CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिंदुस्तान के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली राजस्थान की मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने राज्य प्रशासन की अनदेखी पर निराशा जताई है. स्त्रीओं के 70 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली अरुंधति का कहना है कि इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद उन्हें अब तक राजस्थान प्रशासन या स्पोर्ट्स मंत्री की ओर से कोई बधाई या प्रोत्साहन नहीं मिला.
23 वर्षीय अरुंधति ने फाइनल में इंग्लैंड की शेंटेले रीड को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. उन्होंने बताया कि राष्ट्रमंडल स्पोर्ट्सों में आने के बाद उन्हें पता चला कि वह इस प्रतियोगिता में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली स्त्री मुक्केबाज हैं. यही बात उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी.
‘मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं’
ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरुंधति ने कहा, “मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं था, लेकिन इतिहास रचने का मौका जरूर था. मैंने वही किया, जिसका सपना देखा था. मेरे कोच और पिता ने भी मुझे यही कहा था कि बिना किसी दबाव के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो. “
राजस्थान में बॉक्सिंग सुविधाओं की कमी पर जताई नाराजगी
अरुंधति ने कहा कि राजस्थान में मुक्केबाजी के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. उन्होंने बताया कि कोटा में उन्हें बॉक्सिंग रिंग की जगह कई बार क्रिकेट मैदान में अभ्यास करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए ही उन्होंने हिंदुस्तानीय सेना का साथ चुना, जहां उन्हें अभ्यास के लिए बेहतर माहौल मिला.
मुझे गोल्ड मेडल जीते काफी समय हो गया है, लेकिन अब तक राज्य प्रशासन या स्पोर्ट्स मंत्री की ओर से कोई शुभकामना या प्रोत्साहन नहीं मिला. राजस्थान से जो खिलाड़ी आगे बढ़ रहे हैं, वे अपने दम पर आगे आ रहे हैं.
पिता के व्रत ने बढ़ाया हौसला
अरुंधति ने बताया कि राष्ट्रमंडल स्पोर्ट्सों के दौरान उनके पिता ने उनके स्वर्ण पदक जीतने तक व्रत रखा था. पहले मुकाबले में जीत के बाद उनकी बड़ी बहन ने उन्हें इस बारे में बताया, जिसके बाद उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया. मुझे लगा कि अब किसी भी कीमत पर गोल्ड जीतना है. परिवार के भरोसे और समर्थन ने मुझे अतिरिक्त ताकत दी.
बुखार में स्पोर्ट्सा फाइनल
अरुंधति ने खुलासा किया कि फाइनल मुकाबले से पहले उन्हें तेज बुखार था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पैरासिटामोल लेकर रिंग में उतरीं.
इतने बड़े मंच पर चोट, बीमारी या वजन जैसी बातें बहाना नहीं बन सकतीं. राष्ट्रमंडल स्पोर्ट्सों में मौका चार साल में एक बार मिलता है. मैंने पैरासिटामोल ली, लेकिन जैसे ही रिंग में उतरी, सब कुछ भूल गई. हिंदुस्तानीय दर्शकों के ‘इंडिया-इंडिया’ और ‘जय बजरंग बली’ के नारों ने मुझे नई ऊर्जा दी और उसी जोश के साथ मैंने मुकाबला स्पोर्ट्सा.
हिंदुस्तान ने बॉक्सिंग में रचा इतिहास
राष्ट्रमंडल स्पोर्ट्स 2026 में हिंदुस्तानीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतकर नया इतिहास रचा. अरुंधति चौधरी का स्वर्ण पदक इस ऐतिहासिक अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा.
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