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130 Kmph का तेज गेंदबाज कैसे बना जैवलिन चैंपियन? रुमेश थरंगा के करियर की हैरान कर देने वाली कहानी

Rumesh Tharanga Pathirage: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला. हिंदुस्तान के स्टार एथलीट और ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा से जहां देश को गोल्ड मेडल की पूरी उम्मीद थी, वहीं श्रीलंका के युवा खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया. 23 वर्षीय रुमेश ने 89.75 मीटर का बेहतरीन थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया, जबकि नीरज चोपड़ा 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा.

फाइनल में रुमेश का दमदार प्रदर्शन

जैवलिन थ्रो के फाइनल मुकाबले में रुमेश थरंगा ने शुरुआत से ही शानदार लय दिखाई. उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 89.75 मीटर तक भाला फेंककर प्रतियोगिता में बढ़त बनाई और अंत तक कोई भी खिलाड़ी उनके इस प्रदर्शन को पीछे नहीं छोड़ सका. हिंदुस्तान के नीरज चोपड़ा ने पूरी कोशिश की, लेकिन उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 85.83 मीटर ही रहा. इस तरह श्रीलंका के इस युवा खिलाड़ी ने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली. रुमेश इस सीजन में पहले ही 92.62 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके हैं, जिसके बाद उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक जैवलिन थ्रोअर्स में गिना जाने लगा है. कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड जीतकर उन्होंने यह साबित भी कर दिया कि वह आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स के बड़े सितारों में शामिल होने वाले हैं.

क्रिकेटर बनने का सपना, लेकिन बदल गई जिंदगी

21 मार्च 2003 को श्रीलंका के कलूतारा में जन्मे रुमेश थरंगा पथिरागे की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपने स्पोर्ट्स करियर की शुरुआत जैवलिन थ्रो से नहीं, बल्कि क्रिकेट से की थी. साल 2012 में उन्होंने क्रिकेट स्पोर्ट्सना शुरू किया और कोलंबो के प्रतिष्ठित सेंट पीटर्स कॉलेज की टीम का हिस्सा बने. तेज गेंदबाज के रूप में उनकी पहचान तेजी से बनने लगी. वह नियमित रूप से 130 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे. अंडर-18 स्तर पर उनकी गेंद की गति 134 किलोमीटर प्रति घंटा तक रिकॉर्ड की गई थी. श्रीलंका क्रिकेट में उन्हें भविष्य के तेज गेंदबाज के रूप में देखा जा रहा था.

पिता की सलाह ने बदल दी करियर की दिशा

रुमेश के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनके पिता ने उन्हें एथलेटिक्स में करियर बनाने की सलाह दी. उनके पिता स्वयं पूर्व एथलीट रहे हैं और डिस्कस थ्रो तथा शॉट-पुट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे. उन्होंने अपने बेटे की शारीरिक क्षमता को देखते हुए उसे ट्रैक एंड फील्ड में भविष्य तलाशने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद रुमेश ने एथलेटिक्स की ओर कदम बढ़ाया और यही फैसला उनके करियर का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ.

कोच ने पहचानी कंधे की ताकत

साल 2017 में रुमेश की मुलाकात कोच टोनी प्रसन्ना से हुई. कोच ने उनकी तेज गेंदबाजी के दौरान विकसित हुई कंधे की ताकत और शारीरिक क्षमता को देखते हुए उन्हें जैवलिन थ्रो अपनाने की सलाह दी. इसके बाद रुमेश ने पूरी तरह जैवलिन पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने तकनीक पर लगातार काम किया, फिटनेस में सुधार किया और कुछ ही वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली. मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर उन्होंने विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाई.

नीरज, अरशद और वालकॉट जैसे दिग्गजों को दी चुनौती

रुमेश थरंगा अब सिर्फ श्रीलंका के उभरते खिलाड़ी नहीं, बल्कि विश्व जैवलिन थ्रो के बड़े नामों में शामिल हो चुके हैं. उन्होंने अपने प्रदर्शन से हिंदुस्तान के नीरज चोपड़ा, पाकिस्तान के अरशद नदीम और ट्रिनिडाड एंड टोबैगो के पूर्व चैंपियन केशोरन वालकॉट जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी है. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का गोल्ड जीतना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है.

श्रीलंका के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

रुमेश थरंगा का गोल्ड मेडल श्रीलंका के स्पोर्ट्स इतिहास में भी बेहद खास माना जा रहा है. देश ने करीब 20 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने का गौरव हासिल किया है. इससे पहले श्रीलंका को आखिरी बार 2006 में स्वर्ण पदक मिला था. कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में यह श्रीलंका का केवल पांचवां गोल्ड मेडल है. इसके साथ ही 1950 के बाद पहली बार श्रीलंका ने एथलेटिक्स स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इस जीत ने श्रीलंका के स्पोर्ट्स इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है.

अब एशियन गेम्स पर होगी नजर

कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार सफलता के बाद अब सभी की निगाहें आगामी एशियन गेम्स पर रहेंगी. रुमेश थरंगा एक बार फिर नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम और एशिया के अन्य शीर्ष जैवलिन थ्रोअर्स के खिलाफ मैदान में उतरेंगे. जिस तरह उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने प्रदर्शन से दुनिया को चौंकाया है, उसे देखते हुए एशियन गेम्स में भी उनसे बड़े प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है. यदि वह अपनी मौजूदा फॉर्म बरकरार रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में विश्व एथलेटिक्स में श्रीलंका के सबसे बड़े स्टार के रूप में उनकी पहचान और मजबूत हो सकती है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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