CID Raid: JSSC CGL परीक्षा को लेकर चल रही जांच अब और तेज हो गई है. झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम ने सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कार्यालय में छापेमारी की. इस दौरान आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की गई और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड की पड़ताल की गई. इससे पहले CID की टीम सचिव के निजी आवास पर भी छापेमारी कर चुकी है.
आयोग कार्यालय में गोपनीय तरीके से हुई जांच
मिली जानकारी के अनुसार, CID की टीम ने आयोग कार्यालय पहुंचकर परीक्षा से संबंधित फाइलों और दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनकी बारीकी से जांच की. अधिकारियों की मौजूदगी में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए. कार्रवाई के दौरान टीम ने सचिव सुधीर गुप्ता से भी सीधे पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारियों ने परीक्षा आयोजित कराने की प्रक्रिया, टेंडर आवंटन, प्रश्नपत्र की छपाई और सुरक्षा व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए. परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचने और उसके बाद की प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं.
सचिव के आवास पर छापेमारी के बाद आयोग में दबिश
JSSC कार्यालय में CID की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब जांच एजेंसी इससे पहले आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता के निजी आवास पर भी छापेमारी कर चुकी है. बताया जा रहा है कि आवास से मिले दस्तावेजों और डिजिटल इनपुट की जांच के बाद आयोग कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड से उनका मिलान किया जा रहा है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान नियमों का कहीं उल्लंघन हुआ या किसी स्तर पर अनियमितता को अंजाम दिया गया. डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों के बीच किसी तरह की विसंगति मिलने पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है.
सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की होगी स्क्रूटनी
जांच का एक अहम पहलू JSSC CGL परीक्षा में सफल घोषित किए गए अभ्यर्थियों से भी जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, CID सफल सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच कर सकती है. इसमें शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के साथ परीक्षा से संबंधित अन्य रिकॉर्ड की भी पड़ताल शामिल हो सकती है. जांच के दौरान यदि किसी अभ्यर्थी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है या किसी तरह की फर्जीवाड़े अथवा अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, किसी भी अभ्यर्थी को दोषी मानने से पहले जांच में ठोस साक्ष्य सामने आना जरूरी होगा.
OMR, बायोमेट्रिक और डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
CID परीक्षा से जुड़े डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड का मिलान भी कर रही है. इसमें OMR शीट, उपस्थिति रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक डेटा, परीक्षा केंद्रों से संबंधित दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं. सर्वर और डिजिटल सिस्टम से जुड़े लॉग की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनधिकृत हस्तक्षेप तो नहीं हुआ. परीक्षा केंद्रों से भेजे गए सीलबंद दस्तावेजों के रिकॉर्ड का भी मिलान किए जाने की जानकारी है. जांच एजेंसी कथित अनियमितता के किसी भी तकनीकी या दस्तावेजी प्रमाण को नजरअंदाज नहीं करना चाहती.
अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच बढ़ी कार्रवाई
JSSC CGL समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर राज्य में अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में CID की कार्रवाई से अभ्यर्थियों के बीच भी हलचल बढ़ गई है. छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित गड़बड़ियों के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल रही है. अब जांच एजेंसी की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि मामला केवल प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा तक सीमित नहीं रहने वाला है. यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, अभ्यर्थी या कथित बिचौलिये की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
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डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल
फिलहाल CID की जांच जारी है और आयोग से जुटाए जा रहे दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले निष्कर्ष ही यह तय करेंगे कि JSSC CGL परीक्षा में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. यानी फिलहाल कागज बोल रहे हैं और अफसर सुन रहे हैं, अंतिम फैसला सबूतों को ही करना है.
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