Cyclone Arnab : क्या आप जानते हैं कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवात का नाम कैसे तय होता है? तितली, गाजा, गुलाब तो कभी अम्फान – ये नाम किसी लॉटरी के तहत नहीं रखे जाते. बल्कि इसे एशिया और मिडिल ईस्ट के 13 देशों के ग्रुप द्वारा बारी-बारी से रखा जाता है. आइए समझते हैं कि कैसे किया है चक्रवातों का नामकरण?
इन देशों के ग्रुप को क्या कहते हैं?
वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से इस ग्रुप को WMO/ESCAP (विश्व मौसम विज्ञान संगठन और एशिया-प्रशांत का आर्थिक व सामाजिक आयोग) का पैनल कहा जाता है. इस ग्रुप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उत्तरी हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों से जिन भी देशों की समुद्री सीमाएं या मौसम प्रभावित होता है, उन सभी को इसमें शामिल किया जाए.
पिछले 10 सालों में उठे चक्रवाती तूफान और इसे नाम देने वाले देश
| वर्ष (Year) | चक्रवात का नाम (Cyclone Name) | नाम देने वाला देश (Naming Country) | प्रभावित मुख्य हिंदुस्तानीय क्षेत्र / देश |
| 2026 | अर्नब (Arnab) | बांग्लादेश | ओडिशा, आंध्र प्रदेश (वर्तमान में सक्रिय/अलर्ट) |
| 2025 | मोंथा (Montha) | थाईलैंड | आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना |
| 2024 | रेमल (Remal) | ओमान | पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश |
| 2024 | मिचांग (Michaung) | म्यांमार | आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु |
| 2023 | मिधिली (Midhili) | मालदीव | पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश |
| 2023 | हामून (Hamoon) | ईरान | बांग्लादेश, हिंदुस्तान के उत्तर-पूर्वी राज्य |
| 2023 | मोचा (Mocha) | यमन | म्यांमार, बांग्लादेश (अंडमान पर आंशिक असर) |
| 2022 | मांडूस (Mandous) | UAE | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी |
| 2022 | सितरंग (Sitrang) | थाईलैंड | बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल |
| 2022 | आसानी (Asani) | श्रीलंका | आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु |
| 2021 | जवाद (Jawad) | सऊदी अरब | ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल |
| 2021 | गुलाब (Gulab) | पाकिस्तान | आंध्र प्रदेश, ओडिशा |
| 2021 | यास (Yaas) | ओमान | ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
| 2020 | निवार (Nivar) | ईरान | तमिलनाडु, पुडुचेरी |
| 2020 | अम्फान (Amphan) | थाईलैंड | पश्चिम बंगाल, ओडिशा (सुपर साइक्लोन) |
| 2019 | बुलबुल (Bulbul) | पाकिस्तान | पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बांग्लादेश |
| 2019 | फानी (Fani) | बांग्लादेश | ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
| 2018 | गाजा (Gaja) | श्रीलंका | तमिलनाडु |
| 2018 | तितली (Titli) | पाकिस्तान | ओडिशा, आंध्र प्रदेश |
| 2017 | ओखी (Ockhi) | बांग्लादेश | कन्याकुमारी, केरल, लक्षद्वीप (खाड़ी से अरब सागर गया) |
| 2016 | वरदा (Vardah) | पाकिस्तान | तमिलनाडु (चेन्नई), आंध्र प्रदेश |
| 2016 | रोनू (Roanu) | मालदीव | ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बांग्लादेश |
कौन-कौन से देश हैं शामिल
इस 13 देशों के समूह में हिंदुस्तान और उसके पड़ोसी देशों के साथ-साथ मध्य-पूर्व (खाड़ी) के देश भी शामिल हैं. भौगोलिक दृष्टि से देखें तो इसमें दक्षिण एशिया से हिंदुस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव आते हैं, जबकि दक्षिण-पूर्वी एशिया से म्यांमार और थाईलैंड को शामिल किया गया है. इसके अलावा, अरब सागर और हिंद महासागर से जुड़े पश्चिम एशिया (Middle East) के छह प्रमुख देश- ओमान, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन भी इस पैनल का हिस्सा हैं. ये सभी देश मिलकर उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में उठने वाले चक्रवातों की निगरानी और उनके नामकरण का काम करते हैं.
