फीफा विश्व कप 2026 को अगर ‘आखिरी मिनटों का विश्व कप’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा. अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में स्पोर्ट्से जा रहे इस टूर्नामेंट में मैचों का रोमांच अंतिम सीटी तक बना हुआ है. कई मुकाबलों में नतीजे इंजरी टाइम में बदले हैं और यही वजह है कि इस विश्व कप ने अतिरिक्त समय में गोल करने के मामले में नया इतिहास रच दिया है.
फीफा के आंकड़ों के अनुसार टूर्नामेंट में अब तक कुल गोलों में 11.4 प्रतिशत गोल इंजरी टाइम में हुए हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो हर नौ गोल में से एक गोल निर्धारित 90 मिनट के बाद आया है. 1966 के बाद यह पहला अवसर है जब विश्व कप में 11 प्रतिशत से अधिक गोल इंजरी टाइम में दर्ज किए गए हैं. अर्जेंटीना बनाम मिस्र और स्पेन बनाम पुर्तगाल जैसे मुकाबले इसके बड़े उदाहरण रहे, जहां आखिरी मिनटों में हुए गोलों ने मैच का पूरा परिणाम बदल दिया.
इंजरी टाइम में गोलों का रिकॉर्ड
| विश्व कप | इंजरी टाइम गोल | कुल गोलों में प्रतिशत |
| 2026 | 32 | 11.4% |
| 2018 | 19 | 11.2% |
| 2022 | 15 | 8.7% |
| 2014 | 13 | 7.6% |
| 2006 | 9 | 6.1% |
सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने बदली तस्वीर
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह बेंच से उतरने वाले खिलाड़ियों का प्रभाव माना जा रहा है. पहले जहां बदलाव का मकसद थके खिलाड़ियों को आराम देना होता था, वहीं अब सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मैच का रुख बदल रहे हैं. टूर्नामेंट में 90वें मिनट या उसके बाद हुए 32 गोलों में से 17 गोल सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों ने किए हैं. यानी इंजरी टाइम में हुए 53.1 प्रतिशत गोल ऐसे खिलाड़ियों के खाते में गए हैं, जो मैच की शुरुआत में मैदान पर मौजूद ही नहीं थे.
दूसरे हाफ का स्टॉपेज टाइम बना सबसे खतरनाक दौर
विश्व कप 2026 में दूसरे हाफ का अतिरिक्त समय सबसे निर्णायक साबित हुआ है. दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम में 22 गोल दर्ज किए गए हैं, जो 2022 विश्व कप की तुलना में भी अधिक है. इस ट्रेंड ने टीमों के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब 1-0 या 2-1 की बढ़त भी सुरक्षित नहीं मानी जा रही, क्योंकि आखिरी कुछ मिनटों में पूरा मैच पलट सकता है.
हाइड्रेशन ब्रेक भी बना रणनीतिक हथियार
गर्म मौसम को देखते हुए इस विश्व कप में हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की गई है. हालांकि इसका असर सिर्फ खिलाड़ियों की फिटनेस तक सीमित नहीं रहा. आंकड़ों के मुताबिक टूर्नामेंट में 40 गोल ऐसे समय में आए हैं, जो हाइड्रेशन ब्रेक के बाद अगले 10 मिनट के भीतर किए गए. कनाडा और ब्राजील जैसी टीमों ने इन ब्रेक का रणनीतिक रूप से सबसे बेहतर इस्तेमाल किया है और विरोधी टीमों की एकाग्रता टूटने का फायदा उठाया है.
अनुभव पर दिखा भरोसा
विश्व कप 2026 में युवा खिलाड़ियों के साथ-साथ अनुभवी खिलाड़ियों का भी दबदबा देखने को मिला है. लियोनेल मेसी, हैरी केन, रोमेलु लुकाकू और वोज्शेख शेज़्नी जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों पर टीमों ने भरोसा जताया है. फीफा के अनुसार इस विश्व कप में शुरुआती एकादश की औसत उम्र 28 वर्ष 117 दिन रही है, जो 1966 के बाद सबसे अधिक है. इससे साफ है कि आधुनिक फुटबॉल में अनुभव की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.
विश्व कप में टीमों की औसत उम्र
| विश्व कप | औसत उम्र |
| 2026 | 28 वर्ष 117 दिन |
| 2022 | 27 वर्ष 299 दिन |
| 2006 | 27 वर्ष 248 दिन |
| 1998 | 27 वर्ष 248 दिन |
विश्व कप 2026 के आंकड़े बताते हैं कि अब मैच 90 मिनट में खत्म नहीं होते. अतिरिक्त समय, बेंच की ताकत और अनुभव का मिश्रण इस टूर्नामेंट को पिछले विश्व कपों से अलग और अधिक रोमांचक बना रहा है.
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