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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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“अमेरिका में नहीं चाहिए 20 साल का तनाव”: भारतीय महिला का वीडियो वायरल, छिड़ी US vs Germany की बहस

सोशल मीडिया पर अपने जर्मनी के जीवन से जुड़े वीडियो साझा करने वाली आकांक्षा ने कहा, “2 साल अमेरिका में रहने के बाद मुझे समझ आ गया कि मुझे अगले 20 साल वहां क्यों नहीं रहना. यह जानना बहुत जरूरी है कि आपको जिंदगी में क्या चाहिए, और मुझे शांति चाहिए.” उन्होंने कहा कि वह अपनी पूरी जिंदगी गाड़ी के अंदर बिताने, पेट्रोल और इंश्योरेंस के खर्चों की चिंता करने में नहीं निकालना चाहती थीं. अपने वीडियो में पेड़-पौधों से घिरी सड़कें और शांत माहौल दिखाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की प्रकृति से भरी और सहज जीवनशैली पसंद है. View on Instagram वीजा की अनिश्चितता और स्थायी निवास आकांक्षा ने अमेरिका छोड़ने का सबसे बड़ा कारण वीजा की अनिश्चितता को बताया. उन्होंने कहा, “मुझे वीजा का तनाव नहीं चाहिए. मैं यह सोचते हुए समय नहीं बिताना चाहती कि मेरा वीजा कब तक मान्य है.” जर्मनी के नियमों की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया, “मुझे जर्मनी आए सिर्फ तीन साल हुए हैं और इस साल मुझे यहां का पीआर (Permanent Residency) मिल जाएगा. यह जीवन में एक बहुत बड़ा सुकून है.” उन्होंने सलाह दी कि विदेश जाने का फैसला करने से पहले लोगों को यह जरूर सोच लेना चाहिए कि वे वास्तव में अपनी जिंदगी से क्या चाहते हैं. सोशल मीडिया पर बंटी राय आकांक्षा के इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर अमेरिका बनाम जर्मनी की जीवनशैली को लेकर बहस छिड़ गई. एक यूजर ने आकांक्षा का समर्थन करते हुए लिखा, “अगर आपको कम भीड़-भाड़, शांति और खूबसूरत कुदरत पसंद है, तो जर्मनी आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह है.” वहीं, एक अन्य यूजर ने अमेरिका का पक्ष लेते हुए लिखा, “आपकी बात का सम्मान है, लेकिन हिंदुस्तानीयों के लिए अमेरिकी जिंदगी यूरोप से बेहतर है. यूरोप में मेरे दोस्त मुझसे आधी कमाई करते हैं और 40% तक टैक्स देते हैं. जर्मनी में भाषा की चुनौती और घर मिलने में काफी परेशानी होती है. अमेरिका कोई यूटोपिया नहीं है, लेकिन वहां रफ्तार और अवसर ज्यादा हैं. जो लोग संघर्ष या भागदौड़ नहीं करना चाहते, वे इससे डरते हैं.” ये भी पढ़ें: 9 अगस्त की हिंदुस्तान की वो डील, जिसकी बदौलत अमेरिका को पटका और बदल दिया दुनिया का नक्शा ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध ने खोली अमेरिकी हथियारों की पोल! पेंटागन ने कंपनियों को गोला बारूद तेजी से बनाने का दिया आदेश The post “अमेरिका में नहीं चाहिए 20 साल का तनाव”: हिंदुस्तानीय स्त्री का वीडियो वायरल, छिड़ी US vs Germany की बहस appeared first on Naya Vichar.

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पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे वी. कामेश्वर राव, जानिए कौन हैं और कैसा रहा उनका सफर

