Pitru Paksha Shashthi Shradh 2026: पंचांग के अनुसार, आज आश्विन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है. ऐसे में परंपरानुसार, आज यानी 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार को षष्ठी (छठे दिन) श्राद्ध किया जाएगा. षष्ठी तिथि पर प्रेत योनि से मुक्ति के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से पूर्वजों को प्रेत योनि में भटकना नहीं पड़ता. इसके अलावा इस दिन प्रेत बाधा से निवारण के लिए विशेष अनुष्ठान(पूजा-पाठ) किए जाते हैं. ऐसे में आज पितृ पक्ष की षष्ठी तिथि पर श्राद्ध (तर्पण, पिंडदान) के लिए मुहूर्त और विधि क्या है, जानिए.
आज षष्ठी तिथि पर किसका श्राद्ध?
पितृ पक्ष में षष्ठी तिथि पर उन लोगों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) की षष्ठी तिथि पर हुई है. इसके अलावा आज षष्ठी तिथि पर उन मृत पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाएगा जिनकी मृत्यु पानी में डूबने, आग में जलने, विषपान करने या दुर्घटना से हुई.
षष्ठी श्राद्ध मुहूर्त
- कुतुप मुहूर्त – 11:28 से 12:16 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12:16 से 01:04 बजे तक
- अपराह्न काल – दोपहर 01:04 से 03:27 बजे तक
नारायण बलि या त्रिपिंडी श्राद्ध का विशेष महत्व
कर्मकांड के जानकार पं. वरुण कुमार झा (महापात्र) ने बताया कि इस दिन सामान्य तर्पण करना पर्याप्त नहीं होता. बल्कि इस दिन प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे- गया, त्र्यंबकेश्वर या हरिद्वार में नारायण बलि या त्रिपिंडी श्राद्ध करने का विधान है.
आज षष्ठी श्राद्ध में क्या करें
- कुशा की पवित्री धारण करें- तर्पण करते समय दाएं हाथ के अंगूठे में कुश से बनी पवित्री (अंगूठी) धारण करें. पौराणिक मान्यता है कि कुश पवित्र होता है और इसके प्रयोग से तर्पण का जल शुद्ध माना जाता है.
- तिलांजलि और संकल्प लें- दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके तिल मिले जल को अंजलि (दोनों हथेलियों को मिलाकर) से अर्पित करें. साथ ही संकल्प लें कि यह तर्पण अकाल मृत्यु को प्राप्त परिजन की शांति और सद्गति के लिए है.
- दीपदान करें- षष्ठी श्राद्ध की शाम घर की दक्षिण दिशा में या पीपल या बरगद पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं. मान्यता है कि दीपक पितरों के लिए प्रकाश और मार्गदर्शन का प्रतीक है.
- गीता का पाठ करें या सुनें- षष्ठी श्राद्ध के दिन श्रीमद्भगवद्गीता के 7वें या 11वें अध्याय का पाठ करें या सुनें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गीता का पाठ दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति के लिए किया जाता है.
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षष्ठी श्राद्ध (1 अक्टूबर 2026) पूजन-तर्पण विधि
- सुबह नहाकर साफ, हल्के रंग के या सफेद वस्त्र पहनें. पूजा स्थल और दक्षिण दिशा में गंगाजल छिड़कें.
- तांबे या पीतल का लोटा, जल, गंगाजल, काले तिल, कुश, पवित्री (कुश का बना हुआ), जौ, सफेद फूल, कच्चा दूध और सफेद चंदन रखें.
- कुश या कंबल का साफ आसन बिछाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें.
- दाएं हाथ में कुश की पवित्री धारण करें. जल, काले तिल और सफेद फूल लेकर अपने पितरों की शांति और तृप्ति के लिए संकल्प लें.
- जल में काले तिल, गंगाजल और फूल मिलाएं. अंजलि (दोनों हाथों को मिलाकर बनाएं) में जल लेकर पितरों का स्मरण करें और पितृ तीर्थ से जल अर्पित करें. तर्पण के इस कर्म को कम से कम तीन बार करें.
- भोजन तैयार होने के बाद गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए थोड़ा-थोड़ा भोजन अलग निकालकर अर्पित करें.
- ब्राह्मण को भोजन कराएं. सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, वस्त्र या अन्न का दान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें.
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