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बाबा दरबार पहुंचे 1983 विश्वकप विजेता टीम के सदस्य गुंडप्पा विश्वनाथ, बोले – देश के लिए खेलना सबसे बड़ा गौरव

देवघर से संजीव मिश्रा की रिपार्ट

Deoghar News: हिंदुस्तानीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम अध्याय 1983 विश्वकप विजेता टीम के सदस्य गुंडप्पा विश्वनाथ बुधवार को अपने पूरे परिवार के साथ देवघर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर देश और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. उनके साथ उनकी पत्नी कविता विश्वनाथ, पुत्र दैविक विश्वनाथ, पुत्रवधू श्रुति विश्वनाथ और पोता भी मौजूद थे. मंदिर पहुंचने पर प्रशासन की ओर से उन्हें विशेष व्यवस्था के तहत दर्शन कराया गया.

विधिवत पूजा-अर्चना और जलाभिषेक

मंदिर पहुंचने के बाद गुंडप्पा विश्वनाथ और उनके परिवार को सुरक्षा घेरे में प्रशासनिक भवन तक ले जाया गया. यहां मंदिर सहायक प्रभारी संतोष कुमार की देखरेख में पूरी व्यवस्था की गई. मंदिर दारोगा आदित्य फलहारी ने विधिवत संकल्प कराकर पूरे परिवार से बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कराई. इस दौरान सभी ने श्रद्धा के साथ जलाभिषेक किया और देश की उन्नति तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की. मंदिर परिसर में उनका आगमन श्रद्धालुओं के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बना रहा. कई लोगों ने उन्हें देखकर उत्साह व्यक्त किया.

1983 के विश्वकप को किया याद

मंदिर दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गुंडप्पा विश्वनाथ ने 1983 विश्वकप की यादों को साझा किया. उन्होंने कहा कि उस समय संसाधनों की कमी थी, लेकिन खिलाड़ियों के जज्बे में कोई कमी नहीं थी. उन्होंने कहा कि उस दौर में न तो क्रिकेट बोर्ड के पास पर्याप्त संसाधन थे और न ही खिलाड़ियों को आज जैसी मैच फीस मिलती थी. बावजूद इसके, देश के लिए स्पोर्ट्सना ही सबसे बड़ा सम्मान और गर्व की बात थी.

बदला है हिंदुस्तानीय क्रिकेट का परिदृश्य

विश्वनाथ ने कहा कि आज हिंदुस्तानीय क्रिकेट का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है. उन्होंने हिंदुस्तानीय टीम के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक स्तर पर उसके दबदबे की सराहना की. उन्होंने कहा कि आज खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानीय क्रिकेट का भविष्य बेहद उज्ज्वल है.

युवाओं में बढ़ा क्रिकेट का क्रेज

उन्होंने यह भी कहा कि पहले के समय में स्पोर्ट्स को करियर के रूप में उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. आज के युवा क्रिकेट को पेशेवर करियर के रूप में अपनाने के लिए उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि अब माता-पिता भी अपने बच्चों को स्पोर्ट्स के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. हर परिवार चाहता है कि उनका बच्चा देश का प्रतिनिधित्व करे और नाम रोशन करे.

बाबा दरबार में देश की तरक्की की कामना

देवघर प्रवास के दौरान गुंडप्पा विश्वनाथ ने बाबा बैद्यनाथ के दरबार में देश की उन्नति और समृद्धि की कामना की. उन्होंने कहा कि देश की प्रगति और खुशहाली ही हर नागरिक की प्राथमिकता होनी चाहिए. पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने बाबा को नमन किया और आशीर्वाद लिया. उनका यह दौरा धार्मिक आस्था और देशभक्ति के भाव का सुंदर संगम देखने को मिला.

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प्रेरणा देने वाली शख्सियत

गुंडप्पा विश्वनाथ का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक साबित हुआ. उन्होंने अपने अनुभवों के जरिए यह संदेश दिया कि समर्पण, मेहनत और देशभक्ति से ही सफलता हासिल की जा सकती है. 1983 विश्वकप की यादों को साझा करते हुए उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि स्पोर्ट्स सिर्फ करियर नहीं, बल्कि देश के सम्मान से जुड़ा एक बड़ा मंच है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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