Patna High Court New Chief Justice: पटना हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिल सकता है. दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र प्रशासन से उनके नाम की अनुशंसा की है. केंद्र की मंजूरी के बाद उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा. जस्टिस सुधीर सिंह हैं कार्यवाहक चीफ जस्टिस फिलहाल जस्टिस सुधीर सिंह पटना हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं. जस्टिस मीनाक्षी मदन राय के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी. जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने 5 जून 2026 को पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी. उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा. 11 जुलाई 2026 को वह सेवानिवृत्त हो गईं. इसके बाद जस्टिस सुधीर सिंह को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी मिली. कौन हैं जस्टिस वी. कामेश्वर राव? जस्टिस वी. कामेश्वर राव का जन्म 7 अगस्त 1965 को हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1987 में भूगोल में बीए ऑनर्स किया. इसके बाद 1990 में एलएलबी की डिग्री हासिल की. मार्च 1991 में उन्होंने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में वकालत के लिए अपना नामांकन कराया. करीब दो दशक तक वकालत करने के बाद जनवरी 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया. इसके करीब तीन साल बाद उनके न्यायिक करियर की नई शुरुआत हुई. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 2013 में बने दिल्ली हाईकोर्ट के जज 17 अप्रैल 2013 को जस्टिस वी. कामेश्वर राव को दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. 18 मार्च 2015 को वह स्थायी न्यायाधीश बने. इसके बाद उनके न्यायिक करियर में कई महत्वपूर्ण पड़ाव आए. 1 जून 2024 को उनका तबादला कर्नाटक हाईकोर्ट किया गया. 30 मई 2025 को उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. हालांकि, इसके कुछ समय बाद ही वह फिर दिल्ली हाईकोर्ट लौट आए. 21 जुलाई 2025 को उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर दोबारा कार्यभार संभाला. सेवा और श्रम कानून के विशेषज्ञ जस्टिस वी. कामेश्वर राव को सेवा कानून, श्रम कानून, संविधान और प्रशासनिक कानून का जानकार माना जाता है. अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके अनुभव को देखते हुए पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए उनके नाम की सिफारिश की है. अगर केंद्र प्रशासन कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देती है, तो जस्टिस वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे. Also Read: जब मल्लिका शेरावत ने पहनाया तेज प्रताप को कोट, सूट-बूट में दिखा लालू के लाल का नया अवतार, बोले- कुछ बहुत बड़ा आने वाला है… The post पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे वी. कामेश्वर राव, जानिए कौन हैं और कैसा रहा उनका सफर appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: छात्रों से मैराथन बैठक बेनतीजा, सरकार ने आंदोलन वापस लेने की अपील की

