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Author name: Vinod Jha

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20 हजार के बजट में फ्लैगशिप का मजा, 2026 के ये स्मार्टफोन्स बदल रहे हैं बाजार की तस्वीर

हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार में 20,000 रुपये से कम कीमत वाला बजट सेगमेंट अब प्रीमियम फीचर्स का नया केंद्र बन चुका है. साल 2026 में मोबाइल कंपनियों ने अपने किफायती हैंडसेट में एमोलेड डिस्प्ले, ओआईएस सपोर्ट वाले कैमरे, लंबी बैटरी लाइफ और कई सालों तक मिलने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट्स शामिल करके महंगे और सस्ते फोन के अंतर को लगभग खत्म कर दिया है. कंपोनेंट सप्लाई की चुनौतियों के बीच ब्रांड्स अब सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स बढ़ाने के बजाय खास यूजर जरूरतों और प्रीमियम डिजाइन पर फोकस कर रहे हैं. इस रणनीतिक बदलाव की वजह से आज 20 हजार के बजट में हर वर्ग के उपभोक्ता के लिए पावरफुल विकल्प मौजूद हैं. बजट सेगमेंट में आया प्रीमियम फीचर्स का दौर स्मार्टफोन निर्माताओं ने एंट्री-लेवल और मिड-रेंज मार्केट के बीच की दूरी को पाट दिया है. अब 20,000 रुपये से कम वाले डिवाइसेस में कर्व्ड एमोलेड पैनल्स और ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) तकनीक से लैस कैमरे आम बात हो गए हैं. इसके साथ ही कंपनियां अब बजट स्मार्टफोन में भी मल्टी-डे बैटरी लाइफ और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट की गारंटी दे रही हैं. मोटोरोला का Moto G37 Power इसका बड़ा उदाहरण है, जो बड़ी बैटरी और क्लीन स्टॉक एंड्रॉयड एक्सपीरिएंस के साथ आता है, जबकि Motorola Edge 70 स्लिम प्रोफाइल के साथ दमदार परफॉर्मेंस देता है. अलग-अलग जरूरतों के लिए विशेष स्मार्टफोन विकल्प स्मार्टफोन कंपनियां अब हर यूजर की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर मॉडल पेश कर रही हैं. गेमिंग का शौक रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए iQOO Z11x 5G और POCO X7 5G जैसे मॉडल बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं. दूसरी तरफ, फोटोग्राफी और विजुअल क्वाॅलिटी को प्राथमिकता देने वालों के लिए Vivo T4R 5G, Motorola Moto G96 और Samsung Galaxy F36 बेहतरीन विकल्प बने हुए हैं. सॉफ्टवेयर के शौकीनों के लिए Nothing Phone 3a Lite अपनी अनूठी डिजाइन और साफ-सुथरे यूआई के साथ अलग पहचान बना रहा है, जबकि Redmi 15 5G अपनी टिकाऊ बैटरी के लिए पहचाना जाता है. डिजाइन और उद्योग में आ रहे बदलाव स्मार्टफोन इंडस्ट्री में पुर्जों की कमी के चलते कंपनियों ने सिर्फ इंटरनल स्पेसिफिकेशन्स बढ़ाने के बजाय बाहरी लुक और फील पर काम करना शुरू किया है. मोटोरोला जैसी दिग्गज कंपनियों ने वैश्विक पेंटोन पार्टनरशिप के जरिए रंगों और टेक्सचर पर खास ध्यान दिया है, जिससे बजट फोन्स को भी प्रीमियम लुक मिल रहा है. प्रमुख ब्रांड्स अपनी मजबूत सप्लाई चेन की मदद से लागत बढ़ने के बावजूद गुणवत्ता से समझौता नहीं कर रहे हैं. इसी वजह से उपभोक्ता अब कम कीमत में भी एक फ्लैगशिप जैसा दिखने वाला और टिकाऊ डिवाइस आसानी से खरीद पा रहे हैं. 2026 बजट स्मार्टफोन्स पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) {“type”:”faq”,”question”:”Q1: 2026 में 20,000 रुपये से कम के बजट स्मार्टफोन्स में क्या खास बदलाव देखने को मिल रहे हैं?”,”answer”:”A: अब 20,000 रुपये से कम कीमत वाले बजट फोन्स में भी एमोलेड (AMOLED) डिस्प्ले, ओआईएस (OIS) सपोर्ट वाले कैमरे, कई दिनों तक चलने वाली बैटरी और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट जैसे प्रीमियम और फ्लैगशिप फीचर्स मिल रहे हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q2: 20,000 रुपये के बजट में गेमिंग के लिए सबसे अच्छे फोन कौन से हैं?”,”answer”:”A: यदि आप गेमिंग के शौकीन हैं, तो iQOO Z11x 5G और POCO X7 5G आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं. इनमें हाई-रिफ्रेश-रेट और पावरफुल प्रॉसेसर्स दिए गए हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q3: फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इस बजट में कौन से स्मार्टफोन सही रहेंगे?”,”answer”:”A: बेहतर कैमरा क्वाॅलिटी और ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के लिए आप Vivo T4R 5G, Samsung Galaxy F36 या Motorola Moto G96 का चुनाव कर सकते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q4: अगर मेरी प्राथमिकता लंबी बैटरी लाइफ है, तो मुझे कौन सा फोन चुनना चाहिए?”,”answer”:”A: लंबे बैटरी बैकअप और टिकाऊपन के लिए Redmi 15 5G और बड़ी बैटरी क्षमता के साथ आने वाला Motorola G37 Power सबसे उपयुक्त विकल्प हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q5: क्या 20 हजार के अंदर क्लीन स्टॉक एंड्रॉयड और अनोखे डिजाइन वाले फोन उपलब्ध हैं?”,”answer”:”A: जी हां, Nothing Phone 3a Lite अपने क्लीन यूआई (UI) और अनोखे डिजाइन के साथ आता है. वहीं, Motorola G37 Power और Motorola Edge 70 क्लीन स्टॉक एंड्रॉयड और प्रीमियम डिजाइन का अनुभव देते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q6: कंपनियां अब कम बजट में प्रीमियम फीचर्स क्यों दे पा रही हैं?”,”answer”:”A: कंपोनेंट सप्लाई की चुनौतियों के कारण कंपनियां अब सिर्फ हार्डवेयर बढ़ाने के बजाय डिजाइन, पेंटोन कलर पार्टनरशिप्स और खास फीचर्स (जैसे OIS और AMOLED स्क्रीन) के जरिये अपने फोन्स को अलग और आकर्षक बना रही हैं.”} ये भी पढ़ें: iQOO Z11 की खूबियां हुईं कन्फर्म, Dimensity 7500 Turbo चिपसेट के साथ इन कलर ऑप्शन में आएगा फोन ये भी पढ़ें: Nothing Phone हिंदुस्तान में बढ़ाएगी बाजार, डबल स्मार्टफोन लाइनअप और नये स्टोर्स के साथ तगड़ी तैयारी The post 20 हजार के बजट में फ्लैगशिप का मजा, 2026 के ये स्मार्टफोन्स बदल रहे हैं बाजार की तस्वीर appeared first on Naya Vichar.

