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पेमेंट अटकी तो झटपट मिलेगा पैसा वापस, वॉलेट यूजर्स के लिए RBI ने बदली प्रीपेड कार्ड की पूरी गेम

RBI New PPI Rules: आज के दौर में हम चाय की टपरी से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह मोबाइल वॉलेट या प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. इसी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) अब नए नियम (PPI फ्रेमवर्क) लाने की तैयारी में है. RBI का मकसद सीधा है—लेन-देन में सुरक्षा बढ़े, ग्राहकों के हितों की रक्षा हो और सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी आए. 

क्या हैं ये PPI और आपकी जेब पर क्या असर होगा?

PPI यानी ‘प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स’ का मतलब उन टूल्स से है जिनमें आप पहले पैसे डालते हैं और फिर उन्हें खर्च करते हैं. इसमें आपके मोबाइल वॉलेट (जैसे Paytm, Amazon Pay), गिफ्ट कार्ड और मेट्रो या बस में चलने वाले ट्रांजिट कार्ड शामिल हैं. RBI ने अब इनके लिए बैलेंस की सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है. जैसे, जनरल वॉलेट में आप अधिकतम 2 लाख रुपये रख पाएंगे, जबकि गिफ्ट कार्ड की लिमिट 10,000 रुपये और ट्रांजिट कार्ड की 3,000 रुपये तक हो सकती है. कैश के जरिए वॉलेट में पैसा लोड करने की सीमा भी 10,000 रुपये प्रति महीना तय की जा सकती है ताकि रिस्क कम रहे. 

पैसा फंस गया तो रिफंड कब मिलेगा?

अक्सर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन फेल होने पर पैसा वापस आने में हफ्तों लग जाते हैं. RBI के नए ड्राफ्ट में इसका पक्का समाधान दिया गया है. अगर कोई ट्रांजैक्शन फेल होता है, रिजेक्ट होता है या आप सामान वापस (Cancel) करते हैं, तो पैसा तुरंत आपके उसी वॉलेट में वापस आ जाएगा. खास बात यह है कि अगर रिफंड आने से आपके वॉलेट की लिमिट पार भी हो जाती है, तो भी पैसा क्रेडिट कर दिया जाएगा. इससे ग्राहकों को अपनी ही रकम के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. 

क्या अब UPI और वॉलेट साथ मिलकर चलेंगे?

जी हां, RBI ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ पर जोर दे रहा है. इसका मतलब है कि अगर आपका वॉलेट फुल-KYC (Know Your Customer) अपडेटेड है, तो आप उसे किसी भी UPI ऐप या कार्ड नेटवर्क के साथ इस्तेमाल कर पाएंगे. साथ ही, अब आप थर्ड-पार्टी UPI ऐप्स पर भी अपने वॉलेट को आसानी से देख और इस्तेमाल कर सकेंगे. सबसे अच्छी बात यह है कि वॉलेट कंपनियां या उनके एजेंट ग्राहकों से कोई भी एक्स्ट्रा या छुपा हुआ चार्ज (Hidden Fees) नहीं वसूल पाएंगे. 

कंपनियों के लिए नियम सख्त क्यों?

RBI चाहता है कि केवल भरोसेमंद और आर्थिक रूप से मजबूत कंपनियां ही यह बिजनेस चलाएं. नए नियमों के मुताबिक, नॉन-बैंक वॉलेट कंपनियों के पास कम से कम 5 करोड़ रुपये की नेटवर्थ होनी चाहिए, जिसे तीन साल के भीतर बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये करना होगा. इसके अलावा, कंपनियों को अपनी सभी शर्तें, चार्जेस और वैलिडिटी की जानकारी एकदम साफ और सरल भाषा में देनी होगी. अगर ग्राहक को कोई समस्या आती है, तो कंपनियों को एक तय समय के भीतर उसका समाधान करना ही होगा. 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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