रांची से राजलक्ष्मी की रिपोर्ट JPSC Student Protest: आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिनों तक चली मैराथन बैठक के बाद भी सहमति नहीं बन सकी. बैठक बेनतीजा रहने के बाद प्रशासन की ओर से डेलिगेशन में शामिल मंत्रियों ने सूचना भवन में प्रेस वार्ता की. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को रद्द करने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने छात्रों को समझाने और उनकी मांगों पर समाधान निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन छात्र प्रतिनिधि अब भी संतुष्ट नहीं हैं. तीन बिंदुओं में जांच की प्रक्रिया मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि प्रशासन ने पूरे मामले को तीन प्रमुख बिंदुओं में बांटकर समाधान निकालने का प्रयास किया. 14वीं JPSC परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में प्रशासन पहले ही CID से जांच करा रही है. इसके साथ ही JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों से इस्तीफा भी लिया गया है. उन्होंने कहा कि मामले के वित्तीय पहलुओं को देखते हुए प्रशासन ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को भी पत्र भेजा है, ताकि जांच में एजेंसी की भूमिका सुनिश्चित की जा सके. प्रशासन का कहना है कि अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की जांच गंभीरता से की जा रही है. 14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षा पर रद्द करने की तैयारी मंत्री ने बताया कि प्रशासन की ओर से 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और बैकलॉग परीक्षा को रद्द करने की बात भी रखी गई थी. प्रशासन ने छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए इन परीक्षाओं के संबंध में सकारात्मक रुख अपनाया है. हालांकि, छात्रों की ओर से JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है. इसी मुद्दे पर प्रशासन और छात्रों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है. JSSC CGL रद्द करना संभव नहीं : प्रशासन सुदिव्य सोनू ने कहा कि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करना प्रशासन के लिए फिलहाल संभव नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि यह परीक्षा न्यायिक प्रक्रिया के बाद आयोजित हुई है. परीक्षा से जुड़े मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन किया गया है और इसी कारण प्रशासन अपने स्तर से परीक्षा रद्द करने का निर्णय नहीं ले सकती. प्रशासन ने छात्रों के सामने सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से समीक्षा की जा सके. हालांकि, मंत्री के मुताबिक छात्र इस प्रस्ताव पर भी सहमत नहीं हुए. CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र बैठक के दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार यानी रिफॉर्म को लेकर भी कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. प्रशासन ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए सुधारों पर सहमति जताई है. हालांकि, छात्रों की दो प्रमुख मांगें अब भी बैठक में गतिरोध का कारण बनी हुई हैं. इनमें JSSC CGL मामले की CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग शामिल है. मंत्री ने कहा कि छात्र इन दोनों मुद्दों पर लगातार अड़े हुए हैं. प्रशासन की ओर से समझाने के बावजूद इस पर सहमति नहीं बन सकी. न्यायालय के आदेश पर प्रशासन करेगी कार्रवाई मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यदि JSSC CGL परीक्षा या जांच से जुड़े मामले में न्यायालय की ओर से कोई आदेश आता है, तो प्रशासन उस पर भी कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि प्रशासन न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है और अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि प्रशासन छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं कर रही है. तीन दिनों तक चली बैठक इसी बात का प्रमाण है कि प्रशासन समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. आंदोलन खत्म कर संवाद का रास्ता अपनाने की अपील प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने आंदोलनरत छात्रों और उनके परिजनों से विशेष अपील की. उन्होंने कहा कि छात्र अपना आंदोलन वापस लें और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को रद्द कर दें. प्रशासन ने छात्रों की कई मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया है, इसलिए अब आंदोलन जारी रखने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. सुदिव्य सोनू ने कहा कि प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के रास्ते आगे भी खुले हुए हैं. उन्होंने कहा कि संवाद के जरिए समस्या का समाधान निकालना आंदोलन के रास्ते से कहीं बेहतर है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्रों और प्रशासन की बैठक में जांच एजेंसी को लेकर गतिरोध, CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र जिद छोड़ बातचीत जारी रखें छात्र: सुदिव्य मंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे जिद छोड़कर प्रशासन के साथ बातचीत जारी रखें. हालांकि, छात्रों की ओर से CBI जांच और JSSC CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर कायम रहने के कारण आंदोलन का अगला रुख अब महत्वपूर्ण हो गया है. प्रशासन की अपील के बावजूद यदि छात्र विधानसभा घेराव पर आगे बढ़ते हैं, तो 10 अगस्त को राजधानी में आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: प्रशासन-छात्र के बीच 5 घंटे की माथापच्ची में भी नहीं निकला समाधान, 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव तय The post JPSC Student Protest: छात्रों से मैराथन बैठक बेनतीजा, प्रशासन ने आंदोलन वापस लेने की अपील की appeared first on Naya Vichar.

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₹75,000 के बजट में सबसे धांसू 65-इंच टीवी! खरीदने से पहले जान लें इसकी परफॉर्मेंस

