Dharmendra Pradhan : NEET-UG 2026 पेपर लीक ने सिर्फ एक परीक्षा पर सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था को बहस के केंद्र में ला दिया. लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले ने देखते ही देखते राष्ट्रीय छात्र आंदोलन का रूप ले लिया. पेपर लीक की समाचारों और परीक्षा रद्द होने के बाद 20 से ज्यादा छात्रों के आत्महत्या करने की समाचारें भी सामने आईं, जिससे पूरे देश में गुस्सा और बढ़ गया. 20 जून को शुरू हुआ CJP का आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का अभियान बन गया. इस दौरान भूख हड़ताल, संसद मार्च, पुलिस कार्रवाई, विपक्ष का समर्थन और प्रशासन के साथ बातचीत हुई. आखिरकार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. जानिए इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन.
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3 मई: NEET-UG 2026 का पेपर लीक
3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का पेपर बड़े पैमाने पर लीक होने का दावा सामने आया. जांच में पता चला कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर एक डिजिटल गेस पेपर वायरल हुआ था, जिसके 140 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे. इस खुलासे के बाद देशभर में छात्रों ने परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी.
12 मई: NTA ने परीक्षा रद्द की
लगातार बढ़ते विवाद और जांच के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. बाद में 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई. इसी दौरान कई राज्यों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया.
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20 जून: जंतर-मंतर से शुरू हुआ CJP का आंदोलन
20 जून को Cockroach Janata Party (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया. इस आंदोलन का नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे थे. संगठन की मुख्य मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, परीक्षा व्यवस्था में सुधार हो और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो.
28 जून: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन के समर्थन में आए और 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठ गए. उनके जुड़ने के बाद आंदोलन को देशभर में और ज्यादा समर्थन मिलने लगा. बाद में AISA के कई छात्र नेता भी भूख हड़ताल में शामिल हुए.
18 जुलाई: पुलिस ने वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया
18 जुलाई को पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया. उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया. इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा और प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती गई.
20 जुलाई: संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई
20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन CJP ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया. देशभर से हजारों छात्र दिल्ली पहुंचे. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की, आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया. कई वीडियो सामने आए, जिनमें छात्रों पर बल प्रयोग होता दिखाई दिया. इस कार्रवाई के बाद देशभर में बहस तेज हो गई. इसी दौरान संसद का मानसून सत्र भी विपक्ष के हंगामे के कारण बार-बार बाधित होता रहा.
आंदोलन को मिला कई बड़ी हस्तियों का समर्थन
पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन को कई नेतृत्वक दलों के साथ-साथ फिल्म जगत की हस्तियों का भी समर्थन मिला. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी ने छात्रों का पक्ष रखा. वहीं सलमान खान, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, प्रकाश राज समेत कई चर्चित हस्तियों ने भी आंदोलन के समर्थन में बयान दिए. इससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया.
20 जुलाई: संसद का मानसून सत्र शुरू, विपक्ष ने किया प्रशासन पर हमला
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी रहा. इससे सीजेपी के प्रदर्शन को और मजबूती मिली. इसके ठीक बाद राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव सहित कई सांसद पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए थे. जहां से पुलिस ने कार्रवाई की और सभी सांसदों को हिरासत में ले लिया गया.
23 जुलाई: सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल
केंद्र प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 23 जुलाई को सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी. हालांकि CJP ने साफ कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं.
RSS प्रमुख ने कहा- बच्चों से बातचीत जरूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 25 जुलाई को एक बयान दिया. जिसमें उन्होंने कहा कि छात्रों को आदेश देने के बजाय प्रशासन को उनसे बातचीक करनी चाहिए.
25 जुलाई: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
लगातार 36 दिनों तक चले आंदोलन, विपक्ष के दबाव और देशभर में बढ़ते विरोध के बीच 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इसे CJP की पहली और सबसे बड़ी मांग पूरी होने के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि संगठन ने कहा है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. अब उनकी मांग है कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार किए जाएं, पेपर लीक के दोषियों को सख्त सजा मिले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो. हालांकि जंतर-मंतर सहित देश भर में छात्र और सीजेपी समर्थक जश्न मनाते नजर आ रहे हैं.
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