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झारखंड के सांसदों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ : विकास निधि खर्च करने में सांसद संजय सेठ अव्वल, निशिकांत और मनीष पिछड़े

Jharkhand MP Fund, रांची (विवेक चंद्रा): झारखंड के 14 लोकसभा सांसदों को अपने संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि (एमपीएलएडी) के उपयोग में भारी असमानता सामने आई है. ताजा आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि जहां कुछ सांसदों ने अपने क्षेत्र में विकास की गति को तेज करने के लिए फंड का भरपूर उपयोग किया है, वहीं कई सांसदों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. विकास निधि के खर्च में इस बड़े अंतर का सीधा असर राज्य के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में चल रही बुनियादी परियोजनाओं पर पड़ सकता है.

संजय सेठ ने मारी बाजी, सुखदेव भगत दूसरे स्थान पर

सांसद निधि के उपयोग (फंड यूटिलाइजेशन) के मामले में रांची के सांसद संजय सेठ प्रदेश में शीर्ष पर हैं. उन्होंने अपनी निधि का 82.7 प्रतिशत हिस्सा खर्च कर विकास कार्यों में अपनी सक्रियता साबित की है. वहीं, लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने राशि खर्च करने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है. उन्हें आवंटित 12.3 करोड़ रुपये में से 75.5 प्रतिशत खर्च कर वे राज्य में दूसरे पायदान पर काबिज हैं. इनके अलावा जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो (74.1%), खूंटी के कालीचरण मुंडा (72.2%) और दुमका के नलिन सोरेन (71.2%) ने भी 70 प्रतिशत से अधिक फंड खर्च कर बेहतर प्रदर्शन किया है.

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मध्यम और औसत से नीचे का प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के बी.डी. राम (53.9%), आजसू के सी.पी. चौधरी (46.3%) और ढुलू महतो (41.4%) खर्च के मामले में मध्यम श्रेणी में रहे हैं. वहीं, झामुमो की जोबा मांझी (28.9%), केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी (25.8%) और विजय हांसदा (20.5%) का प्रदर्शन औसत से भी नीचे दर्ज किया गया है. इन क्षेत्रों में विकास निधि के कम उपयोग ने स्थानीय स्तर पर कई सवालों को जन्म दिया है.

हजारीबाग और गोड्डा के आंकड़े सबसे कमजोर

इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली जानकारी गोड्डा और हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से जुड़ी है। चर्चित भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी सांसद निधि का मात्र 1.8 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च किया है. वहीं, हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल का यूटिलाइजेशन ‘शून्य’ प्रतिशत रहा है, जिसका अर्थ है कि उनके खाते से अब तक क्षेत्रीय विकास के लिए एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है.

विकास की गति पर विशेषज्ञों की चिंता

नेतृत्वक विशेषज्ञों का मानना है कि सांसद निधि क्षेत्रीय समस्याओं जैसे सड़क, नाली, और सामुदायिक भवनों के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण ज़रिया है. यदि सांसद इस राशि का समय पर उपयोग नहीं करते हैं, तो वह फंड लैप्स होने का खतरा रहता है और जनता विकास से वंचित रह जाती है. जिन क्षेत्रों में यूटिलाइजेशन कम है, वहां आने वाले समय में जनप्रतिनिधियों को जनता के कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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