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1906 से 1947 तक ऐसे बदला भारत का तिरंगा, जानिए राष्ट्रीय ध्वज की पूरी कहानी

हिंदुस्तान का तिरंगा सिर्फ देश की पहचान नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र के संघर्ष की कहानी भी अपने अंदर समेटे हुए है. आज जिस तिरंगे को हम पूरे गर्व के साथ देखते हैं, वह कई बदलावों से गुजरने के बाद अपने वर्तमान स्वरूप में पहुंचा. तिरंगे के डिजाइन में समय-समय पर बदलाव हुए और आखिरकार 1947 में इसे आज का स्वरूप मिला. 1906 में दिखा पहला तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज के शुरुआती स्वरूपों में से एक 1906 में सामने आया था. इसमें तीन रंगों के साथ सात कमल के फूल, ‘वंदे मातरम्’ लिखा हुआ था. इसके अलावा सूर्य और चंद्र के प्रतीक भी शामिल किए गए थे. यह ध्वज उस दौर में देशभक्ति और आजादी की भावना का प्रतीक बनकर सामने आया. 1907 में बदला ध्वज का स्वरूप 1907 में तिरंगे के डिजाइन में एक और बदलाव हुआ। इसमें केसरिया, पीला और हरा रंग शामिल था. ध्वज पर कमल के फूलों के साथ सूर्य और चंद्र के प्रतीक भी मौजूद थे. यह बदलाव स्वतंत्रता आंदोलन के बढ़ते प्रभाव के बीच सामने आया. 1917 में यूनियन जैक भी था शामिल 1917 में तिरंगे का एक अलग स्वरूप सामने आया. इसमें लाल और हरे रंग के साथ सात सितारे और यूनियन जैक शामिल था. यह डिजाइन उस समय के नेतृत्वक और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े बदलावों को दर्शाता था. 1921 में चरखे ने ली खास जगह सन् 1921 में पिंगली वेंकैया ने एक नए ध्वज का प्रस्ताव रखा. इस डिजाइन में बीच में चरखे को जगह दी गई. चरखा स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका था. 1931 में तिरंगे को मिला नया रूप 1931 में केसरिया, सफेद और हरे रंग वाला ध्वज सामने आया. इसके बीच चरखा बनाया गया था. यही डिजाइन आगे चलकर स्वतंत्र हिंदुस्तान के राष्ट्रीय ध्वज के वर्तमान स्वरूप का आधार बना. View on Instagram 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया आज का तिरंगा 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने हिंदुस्तान के वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया. इसमें चरखे की जगह अशोक चक्र को शामिल किया गया, जिसमें 24 तीलियां हैं. इसके बाद यही तिरंगा स्वतंत्र हिंदुस्तान की पहचान बन गया. 26 जनवरी 1950 को बना आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ यही तिरंगा हिंदुस्तान का आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज बना. आज केसरिया साहस और त्याग, सफेद शांति और सत्य तथा हरा रंग समृद्धि और हरियाली का प्रतीक माना जाता है. अशोक चक्र धर्म, गति और निरंतर प्रगति का संदेश देता है. The post 1906 से 1947 तक ऐसे बदला हिंदुस्तान का तिरंगा, जानिए राष्ट्रीय ध्वज की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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संसद का मानसून सत्र: लोकसभा में पेश होंगे 4 महत्वपूर्ण विधेयक, राज्यसभा में वित्त मंत्री पेश करेंगी बैंकर्स बुक्स बिल