हिंदुस्तानीय होम एंटरटेनमेंट बाजार में बड़ी स्क्रीन वाले स्मार्ट टीवी की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अक्सर ग्राहक ओलेड (OLED) डिस्प्ले की भारी-भरकम कीमत देखकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं. ऐसे समय में शाओमी ने हिंदुस्तानीय उपभोक्ताओं के लिए ‘Xiaomi S Mini LED TV’ सीरीज पेश की है, जो ओलेड जैसी प्रीमियम पिक्चर क्वाॅलिटी को काफी किफायती दाम में घर लाने का दावा करती है. करीब 75,000 रुपये के बजट में आने वाले इसके 65 इंच वेरिएंट को दो हफ्ते तक टेस्ट करने के बाद यह साफ हो जाता है कि कंपनी ने सिर्फ कागजी दावों के बजाय पिक्चर, साउंड और ओवरऑल परफॉर्मेंस पर बारीक काम किया है. अगर आप बिना एक लाख रुपये लुटाए अपने लिविंग रूम को सिनेमाघर बनाना चाहते हैं, तो यह रिव्यू आपके बड़े काम आ सकता है. प्रीमियम डिजाइन और बेहतर बिल्ड क्वाॅलिटी पहली नजर में शाओमी का यह नया टीवी बेहद स्लीक और मॉडर्न नजर आता है. इसके चारों तरफ दिए गए बेहद पतले बेजल्स स्क्रीन को एक बेजेल-लेस और इमर्सिव लुक देते हैं. चाहे आप इसे टेबल पर रखें या दीवार पर माउंट करें, इसका अपीयरेंस आपके रूम को प्रीमियम फील देता है. हालांकि, दीवार पर लगाने के दौरान कंपनी की आफ्टर-सेल सर्विस में थोड़ी देरी महसूस हो सकती है, जिस पर शाओमी को सुधार करने की जरूरत है. इसके बावजूद, बैक पैनल पर प्लास्टिक का इस्तेमाल होने के बाद भी इसकी फिनिशिंग मजबूत और टिकाऊ महसूस होती है. Mini LED टेक्नोलॉजी और लोकल डिमिंग का जादू इस स्मार्ट टीवी की सबसे बड़ी यूएसपी इसका QD Mini LED डिस्प्ले है, जो 1200 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है. 65 इंच वाले इस मॉडल में शाओमी ने 384 लोकल डिमिंग जोन्स दिए हैं, जिनकी मदद से स्क्रीन के डार्क और ब्राइट एरिया में शानदार कंट्रास्ट देखने को मिलता है. डॉल्बी विजन (Dolby Vision) और HDR10+ कंटेंट देखते समय कलर्स बिल्कुल नैचुरल लगते हैं और स्किन टोन एकदम सटीक दिखाई देती है. डार्क रूम में मूवीज देखते वक्त इसके डीप ब्लैक्स बिल्कुल किसी प्रीमियम OLED पैनल का अनुभव कराते हैं, जिसे सामान्य LED स्क्रीन पर पाना नामुमकिन है. दमदार 34W साउंड और स्मूद गूगल टीवी इंटरफेस आमतौर पर पतले टीवी में खराब साउंड क्वाॅलिटी की शिकायत रहती है, लेकिन शाओमी ने इसमें 34W का क्वाॅड-स्पीकर सेटअप दिया है. Dolby Audio और DTS:X टेक्नोलॉजी से लैस इसका इन-बिल्ट ऑडियो इतना तेज और साफ है कि किसी छोटे या मध्यम आकार के कमरे में अलग से साउंडबार लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह Google TV के साथ PatchWall इंटरफेस पर चलता है. 2GB रैम और 32GB स्टोरेज के साथ इसका क्वाॅड-कोर प्रॉसेसर सभी लोकप्रिय ओटीटी (OTT) ऐप्स को बिना किसी अड़चन के तेजी से रन करता है. पुराने अंदाज का रिमोट और फाइनल वर्डिक्ट हर डिवाइस की तरह इसमें भी कुछ कमियां देखने को मिलती हैं, जिनमें सबसे प्रमुख इसका रिमोट कंट्रोल है. पुराने समय के भारी-भरकम और ढेरों बटन वाले रिमोट की तुलना में शाओमी के पिछले स्लीक रिमोट ज्यादा बेहतर थे, हालांकि इसकी कनेक्टिविटी और रिस्पॉन्स टाइम में कोई शिकायत नहीं है. अगर आपका बजट एक लाख रुपये से कम है और आप 65 इंच की विशाल स्क्रीन पर OLED जैसी विजुअल क्वाॅलिटी का मजा लेना चाहते हैं, तो 75 हजार रुपये के अंदर Xiaomi S Mini LED TV एक वैल्यू-फॉर-मनी डील साबित होता है. ये भी पढ़ें: Xiaomi Mijia की हिंदुस्तान में एंट्री, अब स्मार्टफोन के बाद घर-घर पहुंचेगा Smart Home Ecosystem ये भी पढ़ें: Sony ने लॉन्च किया हिंदुस्तान का सबसे बड़ा 115-इंच BRAVIA 9II, कीमत में आ जाए नई SUV The post ₹75,000 के बजट में सबसे धांसू 65-इंच टीवी! खरीदने से पहले जान लें इसकी परफॉर्मेंस appeared first on Naya Vichar.

