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फ्लाईदुबई की घटना से याद आया 50 साल पुराना एंटेबे हाइजैक, जब 100 यहूदियों को छुड़ाने दुश्मन देश में घुस गई थी इजरायली सेना, नेतन्याहू के भाई ने संभाला था मोर्चा

Operation Thunderbolt : 30 सितंबर 2026 की सुबह दुबई एयरपोर्ट पर एक फ्लाईदुबई के बोइंग 737 MAX 8 विमान उड़ान भरने के लिए तैयार था. यात्री अपने परिजनों से विदा लेकर विमान में सवार हुए. विमान को इजरायल के तेल अवीव पहुंचना था.

कुछ ही घंटों बाद विमान के दो पायलटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला चाकूबाजी तक पहुंच गया.

को-पायलट ने साथी पायलट पर चाकू से हमला किया और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की. 1 मिनट के अंदर विमान करीब 17 हजार फीट नीचे आ गया.

टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट को हाईजैक कर क्रैश कराने की भी कोशिश हुई. हालांकि, पायलट और कुछ यात्रियों ने हाथापाई कर उसे रोक लिया. 180 यात्रियों से भरे इस विमान में 150 यहूदियों को बचाने के लिए इजराइल ने तुरंत फाइटर जेट्स रवाना कर दिए.

इन उनकी निगरानी में फ्लाइट का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. यात्रियों के परिजनों को समाचार मिली कि विमान को हाइजैक कर लिया गया है. हालांकि, बाद में सामने आया कि यह हाइजैक की घटना नहीं है.

फ्लाईदुबई की यह फ्लाइट हाइजैक होने से तो बच गई, लेकिन इस घटना ने 50 साल पुरानी एंटबे हाइजैक घटना की याद ताजा कर दी है. आज उसी एंटबे हाइजैक की कहानी जानते हैं…

तारीख, 29 जून 1976. इजरायल का फेमस बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जहां से फ्लाइट AF 139 को सुबह 9 बजे टेक ऑफ करना था. फ्लाइट का अगला स्टॉपेज था ग्रीस का एथेंस एयरपोर्ट.

दो संगठनों ने मिलकर बनाया था प्लान

चारों आतंकवादियों में से दो, जैल और फैज, PLFP ग्रुप से थे, जो इजरायल और फिलिस्तीन की लड़ाई में फिलिस्तीन की ओर से अपनी आजादी के लिए लड़ रहे थे. वहीं बाकी दो हाईजैकर ब्रिजिट और विल्फ्रेड जर्मनी के रिवॉल्यूशनरी सेल से थे. ये उन ग्रुप के सदस्य थे, जो जर्मनी और दूसरे देश में चल रहे अमेरिका की मनमानी के खिलाफ लड़ रहे थे.

कैद साथियों की रिहाई थी मकसद

इजरायल के इस प्लान हाईजैकिंग में इन दोनों ग्रुप का साथ आने का जो लक्ष्य था, वो ये कि ये अपने लोगों को, जो इजरायल की जेल में बंद थे, उन्हें छुड़ाना चाहते थे. करीब 3 बजते-बजते हाईजैक हो चुका प्लेन अब लीबिया के बेनगाजी के एयर स्पेस में पहुंच जाता है. हाईजैकर के दबाव में आकर फ्लाइट कैप्टन लीबिया एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से बात कर के सारा माजरा समझता है. वह बताता है कि प्लेन हाईजैक हो चुका है. कुछ देर की बातचीत के बाद प्लेन को बेनगाजी एयरपोर्ट में लैंड करने की परमिशन मिल जाती है.

बेनगाजी में कुछ घंटे रुका विमान

लीबिया में लैंड करने के बाद आतंकवादियों से मिलने लीबिया की ओर से ऑफिसर्स आते हैं. आतंकवादी उनसे इतने नाम से बेखौफ होकर मिलते हैं. उनमें से एक हाईजैकर सभी यात्रियों के पासपोर्ट ले लेता है. सारी चीज ऐसी चल रही थी, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. करीब 6 से 7 घंटे बेनगाजी एयरपोर्ट पर रुकने के बाद प्लेन वापस टेक ऑफ कर जाता है. नॉर्मल तरीके से बीच-बीच में हाईजैकर अनाउंसमेंट करते रहते हैं. यात्रियों के बीच एक बार फिर हड़कंप मच जाता है, जब उन्हें पता लगता है कि अब उनका प्लान युगांडा की ओर मोड़ दिया गया है.

Yitzhak Rabin, इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री

परिवारों के दबाव में इजरायली प्रशासन

इन सब के बीच हाईजैक कर लिए गए पैसेंजर्स के परिवार वाले इजरायली प्रशासन पर दबाव बनाने लगे थे. प्रशासन के ऑफिस में घुसकर हल्ला करने लगे थे, कहीं तोड़फोड़ भी की जाने लगी थी. गवर्नमेंट में इस बात का भी प्रेशर था कि अगर वह यात्रियों को छुड़ाने में सफल नहीं होते, तो बात उनकी सत्ता पर आ जाएगी. किसी एक यात्री को भी कुछ हो जाता है, तो जनता कभी माफ नहीं करेगी और दोबारा वह कभी पावर में नहीं आ पाएंगे. उस समय इजरायल के प्रधानमंत्री थे Yitzhak Rabin.

