AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी प्रशासन पर यह आरोप लगाया है कि होम मिनिस्ट्री मुसलमानों से उनके अधिकार छीनने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने डेमोग्राफिक बदलावों पर पिछले 15 साल के आंकड़े मांगे हैं. इसमें जन्म, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन, स्कूल एनरोलमेंट और प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन को लेकर धर्म के हिसाब से जानकारी मांगी गई है. ओवैसी का आरोप यह है कि इन आंकड़ों का इस्तेमाल मुसलमानों की भलाई के लिए नहीं, उनके अधिकार छीनने के लिए किया जाएगा. आइए जानते हैं क्या है डेमोग्राफिक पैनल और यह कैसे करता है काम.
हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज क्या है?
हाल के दौर में जिस डेमोग्राफिक पैनल को लेकर विवाद शुरू हुआ है, उसका आधिकारिक नाम हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज (High-Level Committee on Demographic Changes (HLCDC) है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को इसका गठन किया था. गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करके कमेटी के गठन की जानकारी दी थी. इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं. कमेटी को देश में अवैध इमिग्रेशन और अन्य असामान्य कारणों से जनसंख्या में हो रहे बदलावों का अध्ययन करना है. कमेटी पर यह जिम्मेदारी भी है कि वह उन समस्याओं से निपटने का रास्ता भी सुझाए.
हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज की क्यों हो रही चर्चा
हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज ने हाल ही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 35 सवालों का एक सेट भेजा है. इन सवालों में पिछले करीब 15 वर्षों में धर्म के आधार पर जो बदलाव देखे गए हैं उनका जिलेवार आंकड़ा मांगा गया है. सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार कमेटी ने राज्यों से धर्म के आधार पर जन्म, शिक्षा, वाहन रजिस्ट्रेशन, संपत्ति, वोटर, राशनकार्ड, धार्मिक स्थल और आदिवासी क्षेत्र जैसे मामलों की जानकारी मांगी है. कमेटी ने कई मामलों में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदायों के हिसाब से आंकड़े मांगे हैं.
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