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Saba Azad:अभिनेत्री ने स्वीकारा मैं भी भद्दे कमेंट्स और छेड़खानी का शिकार हुई हूं

saba azad :ओटीटी प्लेटफार्म जी 5 पर स्ट्रीम कर रही वेब सीरीज क्राइम बीट में अभिनेत्री सबा आजाद जर्नालिस्ट माया की भूमिका में हैं. सबा बताती हैं कि इस किरदार के लिए उनकी प्रेरणा दिल्ली के पत्रकार हैं, जो उनके परिवार के करीब थे. जिनके लिए सच सबकुछ था.उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश 

रॉकेट बॉयज ,हू इज योर गायनेक जैसे शोज ने इंडस्ट्री में आपको अभिनेत्री के तौर पर एक नई पहचान दी है,क्राइम बीट क्या अलग आपकी फिल्मोग्राफी में एड कर रहा था ?

रॉकेट बॉयज एक हिस्टोरिकल बायोपिक थी. फील लाइक इश्क़ एलजीबीटीक्यू की लव स्टोरी थी.हु इज योर गायनेक सोशल इश्यू पर आधारित लाइट हार्टेड कहानी थी.इन सब से मुझे कुछ अलग करना था. क्राइम बीट ग्रिटी इन्वेस्टीगेशन जर्नलिज्म पर आधारित है .जिसमे जमकर ड्रामा और थ्रिलर था और मुझे ऐसा कुछ करना था.

इस थ्रिलर ड्रामा का हिस्सा बनने के लिए क्या चीजें सीखनी पड़ी क्या कुछ भूलना पड़ा?

सच कहूं तो इतना कुछ होमवर्क नहीं था.सुधीर मिश्रा इसके निर्देशक हैं .जो हमेशा आपको सपोर्ट करते हैं.उनके सेट का माहौल बहुत ही फ्रेंडली होता है .इस वेब सीरीज में मेरे साथ साकिब हैं ,जो मेरे अच्छे दोस्तों में से एक हैं तो चीजें और आसान हो गई . वैसे मेरे मम्मी पापा के कई जर्नलिस्ट दोस्त रहे हैं ,तो मैंने उनको अपने किरदार में लाने की कोशिश की है . दिल्ली के प्रेस क्लब ,कंस्टीट्यूशन क्लब में मिलते थे. वह सोशलिस्ट थे. सच किसी भी चीज से बड़ा होता है. इस तरह की उनकी सोच थी.ये सब मैंने माया के किरदार में भी लाने की कोशिश की है . 

अपने आसपास के देश दुनिया की समाचारों की निजी जिंदगी में आप कितनी जानकारी रखती हैं ?

देश दुनिया में क्या हो रहा है . यह आपको पता होना चाहिए. सीधे तौर पर ना सही लेकिन कहीं ना कहीं से वह प्रभावित करता ही है ,तो मैं जानकारी रखने की कोशिश करती हूं.

निजी जिंदगी में कभी किसी क्राइम के खिलाफ आपने आवाज़ उठायी है ?

वैसे कोई बड़ा क्राइम तो मेरे आसपास नहीं हुआ है,लेकिन हर हिंदुस्तानीय लड़की की तरह मैं भी सड़कों पर चलते हुए भद्दे कमेंट्स और छेड़खानी का शिकार हुई हूं. मेरे पेरेंट्स सिखाया है कि चुपचाप कुछ भी नहीं सहने का.आपके साथ कोई गलत कर रहा है तो चुप नहीं रहने का अपनी आवाज उठाने का. भीड़ वाली जगहों में कई बार कई बार गलत तरीके से मुझे छूने की कोशिश हुई है और मैंने  हर बार मुंह तोड़ जवाब दिया है. मैं हर लड़की से ये अपील करूंगी कि वो जवाब दे क्योंकि अक्सर ऐसे लोगों को लगता है कि औरतें रिप्लाई नहीं करेंगी तो उनकी हिम्मत बढ़ जाती है.

