तमिलनाडु की नेतृत्व में बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब डीएमके के वरिष्ठ नेता और सहकारिता मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन तिरुप्पत्तूर सीट से सिर्फ एक वोट से हार गए. इतनी करीबी हार ने सबको हैरान कर दिया और यह चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया. निर्वाचन आयोग के अनुसार, तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर. ने 83,375 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि डीएमके के पेरियाकरुप्पन 83,374 मतों के साथ महज एक वोट से पीछे रह गए.
यह मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ. पहले पेरियाकरुप्पन 30 मतों से आगे थे, लेकिन आखिरी गणना में टीवीके उम्मीदवार बाजी मार ले गए. वहीं, हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के के.सी. तिरुमरन 29,054 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK
मंत्री की ये हार दिखाती है कि विजय की TVK ने कितना बड़ा असर डाला है. पहली बार चुनाव लड़कर ही पार्टी 108 सीटें जीत गई और तमिलनाडु की पुरानी दो-ध्रुवीय नेतृत्व को हिला दिया, साथ ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. तिरुप्पत्तूर का यह परिणाम हिंदुस्तान के चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में दर्ज हो गया है, जो यह दिखाता है कि लोकतंत्र में हर एक मत कितनी निर्णायक भूमिका निभाता है.
विजय की टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को पछाड़ते हुए 108 सीट हासिल की. इस चुनाव में DMK मात्र 59 सीट में ही जीत हासिल कर सकी. यहां विधानसभा चुनाव के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुए थे और मतगणना 4 मई को हुई. विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIDMK) ने 47 सीट जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) को चार सीट और बीजेपी के अलावा अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) को क्रमशः एक-एक सीट मिली.
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DMK के सहयोगी दलों में से कांग्रेस ने पांच सीट जीतीं, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), हिंदुस्तानीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और वीसीके ने दो-दो सीट जीतीं. डीएमडीके को राज्य की कुल 234 विधानसभा सीट में से एक सीट मिली.
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