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PoK मामले पर शहबाज सरकार का यू-टर्न: प्रदर्शनकारियों को बताया देशभक्त, बातचीत का दिया न्योता

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले करीब दो महीनों से जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच शहबाज शरीफ प्रशासन का रुख बदलता नजर आ रहा है. जिस आंदोलन को कुछ समय पहले तक प्रशासन कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बता रही थी. अब उसी से जुड़े प्रदर्शनकारियों को ‘देशभक्त नागरिक’ कहा जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पाक प्रशासन ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की पेशकश भी की है. राणा सनाउल्लाह ने आंदोलनकारियों को बताया देशभक्त पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक चुनावी सभा में कहा कि JAAC से जुड़े करीब 99 प्रतिशत लोग देशभक्त नागरिक हैं. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी PML-N PoK में दो-तिहाई बहुमत के साथ प्रशासन बनाती है, तो प्रशासन की पहली प्राथमिकताओं में JAAC प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करना और उनकी मांगों का समाधान निकालना शामिल होगा. JAAC के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में छात्र, व्यापारी, वकील, ट्रांसपोर्टर और दूसरे सामाजिक समूह शामिल हैं. संगठन की प्रमुख मांग PoK विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना है. JAAC का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद का सत्ता प्रतिष्ठान PoK की नेतृत्व में प्रभाव बनाए रखता है और अपनी पसंद की प्रशासन बनाने की कोशिश करता है. पहले आंदोलन को बताया जा रहा था सुरक्षा के लिए खतरा पाक प्रशासन का यह बयान उसके पुराने रुख से बिल्कुल अलग माना जा रहा है. इससे पहले पाकिस्तान प्रशासन और PML-N की ओर से दावा किया जाता रहा था कि आंदोलनकारियों के बीच प्रतिबंधित संगठनों के तत्व मौजूद हैं. इसी आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की गई थी. अब प्रशासन का बातचीत और सम्मान का रुख नेतृत्वक दबाव का संकेत माना जा रहा है. मौतों के आंकड़ों पर प्रशासन और JAAC आमने-सामने JAAC का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और जून से अब तक मृतकों की संख्या करीब 400 तक पहुंच गई है. हालांकि, पाकिस्तान प्रशासन इन आंकड़ों को खारिज करती रही है और आरोप लगाया है कि आंदोलनकारी मौतों के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता PoK में बिगड़ते हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता सामने आई है. 7 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर चिंता जताई और घटनाओं की निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही तय करने की मांग की. इससे पाकिस्तान प्रशासन पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव का भी संकेत मिलता है. ये भी पढ़ें: खाना खाते ही लश्कर कमांडर कारी सईद की हुई मौत, मुंबई आतंकी हमले की साजिश में था शामिल ये भी पढ़ें: अमेरिका-इजराइल की घेराबंदी पर भड़के ईरानी राष्ट्रपति, बोले- खाड़ी मुल्कों को उकसाया जा रहा The post PoK मामले पर शहबाज प्रशासन का यू-टर्न: प्रदर्शनकारियों को बताया देशभक्त, बातचीत का दिया न्योता appeared first on Naya Vichar.

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CWG के पदक विजेताओं से मिले PM मोदी, कहा- जो खेलेगा, वो खिलेगा, हमेशा भारत के लिए चीयर करें

PM Modi with CWG Medallists : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संडे को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG) में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी और उनकी मेहनत व समर्पण की सराहना की. प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए कहा, ‘जो स्पोर्ट्सेगा, वो खिलेगा. हमेशा हिंदुस्तान के लिए चीयर करें.’ देश का परचम आगे भी लहराए प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदुस्तानीय दल के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स समेत कई स्पोर्ट्सों में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने खिलाड़ियों से अपनी सफलता को अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम आगे भी लहराने का आह्वान किया. युवाओं को स्पोर्ट्सों से जोड़ने पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया. उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्सों में सफलता केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश के बच्चों और युवाओं को स्पोर्ट्सों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं और ‘Cheer for Bharat’ के संदेश के साथ हिंदुस्तानीय स्पोर्ट्स प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ाने पर जोर दिया. Also Read: वार्म-अप मैच के आखिरी ओवर में 3 छक्के जड़कर सिराज ने दिलाई हिंदुस्तान को जीत, श्रीलंका XI को 6 विकेट से हराया पीएम से मिलना गर्व का पल स्त्री 51 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज साक्षी चौधरी भी प्रधानमंत्री से मिलने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहीं. मुलाकात के बाद साक्षी ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सभी पदक विजेताओं के लिए प्रधानमंत्री से मिलना गर्व का पल रहा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेहद सहज और विनम्र हैं और खिलाड़ियों ने उनके साथ मुलाकात का काफी आनंद लिया. 39 पदकों के साथ शानदार अभियान ग्लासगो में हिंदुस्तान ने कुल 39 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 13 स्वर्ण शामिल रहे. हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पोर्ट्सों में अपनी प्रतिभा और मजबूत तैयारी का परिचय दिया. बॉक्सिंग में हिंदुस्तान का प्रदर्शन विशेष रूप से शानदार रहा और हिंदुस्तानीय मुक्केबाजों ने रिकॉर्ड 10 पदक जीते. Also Read: कोहली के प्रोफेशनलिज्म के मुरीद हुए वीवीएस लक्ष्मण, बोले- ‘वह हर बार अपने लिए ऊंचे मानक तय करते हैं’ The post CWG के पदक विजेताओं से मिले PM मोदी, कहा- जो स्पोर्ट्सेगा, वो खिलेगा, हमेशा हिंदुस्तान के लिए चीयर करें appeared first on Naya Vichar.

