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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: दिल्ली में हटाए जाएं बैरिकेड्स, बंद न हो इंटरनेट सेवा

Supreme Court Special Hearing : जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र प्रशासन को मेट्रो सेवाएं सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चलाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि इंटरनेट सेवाओं में किसी तरह की परेशानी नहीं आनी चाहिए. बैरिकेड्स हटाए जाएं.

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और अदालत के आदेश की कथित अनदेखी को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं. सुनवाई शुरू करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन वकीलों को इस मामले में अपनी बात रखनी है, उन्हें मौका दिया जाएगा. अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के लिए वकीलों को बारी-बारी से अपनी बात रखने की अनुमति दी.

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सुनवाई को लेकर जानकारी दी

जब वकीलों ने विशेष सुनवाई के लिए अदालत का धन्यवाद किया, तो जस्टिस बागची ने कहा, “हमें धन्यवाद देने की जरूरत नहीं है. हम हमेशा देश की सेवा के लिए मौजूद हैं.”

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने पाबंदियों पर सवाल उठाए

सुनवाई के दौरान सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने हिरासत में लेने की कार्रवाई और हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लोगों को ट्रेनों आदि से भी हिरासत में लिया जा रहा है. सिब्बल ने इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट पहले ही अनुराधा भसीन मामले में फैसला दे चुका है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि शनिवार यानी 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशन बंद नहीं थे. कुल 303 स्टेशनों में से सिर्फ 45 स्टेशनों पर लोगों के आने-जाने पर रोक लगाई गई थी.

सुनवाई के दौरान वकील एन. हरिहरन ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान वकील ने कहा- पब्लिक के लिए अब शहर में स्वतंत्र रूप से घूमना भी मुश्किल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर वकील शहदान फरासत ने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लोगों को जबरन घसीटकर बसों में बैठाया जा रहा था. कुछ लोगों को बसों से बाहर भी फेंका गया. मीडिया में ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें फरासत खुद पुलिस की हिरासत में दिख रहे हैं. वहीं, वकील एन. हरिहरन ने कहा कि पब्लिक के लिए अब शहर में स्वतंत्र रूप से घूमना भी मुश्किल हो गया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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