Parenting Tips: बच्चों को पालना कभी भी पैरेंट्स के लिए आसान नहीं होता है. जब शिशु छोटे होते हैं, तभी से माता-पिता की यह चाहत होती है कि वे बड़े होकर एक अच्छे इंसान बनें. लेकिन कई बार जब शिशु छोटे होते हैं, उसी समय से वे कुछ गलत आदतों या हरकतों में पड़ जाते हैं. शुरुआती दौर में अक्सर पैरेंट्स इन आदतों को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि, ‘छोड़ो अभी बच्चा छोटा है, समय के साथ खुद ही धीरे-धीरे चीजों को सीख जाएगा.’ बस पैरेंट्स की यही गलती बच्चों पर आगे चलकर भारी पड़ जाती है. बचपन की यही छोटी-छोटी बातें आगे चलकर शिशु की पक्की आदत बन जाती हैं, जिन्हें बदलना फिर बहुत मुश्किल हो जाता है. आज का यह आर्टिकल हर उस पैरेंट के लिए है जिनके शिशु अभी छोटे हैं. आज हम आपको बच्चों की कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अगर आपको उनमें दिखें तो आपको उन्हें तुरंत टोकना शुरू कर देना चाहिए. अगर आप समय रहते अपने शिशु को सुधार लेंगे, तो उसकी आगे की जिंदगी खराब होने से बच जाएगी और वह एक बेहतर इंसान बनकर निकलेगा. तो चलिए, इन आदतों और हरकतों के बारे में विस्तार से जानते हैं.
बात-बात पर झूठ बोलने की आदत
कई बार छोटे शिशु पनिशमेंट से बचने के चक्कर में या फिर डर से झूठ बोल देते हैं. शुरुआत में यह बहुत ही आम सी बात लग सकती है, लेकिन अगर आपका बच्चा लगातार बिना किसी खास वजह के भी झूठ बोलने लगे, तो यह एक सीरियस प्रॉब्लम बन सकती है. अगर आप उसकी इस आदत को नजरअंदाज करेंगे, तो उसे लगेगा कि झूठ बोलकर वह किसी भी हालात से निकल सकता है. इसलिए जब भी बच्चा झूठ बोले, उसे डांटने के बजाय प्यार से समझाएं कि सच बोलना क्यों जरूरी है और उसका भरोसा भी जीतने की कोशिश करें.
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दूसरों की बातों को बीच में काटने की आदत
कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि जब बड़े आपस में बात कर रहे होते हैं, तो बच्चा बीच में आकर अपनी बात करना शुरू कर देता है. कुछ पैरेंट्स इसे शिशु का तेज दिमाग या फिर उसका कॉन्फिडेंस समझकर अनदेखा कर देते हैं. लेकिन असलियत में शिशु की यह आदत दूसरों के प्रति सम्मान की कमी की तरफ इशारा करती है. आपके लिए अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही यह सिखाना जरूरी है कि जब कोई दूसरा बात कर रहा हो, तो कुछ कहने से पहले अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए. जब आप उसे यह सिखाएंगे, तो आपका बच्चा आगे चलकर एक बेहतरीन लिस्नर बनेगा.
गुस्सा होने पर चीजें फेंकना या हाथ उठाना
अक्सर ऐसा होता है कि जब शिशु की कोई इच्छा पूरी नहीं होती है, तो वह रोने लगता है या फिर गुस्सा करने लग जाता है. अगर बात यहां तक सीमित है तो ज्यादा परेशानी की बात नहीं है, लेकिन अगर आपका बच्चा गुस्से में आकर घर की चीजों को फेंकने लगे, या फिर दूसरों पर हाथ उठाने लग जाए या फिर खुद को ही चोट पहुंचाने की कोशिश करे, तो आपको तुरंत सचेत हो जाना चाहिए. उसका यह जिद्दीपन और आक्रामक व्यवहार बड़े होने पर उसके रिश्तों और करियर को अफेक्ट कर सकता है. ऐसा न हो इसलिए अपने शिशु को यह सिखाएं कि गुस्से को शांति से और शब्दों के जरिए कैसे जाहिर किया जा सकता है.
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बड़ों का आदर न करना और गलत भाषा का इस्तेमाल
आज के शिशु ज्यादतर चीजें टीवी, स्मार्टफोन या फिर आसपास मौजूद लोगों से बहुत जल्दी एब्जॉर्ब कर लेते हैं. ऐसे में अगर आपका बच्चा कभी भी किसी के लिए गलत शब्द या फिर भाषा का इस्तेमाल करे, तो उसे उसी समय आपको टोकना चाहिए. कई बार माता-पिता शिशु के मुंह से ऐसी बातें सुनकर हंस देते हैं, जिससे शिशु को बढ़ावा मिलता है. बड़ों का सम्मान करना और तमीज से बात करना एक ऐसी आदत है जो शिशु के ओवरऑल पर्सनालिटी को निखारती है, इसलिए इसमें पैरेंट्स को बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए.
अपनी गलतियों को न मानना और दूसरों पर दोष मढ़ना
अगर आपका बच्चा कोई गलती करता है, जैसे कि कोई खिलौना तोड़ देना या फिर पढ़ाई न करना, लेकिन अपनी गलती मानने की जगह वह इसका दोष किसी और पर या फिर हालात पर डाल देता है, तो उसकी यह आदत भी बहुत गलत है. अपनी गलतियों को एक्सेप्ट न करना शिशु को गैर-जिम्मेदार बनाता है. ऐसे में माता-पिता होने के नाते आपको अपने शिशु को यह समझाना चाहिए कि गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन उसे मानकर सुधारना ही समझदारी है.
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