लोकसभा में जिन चार विधेयकों को पेश किया जाएगा, उसमें ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं. ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश करेंगे. इसका उद्देश्य विभिन्न ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यताओं, नियुक्तियों और सेवा शर्तों में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता लाना है. ेइस बिल में एक ‘राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग’ (National Tribunals Commission) के गठन का भी प्रस्ताव है. केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 गृह मंत्री अमित शाह केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक पेश करने के लिए अनुमति मांगेंगे. खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ में संशोधन करने के लिए विधेयक पेश करेंगे. राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संशोधन विधेयक, 2026 गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एनसीडीसी अधिनियम, 1962 में संशोधन के लिए यह विधेयक सदन के पटल पर रखेंगे. कई कैबिनेट मंत्री भी अपने विभागों के कागजात रखेंगे पटल पर लोकसभा में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखवत, जयंत चौधरी, पंकज चौधरी, कीर्ति वर्धन सिंह, सुकांत मजूमदार और तोखन साहू अपने-अपने विभागों के कागजात पटल पर रखेंगे. राज्यसभा में बैंकिंग और टैक्स कानूनों पर होगी चर्चा राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘बैंकर्स बुक साक्ष्य विधेयक, 2026’ को विचार और पारित करने के लिए पेश करेंगी. यह विधेयक बैंकों के दस्तावेजों से संबंधित कानून को समकालीन डिजिटल बैंकिंग प्रथाओं के अनुरूप बनाने का काम करेगा. इसके साथ ही, उच्च सदन में ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर भी विचार किया जाएगा, जिसके तहत ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ और ‘आयकर अधिनियम’ में आवश्यक संशोधन प्रस्तावित हैं. ये भी पढ़ें: शिरोमणि अकाली दल ने स्त्री आरक्षण और परिसीमन बिल का किया समर्थन, तुरंत लागू करने की मांग की ये भी पढ़ें: Parliament : विपक्ष के हंगामे से दिनभर ठप रही संसद, लोकसभा से MSME संशोधन विधेयक पास The post संसद का मानसून सत्र: लोकसभा में पेश होंगे 4 महत्वपूर्ण विधेयक, राज्यसभा में वित्त मंत्री पेश करेंगी बैंकर्स बुक्स बिल appeared first on Naya Vichar.

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प्रयागराज में राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रम पर BJP का हमला, दानिश आजाद अंसारी बोले- युवाओं को गुमराह करने में नाकाम रहेंगे

UP Politics : कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रयागराज में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है. हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी पर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. यूपी प्रशासन में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि प्रदेश के युवा अब जागरूक हैं और वे किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं. रविवार को प्रयागराज पहुंचे राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से संवाद किया. इसी कार्यक्रम को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए दानिश आजाद अंसारी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता युवाओं को अपने नेतृत्वक एजेंडे से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिलेगी. युवाओं को गुमराह करने की कोशिश का लगाया आरोप दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा आज अपने भविष्य को लेकर गंभीर है. वह रोजगार, शिक्षा और विकास के मुद्दों को समझता है. ऐसे में केवल नेतृत्वक भाषणों के जरिए युवाओं को गुमराह करना आसान नहीं है. उन्होंने राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रम को लेकर कहा कि युवाओं को बरगलाने की कोशिश लगातार की जा रही है, लेकिन प्रदेश की युवा पीढ़ी सच्चाई को समझती है. उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी युवाओं को गुमराह करने में सफल नहीं होंगे. प्रयागराज में छात्रों से संवाद कर रहे हैं राहुल गांधी राहुल गांधी रविवार को प्रयागराज पहुंचे. यहां उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से संवाद किया. कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस लगातार युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है सियासी टक्कर उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले छात्र और युवा वर्ग नेतृत्वक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसे में राहुल गांधी का छात्रों के बीच पहुंचना और सीधे संवाद करना कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. वहीं, भाजपा नेताओं ने भी कांग्रेस पर युवाओं को नेतृत्वक रूप से प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए पलटवार शुरू कर दिया है. दानिश आजाद अंसारी के बयान से साफ है कि राहुल गांधी के प्रयागराज छात्र कार्यक्रम को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है. यह भी पढ़ें: यूपी में SIR के बाद अब SSR की तैयारी: विधानसभा चुनाव से पहले फिर दुरुस्त होगी वोटर लिस्ट, सितंबर से घर-घर पहुंचेंगे BLO The post प्रयागराज में राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रम पर BJP का हमला, दानिश आजाद अंसारी बोले- युवाओं को गुमराह करने में नाकाम रहेंगे appeared first on Naya Vichar.

