CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने याचिका वापसी का फैसला तब लिया, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान उनकी याचिका पर टिप्पणी करते हुए यह कहा कि पुलिस की इजाजत का मतलब सिर्फ प्रदर्शनकारियों को रोकना नहीं था, बल्कि दूसरे लोगों को उस प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना भी था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान फ्रांस में चल रहे स्टूडेंट-लेड प्रोटेस्ट का जिक्र किया. फ्रांस का यह स्टूडेंट प्रोटेस्ट आगजनी और लूटपाट में बदल गया था.कोर्ट ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनों के लिए पुलिस की इजाजत का मतलब सिर्फ प्रदर्शनकारियों को रोकना नहीं था, बल्कि दूसरे लोगों को उनमें शामिल होने से रोकना भी था.
सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर कोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई की. सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी. दशहरा की छुट्टियों के कारण हाईकोर्ट इस सप्ताह बंद है.
सौरव और आशुतोष की याचिका पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होनी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि देखें कि विशेष कोर्ट की कार्यवाही में क्या होता है, अगर शिकायत बरकरार रहती है तो याचिका दायर करें .
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