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JPSC के 3 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, CID ने पहले ही भेजा था पूछताछ का नोटिस

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीनों सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वालों में डॉ अजिता भट्टाचार्य, डॉ अनिमा हांसदा और डॉ जमाल अहमद शामिल हैं. बताया जा रहा है कि तीनों सदस्यों का कार्यकाल अब महज एक महीने का ही शेष बचा था. जेपीएससी में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच तीनों सदस्यों के इस्तीफे से आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गयी है. CID ने पूछताछ के लिए भेजा था नोटिस जानकारी के अनुसार, CID की ओर से पूर्व में ही तीनों JPSC सदस्यों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया था. हालांकि, इस्तीफे के बाद अब इस मामले में जांच की दिशा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. CID किन बिंदुओं पर तीनों सदस्यों से पूछताछ करना चाहती थी, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है. ये भी पढ़ें… JPSC-JSSC विवाद: धरनास्थल पहुंचे संजय सेठ और आदित्य साहू, छात्रों की मांगों पर प्रशासन को घेरा तीनों का कार्यकाल एक महीने ही बचा था तीनों सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने में करीब एक महीने का समय ही बचा था. ऐसे समय में एक साथ तीन सदस्यों के इस्तीफे को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. आयोग में सदस्यों की भूमिका नियुक्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होती है. ये भी पढ़ें… छात्र आंदोलन पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- न्याय मिलेगा, दोषियों को कठोर सजा मिलेगी छात्र आंदोलन के बीच इस्तीफे से बढ़ी हलचल JPSC-JSSC में कथित भ्रष्टाचार और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है. इसी बीच तीनों सदस्यों के इस्तीफे से आंदोलन के बीच नेतृत्वक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गयी है. छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और JPSC की ओर से तीनों सदस्यों के इस्तीफे को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी दी जाती है और CID की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है. The post JPSC के 3 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, CID ने पहले ही भेजा था पूछताछ का नोटिस appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: सरकार-छात्र के दूसरे दौर की वार्ता में भी नहीं बनी बात, 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव तय