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बाबूपुर का बेटा बना CAPF में असिस्टेंट कमांडेंट, आर्यन को UPSC में AIR 193

Success Story Aryan Amit: यूपीएससी की ओर से सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट ऑफिसर भर्ती 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है. रिजल्ट जारी होने के बाद टॉपर्स की सफलता की कहानियां सामने आने लगी हैं. इन्हीं में एक कहानी है आर्यन अमित की, जिन्होंने UPSC CAPF असिस्टेंट कमांडेंट की परीक्षा को रैंक 193 से क्रैक किया है. Success Story Aryan Amit: कौन हैं आर्यन अमित? आर्यन अमित समस्तीपुर जिले के बाबूपुर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता बलराम सिंह किसान हैं. साधारण पारिवार से आने वाले आर्यन ने आरएनएआर कॉलेज, समस्तीपुर से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और सिविल सर्विसेज को अपना लक्ष्य बनाया. लगातार मिली असफलताएं आर्यन की तैयारी का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा. UPSC Civil Services परीक्षा में वह General Studies के Prelims पेपर को तो क्वालिफाई कर लेते थे, लेकिन CSAT बार-बार उनकी राह में दीवार बनकर खड़ा हो जाता था. राज्य सेवा परीक्षाओं में भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. दो BPSC Mains और इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी मंजिल हाथ से निकलती रही. BPSC में 3 नंबर से फेल आर्यन के लिए सबसे दर्दनाक मौकों में से एक 70वीं BPSC परीक्षा का परिणाम था. वह इंटरव्यू में 120 में 87 अंक हासिल करने के बावजूद फाइनल मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना सके. महज 3 अंकों के अंतर ने उनका सपना फिर कुछ समय के लिए रोक दिया. पांच साल की लगातार मेहनत के बाद ऐसी नजदीकी हार किसी को भी अंदर से हिला सकती थी. ये भी पढ़ें: कई बार हुए असफल, लेकिन नहीं टूटा हौसला, बिलाल खान ने UPSC CAPF 2025 में हासिल की AIR 121 CAPF देने का मन भी नहीं था लगातार असफलताओं के बीच आर्यन का मन UPSC CAPF परीक्षा देने का भी नहीं था. उन्हें लग रहा था कि शायद अब किसी और रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए. इसी दौरान उनके करीबी दोस्त प्रीतम ने उन्हें CAPF परीक्षा देने के लिए लगातार प्रेरित किया. आर्यन ने आखिरकार परीक्षा दी और यही फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया. आर्यन ने CAPF की लिखित और शारीरिक परीक्षा दोनों में सफलता हासिल कर ली. इसके बाद Personality Test की बारी थी. लेकिन इंटरव्यू से पहले उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं. UPSC इंटरव्यू से करीब 10 दिन पहले वह पटना में 71वीं BPSC Mains परीक्षा दे रहे थे. इसी बीच उनकी नानी शुशीला देवी का निधन हो गया. ये भी पढ़ें: रितिका का डबल धमाका, BPSC के बाद UPSC में जलवा, AIR 12 लाकर बनीं CAPF असिस्टेंट कमांडेंट दादी के निधन का गम और इंटरव्यू की तैयारी परिवार में दुख का माहौल था और दूसरी तरफ UPSC Personality Test सिर पर था. आर्यन के पास इंटरव्यू की तैयारी के लिए लगभग कोई समय नहीं बचा. ऐसे मुश्किल हालात में वह बोर्ड के सामने पहुंचे. उनके पास किताबों से तैयारी करने का वक्त भले नहीं था, लेकिन वर्षों के संघर्ष से मिली समझ, अनुभव और आत्मविश्वास जरूर था. उन्होंने ईमानदारी और अपने अनुभवों के आधार पर इंटरव्यू का सामना किया. आखिरकार जब UPSC CAPF 2025 का परिणाम आया तो आर्यन अमित ने AIR 193 हासिल कर इतिहास रच दिया. उनका चयन Assistant Commandant के पद के लिए हुआ. आर्यन के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि पांच साल तक लगातार मिलती असफलताओं के बावजूद खुद पर भरोसा बनाए रखने की कहानी है. ये भी पढ़ें: कोचिंग को कहा बाय-बाय, सेल्फ स्टडी से अंकुर ने UPSC में मारी बाजी, बने CAPF असिस्टेंट कमांडेंट The post बाबूपुर का बेटा बना CAPF में असिस्टेंट कमांडेंट, आर्यन को UPSC में AIR 193 appeared first on Naya Vichar.

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खाना खाते ही लश्कर कमांडर कारी सईद की हुई मौत, मुंबई आतंकी हमले की साजिश में था शामिल

