UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10वीं सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. सीट एक है, लेकिन दोनों प्रमुख खेमों के लिए दांव बड़ा माना जा रहा है. मुकाबला अब केवल विधायकों की संख्या और वोटों के गणित तक सीमित नहीं दिख रहा. क्रॉस वोटिंग और सेंधमारी की रणनीति भी चर्चा में है. समाजवादी पार्टी और बीजेपी दोनों एक-दूसरे के विधायकों पर नजर बनाए हुए हैं. विधानसभा की सात सीटें खाली होने के कारण अधिकतम 395 वोट पड़ने की स्थिति है. एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट जरूरी होंगे.
तीसरी सीट के लिए सपा को चाहिए अतिरिक्त वोट
समाजवादी पार्टी के पास फिलहाल दो राज्यसभा सीटें जीतने के बाद तीसरी सीट के लिए जरूरी संख्या पूरी नहीं है. पार्टी को करीब नौ अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा. सपा का दावा है कि सुहेलदेव हिंदुस्तानीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी और अपना दल एस जैसे सहयोगी दलों के कुछ विधायक संपर्क में हैं. पार्टी बीजेपी के छह से सात विधायकों के संपर्क में होने का भी दावा कर रही है. हालांकि इन दावों की पुष्टि संबंधित विधायकों या बीजेपी की ओर से नहीं हुई है. ऐसे में हर विधायक का वोट अहम हो गया है.
बीजेपी के सामने भी संख्या जुटाने की चुनौती
राज्यसभा की इस सीट को लेकर बीजेपी खेमे के सामने भी संख्या बल जुटाने की चुनौती बताई जा रही है. सपा के तीसरा उम्मीदवार उतारने के फैसले ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. नेतृत्वक हलकों में माना जा रहा है कि बीजेपी को अपने सहयोगी दलों के विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करना होगा. दूसरी ओर सपा लगातार अपने संपर्क में होने वाले विधायकों का दावा कर रही है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संख्या के आधार पर मौका मिलने की बात कह चुके हैं. इसलिए मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है.
उम्मीदवार के नाम और रणनीति पर नजर
सपा के तीसरे उम्मीदवार का नाम अभी सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी की तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. नेतृत्वक गलियारों में उम्मीदवार के चयन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला कर सकते हैं. वहीं बीजेपी भी अपने सहयोगी दलों के साथ बातचीत मजबूत कर रही है, ताकि उसके पक्ष में वोटों का गणित बना रहे. दोनों खेमों के दावों के बीच अब नजरें उम्मीदवारों के नाम, विधायकों के समर्थन और मतदान के दौरान होने वाली क्रॉस वोटिंग पर टिकी हैं.
पिछले चुनाव में भी दिखा था क्रॉस वोटिंग का असर
फरवरी 2024 के यूपी राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने सियासी गणित बदल दिया था. सपा के सात विधायकों ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके चलते सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन चुनाव हार गए थे. वहीं अपना दल (एस) के विधायक नीलरतन सिंह नीलू बीमारी के बावजूद एंबुलेंस से मतदान करने पहुंचे थे, हालांकि उनके क्रॉस वोट करने की पुष्टि नहीं हुई. दूसरी ओर अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने सपा उम्मीदवार रामजी लाल सुमन को वोट देने की बात कही थी.
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