करीब छह महीने पहले 13 मार्च को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक अमेरिकी नागरिक पकड़ा गया था. नाम था मैथ्यू वैनडाइक. एयरपोर्ट से गिरफ्तारियों का सिलसिला यहीं नहीं थमा. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी एयरपोर्ट से छह विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई. फर्क सिर्फ इतना था कि ये छह लोग अमेरिका नहीं, यूक्रेन से थे. सभी गिरफ्तारियां राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने एंटी टेरर ऑपरेशन के तहत की थीं. सातों विदेशी नागरिकों पर पूर्वोत्तर के मिजोरम में उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, बगैर जरूरी परमिट के संवेदनशील इलाकों में जाने का आरोप लगा.आतंकवाद निरोधक कानून के तहत केस दर्ज हुआ. चार्जशीट भी पेश हो चुका था.
अब यह समाचार पिछले चार दिनों से सुर्खियों में है. इसकी वजह है कभी आतंकवाद के खिलाफ सबसे सख्त कानून के तहत गिरफ्तार किए गए, देश के सबसे सुरक्षित और सबसे बड़े जेल में शुमार तिहाड़ में बंद किए गए ये सातों आरोपी अब रिहा हो चुके हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू की एनआईए कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ सभी आरोपियों को एक महीने के लिए अपने घर, अपने देश जाने की अनुमति दे दी. कोर्ट का फैसला 18 सितंबर को आया और इसके करीब हफ्तेभर बाद 24 सितंबर को मैथ्यू वैनडाइक और अन्य छह को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया.
मैथ्यू वेड और अन्य छह विदेशी कौन हैं
मैथ्यू आरोन वैनडाइक अमेरिका के बाल्टीमोर के रहने वाले हैं. मीडिया रिकॉर्ड के मुताबिक उनका जन्म 11 जून 1979 को हुआ था. मैथ्यू खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ, फिल्ममेकर और युद्ध क्षेत्रों में काम करने वाला व्यक्ति बताता है . उसके अनुसार वो एक मर्सिनरी है.
मर्सिनरी का मतलब होता है भाड़े का सैनिक, यानी तो जो पैसों के बदले किसी भी देश या संगठन के लिए लड़ाई लड़े.
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2011 में, लीबिया के गृहयुद्ध में मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोही गुट के साथ लड़ते हुए गद्दाफी की सेना ने मैथ्यू को पकड़ लिया था. हालांकि बाद में वे जेल से भाग निकला.
- मैथ्यू की एक वेबसाइट है, जिसके मुताबिक उन्होंने 2007 से 2010 के बीच मोटरसाइकिल से अरब देशों की यात्रा की और इराक-अफगानिस्तान में युद्ध संवाददाता (जंग कवर करने वाला पत्रकार) और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर के तौर पर भी काम किया है.
- वेबसाइट के अनुसार, 2014 में पत्रकार जेम्स फोली और स्टीवन सोटलॉफ की ISIS द्वारा हत्या के बाद, वैनडाइक ने Sons of Liberty International (SOLI) नाम की प्राइवेट मिलिट्री का फाउंडर स्थापना की. वैनडाइक के अपने रिकॉर्ड के मुताबिक, वे दोनों पत्रकार उनके दोस्त थे.
SOLI के जरिए वो जरूरतमंद संगठन और लोगों को सैन्य प्रशिक्षण व सलाह देता है. SOLI खुद को एक गैर-लाभकारी संगठन बताता है. संगठन के अनुसार उसने इराक में ISIS से लड़ने वाले ईसाई सुरक्षा बलों को सैन्य प्रशिक्षण और सलाह दी. संगठन द्वारा यूक्रेन में भी प्रशिक्षण और सैन्य सहायता देने का दावा किया गया है.
6 यूक्रेनी नागरिक कौन हैं?
- हुर्बा पेट्रो (Hurba Petro)
- स्लिवियाक तारास (Slyviak Taras)
- इवान सुखमानोव्स्की (Ivan Sukmanovskyi)
- स्टेफानकिव मारियन (Stefankiv Marian)
- होंचारुक मैक्सिम (Honcharuk Maksim) 7
- कामिन्स्की विक्टर (Viktor Kaminskyi)
रिहा हुए विदेशी नागरिकों पर क्या आरोप हैं
13 मार्च 2026 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया. इनकी गिरफ्तारी काउंटर-टेरर ऑपरेशन के तहत हुई. NIA के मुताबिक आरोपियों ने हिंदुस्तान में प्रवेश किया और पूर्वोत्तर क्षेत्र के रास्ते म्यांमार तक पहुंचने की कोशिश की. मामले में वैनडाइक पर यूएपीए की धारा 18 लगाई गई थी.
कांग्रेस और अन्य पार्टियों का रुख क्या
यूएपीए के तहत पकड़ा गया मैथ्यू अब अमेरिका पहुंच चुका है. इसे लेकर विपक्षी कांग्रेस, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम और अन्य विपक्षी दलों ने प्रशासन और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस ने मैथ्यू की रिहाई के पीछे अमेरिका के दबाव को वजह बताते हुए प्रशासन को घेरा है. जयराम रमेश ने कहा है कि मैथ्यू की रिहाई के बदले हिंदुस्तान को क्या मिला, संदिग्ध था तो उसे वीजा कैसे मिला, हिंदुस्तान के रास्ते म्यांमार जाने की अनुमति किसने दी. यह प्रशासन को बताना चाहिए.
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि यूएपीए के तहत किसके खिलाफ चार्जशीट दायर होगी और किसके खिलाफ नहीं, इसका फैसला सर्जियो गोर करते हैं. हिंदुस्तान का एक आम नागरिक यूएपीए का केस दर्ज हो जाए तो नौ से 10 साल जेल में रहता है. क्योंकि हिंदुस्तानीय नागरिकों के पास सर्जियो गोर नहीं हैं. दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान एनआईए की ओर से कोर्ट में दायर की गई चार्जशीट को लेकर है, जिसमें आरोपियों पर शुरुआती एफआईआर में लगाई गई यूएपीए की धारा का कोई जिक्र नहीं है.
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