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक वरिष्ठ कमांडर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया है.पाक मीडिया के मुताबिक, कारी सईद अब्दुल अजीज नमाज के लिए क्यूबा मस्जिद पहुंचा था. मस्जिद के गेट पर पहुंचते ही वह अचानक गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई. उसकी मौत की सही वजह अभी सामने नहीं आई है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक बताया जा रहा है कि मस्जिद पहुंचने से पहले कारी सईद ने एक ऐसे रेस्टोरेंट में खाना खाया था, जहां वह आमतौर पर नहीं जाता था. इसके कुछ समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई. अचानक मौत की वजह से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मौत बीमारी, जहर या किसी अन्य कारण से हुई. मुंबई हमलों से भी जुड़ा है लश्कर लश्कर-ए-तैयबा वही आतंकी संगठन है, जिस पर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप हैं। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र ने 2005 में लश्कर को अल-कायदा और तालिबान से संबंधों के चलते प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल किया था। आतंकियों के परिवारों की मदद करता था विभाग कारी सईद अब्दुल अजीज लश्कर-ए-तैयबा के उस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहा था, जो जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ों के दौरान मारे गए आतंकियों के परिवारों की मदद करता था। इसी वजह से वह संगठन के महत्वपूर्ण लोगों में शामिल माना जाता था। ‘अनजान लोगों’ की हत्या का दावा उसकी मौत ऐसे समय हुई है जब लश्कर से जुड़े एक अन्य ऑपरेटिव रिजवान हनीफ ने सनसनीखेज दावा किया था. एक वीडियो में उसने कहा था कि पिछले तीन-चार वर्षों में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में संगठन के करीब 30 सदस्यों को ‘अनजान लोगों’ ने मार दिया. पेशावर से मुजफ्फराबाद तक मारे गए आतंकी हनीफ के मुताबिक, पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में लश्कर के कई सदस्य मारे गए. इन मौतों को लेकर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं, लेकिन यह पहली बार बताया गया कि लश्कर से जुड़े किसी व्यक्ति ने सार्वजनिक तौर पर ऐसी हत्याओं का दावा किया है. ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध ने खोली अमेरिकी हथियारों की पोल! पेंटागन ने कंपनियों को गोला बारूद तेजी से बनाने का दिया आदेश The post खाना खाते ही लश्कर कमांडर कारी सईद की हुई मौत, मुंबई आतंकी हमले की साजिश में था शामिल appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: छात्रों और सरकार की बैठक में जांच एजेंसी को लेकर गतिरोध, CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

रांची से अभिषेक आनंद और राजलक्ष्मी की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड में छात्र आंदोलन को लेकर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और राज्य प्रशासन के बीच चल रही बैठक में जांच एजेंसी के मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति बन गई है. छात्रों की मांग है कि TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए. वहीं, प्रशासन की ओर से मामले की जांच राज्य की CID से कराने की बात कही जा रही है. छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच जरूरी है. तीन घंटे से चल रही मंत्री-छात्र की बैठक छात्र प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के बीच यह बैठक तीन घंटे से अधिक समय से चल रही है. बैठक के अंदर से मिली जानकारी के मुताबिक, कई मुद्दों पर प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति बनने की स्थिति है, लेकिन जांच एजेंसी को लेकर मामला अटका हुआ है. इसी मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ने में सबसे बड़ी बाधा सामने आ रही है. TDPL की परीक्षाओं की CBI जांच की मांग छात्रों ने TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि TDPL का मुख्यालय लखनऊ में है, जबकि परीक्षा से जुड़ी प्रिंटिंग व्यवस्था अन्य स्थान पर है. ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और संभावित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी है. छात्रों का तर्क है कि मामले में अलग-अलग स्थानों और संस्थानों की भूमिका सामने आ सकती है. इसलिए वे चाहते हैं कि जांच किसी ऐसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए, जिस पर उन्हें भरोसा हो. इसी वजह से प्रतिनिधिमंडल बैठक में लगातार CBI जांच की मांग पर जोर दे रहा है. प्रशासन ने दिया CID जांच का भरोसा बैठक में प्रशासन की ओर से छात्रों को CID जांच का भरोसा दिया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि राज्य की जांच एजेंसी मामले की गंभीरता से जांच करेगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन की ओर से यह भरोसा दिए जाने के बावजूद छात्र अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. छात्रों का कहना है कि उन्हें जांच की प्रक्रिया के साथ-साथ उसकी विश्वसनीयता को लेकर भी आश्वासन चाहिए. इसी बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत लंबी खिंच रही है. JPSC-JSSC रिफॉर्म पर प्रशासन ने मानी छात्रों की मांग बैठक में JPSC और JSSC में सुधार को लेकर छात्रों की ओर से रखी गई मांगों पर प्रशासन ने सहमति जताई है. जानकारी के मुताबिक, परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी. इस कमेटी में IIT, XISS और ISM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी. इसके अलावा समिति में कुछ बुद्धिजीवियों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है. प्रशासन की योजना है कि यह समिति परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े सुधारों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. एक महीने में रिपोर्ट देगी कमेटी छात्र प्रतिनिधियों को दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित कमेटी को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर सौंपनी होगी. खास बात यह है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करने के दौरान छात्रों से भी विमर्श करेगी. इससे छात्रों को अपनी समस्याओं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सुझाव सीधे समिति के सामने रखने का अवसर मिलेगा. JPSC-JSSC परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्रों की ओर से लंबे समय से पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने की मांग की जा रही है. प्रशासन द्वारा इस मांग को स्वीकार किया जाना बैठक में अब तक सामने आई बड़ी सहमति मानी जा रही है. तीन घंटे बाद भी बैठक से नहीं निकला अंतिम समाधान हालांकि, बैठक तीन घंटे से अधिक समय से चलने के बावजूद अब तक कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है. सूत्रों के अनुसार, बैठक में रिफॉर्म से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति बन गई है, लेकिन जांच एजेंसी को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति अभी अलग-अलग है. छात्र प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ सदस्यों ने फोन के माध्यम से बैठक के अंदर हुई गतिविधियों की जानकारी दी है. उनके मुताबिक, फिलहाल बातचीत का मुख्य केंद्र TDPL परीक्षाओं की जांच को लेकर CBI बनाम CID का मुद्दा है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा CBI जांच पर फैसला बना सबसे बड़ा सवाल बैठक का सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यही है कि प्रशासन छात्रों की CBI जांच की मांग को स्वीकार करती है या नहीं. प्रशासन CID जांच के जरिए मामले को आगे बढ़ाने का भरोसा दे रही है, जबकि छात्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग पर कायम हैं. इस गतिरोध के कारण बैठक का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है. छात्रों का कहना है कि JPSC-JSSC सुधार को लेकर प्रशासन की सहमति स्वागत योग्य है, लेकिन परीक्षा संबंधी विवादों की जांच को लेकर स्पष्ट निर्णय भी जरूरी है. फिलहाल प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के बीच बातचीत जारी है. बैठक खत्म होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसी को लेकर कोई बीच का रास्ता निकलता है या छात्र अपनी CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने का निर्णय लेते हैं. इसे भी पढ़ें: छात्र आंदोलन पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- हमने चोरों को पकड़ ली है, छात्रों को मिलेगा न्याय The post JPSC Student Protest: छात्रों और प्रशासन की बैठक में जांच एजेंसी को लेकर गतिरोध, CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र appeared first on Naya Vichar.

