नस्लीय भेदभाव बताया.
Indians in Taiwan worried by rising racism
A political candidate has promised to ban Indian workers from Taiwan
His campaign poster depicts a man with a turban and the flag of India with a large cross over both pic.twitter.com/ieEwm1L8F4
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) May 19, 2026
हिंदुस्तानीय समुदाय ने जताई नाराजगी
ताइवान में करीब 7,000 हिंदुस्तानीय रहते हैं और ज्यादातर हाई-टेक इंडस्ट्री में काम करते हैं. इनमें Realtek, Foxconn और TSMC जैसी कंपनियों से जुड़े लोग शामिल हैं. ताइवान में रहने वाले एक हिंदुस्तानीय नागरिक ने इस पोस्टर को ‘खुला और सीधा नस्लीय भेदभाव’ बताया.
सोशल मीडिया पर लिखे अपने संदेश में उन्होंने कहा कि किसी प्रशासनी नीति से असहमति होना अलग बात है, लेकिन किसी समुदाय की पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों को निशाना बनाना गलत है. उन्होंने कहा कि पोस्टर में लोगों की शारीरिक पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश दिखाई देती है.
स्थानीय नेताओं ने भी किया विरोध
न्यू पावर पार्टी के काओशुंग चैप्टर प्रमुख वांग यी-हेंग ने भी ली होंग-यी के पोस्टर की आलोचना की. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानीय झंडे और पगड़ी पर प्रतिबंध का निशान लगाना बेहद अज्ञानतापूर्ण कदम है. वांग ने कहा कि पगड़ी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान, आस्था और पहचान का प्रतीक है. ऐसे प्रतीकों को निशाना बनाना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है. लेकिन काओशुंग में लगाए गए इस पोस्टर ने अब बहस को सीधे नस्लभेद और सांस्कृतिक सम्मान के मुद्दे तक पहुंचा दिया है.
ताइवान की प्रशासन का क्या है रुख
ताइवान और हिंदुस्तान के बीच 2024 में प्रवासी श्रमिकों को लेकर समझौता हुआ था. इसके तहत हिंदुस्तान से मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और केयरगिविंग सेक्टर में मजदूरों की भर्ती की जानी है. ताइवान के श्रम मंत्री हंग सुन-हान ने संसद में कहा था कि शुरुआती चरण में 2026 में करीब 1,000 हिंदुस्तानीय मजदूरों को ताइवान लाया जा सकता है.
फिलहाल दोनों देश दस्तावेजों की जांच, हेल्थ स्क्रीनिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर काम कर रहे हैं. ताइवान प्रशासन का कहना है कि देश में घटती जनसंख्या और बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कारण कई सेक्टर में कर्मचारियों की कमी हो रही है. ऐसे में विदेशी श्रमिकों की जरूरत बढ़ गई है.
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विपक्षी KMT क्यों कर रही विरोध?
विपक्षी पार्टी KMT लगातार इस योजना पर सवाल उठा रही है. पार्टी के कुछ नेताओं ने दावा किया कि हिंदुस्तानीय मजदूर अपराध बढ़ा सकते हैं और ‘भाग’ सकते हैं. उन्होंने स्त्रीओं की सुरक्षा को लेकर भी बयान दिए गए.
हिंदुस्तानीय अपराध आंकड़ों का हवाला देकर डर फैलाने की कोशिश
ताइवान की संसद में KMT विधायक हुआंग चिएन-पिन ने हिंदुस्तान के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में 2022 में स्त्रीओं के खिलाफ 4,45,256 अपराध दर्ज हुए, जिनमें 31,000 से ज्यादा रेप केस शामिल थे.
हुआंग ने दावा किया कि ये आंकड़े हिंदुस्तानीय मजदूरों को ताइवान लाने को लेकर चिंता पैदा करते हैं और प्रशासन को ज्यादा सख्त निगरानी करनी चाहिए. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि हिंदुस्तान की विशाल आबादी और भौगोलिक आकार की तुलना ताइवान जैसे छोटे देश से करना सही नहीं है.
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