Kiran Kumar Birthday: रेखा से अफेयर, कॉलेज में मारपीट, B-C ग्रेड फिल्मों से बनाया ड्रीम हाउस…हीरो बनने निकले थे, ऐसे बने बॉलीवुड के खूंखार विलेन!
फिल्म इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहे एक नौजवान का अपने ही साथियों से झगड़ा हो गया. बात इतनी बढ़ी कि पुलिस बुलानी पड़ी. उसे और उसके दोस्तों को थाने ले जाया गया. इसके बाद कॉलेज से निकालने की नौबत आई और साथी छात्रों ने 45 दिनों तक हड़ताल कर दी. लेकिन इस बवाल के बीच उस नौजवान की जिंदगी ने ऐसी करवट ली कि उसे पहली फिल्म मिल गई. यह कहानी है किरण कुमार की, जिन्हें आगे चलकर बॉलीवुड के सबसे यादगार खलनायकों में गिना जाने लगा. 20 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी के ऐसे किस्से, जिनमें कॉलेज का हंगामा, रेखा के साथ रिश्ते की चर्चा और बी-सी ग्रेड फिल्मों से सपनों का घर बनाने की कहानी शामिल है. कॉलेज में मारपीट, पुलिस और 45 दिन की हड़ताल किरण कुमार का फिल्मी सफर जितना दिलचस्प है, उनके शुरुआती दिनों के किस्से भी उतने ही चौंकाने वाले हैं. फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में पढ़ाई के दौरान किरण कुमार और रजा मुराद का दूसरे छात्रों से झगड़ा हो गया था. किरण ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक्टिंग और डायरेक्शन विभाग के छात्रों के बीच अक्सर कहासुनी होती थी. एक दिन बात मारपीट तक पहुंच गई और पुलिस दोनों को थाने ले गई. संस्थान के प्रिंसिपल इस घटना से नाराज थे और उन्होंने किरण कुमार समेत कुछ छात्रों को कॉलेज से निकाल दिया. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. एक्टिंग विभाग के छात्रों ने विरोध में हड़ताल कर दी, जो 45 दिनों तक चली. आखिरकार फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों को बीच-बचाव के लिए बुलाया गया. इनमें बीआर चोपड़ा और ए.के. अब्बास भी शामिल थे. किरण ने बताया कि बीआर चोपड़ा ने उन्हें समझाया और उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी मांगी. इसके बाद उन्हें दोबारा कॉलेज में पढ़ने का मौका मिला. दिलचस्प बात यह है कि इसी घटना के बाद उनके करियर को पहली फिल्म का रास्ता भी मिला. डांट की उम्मीद थी, लेकिन मिल गया फिल्म का ऑफर कॉलेज का विवाद सुलझने के बाद निर्देशक ए.के. अब्बास ने किरण कुमार को अपने गेस्ट हाउस बुलाया. किरण को लगा कि शायद उन्हें फिर से डांट सुननी पड़ेगी, लेकिन वहां कुछ और ही हुआ. अब्बास ने उन्हें अपनी फिल्म में एक इंजीनियर का किरदार ऑफर किया. उन्होंने किरण से कहा कि उन्हें एक लंबे कद के इंजीनियर की जरूरत है. किरण कुमार ने यह मौका तुरंत स्वीकार कर लिया. इस फिल्म के लिए उन्हें 7,500 रुपये मिले थे. जिस घटना ने उनके कॉलेज के दिनों को मुश्किल में डाल दिया था, वही उनके अभिनय करियर की शुरुआत का कारण भी बनी. इसके बाद उन्होंने फिल्मों में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत शुरू की. रेखा के साथ रिश्ते की चर्चा, ‘मम्माज बॉय’ कहकर चिढ़ाती थीं अभिनेत्री किरण कुमार की जिंदगी का एक और चर्चित अध्याय रेखा के साथ उनके कथित रिश्ते से जुड़ा है. 1970 के दशक में दोनों के अफेयर की चर्चा रही. उस दौर की एक मैगजीन में रेखा ने किरण को ‘मम्माज बॉय’ यानी मां का लाडला बताया था. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि किरण रात को सोने से पहले एक गिलास दूध पीना पसंद करते थे और समय पर घर लौटना चाहते थे. सालों बाद जब किरण कुमार से इस पुराने इंटरव्यू और रेखा की टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अभिनेत्री के लिए सम्मान ही जाहिर किया. उन्होंने रेखा को ‘दिल की सोना’ कहा और उनकी खूबसूरती के साथ उनके दिल की भी तारीफ की. किरण ने यह भी कहा कि वह रेखा को हमेशा अपने दिल में संजोकर रखेंगे. हालांकि, दोनों के रिश्ते की पूरी कहानी सार्वजनिक रूप से साफ नहीं है, लेकिन पुराने इंटरव्यू के ये किस्से आज भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ाते हैं. हीरो बनना चाहते थे, लेकिन विलेन के किरदारों ने दिलाई पहचान किरण कुमार दिग्गज अभिनेता जीवन के बेटे हैं. उनके पिता ने हिंदी फिल्मों में खलनायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थी. लेकिन किरण खुद शुरुआत में हीरो बनना चाहते थे. उन्हें उम्मीद थी कि वह मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे, मगर फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें मनचाहे मौके नहीं मिले. ऐसे में उन्होंने गुजराती सिनेमा का रुख किया, जहां उन्हें खूब लोकप्रियता मिली. बाद में हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने नेगेटिव किरदारों के जरिए अपनी पहचान मजबूत की. ‘खुदगर्ज’, ‘तेजाब’ और ‘खुदा गवाह’ जैसी फिल्मों में उनके काम को दर्शकों ने याद रखा. उनकी भारी आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और पर्दे पर खतरनाक अंदाज ने उन्हें एक अलग मुकाम दिया. जब बी-सी ग्रेड फिल्मों में काम करके बनाया सपनों का घर किरण कुमार के करियर का सबसे भावुक किस्सा उस दौर से जुड़ा है, जब उन्हें अपनी पसंद के बड़े प्रोजेक्ट नहीं मिल रहे थे. घर बनाने का सपना था और इसके लिए पैसों की जरूरत थी. ऐसे में उन्होंने बी-सी ग्रेड फिल्मों में भी काम किया. बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर बताया कि इन फिल्मों से मिली कमाई ने उनका सपनों का घर बनाने में मदद की. किरण ने बताया कि उस दौर में कई बार वह अपने काम से रचनात्मक रूप से संतुष्ट नहीं होते थे. फिर भी घर लौटते समय चेहरे पर मुस्कान रखते और पत्नी को कमाई के बारे में बताते. वह नहीं चाहते थे कि उनकी परेशानी से परिवार भी दुखी हो. उनके घर को बनने में छह साल लगे. अभिनेता के मुताबिक, घर के बाहर बने 11 खंभों में से हर एक पर करीब चार लाख रुपये खर्च हुए थे. यानी केवल खंभों की लागत ही 44 लाख रुपये थी. किरण कुमार ने यह भी साफ किया कि उन्हें उन फिल्मों में काम करने का पछतावा नहीं है. उनका मानना था कि उन्हीं फिल्मों की वजह से वह अपनी जरूरतें पूरी कर सके और अपना घर बना पाए. वह उन फिल्मों को भी उतना ही महत्व देते हैं, जितना अपनी चर्चित फिल्मों को. बॉलीवुड के इस विलेन की कहानी में कई रंग किरण कुमार की जिंदगी में कॉलेज का विवाद है, पहली फिल्म मिलने का दिलचस्प मोड़ है, रेखा के साथ रिश्ते की पुरानी चर्चा है और करियर के मुश्किल दौर में लिए गए फैसले भी हैं. पर्दे पर