रांची से नवीन शर्मा, अभिषेक आनंद और राजलक्ष्मी की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य प्रशासन के बीच रविवार को दूसरी दौर की वार्ता हुई. करीब दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रशासन की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98% मांगों पर सहमति बन गई है. वहीं, छात्रों का कहना है कि 50 फीसदी से अधिक मांगों को प्रशासन ने स्वीकार किया है, लेकिन कई प्रमुख और निर्णायक मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है. बैठक के बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया. छात्र प्रतिनिधियों ने ऐलान किया कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा. ऐसे में दूसरी वार्ता के बाद भी आंदोलन का समाधान नहीं निकल सका है. 14वीं JPSC परीक्षा की जांच पर प्रशासन ने लिया फैसला 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर बैठक में प्रशासन ने जांच कराने पर सहमति जताई. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के मुताबिक, मामले की जांच ED और CID करेगी. प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि CID को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने के लिए कहा जाएगा. छात्रों की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग भी रखी गई. इस पर प्रशासन ने तत्काल परीक्षा रद्द करने के बजाय इस पर विचार करने की बात कही है. यानी जांच के मुद्दे पर प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति की स्थिति बनी, लेकिन परीक्षा रद्द करने का फैसला अभी लंबित है. JSSC CGL पर नहीं बनी सहमति, CBI जांच पर अड़े छात्र JSSC CGL परीक्षा को लेकर वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण गतिरोध सामने आया. छात्रों ने इस मामले की CBI जांच कराने की मांग रखी, जबकि प्रशासन की ओर से न्यायिक जांच की बात कही गई. प्रशासन का तर्क है कि CGL परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोजित हुई है. इसलिए इसे सीधे रद्द नहीं किया जा सकता. वहीं, छात्र परीक्षा की प्रक्रिया और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग पर कायम हैं. यही मुद्दा बैठक के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच असहमति का प्रमुख कारण बना रहा. छात्रों का कहना है कि केवल न्यायिक जांच का आश्वासन उनकी मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है और वे CBI जांच चाहते हैं. TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग पर गतिरोध TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर भी प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन सकी. छात्रों ने TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग रखी है. छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर इन परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है. वहीं, प्रशासन की ओर से सभी परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति नहीं दी गई है. TDPL को लेकर छात्रों की मांग और प्रशासन के रुख में अंतर के कारण यह मुद्दा भी वार्ता में लंबित रहा. छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा. परीक्षा व्यवस्था में रिफॉर्म पर प्रशासन-छात्र में सहमति बैठक में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार यानी रिफॉर्म को लेकर प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति बनी है. छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC और JSSC की परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए संस्थागत सुधार शामिल हैं. प्रशासन की ओर से पहले ही संकेत दिया गया था कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जाएगी. इसमें IIT, XISS और ISM जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बुद्धिजीवियों को भी शामिल करने की बात कही गई है. प्रस्तावित कमेटी छात्रों से भी विमर्श करेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की बात कही गई है. इस मुद्दे पर प्रशासन की सहमति को वार्ता में बड़ी प्रगति माना जा रहा है. हालांकि छात्रों के लिए परीक्षा रद्द करने और जांच एजेंसी जैसे मुद्दे अभी ज्यादा महत्वपूर्ण बने हुए हैं. प्रशासन का दावा, 98 फीसदी मांगें मानीं बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि प्रशासन ने छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि प्रशासन छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और आंदोलन खत्म कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. प्रशासन की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वार्ता के दौरान अधिकतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया है. लेकिन छात्रों के आकलन में तस्वीर अलग है. छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी 50 फीसदी से अधिक मांगों पर सहमति बनी है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अभी भी लंबित हैं. इस तरह दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है. प्रशासन जहां लगभग पूरी मांगें मानने की बात कर रही है, वहीं छात्र इसे आंदोलन समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं मान रहे हैं. प्रमुख मुद्दों पर फैसला नहीं होने से छात्र नाराज छात्रों के मुताबिक 14वीं JPSC की परीक्षा रद्द करने, JSSC CGL में CBI जांच और TDPL की सभी परीक्षाओं को रद्द करने जैसे मुद्दे अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं. यही वे मुद्दे हैं जिन्हें छात्र आंदोलन के केंद्र में मान रहे हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर सहमति अपनी जगह है, लेकिन पुराने मामलों में जिम्मेदारी तय करना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना भी जरूरी है. जब तक इन मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, आंदोलन खत्म करना संभव नहीं है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा 10 अगस्त को विधानसभा घेराव दूसरी दौर की वार्ता के बाद भी अंतिम सहमति नहीं बनने पर छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है. छात्र प्रतिनिधियों ने घोषणा की है कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा. सोमवार को होने वाले विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी रांची में प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी. बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की संभावना के बीच सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल, प्रशासन और छात्रों के बीच

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‘छात्रों की बात… छात्रों के साथ’, सीएम हेमंत सोरेन ने युवाओं से मांगे परीक्षा सुधार के सुझाव

