Digital Arrest Scam Patna : दानापुर थाना क्षेत्र के सगुना मोड़ निवासी केंद्र प्रशासन के एक सेवानिवृत्त शिक्षक को साइबर अपराधियों ने करीब 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 30 लाख रुपये ठग लिये. आरोपितों ने खुद को दिल्ली पुलिस, सीबीआइ और न्यायालय से जुड़ा बताकर शिक्षक को गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग और गोपनीय जांच में फंसाने की धमकी दी. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक बैंक शाखा में शिक्षक के नाम पर खाता है, जिसमें विदेश से मनी लॉन्ड्रिंग के 6.80 करोड़ रुपये आये हैं. उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने की बात भी कही गयी.
डर से शिक्षक ने एफडी तोड़कर दिये पैसे
लगातार दबाव और गिरफ्तारी के डर से शिक्षक ने अपनी एफडी तुड़वाकर 30 लाख रुपये आरोपितों के बताये खाते में भेज दिये. बाद में सोना गिरवी रखने के लिए कहे जाने पर उन्हें ठगी का शक हुआ. भतीजे की मदद से मामले को समझने के बाद उन्होंने पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
आधार पर सिम निकलने की बात कह शुरू किया ठगी का स्पोर्ट्स
पीड़ित शिक्षक जवाहर नवोदय विद्यालय से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश प्रशासन के अधीन संविदा पर कार्यरत हैं. वह मुरादाबाद स्थित अटल आवासीय विद्यालय में पढ़ाते हैं. शिक्षक के मुताबिक, 20 सितंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक स्त्री का फोन आया. उसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर एक सिम जारी हुआ है, जिसका नंबर 6787413832 है. स्त्री ने इसी आधार पर शिक्षक का इस्तेमाल वाला मोबाइल नंबर बंद किये जाने की बात कही.
वीडियो कॉल पर पुलिस वर्दी में व्यक्ति ने बात की
कारण पूछने पर स्त्री ने दिल्ली के बाराखंबा थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज होने की बात बतायी और शिकायत संख्या भी दी. इसके बाद उन्हें कथित तौर पर दिल्ली पुलिस से जोड़ दिया गया. वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने शिकायत संख्या पूछी और फिर मुख्यालय से संपर्क कराने की बात कही. वहां से शिक्षक को बताया गया कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है और वारंट पर उनका नाम, पता तथा आधार कार्ड का विवरण दर्ज है.
फर्जी पासबुक और कोर्ट के आदेश से बनाया दबाव
साइबर अपराधियों ने भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर दिल्ली के चांदनी चौक स्थित बैंक शाखा की पासबुक दिखाई. उसमें शिक्षक का फोटो, नाम और पता दर्ज होने का दावा किया गया. आरोपितों ने कहा कि उनके खाते में विदेश से मनी लॉन्ड्रिंग के 6.80 करोड़ रुपये आये हैं. इसके बाद शिक्षक की बात एक कथित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से करायी गयी. अधिकारी ने उन्हें सीबीआइ के टीम लीडर प्रदीप कुमार सिंह के नाम से आवेदन देने को कहा, ताकि ऑनलाइन जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा सके.
लगातार कॉल करके दबाव बनाया
शिक्षक के अनुसार, इसके बाद लगातार फोन कर जांच में सहयोग करने का दबाव बनाया जाने लगा. आरोपितों ने दावा किया कि सुदीप कुमार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से 180 पासबुक बरामद हुई हैं. इसी मामले से जोड़कर शिक्षक पर भी खाते के बदले दो लाख रुपये और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की रकम का 10 प्रतिशत यानी 68 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप लगाया गया.
बैंक खातों की जानकारी देकर जीता भरोसा
पीड़ित ने बताया कि आरोपित उनके बैंक खातों, संबंधित शाखाओं और बैलेंस तक की जानकारी दे रहे थे. इससे उन्हें लगा कि वास्तव में प्रशासनी एजेंसियां जांच कर रही हैं. ठगों ने कथित तौर पर हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि के दो दिनों तक मौजूद रहने की बात कही. साथ ही दिल्ली सेशन कोर्ट के नाम पर एक आदेश की प्रति भी दिखाई.
आरोपितों ने दावा किया कि शिक्षक निर्दोष पाये जाने पर एक माह के भीतर अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जबकि दोषी होने पर उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा. जांच की गोपनीयता भंग होने या आरोपी के भागने पर शिक्षक को भी जिम्मेदार ठहराने की धमकी दी गयी. गिरफ्तारी का डर बढ़ाने के लिए हथकड़ी पहने पांच लोगों की तस्वीर या दृश्य भी दिखाये गये.
मुरादाबाद से पटना आये और खाते में भेजे पैसे
लगातार मानसिक दबाव के बीच शिक्षक मुरादाबाद से पटना आये. उन्होंने वरिष्ठ नागरिक के रूप में जमा अपनी एफडी तुड़वायी और 30 लाख रुपये आरोपितों के बताये खाते में भेज दिये. ठगों ने उन्हें आइसीआइसीआइ बैंक के माध्यम से रकम भेजने को कहा. उनका दावा था कि मनी लॉन्ड्रिंग की रकम इसी बैंक के खाते में आयी है, इसलिए जांच के लिए उसी माध्यम से पैसे भेजना जरूरी है. उन्होंने 24 घंटे के भीतर रकम लौटाने का भरोसा भी दिया.
सोना गिरवी रखने को कहा तो हुआ शक
रकम भेजने के करीब दो दिन बाद आरोपितों ने शिक्षक से सोना बैंक में रखकर कर्ज लेने या उसे गलाकर उसकी वास्तविकता से संबंधित प्रमाण भेजने को कहा. इस मांग पर उन्हें संदेह हुआ. उन्होंने अपने भतीजे को पूरी घटना बतायी, जो हिंदुस्तानीय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं. भतीजे ने मामले को समझने के बाद साइबर ठगी की आशंका जतायी. इसके बाद पीड़ित ने पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. पुलिस अब मामले की जांच कर रही है.
The post रिटायर्ड शिक्षक को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी, 15 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 30 लाख ठगे appeared first on Naya Vichar.