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CWG 2026 के पदक विजेताओं से मिलेंगे पीएम मोदी, गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू बोलीं- ‘मैं बेहद उत्साहित हूं’

CWG 2026 Winners: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संडे को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों और हिंदुस्तानीय दल के सदस्यों से मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री खिलाड़ियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई देंगे और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाने के लिए उनकी उपलब्धियों की सराहना करेंगे. मुलाकात से पहले कई खिलाड़ियों ने पीएम मोदी से मिलने को लेकर अपनी खुशी जाहिर की. मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से मिलने के लिए काफी उत्साहित हैं, जबकि वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने भी इस मुलाकात को लेकर खुशी जताई. खिलाड़ियों का बढ़ता है मनोबल पैरा शॉट पुट में गोल्ड मेडल जीतने वाले सोमन राणा ने कहा, ‘मैं बहुत उत्साहित हूं क्योंकि हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला है. इस तरह का समर्थन मिलने से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है. दूसरे देशों के एथलीट यह सुनकर हैरान होते हैं कि हमें अपने देश और प्रधानमंत्री से इतना समर्थन मिलता है. यह हमारे लिए गर्व की बात है.’ बहुत अच्छा महसूस हो रहा है कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के 110 किग्रा से अधिक भार वर्ग में सिल्वर जीतने वाले वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कहा, ‘यह बहुत अच्छा महसूस हो रहा है कि हम सभी खिलाड़ी अपने प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे हैं. हमारे प्रधानमंत्री ने हमारे स्वागत के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया है और हम सभी इससे बहुत खुश हैं.’ वहीं डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली सीमा कालिरामन ने कहा, ‘मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर पाकर बहुत उत्साहित हूं. हर किसी का सपना होता है कि वह अपने प्रधानमंत्री से मिले और आज मुझे यह अवसर मिला है.’ Also Read: सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं… चोटिल खिलाड़ियों पर उठे सवालों पर बोले वीवीएस लक्ष्मण प्रधानमंत्री से छठी बार मिलूंगी हिंदुस्तानीय मुक्केबाज और ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने कहा, ‘बहुत अच्छा लग रहा है और मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए उत्साहित हूं. यह छठी बार होगा जब मुझे उनसे मिलने का अवसर मिलेगा.’ वहीं जूडो में सिल्वर मेडल जीतने वाली यामिनी मौर्या ने कहा, ‘मैं बहुत उत्साहित हूं और थोड़ी नर्वस भी हूं. मैं पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने जा रही हूं. अगर मुझे प्रधानमंत्री से बातचीत करने का मौका मिला तो मेरे मन में उनसे पूछने के लिए कुछ सवाल हैं.’ प्रधानमंत्री हमेशा हमारा समर्थन करते हैं गोल्ड मेडल जीतने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कहा, ‘मैं बेहद उत्साहित हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हमेशा हमारा समर्थन करते रहे हैं और हर इवेंट के बाद की तरह आज भी हम उनसे मिलने जा रहे हैं. आज सभी पदक विजेता प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे. सब कुछ अच्छा रहेगा.’ Also Read: CWG प्लेयर्स को मिला सम्मान, अरुंधति चौधरी को 1 करोड़ तो यशवीर सिंह को 30 लाख का इनाम पीएम ने ट्वीट कर दी थी बधाई पैरा एथलेटिक्स F57 शॉट पुट में सिल्वर मेडल जीतने वाले शुभम जुयाल ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि बातचीत किस बारे में होगी, लेकिन वह सभी एथलीटों के बारे में जानते हैं. चूंकि मैं सेना से भी हूं, इसलिए मुझे लगता है कि सेना या आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़ी कोई चर्चा हो सकती है. मेरी स्पर्धा के तुरंत बाद मोदी जी ने ट्वीट कर मुझे बधाई दी थी.’ हिंदुस्तान ने जीते थे 39 मेडल ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिंदुस्तान का प्रदर्शन शानदार रहा. हिंदुस्तानीय दल ने प्रतियोगिता में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज समेत कुल 39 पदक अपने नाम किए. इस प्रदर्शन के साथ हिंदुस्तान पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा. Also Read: SL vs IND: टेस्ट सीरीज से पहले हिंदुस्तान के लिए आई अच्छी समाचार, वॉर्म-अप मैच में बैटिंग करने उतरे शुभमन गिल The post CWG 2026 के पदक विजेताओं से मिलेंगे पीएम मोदी, गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू बोलीं- ‘मैं बेहद उत्साहित हूं’ appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के स्कूलों में AI, क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्पेशल कमिटी का गठन, पेपर लीक पर गुंडा एक्ट, सम्राट सरकार के 4 फैसले

