विजयादशमी पर देशभर में धूम मची है. कई जगह रावण दहन की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. दिल्ली के द्वारका में 221 फीट ऊंचा रावण आकर्षण का केंद्र है, तो पीतमपुरा में 30 फीट दहन के लिए कॉकरोच का पुतला भी तैयार किया गया है. दिल्ली, लखनऊ, पटना और मुंबई समेत कई शहरों में रावण दहन के समय तय किए गए हैं. ज्यादातर शहरों में शाम के समय रावण दहन के कार्यक्रम रखे गए हैं
दिल्ली, लखनऊ और पटना में कब होगा रावण दहन?
विजयादशमी पर कई शहरों में शाम के समय रावण दहन के कार्यक्रम रखे गए हैं. उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी जानकारी के अनुसार, प्रमुख शहरों में संभावित समय इस प्रकार हैं.
| शहर | रावण दहन का समय |
| नई दिल्ली | शाम 5:48 बजे के बाद |
| नोएडा | शाम 5:47 बजे के बाद |
| गाजियाबाद | शाम 5:47 बजे के बाद |
| लखनऊ | शाम 5:35 बजे के बाद |
| कानपुर | शाम 5:38 बजे के बाद |
| वाराणसी | शाम 5:26 बजे के बाद |
| पटना | शाम 5:18 बजे के बाद |
| जयपुर | शाम 5:54 बजे के बाद |
| भोपाल | शाम 5:51 बजे के बाद |
| मुंबई | शाम 6:12 बजे के बाद |
| पुणे | शाम 6:30 बजे के बाद |
| कोलकाता | शाम 5:07 बजे के बाद |
| हैदराबाद | शाम 5:21 बजे के बाद |
| बेंगलुरु | शाम 5:58 बजे के बाद |
| चेन्नई | शाम 5:47 बजे के बाद |
ध्यान दें कि ये समय उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं. अलग-अलग रामलीला समितियों के कार्यक्रम, स्थानीय परंपराओं और पूजा के मुहूर्त के अनुसार समय बदल सकता है. घर से निकलने से पहले संबंधित आयोजन समिति की आधिकारिक सूचना जरूर देख लें.
दिल्ली में 221 फीट का रावण की तलवार और आंखें होंगी खास
दशहरे पर दिल्ली में रावण दहन के कई बड़े आयोजन हो रहे हैं. द्वारका की श्री रामलीला सोसायटी ने 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया है. आयोजकों के मुताबिक, इसे बनाने में करीब 38 से 40 लाख रुपये खर्च हुए हैं. इसके साथ कुंभकरण और मेघनाद के 90-90 फीट ऊंचे पुतले भी लगाए गए हैं. वहीं, दिल्ली की मशहूर लव कुश रामलीला में 110 फीट ऊंचे रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र रहेगा. इसकी खासियत यह है कि पुतले के हाथ में लगी तलवार घूमेगी और आंखें जलती हुई दिखाई देंगी. इसके अलावा, पुतले को 11 अलग-अलग रंगों की मालाओं से सजाया गया है.
रावण के साथ जलेगा कॉकरोच का पुतला
दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे का आयोजन एक अलग संदेश के साथ किया जा रहा है. यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के साथ कॉकरोच का पुतला भी रखा गया है. आयोजकों के अनुसार, कॉकरोच का पुतला गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक है. इस पहल का उद्देश्य लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करना है. समिति के अध्यक्ष अशोक गोयल ने बताया कि यह किसी नेतृत्वक दल या मुद्दे से प्रेरित नहीं है. इससे पहले भी समिति नक्सलवाद और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर प्रतीकात्मक पुतले तैयार कर चुकी है.
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क्यों मनाया जाता है दशहरा?
दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था. इस घटना की याद में हर साल रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. कई जगहों पर रावण दहन को सामाजिक संदेशों से भी जोड़ा जाता है. इसका मकसद लोगों को यह याद दिलाना है कि समाज में फैली बुराइयों को दूर करना भी उतना ही जरूरी है. इस तरह दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सच्चाई, अच्छाई और सकारात्मक बदलाव का संदेश देने वाला पर्व भी है.
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