प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में विकसित हिंदुस्तान 2047 के लक्ष्य को सामने रखते हुए आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा, कृषि, युवा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर जोर दिया.
लेकिन किसी भी बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य की विश्वसनीयता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसकी मापने योग्य प्रगति से तय होती है.
विकसित हिंदुस्तान का लक्ष्य 2047 तक हिंदुस्तान को एक विकसित राष्ट्र बनाने का है.
ऐसे में अगले दो दशक में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, उनमें वास्तविक बदलाव कितना हुआ. इसके लिए केवल बजट खर्च, सड़क की लंबाई, योजनाओं की संख्या या प्रशिक्षण पाने वाले लोगों की गिनती पर्याप्त नहीं होगी. असली सवाल होगा- इन खर्चों और योजनाओं का नागरिकों की आय, रोजगार, उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ा?
इसी नजरिए से विकसित हिंदुस्तान के लिए प्रशासन के प्रदर्शन को कुछ स्पष्ट संकेतकों के जरिए लगातार मापा जा सकता है.
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8. राष्ट्रीय सुरक्षा अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं
आधुनिक युद्ध के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ केवल सीमा सुरक्षा नहीं है. साइबर हमले, बैंकिंग सिस्टम, ऊर्जा प्रतिष्ठान, रिफाइनरी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं.
इसलिए साइबर घटनाओं, प्रतिक्रिया समय, रणनीतिक भंडार और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे संकेतकों पर भी नियमित निगरानी जरूरी होगी.
9. संस्थागत सुधार: प्रशासन कितनी तेजी से डिलीवर कर रही है?
विकसित हिंदुस्तान के लिए मजबूत संस्थानों की जरूरत होगी. न्यायिक लंबित मामलों, रेगुलेटरी देरी, प्रशासनी परियोजनाओं में देरी, नागरिक शिकायतों के समाधान और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई जैसे संकेतक प्रशासन की संस्थागत क्षमता को माप सकते हैं.
हर मंत्रालय के लिए स्पष्ट KPI- Key Performance Indicators तय किए जाएं और यह बताया जाए कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले प्रदर्शन कितना रहा.
नागरिकों से डिजिटल माध्यम से सेवा-संतुष्टि का फीडबैक लेना भी प्रशासनी जवाबदेही को मजबूत कर सकता है.
10. सबसे जरूरी सवाल: 2047 तक हर साल कितना हासिल करना है?
विकसित हिंदुस्तान 2047 कोई एक दिन में हासिल होने वाला लक्ष्य नहीं है.
इसलिए 2025 को बेसलाइन मानकर 2026, 2027, 2028 और आगे हर वर्ष के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं.
आखिर 2047 का लक्ष्य तभी विश्वसनीय बनेगा जब नागरिक यह देख सकें कि आज हम कहां हैं, अगले साल कहां पहुंचना है और उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कौन-सा मंत्रालय क्या कर रहा है.
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