एडवांस में बनती है नामों की ‘बैंक’
चक्रवाती तूफानों के नाम तूफान आने के बाद नहीं रखे जाते. साल 2020 में सभी 13 देशों ने मिलकर 13-13 नाम सौंपे थे. इस तरह कुल 169 नामों की एक एडवांस लिस्ट (बैंक) तैयार कर ली गई, जो मौसम विभाग के पास सुरक्षित है.
कब से हुई नामकरण की शुरुआत?
चक्रवातों के नाम देने का सिलसिला साल 2004 से शुरू हुआ था. इन सभी देशों ने मिलकर जब ग्रुप बनाया इसके बाद से तूफानों के नाम तय किए जाने लगे. इसके पहले इनके नाम नहीं रखे जाते थे.
मुख्य भूमिका अदा करता है हिंदुस्तान
इस पूरी प्रक्रिया में हिंदुस्तान की भूमिका एक ‘सुपरबॉस’ की तरह है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल, नई दिल्ली स्थित हिंदुस्तानीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) दुनिया के उन चुनिंदा छह विशेष क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों में से एक है, जिसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है. इसका मतलब यह है कि नाम भले ही अलग-अलग देश सुझाते हैं, लेकिन समुद्र में तूफान उठने के बाद उसे आधिकारिक रूप से नाम देने और उसकी निगरानी करने का मुख्य काम हिंदुस्तान का मौसम विभाग ही करता है. इसके साथ ही, हिंदुस्तान ही इन बाकी 12 देशों को चक्रवात की रफ्तार, उसके रास्ते और उससे होने वाले नुकसान को लेकर समय-समय पर आधिकारिक चेतावनी और निर्देश जारी करता है.
नामों के पीछे का अनोखे अर्थ
चक्रवातों को दिए जाने वाले इन नामों के पीछे बड़े ही दिलचस्प और अनोखे अर्थ छिपे होते हैं, जो आम पाठकों को बहुत ज्यादा आकर्षित करते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ समय पहले आए ‘बिपरजॉय’ तूफान का नाम बांग्लादेश ने रखा था, जिसका बांग्ला भाषा में अर्थ ‘आपदा’ या ‘विपत्ति’ होता है. वहीं, हिंदुस्तान द्वारा दिए गए ‘तेज’ नाम का सीधा संबंध रफ्तार से था.
इसी तरह, यमन ने एक चक्रवात का नाम ‘मोचा’ रखा था, जो वहां के एक मशहूर कॉफी उत्पादक शहर के नाम पर आधारित था, जबकि पाकिस्तान द्वारा दिए गए ‘गुलाब’ नाम के पीछे का उद्देश्य प्रकृति की खूबसूरती को दर्शाना था. ये नाम केवल पहचान के लिए नहीं, बल्कि इन देशों की संस्कृति और भाषा की झलक भी होते हैं.
‘रिटायर’ हो जाते हैं भारी तबाही मचाने वाले चक्रवातों के नाम
इस नामकरण व्यवस्था का एक सबसे हैरान करने वाला नियम यह है कि तूफानों के नामों का भी ‘रिटायरमेंट’ होता है. अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, यदि कोई चक्रवात असाधारण रूप से भयानक तबाही मचाता है और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान करता है, तो उस नाम को हमेशा के लिए सूची से हटा यानी रिटायर कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि भविष्य में जब भी उस नाम का जिक्र हो, तो लोग केवल उसी ऐतिहासिक आपदा को याद कर सकें और मौसम संबंधी रिकॉर्ड्स में कोई भ्रम न पैदा हो. एक बार रिटायर होने के बाद उस नाम को दोबारा कभी भी दुनिया के किसी भी नए तूफान को नहीं दिया जाता.
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