एक समय था जब हिंदुस्तान में साइकिल सिर्फ सवारी नहीं थी, यह आम आदमी की जरूरत थी. स्कूल जाना हो, नौकरी पर पहुंचना हो, बाजार जाना हो. साइकिल सबसे आसान और किफायती साधनों में से एक थी. आज साइकिल का इस्तेमाल फिटनेस, स्पोर्ट्स और लाइफस्टाइल के लिए भी होता है. लेकिन इस बदलाव के बीच कुछ हिंदुस्तानीय कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने साइकिल के साथ अपना पूरा सफर तय किया. Avon Cycles उन्हीं में से एक है.
लुधियाना से शुरू हुई इसकी कहानी अब 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुकी है. कंपनी के मुताबिक, आज इसकी सालाना उत्पादन क्षमता 32 लाख साइकिल है और इसके पोर्टफोलियो में 200 से ज्यादा मॉडल हैं. लेकिन Avon यहां तक पहुंची कैसे? इसके लिए कहानी को करीब आठ दशक पीछे ले जाना होगा.
1947 में साइकिल बेचने से शुरू हुआ सफर
Avon की कहानी सीधे साइकिल बनाने से शुरू नहीं हुई थी. कंपनी के मुताबिक, 1947 में Pahwa Brothers ने साइकिल ट्रेडिंग का काम शुरू किया. उस समय हिंदुस्तान आजादी के बाद अपनी नई औद्योगिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था. Pahwa परिवार ने किफायती मोबिलिटी की जरूरत को समझा और साइकिल कारोबार में कदम रखा. लेकिन जल्द ही कंपनी ने सिर्फ साइकिल बेचने के बजाय उसके पार्ट्स बनाने की तरफ कदम बढ़ाया.
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