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‘यूथ आइकन कैसे?’ समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में लगा लाखों का जुर्माना

कॉमेडियन समय रैना की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं. 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने कोर्ट को गुमराह किया और जो भरोसा अदालत के सामने दिया था, उसे निभाया नहीं. कोर्ट ने समय रैना और उनके साथी कॉमेडियन विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और दो हफ्ते के भीतर यह रकम जमा करने का आदेश दिया है. अदालत ने साफ कर दिया कि तय समय में जुर्माना जमा नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कोर्ट ने क्यों लगाया जुर्माना?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि समय रैना ने कोर्ट के पुराने आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं किया. पहले अदालत ने उन्हें अपने शो में दिव्यांग लोगों को शामिल करने और उनके लिए जागरूकता बढ़ाने की सलाह दी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इसी को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने उन पर आर्थिक दंड लगाया.

मुख्य न्यायाधीश ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने समय रैना की ओर से दाखिल जवाब पर भी नाराजगी जताई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने जवाब को देखते हुए कहा, “इसे फेंक दीजिए.” साथ ही सवाल किया कि इतनी लंबी देरी के बाद आखिर ऐसा जवाब दाखिल करने का क्या मतलब है.

कोर्ट ने समय रैना पर क्यों जताई नाराजगी?

क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने दिए गए आश्वासन के बावजूद न तो फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से जूझ रहे लोगों से मुलाकात की. उन्होंने कहा, “समय रैना लगातार शो कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया. ऐसे में उन्हें यूथ आइकन कहना मुश्किल है.” इन दलीलों पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना ने अदालत के भरोसे को गंभीरता से नहीं लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना और अन्य कॉमेडियंस ने पहले जो भरोसा अदालत को दिलाया था, बाद की उनकी गतिविधियां उससे मेल नहीं खातीं. इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जे.वी. मोहना की पीठ ने पांचों कॉमेडियंस को सार्वजनिक माफी जारी करने, अनुपालन हलफनामा दाखिल करने और हर महीने दो विशेष कॉमेडी शो आयोजित करने का निर्देश दिया. इन कार्यक्रमों से जुटाई गई राशि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित बच्चों के इलाज में इस्तेमाल की जाएगी.

कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी भी दी कि अगर तय समय के भीतर आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो जुर्माने की रकम कई गुना बढ़ाई जा सकती है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “इसमें एक और जीरो जोड़ दिया जाएगा.” यानी मौजूदा 3 लाख रुपये का जुर्माना बढ़ाकर 30 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक किया जा सकता है.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद साल 2025 में यूट्यूब पर स्ट्रीम हुए ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के दो एपिसोड से शुरू हुआ था. आरोप है कि समय रैना और अन्य कॉमेडियंस ने शो के दौरान स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से जूझ रहे मरीजों, इस बीमारी से पीड़ित एक शिशु, दृष्टिबाधित और भेंगापन से पीड़ित लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं. इन टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर भारी विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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