स्त्रीओं से जुड़े बढ़ते अपराध में हालिया किस समाचार ने आपको बहुत ज्यादा परेशान किया ? 

स्त्रीओं को अपनी ही बॉडी पर अधिकार नहीं है. दूसरे लोगों ने इसका ठेका ले रखा है. कोई जज कहीं बैठा हुआ.मैरिटल रेप पर नए कानून बना रहा है. इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है.हम 2025 में इस तरह की बातें कर रहे हैं. हमारी शिक्षा या परवरिश में ही कुछ दोष हैं, जो हम नहीं समझा पा रहे हैं कि दोनों समान हैं.हमारे एजुकेशन सिस्टम में जेंडर स्टडी होनी चाहिए. सेक्स एजुकेशन भी होना चाहिए.मुझे लगता है कि ग्रास रुट लेवल पर ही बदलाव संभव हैं.  

आप निजी जिंदगी में जेंडर इनइक्वालिटी से जूझी हैं ? 

घर पर तो नहीं लेकिन वर्क प्लेस पर कई बार. बहुत सारी  फीमेल एक्ट्रेस इस बात को हाईलाइट कर चुकी हैं. मेल एक्टर और फीमेल एक्टर के बीच मेहनताने का जो फर्क है. वो बहुत ही गलत है. वो कहीं ना कहीं पितृसत्ता समाज की ओर दर्शाता है. एक ही काम के लिए पुरुषों को ज्यादा मेहनताना कैसे दिया जा सकता है.

आप एक्टर,सिंगर, वॉइस ओवर आर्टिस्ट ,डांसर हैं किस तरह से सभी चीजों के साथ बैलेंस करती हैं ?

मैंने बचपन से थिएटर और म्यूजिक साथ -साथ करते आयी हूं. उसके साथ मेरा डांस भी चल रहा था. हां कई बार मेर एक्टिंग का कुछ होता है और उसी समय म्यूजिक का भी आ जाता है, तो अपनी सुविधा के अनुसार उस वक़्त जो होता है. उसे चुन लेती हूं.वैसे जहां चाह वहां राह भी  है. कई बार मैं दिन में शूट करती हूं और रात में म्यूजिक से जुड़ा काम कर लेती हूं.सच कहूं तो चार चीजें एक साथ करने में मुझे मजा आता है 

जब अच्छी स्क्रिप्ट और किरदार नहीं मिलते हैं, तो परेशान होती हैं ? 

इस मामले में चार -चार करियर होना मेरे लिए वरदान रहा है.अच्छी स्क्रिप्ट जब मेरे पास नहीं आती है तो मुझे ये सोचकर परेशान नहीं होना पड़ता है कि अरे मेरे पास तो कोई काम नहीं है. थिएटर चल रहा होता है। वॉइस  ओवर और प्लेबैक का काम भी है. म्यूजिक बनाना, प्ले  लिखना इन सब में समय लगता है तो मेरे पास ये थिंकिंग चलती है कि इतना कुछ करना है.वैसे स्क्रिप्ट नहीं आती सिर्फ यही नहीं है. कई बार रिजेक्ट भी होती हूं. मुझे लगता है कि हम एक्टर्स डे टू डे लाइफ में जितना रिजेक्शन झेलते हैं.कोई नहीं झेल सकता है. उसपर लोग कहते हैं कि एक्टर्स इन्सिक्योर होते हैं. एक दिन हमारी जिंदगी जीकर देखें. हम  एक्टर्स को मोटी चमड़ी करके जीना होता है. 

आनेवाले प्रोजेक्ट ?

तीन और प्रोजेक्ट इस साल रिलीज होनेवाले हैं. अनुराग कश्यप की एक फिल्म है.एक्सेल के साथ एक प्रोजेक्ट है और हु इज योर गायनेक का अगला सीजन भी इसी साल आएगा 


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विनोद झा
संपादक नया विचार

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