Shravani Mela 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का आयोजन किया जाता है. देशभर से लाखों शिवभक्त बिहार के सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

श्रावणी मेला 2026: प्रमुख तिथियां
इस वर्ष सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना के लिए कई शुभ संयोग बन रहे हैं. बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक और सावन सोमवार के व्रत की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:
| मुख्य आयोजन / व्रत | तिथि और दिन |
| श्रावणी मेला प्रारंभ | 30 जुलाई 2026, गुरुवार |
| प्रथम सावन सोमवार व्रत | 3 अगस्त 2026, सोमवार |
| द्वितीय सावन सोमवार व्रत | 10 अगस्त 2026, सोमवार |
| सावन शिवरात्रि | 11 अगस्त 2026, मंगलवार |
| तृतीय सावन सोमवार (नाग पंचमी का संयोग) | 17 अगस्त 2026, सोमवार |
| चतुर्थ सावन सोमवार व्रत | 24 अगस्त 2026, सोमवार |
| श्रावणी मेला समापन (सावन पूर्णिमा/रक्षाबंधन) | 28 अगस्त 2026, शुक्रवार |
इस बार सावन का तीसरा सोमवार के दिन नाग पंचमी का शुभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है.
श्रावणी मेले का धार्मिक महत्व

श्रावणी मेला सनातन धर्म में अटूट आस्था, कठिन तपस्या और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है. यह हिंदुस्तान की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में से एक है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु भगवा वस्त्र धारण कर समान भाव से ‘बोल बम’ का जयघोष करते हुए आगे बढ़ते हैं.
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