Samrat Choudhary: पटना में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय चिंतन शिविर में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि स्कूलों में हर हाल में पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी. परीक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए AI का इस्तेमाल होगा. छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगी राज्य स्तरीय समिति पटना के अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का आयोजन किया गया. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की अध्यक्षता में हुए इस शिविर का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ऐसा विभाग है, जो पूरे समाज को दिशा देता है. प्रशासन का लक्ष्य बिहार के हर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करना है. इसके लिए राज्य स्तर पर एक विशेष समिति का गठन किया गया है. समिति का काम स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर करने के उपाय सुझाना होगा. प्रशासन का लक्ष्य हर स्कूल को उत्कृष्टता का केंद्र बनाना है. परीक्षा व्यवस्था में AI की होगी एंट्री प्रशासन ने परीक्षा प्रणाली में भी बड़े बदलाव की तैयारी की है. परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित की जाएगी. यह समिति बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की भी समीक्षा करेगी. छात्रों ने कितना याद किया, सिर्फ इतना ही नहीं देखा जाएगा. उनकी समझ, विश्लेषण क्षमता और विषय पर पकड़ का भी आकलन किया जाएगा. इसके लिए तकनीक और AI का इस्तेमाल करने के सुझाव दिए जाएंगे. छात्रों की समस्याओं के लिए बनेगा अलग पोर्टल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की घोषणा की है. इस पोर्टल पर विद्यार्थी स्कूल, कॉलेज, परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे. छात्र अपने सुझाव भी सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे. प्रशासन का दावा है कि इसका मकसद छात्रों को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है. खास बात यह होगी कि शिकायत सिर्फ दर्ज करके छोड़ नहीं दी जाएगी. उसके समाधान की निगरानी भी की जाएगी. 30 दिन में समाधान नहीं तो CM स्तर पर लगेगा सहयोग शिविर मुख्यमंत्री ने शिकायतों के समाधान की समयसीमा भी तय करने की बात कही है. अगर किसी छात्र की शिकायत पोर्टल पर दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं होता है, तो उसे मुख्यमंत्री स्तर पर लाया जाएगा. इसके लिए महीने में एक बार अलग सहयोग शिविर आयोजित करने की बात कही गई है. यहां उन मामलों की समीक्षा होगी, जिनका समाधान तय समयसीमा में नहीं हो पाया. इस व्यवस्था से अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोशिश होगी. स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों से बात करेंगे मंत्री और अधिकारी प्रशासन अब शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ दफ्तरों से चलाने के बजाय जमीन पर जाकर समझने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद और संबंधित अधिकारी स्कूल-कॉलेजों में जाएंगे. वहां छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत की जाएगी. युवाओं से मिलने वाले सुझावों और समस्याओं को ऑनलाइन पोर्टल पर भी दर्ज किया जाएगा. इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि स्कूल और कॉलेजों में छात्रों को वास्तव में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार पर भी जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं को शिक्षा, कौशल और अवसरों से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता है. प्रशासन का लक्ष्य ऐसी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिससे बिहार के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े. इसके लिए राज्य में 1001 मॉडल स्कूल विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रशासन का कहना है कि इन स्कूलों के जरिए बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की कोशिश की जाएगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पेपर लीक पर प्रशासन का सख्त रुख चिंतन शिविर के दौरान परीक्षा में पेपर लीक का मुद्दा भी उठा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि प्रशासन परीक्षा व्यवस्था को ‘लीकेज प्रूफ’ बनाने पर काम कर रही है. पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई और सजा की व्यवस्था की बात भी कही. मेहनत करने वाले छात्रों के हित में सख्ती मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को होता है. विद्यार्थी महीनों और कई बार वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं. ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठता है और छात्रों का भरोसा टूटता है. प्रशासन अब परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है. चार फैसलों से बदलने की तैयारी प्रशासन के फैसलों को देखें तो शिक्षा व्यवस्था में चार बड़े बदलावों पर फोकस किया गया है. पहला- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य स्तरीय समिति. दूसरा- परीक्षा सुधार के लिए अलग समिति और AI आधारित मूल्यांकन. तीसरा- छात्रों की समस्याओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल और 30 दिन की समयसीमा. चौथा- छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई. Also Read: फुलवरिया की गलियों में साइकिल चलाते दिखे तेज प्रताप, गाय का दूध दुहा और निकाला गन्ने का जूस, पिता लालू को लेकर कही दिल की बात The post बिहार के स्कूलों में AI, क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्पेशल कमिटी का गठन, पेपर लीक पर गुंडा एक्ट, सम्राट प्रशासन के 4 फैसले appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से संयम बरतने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दिए गए आश्वासन पर भरोसा रखने की अपील की है. राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री छात्रों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील हैं और उनके आंदोलन को लेकर चिंतित भी हैं. प्रशासन की ओर से समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है. सबको है मांगों पर आंदोलन करने का अधिकार: राज्यपाल राज्यपाल ने छात्रों से कहा कि उन्हें अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाना अधिक प्रभावी होगा. