Anant Chaturdashi Puja Today: अनंत चतुर्दशी भाद्रपद मास की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. मिथिला और महावीर पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को यानी आज है. आइए जानते हैं कि अनंत चतुर्दशी पर आज अनंत भगवान की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है और उनकी पूजा कैसे करें.
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए सुबह 5 बजकर 38 मिनट से रात 11 बजकर 06 मिनट तक का समय शुभ है. इस बीच अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
| विवरण | समय | |
| अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ समय | सुबह 5:38 बजे से रात 11:06 बजे तक | |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:16 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक | |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 1:41 बजे से 2:29 बजे तक |
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अनंत भगवान की पूजा कैसे करें
सबसे पहले पूजा स्थान को साफ-सुथरा करें. स्नान इत्यादि करके पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें. संभव हो, तो पूजा स्थल पर एक चौकी को मंडपनुमा बनाएं और उसमें भगवान की तस्वीर (सात फणों वाली) लगाएं या कलश के ऊपर कुश से बना हुआ चतुर्भुज अनंत भगवान को स्थापित करें. तांबे के पात्र पर अष्टदल कमल बनाकर उसके ऊपर नया धागा (14 गांठों वाला) रखें. पंचदेवता और विष्णु भगवान की पूजा करें. संकल्प लेकर शांति कलश की स्थापना करें. भगवान विष्णु की षोडशोपचार, दशोपचार या पंचोपचार पूजा करें.
अनंत भगवान की पूजा जौ और तिल से होती है. इसलिए उनकी पूजा जौ और तिल से करें. भगवान विष्णु की पूजा में अक्षत का प्रयोग नहीं होता. भगवान विष्णु को दक्षिणावर्ती शंख से जल दें. भगवान को कनेर, जूही, पारिजात, अड़हुल (गुड़हल) गुलाब और कमल का फूल चढ़ाएं. भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का पत्ता जरूरी माना गया है. ऐसे में उन्हें तुलसी चढ़ाएं. इसके बाद 14 गांठों वाले अनंत धागे की पूजा भगवान के 14 नामों के साथ करें. भगवान को केला, सेब, संतरा इत्यादि 14 प्रकार के फल, पकवान या मिठाई अर्पित करें. इसके बाद कथा का पाठ करें या सुनें. इतना करने के बाद भगवान की आरती करें और उनकी चार बार परिक्रमा करें. इसके बाद विसर्जन करें. विसर्जन के बाद अनंत धागे को पुरुष दाहिने और स्त्री बाएं हाथ पर बांध लें.
अनंत धागा बांधने का मंत्र
“अनन्तसंसार महासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव अनन्तरूपे विनयोजयस्व ह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते ओम् इंद डोरकमनन्तमाख्यं चतुर्दश गुणात्मकम् सर्वदेवमयं विष्णो स्वकरे धारयाम्यहम्”. इसके बाद भगवान का नीचे दिए गए मंत्र से चरणामृत लेकर प्रसाद ग्रहण करें.
“अकालमृत्युहरणं सर्वव्याविनाशनम् विष्णोः पादोदकं पीत्वा शिरसा धारयाम्यहम्”
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