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भारत आकर पाकिस्तान पर बोले अमेरिकी विदेश मंत्री- रखने ही होंगे रिश्ते; मतभेद के बावजूद संबंध खत्म करना क्यों नहीं चाहता अमेरिका?

तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हिंदुस्तान आए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ वाशिंगटन के रिश्तों को लेकर अहम पहलू सामने रखी है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी अहम है. ऐसे में अमेरिका उसके साथ राजनयिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता. रुबियो ने यह भी कहा कि आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों के खिलाफ अमेरिका की नीति में कोई नरमी नहीं आई है.

पाकिस्तान से रिश्ते बनाए रखना अमेरिका के लिए क्यों है जरूरी?

एक मीडिया चैनल के साथ इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव आया है. इस पर रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी पहले से अलग है. अब उन्हें केवल किसी एक मुद्दे पर नहीं, बल्कि अमेरिका की पूरी विदेश नीति को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं.

उन्होंने कहा कि अमेरिका को ऐसे देशों के साथ भी संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके गंभीर मतभेद हैं. पाकिस्तान इसका एक उदाहरण है. रुबियो के मुताबिक, पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसके साथ संवाद बनाए रखना अमेरिका के लिए जरूरी है.

जानकारी के लिए बता दें कि 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए रुबियो ने हिंदुस्तान के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के मुद्दे पर पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता रोकने से जुड़े विधेयक की बात कही थी.

आतंकवाद पर अमेरिका के रुख में बदलाव नहीं: रुबियो

पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने की जरूरत बताने के साथ ही रुबियो ने आतंकवाद पर अमेरिका की नीति को भी स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका आतंकवाद का विरोध करता है. जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं, अमेरिका उनके भी खिलाफ है. रुबियो के बयान का अहम पहलू यह है कि उन्होंने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने को आतंकवाद के मुद्दे पर किसी तरह की नरमी से अलग बताया. उनके अनुसार, किसी देश के साथ बातचीत जारी रखने का मतलब यह नहीं है कि उसके साथ हर मुद्दे पर सहमति है या उसकी नीतियों का समर्थन किया जा रहा है. उन्होंने हिंदुस्तान के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की अहमियत भी बताई. रुबियो का कहना है कि पाकिस्तान के साथ सीधे संवाद के रास्ते खुले रहने से अमेरिका हिंदुस्तान की सुरक्षा चिंताओं को इस्लामाबाद के सामने उठा सकता है.

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हिंदुस्तान की सुरक्षा चिंताओं पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?

मार्को रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संपर्क बनाए रखने से अमेरिका को उन मुद्दों पर बात करने का मौका मिलता है, जिससे हिंदुस्तान चिंतित है. इनमें आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ जैसे विषय शामिल हैं. उनके मुताबिक, पाकिस्तान से बातचीत के जरिए उसे ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए हतोत्साहित करने की कोशिश की जा सकती है, जो हिंदुस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं. यह बयान हिंदुस्तान के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाले समर्थन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाती रही है. हालांकि, रुबियो ने अपने बयान में यह दावा नहीं किया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत से इन समस्याओं का समाधान निश्चित रूप से हो जाएगा.

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हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच अमेरिका की संतुलन रणनीति

रुबियो का बयान अमेरिका की उस विदेश नीति को दिखाता है, जिसमें रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखे जाते हैं. हिंदुस्तान अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार है, जबकि पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने के पीछे परमाणु सुरक्षा, भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कारण हैं. रुबियो ने हिंदुस्तान के ईरान के साथ राजनयिक संबंधों का उदाहरण देते हुए भी समझाया कि देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर उन प्रशासनों से बातचीत जारी रख सकते हैं, जिनसे उनके कई मुद्दों पर मतभेद हों. 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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