रांची: JPSC-JSSC परीक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री ने झारखंड के युवाओं से संवाद और सुझाव देने की अपील की है. मुख्यमंत्री ने ‘छात्रों की बात – छात्रों के साथ’ अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि संवाद से ही सुधार आते हैं और छात्रों की भागीदारी के बिना यह संवाद अधूरा है. उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं के सपने प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई छात्र जब वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है, तो उसके साथ केवल उसका भविष्य नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं. ऐसे में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, निष्पक्ष, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाये कदम मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली बार प्रशासन ने JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई नियमावली तैयार की है. परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था भी लागू की गयी है. उन्होंने कहा कि यह कानून झारखंड के युवाओं के भविष्य की रक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर देश के कई राज्यों के सामने चुनौतियां हैं. ऐसे समय में झारखंड का प्रयास केवल समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि समाधान का रास्ता तैयार करना है. ये भी पढ़ें… JPSC-JSSC विवाद: धरनास्थल पहुंचे संजय सेठ और आदित्य साहू, छात्रों की मांगों पर प्रशासन को घेरा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का दावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन का प्रयास झारखंड के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार और अवसर उपलब्ध कराना है. इसी उद्देश्य से नियुक्ति प्रक्रियाओं में कई महत्वपूर्ण सुधार किये गये हैं. झारखंडी फर्स्ट की भावना के साथ स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा और उनके लिए अवसरों का विस्तार करने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि 25 वर्ष का झारखंड अब विकास के नये चरण में प्रवेश कर रहा है. यह केवल प्रशासन की यात्रा नहीं, बल्कि सभी झारखंडवासियों की साझा यात्रा है और इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. हर जिले और कॉलेज से मांगे सुझाव मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना चाहती है. इसके लिए छात्रों को परिवर्तन का महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जा रहा है. उन्होंने झारखंड के प्रत्येक जिले, प्रखंड, कॉलेज, विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान और छात्र-छात्राओं से सुझाव देने की अपील की. उन्होंने छात्रों से पूछा कि परीक्षा प्रणाली में उन्हें कौन-कौन सी कमियां दिखाई देती हैं, बेहतर व्यवस्था के लिए उनके पास क्या सुझाव हैं, उन्होंने किन समस्याओं का सामना किया है और उनके पास कोई नया समाधान है तो उसे प्रशासन के साथ साझा करें. ये भी पढ़ें… छात्र आंदोलन पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- न्याय मिलेगा, दोषियों को कठोर सजा मिलेगी विशेषज्ञ करेंगे सुझावों का परीक्षण मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की ओर से प्राप्त प्रत्येक सुझाव का अध्ययन किया जायेगा. विशेषज्ञों के माध्यम से सुझावों का परीक्षण कराया जायेगा और जहां संभव होगा, उन्हें नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तय समय सीमा के भीतर लागू करने का प्रयास किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा सुधार का विषय नहीं है, बल्कि झारखंड के युवाओं के विश्वास, लाखों परिवारों के सपनों और राज्य के भविष्य से जुड़ा विषय है. पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं सुझाव मुख्यमंत्री ने युवाओं से ‘छात्रों की बात – छात्रों के साथ’ जनभागीदारी अभियान का हिस्सा बनने और अपने सुझाव ऑनलाइन दर्ज करने की अपील की है. इसके लिए प्रशासन ने samvad.jharkhand.gov.in पोर्टल उपलब्ध कराया है. मुख्यमंत्री ने युवाओं से ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाने में भागीदारी की अपील की, जिस पर हर छात्र गर्व और भरोसा कर सके. The post ‘छात्रों की बात… छात्रों के साथ’, सीएम हेमंत सोरेन ने युवाओं से मांगे परीक्षा सुधार के सुझाव appeared first on Naya Vichar.

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PHOTOS: ममता बनर्जी की कार को चारों ओर से घेरकर किया गया हमला, शांत बैठी रहीं तृणमूल सुप्रीमो

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार पर कांचरापाड़ा में भीड़ ने हमला कर दिया. इस दौरान कार पर जूते-चप्पल, ईंट-पत्थर और कीचड़ फेंके गये. घटना के बाद सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाये गये. The post PHOTOS: ममता बनर्जी की कार को चारों ओर से घेरकर किया गया हमला, शांत बैठी रहीं तृणमूल सुप्रीमो appeared first on Naya Vichar.

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