प्रधानमंत्री राबिन ने एक मीटिंग बुलाई और यह कहा कि हाईजैकर्स की मांग मान लेनी चाहिए. हम अपने यात्रियों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते. लेकिन इस डिस्कशन में शामिल इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर Shimon Peres अड़ जाते हैं कि बंधक बनाए गए आतंकवादियों को अगर छोड़ दिया जाए, तो अभी जितना डैमेज हो सकता है, यह उससे कहीं अधिक डैमेज पहुंचाएंगे. प्रधानमंत्री और डिफेंस मिनिस्टर के बीच तनातनी जैसा माहौल भी बन जाता है. लेकिन अंत में यह फैसला किया जाता है कि एक प्रॉपर प्लान बनाया जाए, इसके बाद देखें कि क्या हो सकता है.

योनातन नेतन्याहू, बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई

कमांडो लेकर युगांडा रवाना हुए विमान

सारी चीज फाइनल होने के बाद अब चारों प्लेन ऑपरेशन थंडरबोल्ट के लिए उड़ान भरते हैं. जिसके पीछे दो बोइंग के पैसेंजर प्लेन भी चल पड़ते हैं. इन्हें बैकअप के लिए रखा गया था. इन चारों प्लेन में से पहले जो प्लेन था, जिसे सबसे पहले युगांडा में लैंड होना था, उसमें 29 लोगों की टीम थी. जिसे लीड कर रहे थे बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनातन (योनी) नेतन्याहू. बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री बन पाए, इसके पीछे इस ऑपरेशन और उनके बड़े भाई की सफलता बहुत बड़ा रोल निभाती है.

Entebbe इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एरियल व्यू

सफेद मर्सिडीज ने बढ़ाई परेशानी

यहां पर एक बहुत बड़ी दिक्कत यह आ जाती है कि इजरायल के पास यह इनपुट नहीं होता कि ईदी अमीन जिस मर्सिडीज से ट्रेवल कर रहा है, वह ब्लैक नहीं बल्कि व्हाइट कलर की है. फेक काफिले का सामना सबसे पहले दो सैनिकों से होता है. ब्लैक की जगह व्हाइट मर्सिडीज देखकर दोनों में से एक सैनिक को शक हो जाता है कि आज अगर अमीन ब्लैक मर्सिडीज से क्यों नहीं आ रहे हैं.

शक की आड़ में ही वह काफिले को रोक देता है. एक दिक्कत और आ जाती है. इजरायल के प्लान के मुताबिक उन्हें किसी भी युगांडा के सैनिकों पर हमला नहीं करना था, ताकि वॉर जैसी सिचुएशन को अवॉइड किया जा सके. लेकिन काफिले में बैठे एक इजरायली कमांडो ने अपनी साइलेंट गन से दो में से एक सैनिक पर गोली चला दी.

यह देखकर दूसरे कमांडो ने भी फायरिंग शुरू कर दी. दोनों सैनिक तो ढेर हो गए, लेकिन इससे निकली आवाज बहुत तेज गूंजी थी. अब डर यह था कि कहानी हाईजैकर्स तक यह आवाज ना पहुंच गई हो और वे अलर्ट हो जाएं. यह सोचकर गाड़ी वहीं छोड़कर सभी कमांडो ओल्ड टर्मिनल की ओर तेजी से आगे बढ़ने लगते हैं.

योनी नेतन्याहू की टीम तेजी से बढ़ी

योनी नेतन्याहू अपनी टीम को लेकर ओल्ड टर्मिनल की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे थे. इजरायल के इस मिशन की सबसे इंपोर्टेंट चीज थी उनकी स्पीड, जिसे वह बिल्कुल भी ब्रेक नहीं करना चाहते थे. यहां पर एक बहुत बड़ी घटना होती है. योनी नेतन्याहू पर एक युगांडा के सैनिक ने गोली चला दी थी, जिसके कारण मौके पर ही उनकी जान चली जाती है.

हालांकि बाकी कमांडो तेजी से हॉल में घुस जाते हैं और उनकी मुठभेड़ हाईजैकर्स के साथ शुरू हो जाती है. कमांडो हॉल में मौजूद तीन हाईजैकर्स को मार गिराते हैं और बाकी बंधक लोगों को नीचे झुक कर बैठने को कहते हैं. लेकिन उनमें से एक पैसेंजर उठ खड़ा होता है. इजरायली कमांडो उसे भी हाईजैकर समझकर गोली मार देते हैं. इस दौरान तीन यात्रियों की भी जान चली जाती है.

इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर लौटे यात्रियों का स्वागत

53 मिनट में पूरा हुआ ऑपरेशन

53 मिनट के इस ऑपरेशन में इजरायली कमांडोज ने वह कारनामा करके दिखाया था, जो इसके पहले किसी भी देश ने इतिहास में कभी नहीं किया था. ऑपरेशन थंडरबोल्ट की टीम अपने सभी यात्रियों और यानी नेतन्याहू को लेकर वहां से निकल जाती है. इतना ही नहीं, इस दौरान एयरपोर्ट पर मौजूद युगांडा के सभी प्लेन भी डिस्ट्रॉय कर दिए जाते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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