जमशेदपुर : मां की ममता किसी रिश्ते की मोहताज नहीं होती. मां बनने के लिए शिशु को जन्म देना ही जरूरी नहीं, उसे अपना मानकर उसकी परवरिश करना और उसके भविष्य के लिए सपने संजोना भी मातृत्व है. जमशेदपुर के भालूबासा मुखी बस्ती की रहने वाली बेबो किन्नर की कहानी इसी ममता और अपनत्व की मिसाल है. जिस शिशु को जन्म के बाद उसके अपने माता-पिता ने ठुकरा दिया था, उसे बेबो ने न सिर्फ अपनाया, बल्कि मां की तरह उसकी परवरिश कर समाज में पहचान दिलाने की जिम्मेदारी भी उठायी. आज 14 साल का गोविंदा उनकी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है. उसके बेहतर भविष्य की कामना के साथ बेबो पिछले 10 वर्षों से जिउतिया का कठिन व्रत रख रही हैं.
प्यार से संवारा भविष्य, दिलायी नई पहचान
बेबो की जिंदगी में गोविंदा का आना एक ऐसा मोड़ था, जिसने उनके जीवन को एक नया मकसद दिया. उन्होंने बताया – एक शिशु को जन्म के बाद ही उसके माता-पिता ने ठुकरा दिया था. जब शिशु को अपनाने वाला कोई नहीं था, तब बेबो ने उसे अपने स्नेह का सहारा दिया. उन्होंने शिशु को अपनाया और उसका नाम गोविंदा रखा. इसके बाद शुरू हुआ उसकी परवरिश और भविष्य संवारने का सफर.
भालूबाासा के एक निजी स्कूल में पढ़ रहा गोविंदा
बेबो ने गोविंदा की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था की और उसे सुंदरनगर स्थित जीटी हॉस्टल में रखकर पढ़ाया. वह चाहती थीं कि शिशु को अच्छी शिक्षा मिले और वह अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बने. गोविंदा अब 14 साल का हो चुका है. बेबो उसे अपने पास भालूबासा ले आयी हैं. फिलहाल वह भालूबासा के एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा है.
बधाई और परवी से होने वाली कमाई से चलाती हैं घर
बेबो किन्नर की जिंदगी भी संघर्षों से भरी है. वह बधाई और परवी से मिलने वाले पैसों से अपना घर चलाती हैं. इसी कमाई के सहारे उन्होंने गोविंदा की परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी उठायी है. सीमित संसाधनों के बावजूद उनके इरादे मजबूत हैं. उनके लिए सबसे बड़ी खुशी गोविंदा को पढ़ते-लिखते देखना और उसे जीवन में आगे बढ़ते हुए देखना है. बेबो कहती हैं कि उनकी इच्छा है कि उनका बच्चा आगे चलकर अच्छा करे. उनकी इस बात में एक मां की चिंता भी है और बेटे के भविष्य को लेकर उम्मीद भी.
रिश्तों से नहीं, प्यार से बनती है मां
बेबो और गोविंदा की कहानी जिउतिया पर्व के भावनात्मक पक्ष को भी सामने लाती है. यह पर्व संतान की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना से जुड़ा है. बेबो पिछले एक दशक से इसी आस्था के साथ व्रत रख रही हैं. उनके लिए गोविंदा सिर्फ वह बच्चा नहीं है, जिसे उन्होंने कभी अपनाया था, बल्कि वह उनकी उम्मीदों और सपनों का केंद्र है.
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