Navratri Vehicle Sales 2026: नवरात्रि के दौरान देश में वाहनों की खुदरा बिक्री में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नौ दिनों में कुल 10.32 लाख वाहन बिके. यानी औसतन हर मिनट करीब 80 वाहनों की बिक्री हुई. पिछले साल की समान अवधि में 10.12 लाख वाहन बिके थे. इस तरह कुल बिक्री में सालाना आधार पर 1.95% की बढ़ोतरी हुई है.
हालांकि, इस बार ऑटो बाजार के अलग-अलग सेगमेंट का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा. दोपहिया वाहनों की बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जबकि कारों और एसयूवी की बिक्री में गिरावट आई. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की बिक्री 5.78% बढ़कर 7.60 लाख यूनिट हो गई. वहीं, यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 13.66% घटकर 1.72 लाख यूनिट रह गई.
नवरात्रि में किस सेगमेंट की कितनी बिक्री हुई?
नवरात्रि के दौरान दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी कुल वाहन बिक्री में सबसे ज्यादा रही. दूसरी तरफ, कमर्शियल वाहनों और ट्रैक्टर की बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. तीनपहिया वाहनों की बिक्री में मामूली गिरावट आई.
| वाहन सेगमेंट | बिक्री (यूनिट) | सालाना बदलाव |
| दोपहिया वाहन | 7,60,000 | +5.78% |
| यात्री वाहन | 1,72,000 | -13.66% |
| तीनपहिया वाहन | 43,057 | -1.65% |
| कमर्शियल वाहन | 34,120 | +14.21% |
| ट्रैक्टर | 20,912 | +8.87% |
| कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट | 2,185 | +10.86% |
| कुल वाहन | 10,32,000 | +1.95% |
बाइक की बिक्री बढ़ने से बाजार को मिला सहारा
कुल वाहन बिक्री में दोपहिया वाहनों का योगदान सबसे ज्यादा रहा. इस सेगमेंट में 7.60 लाख यूनिट की खुदरा बिक्री हुई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5.78% अधिक है. कुल 10.32 लाख वाहनों की बिक्री में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 74% रही.
दोपहिया वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी से कुल ऑटो बाजार की ग्रोथ को सहारा मिला. अगर इस सेगमेंट में बढ़त नहीं होती, तो कुल बाजार की तस्वीर अलग हो सकती थी. हालांकि, उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि बिक्री में बढ़ोतरी के पीछे किस तरह के दोपहिया वाहनों या किन कीमतों वाली गाड़ियों की सबसे ज्यादा मांग रही.
कारों की बिक्री में 13.66% की गिरावट क्यों आई?
नवरात्रि के दौरान यात्री वाहनों की बिक्री घटकर 1.72 लाख यूनिट रह गई. पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले यह 13.66% कम है. यात्री वाहनों की श्रेणी में कारों और एसयूवी जैसे वाहन शामिल होते हैं.
इस गिरावट की एक अहम वजह पिछले साल का मजबूत आधार माना जा रहा है. साल 2025 में GST 2.0 के तहत टैक्स में बदलाव के बाद कई वाहनों की कीमतों में कटौती हुई थी. इससे ग्राहकों को खरीदारी के लिए प्रोत्साहन मिला और कई लोगों ने अपनी खरीद पहले ही कर ली थी. नतीजतन, पिछले साल त्योहारी अवधि में मांग बढ़ गई थी. इस बार उसी मजबूत आधार से तुलना होने के कारण सालाना आंकड़ों में गिरावट दिख रही है.
FADA के अध्यक्ष साई गिरिधर ने Moneycontrol से बातचीत में कहा कि पिछले साल की मांग सामान्य स्तर से काफी अधिक थी. उनके अनुसार, उस दौरान करीब 30 से 45 दिनों के बराबर मांग पहले ही बाजार में आ गई थी. ऐसे में इस साल कुल बिक्री में मामूली बढ़ोतरी भी सकारात्मक संकेत है, क्योंकि उद्योग को गिरावट की आशंका थी.
उन्होंने यह भी कहा कि यात्री वाहनों की बिक्री में गिरावट को सीधे तौर पर मांग कमजोर होने का संकेत नहीं मानना चाहिए. पिछले साल GST में बदलाव का असर इसी सेगमेंट पर अधिक पड़ा था.
कमर्शियल वाहन और ट्रैक्टर की बिक्री भी बढ़ी
नवरात्रि के दौरान कमर्शियल वाहनों की बिक्री 14.21% बढ़कर 34,120 यूनिट रही. ट्रैक्टर की बिक्री में भी 8.87% की बढ़ोतरी हुई और कुल 20,912 यूनिट बिके. कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की बिक्री 10.86% बढ़कर 2,185 यूनिट पहुंच गई.
इसके उलट, तीनपहिया वाहनों की बिक्री 1.65% घटकर 43,057 यूनिट रह गई. इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुल बाजार की बढ़त में अलग-अलग वाहन श्रेणियों का योगदान अलग रहा.
कार डीलरों के पास 45 दिन का स्टॉक, क्या मिल सकता है डिस्काउंट?
बिक्री के आंकड़ों के बीच यात्री वाहन डीलरों के स्टॉक पर भी नजर है. सितंबर के अंत में डीलरों के पास करीब 45 दिनों की बिक्री के बराबर यात्री वाहन स्टॉक था. Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, यह लगभग एक साल का सबसे ऊंचा स्तर था.
ज्यादा स्टॉक रखने से डीलरों की वित्तीय लागत बढ़ सकती है, क्योंकि वाहनों की खरीद के लिए लिए गए कर्ज पर ब्याज देना पड़ता है. वहीं, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियों की तरफ से दिए जाने वाले डिस्काउंट से डीलरों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ सकता है.
सितंबर में यात्री वाहनों के स्टॉक में करीब 33,000 यूनिट की बढ़ोतरी हुई थी. यह कंपनियों से डीलरों को भेजे गए वाहनों और वास्तव में रजिस्टर हुए वाहनों के बीच का अंतर था. यदि स्टॉक लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है, तो पुराने मॉडल वर्ष के वाहनों को बेचने के लिए अतिरिक्त छूट की जरूरत पड़ सकती है.
हालांकि, ज्यादा स्टॉक का मतलब यह नहीं है कि हर मॉडल पर निश्चित रूप से बड़ी छूट मिलेगी. ऑफर वाहन, कंपनी, शहर और डीलर के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं.
धनतेरस और दिवाली पर कैसी रह सकती है मांग?
त्योहारी सीजन की बाकी अवधि में धनतेरस और दिवाली के दौरान होने वाली बिक्री पर नजर रहेगी. पश्चिम बंगाल के डीलरों ने Moneycontrol को बताया कि इस बार ग्राहकों का रुझान सकारात्मक रहा है. FADA पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष रोहित चौधरी के मुताबिक, उनके टाटा मोटर्स डीलरशिप पर बिक्री में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई.
फिर भी, पूरे देश में आगे की बिक्री कितनी बढ़ेगी, इसका निष्कर्ष धनतेरस और दिवाली के वास्तविक खुदरा आंकड़ों के बाद ही निकाला जा सकेगा. फिलहाल नवरात्रि के आंकड़े बताते हैं कि दोपहिया वाहनों की बढ़त ने कुल बाजार को सहारा दिया है, जबकि यात्री वाहनों की बिक्री पिछले साल की मजबूत मांग से तुलना के कारण दबाव में रही.
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