Indian Beer Industry: जब भी बीयर इंडस्ट्री की बात होती है, ज्यादातर लोगों के दिमाग में सिर्फ शराब का कारोबार आता है. लेकिन शायद कम लोग जानते हैं कि यह इंडस्ट्री लाखों लोगों को रोजगार देने, किसानों की कमाई बढ़ाने और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभा रही है.
ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (UBL) की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, हिंदुस्तान की बीयर इंडस्ट्री का देश की GDP में करीब ₹92,000 करोड़ का योगदान है. इतना ही नहीं, यह सेक्टर करीब 13 लाख लोगों के रोजगार और आजीविका से भी जुड़ा हुआ है. इसके अलावा, राज्यों को इस उद्योग से लगभग ₹51,000 करोड़ का टैक्स भी मिलता है.
हाल के महीनों में इस सेक्टर में निवेश की रफ्तार भी तेज हुई है. ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी ने बताया कि पिछले छह महीनों में नई ब्रुअरी लगाने के लिए करीब ₹2,500 करोड़ के MoUs (समझौता ज्ञापन) साइन किए गए हैं. इससे साफ है कि आने वाले समय में इस उद्योग में और निवेश तथा रोजगार बढ़ सकते हैं.
किसानों को इससे क्या फायदा हो रहा है?
बीयर बनाने में जौ (Barley) और चावल जैसे कृषि उत्पादों का इस्तेमाल होता है. इसलिए यह उद्योग सीधे हिंदुस्तानीय किसानों से जुड़ा हुआ है. यूनाइटेड ब्रुअरीज के अनुसार, कंपनी हर साल करीब ₹700 करोड़ का जौ और चावल हिंदुस्तानीय किसानों से खरीदती है. इससे किसानों को अपनी फसल का बड़ा बाजार मिलता है और स्थानीय कृषि को भी मजबूती मिलती है. कंपनी टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है.
किन-किन लोगों को मिलता है फायदा?
बीयर इंडस्ट्री का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है. इसकी पूरी सप्लाई चेन कई दूसरे सेक्टरों को भी सहारा देती है.
इससे जुड़े प्रमुख क्षेत्र:
- किसान और कृषि
- मैन्युफैक्चरिंग
- पैकेजिंग
- लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट
- रिटेल कारोबार
- होटल और हॉस्पिटैलिटी
- टूरिज्म
- MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग)
इसी वजह से यह उद्योग देशभर में करीब 13 लाख लोगों के रोजगार और आजीविका को समर्थन देता है.
यूनाइटेड ब्रुअरीज का कितना बड़ा योगदान है?
यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (UBL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विवेक गुप्ता ने बताया कि कंपनी की पूरी वैल्यू चेन हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति में करीब ₹43,000 करोड़ का योगदान देती है और लगभग 2.95 लाख लोगों के रोजगार और आजीविका से जुड़ी हुई है. कंपनी का कहना है कि वह हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति में करीब ₹44,000 करोड़ का योगदान देती है और लगभग ₹31,000 करोड़ टैक्स का भुगतान करती है. इसके अलावा कंपनी हर साल करीब ₹7,000 करोड़ की स्थानीय खरीद करती है और करीब 10,000 वेंडर्स के साथ काम करती है, जिनमें बड़ी संख्या MSMEs की है.
लोकल खरीदारी पर इतना जोर क्यों?
स्टूअर्ड रेडक्वीन (Steward Redqueen) द्वारा किए गए स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक अध्ययन के मुताबिक, यूनाइटेड ब्रुअरीज अपने करीब 93% कच्चे माल और अन्य जरूरी सामान हिंदुस्तान से ही खरीदती है. इससे खेती, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों की घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होती है. अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कंपनी की गतिविधियां और सप्लाई चेन मिलकर हिंदुस्तान की GDP का लगभग 0.1% योगदान देती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अगर स्थानीय खरीद, टिकाऊ खेती, जल संरक्षण (Water Stewardship) और सामुदायिक विकास से जुड़ी पहलें आगे भी जारी रहती हैं, तो इसका फायदा किसानों, MSMEs, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और पूरी घरेलू सप्लाई चेन को लंबे समय तक मिल सकता है.
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