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को लेकर वह भी गंभीर हैं और जरूरत पड़ने पर छात्र सीधे उनसे मुलाकात कर अपनी बात रख सकते हैं. मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा करें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आंदोलनरत छात्रों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बातों पर भरोसा रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने छात्रों को न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है. ऐसे में छात्रों को प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन पर विश्वास रखना चाहिए. राज्यपाल के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के मामले को लेकर काफी संवेदनशील हैं. वह पूरे विषय को गंभीरता से देख रहे हैं और समस्या का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार करते हुए संयम बनाए रखें. छात्रों के आंदोलन को लेकर CM चिंतित राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्र आंदोलन को लेकर चिंतित हैं. प्रशासन इस विषय को हल्के में नहीं ले रही है. छात्रों की ओर से उठाई जा रही मांगों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन गंभीरता से विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और आपसी संवाद से निकाला जा सकता है. इसलिए छात्रों को अपनी बात मजबूती से रखने के साथ-साथ बातचीत के रास्ते को भी खुला रखना चाहिए. छात्र उग्र न हों, संयम बनाए रखें राज्यपाल ने आंदोलनरत छात्रों से उग्र नहीं होने की अपील की. उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थिति में ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे समस्या और जटिल हो. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. प्रशासन और प्रशासन उनके मुद्दों को सुन रहे हैं. ऐसे में संयम के साथ आगे बढ़ना ही उचित रास्ता होगा. राज्यपाल के संदेश में संवाद पर विशेष जोर रहा. उन्होंने छात्रों से कहा कि यदि उन्हें लगता है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, तो वे सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर अपनी बात रख सकते हैं. सीधे मुख्यमंत्री से मिलने की सलाह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने छात्रों को सुझाव दिया कि यदि उन्हें प्रशासन की कार्रवाई या बातचीत से संतुष्टि नहीं मिलती है, तो वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात करें. उन्होंने कहा कि अपनी समस्याओं और मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखना समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. राज्यपाल ने कहा कि बातचीत के जरिए कई जटिल समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद बना रहना जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात समझ सकें और किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रहें, लेकिन समाधान के लिए बातचीत का रास्ता बंद न करें. ‘मैं छात्रों के साथ हूं’ राज्यपाल ने आंदोलनरत छात्रों को अपने समर्थन और सहयोग का भरोसा भी दिया. उन्होंने कहा कि वह छात्रों की समस्याओं को समझना चाहते हैं और उनके लिए उपलब्ध हैं. छात्र जब चाहें उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रख सकते हैं. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी बात सुनी जाएगी. राज्यपाल का यह संदेश आंदोलनरत छात्रों के लिए एक तरह से संवाद का वैकल्पिक रास्ता भी खोलता है. हालांकि, छात्रों की प्रमुख मांगों का समाधान प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर ही निर्भर करेगा. संवाद से समाधान पर राज्यपाल का जोर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के संदेश का मुख्य फोकस छात्रों से संयम बनाए रखने और संवाद के जरिए समस्या का समाधान निकालने पर रहा. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की संवेदनशीलता और छात्रों की समस्याओं के प्रति उनकी चिंता का उल्लेख करते हुए आंदोलनरत युवाओं से भरोसा बनाए रखने को कहा. राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि छात्र अपनी बात रखने के लिए उनके पास भी आ सकते हैं. वहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने का रास्ता भी सुझाया. इसे भी पढ़ें: छात्र आंदोलन पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- हमने चोरों को पकड़ ली है, छात्रों को मिलेगा न्याय राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने छात्रों को दिया न्याय का भरोसा झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों की ओर से छात्रों को न्याय और समाधान का भरोसा दिया गया है. अब छात्रों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी. आश्वासन अपनी जगह है, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए असली सवाल यही रहेगा कि उनकी मांगों पर प्रशासन कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता के साथ ठोस निर्णय लेती है. आखिर लोकतंत्र में संवाद जरूरी है, लेकिन संवाद का अंतिम पड़ाव कार्रवाई ही होता है. इसे भी पढ़ें: World Indigenous Day: जल-जंगल-जमीन के संरक्षण को लेकर छात्रों ने निकाली जागरूकता रैली The post JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा appeared first on Naya Vichar.

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