नया विचार न्यूज़ सरायरंजन : प्रखंड के झखड़ा स्थित दुर्गा स्थान में मूर्ति की प्राण– प्रतिष्ठा एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। इस अवसर पर केवल अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मर्यादा एवं ज्ञान का संगम भी देखने को मिल रहा है। वहीं वैदिक मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि से झखड़ा गांव का कण –कण गुंजायमान हो रहा है। सुप्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. पुंडरीक शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान की लीलाओं का वर्णन कर रहे हैं। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथावाचक ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण पर जाने से पहले इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि आप जहां जा रहे है,वहां आपका, अपने इष्ट का या अपने गुरु का अपमान ना हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उसे स्थान पर नहीं जाना चाहिए। कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाहा होना पड़ा। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खो, जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। इसी तरह परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य एवं संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। मौके पर्व पूर्व मुखिया अजित कुमार झा, वार्ड पार्षद नीरज कुमार झा, विनोद बाजपेयी,बैजनाथ झा, अशोक झा, रवींद्र झा, गोपाल झा, रंजीत झा, रामानंद झा,अरुण कुमार झा, जगन्नाथ झा, शंभू झा, विमल झा, मनीष झा, भूषण झा,अजय कुमार झा, फूलबाबू झा सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

23/04/2026