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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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iPhone विवाद या पारिवारिक कलह? कुणाल केस में सामने आया नया सच, मौसी ने शेयर किया वीडियो

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के खावड्या डोंगर पर 21 अगस्त को 18 वर्षीय कुणाल चांडगुडे, उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता की मौत के मामले में iPhone को लेकर हुए विवाद की कहानी पर सवाल उठने लगे हैं. शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया था कि कुणाल ने iPhone की लेने की जिद को लेकर पहाड़ी पर पहुंचा और जान देने की धमकी दी. हालांकि, अब परिवार की ओर से इस दावे को खारिज किया गया है. कुणाल की मौसी पल्लवी पाटिल ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें iPhone वाली कहानी को अफवाह बताया. उन्होंने कहा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों को जाने बिना लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे कर रहे हैं. View on Instagram पुराने वीडियो जांच रही है पुलिस पुलिस की प्रारंभिक जांच में पारिवारिक कलह का एंगल भी सामने आया है. Times of India के मुताबिक, पुलिस परिवार के भीतर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों की जांच कर रही है. घटना से पहले संगीता के सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए पुराने वीडियो भी जांच के दायरे में हैं. इनमें उन्होंने रिश्तों में सम्मान और कद्र नहीं मिलने को लेकर बातें कही थीं. आशंका जताई जा रही है कि घटना के पीछे के कारण पारिवारिक कलह भी हो सकता है. हालांकि घटना के पीछे किसी भी एक कारण को मान लेना थोड़ा जल्दीबाजी हो सकती है. ये भी पढ़ें: पटना: मनेर में भीषण सड़क हादसा, बाइक-ट्रैक्टर की आमने-सामने टक्कर में दो की मौत; दो की हालत गंभीर एक अन्य रिपोर्ट में परिवार से जुड़े लोगों और ग्रामीणों के हवाले से जमीन और पारिवारिक रिश्तों को लेकर पुराने विवाद की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुरलीधर के परिवार में जमीन के बंटवारे को लेकर भी मतभेद थे. हालांकि, इन दावों की पुलिस जांच कर रही है और अभी यह साबित नहीं हुआ है कि इन विवादों का घटना से सीधा संबंध था. The post iPhone विवाद या पारिवारिक कलह? कुणाल केस में सामने आया नया सच, मौसी ने शेयर किया वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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बच्चा स्कूल जाने से करता है मना? इन वजहों को न करें नजरअंदाज

Child Refuses to Go to School: सुबह स्कूल जाने का समय होते ही अगर बच्चा पेट दर्द, थकान या किसी और बहाने से स्कूल जाने से मना करने लगे, तो माता-पिता को उसकी बात ध्यान से सुननी चाहिए. कई बार बच्चा अपनी परेशानी सीधे नहीं बता पाता. स्कूल का नया माहौल, पढ़ाई का दबाव, दोस्तों के साथ अनबन या किसी शिक्षक से जुड़ी बात उसे परेशान कर सकती है. ऐसे में डांटने के बजाय प्यार से उसकी बात समझना ज्यादा जरूरी है. नया स्कूल या माहौल पसंद न आना अगर बच्चा पहली बार स्कूल जा रहा है या नया स्कूल शुरू किया है, तो उसे वहां के माहौल में घुलने-मिलने में थोड़ा समय लग सकता है. नए शिक्षक, नए शिशु और नई जगह देखकर उसे डर या झिझक महसूस हो सकती है. ऐसे समय में शिशु को थोड़ा समय दें और उससे रोज स्कूल के बारे में प्यार से बात करें. पढ़ाई का ज्यादा दबाव होमवर्क, टेस्ट और अच्छे नंबरों की चिंता भी शिशु को परेशान कर सकती है. अगर उसे लगता है कि वह पढ़ाई में बाकी बच्चों से पीछे है, तो स्कूल जाने का मन कम हो सकता है. माता-पिता को हर समय नंबरों की बात करने के बजाय शिशु की मेहनत की तारीफ करनी चाहिए और पढ़ाई को आसान बनाने में उसकी मदद करनी चाहिए. दोस्तों से जुड़ी परेशानी कभी-कभी दोस्तों के साथ हुई कोई बात भी शिशु को स्कूल से दूर कर सकती है. कोई बच्चा उसका मजाक उड़ाता हो, उसे स्पोर्ट्स में शामिल न करता हो या बार-बार परेशान करता हो, तो बच्चा स्कूल जाने से बच सकता है. अगर बच्चा अचानक चुप रहने लगे या स्कूल का नाम सुनकर परेशान हो, तो उससे आराम से पूछें कि वहां सब ठीक है या नहीं. शिक्षक से जुड़ी कोई बात किसी शिक्षक की डांट या कक्षा में हुई कोई ऐसी बात, जिससे बच्चा असहज महसूस करे, उसके मन में स्कूल को लेकर डर पैदा कर सकती है. ऐसे में पहले शिशु की पूरी बात सुनें. अगर परेशानी सही लगती है, तो शिक्षक या स्कूल से शांत तरीके से बात करके समाधान निकालने की कोशिश करें. शिशु की नींद और दिनचर्या भी देखें कम नींद, देर रात तक मोबाइल चलाना या दिनभर की थकान से भी बच्चा सुबह स्कूल जाने में परेशान हो सकता है. इसलिए उसकी नींद, खाने और स्क्रीन टाइम का भी ध्यान रखें. रोज एक आसान और तय दिनचर्या रखने से शिशु को काफी मदद मिल सकती है. शिशु से प्यार से बात करें सबसे जरूरी है कि शिशु को लगे कि माता-पिता उसकी बात समझेंगे. स्कूल जाने से मना करने पर तुरंत डांटने के बजाय पूछें कि उसे वहां जाने में क्या परेशानी हो रही है. उसकी बात बीच में न काटें और न ही उसका मजाक बनाएं. अगर बच्चा लंबे समय तक स्कूल जाने से मना करता रहे या बहुत ज्यादा परेशान दिखे, तो किसी डॉक्टर या बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. यह भी पढ़ें: बच्चा आपसे हर बात बेझिझक बताएगा, बस पैरेंट्स को बदलनी होंगी ये 5 आदतें The post बच्चा स्कूल जाने से करता है मना? इन वजहों को न करें नजरअंदाज appeared first on Naya Vichar.

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रामगढ़ के नेमरा में गरमाया माहौल, देवेंद्र महतो की भर्ती यात्रा पर भड़के ग्रामीण, बोले- मुख्यमंत्री का विरोध बर्दाश्त नहीं

रामगढ़ से सलाउद्दीन की रिपोर्ट रामगढ़ : रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में सोमवार को भारी नेतृत्वक और सामाजिक गरमा-गरमी देखने को मिली. छात्र नेता देवेंद्र महतो के नेतृत्व में प्रस्तावित ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ का नेमरा गांव के संथाली समाज ने पुरजोर विरोध किया. हालांकि, तमाम विरोध और तनाव के बीच यात्रा दोपहर बाद गोला के लुकैयाटांड पहुंची, जहां नेताओं ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा आगे बढ़ाई. नेमरा में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक हथियारों के साथ जुटे ग्रामीण सोमवार सुबह नेमरा के धुमकुड़िया भवन के पास मांझी हड़ाम और संथाली समाज के लोग पारंपरिक हथियारों व ढोल-नगाड़ों के साथ गोलबंद हो गए. गांव में आयोजित बैठक के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी सूरत में गांव के भीतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं होने देंगे. ग्रामीणों का कहना था कि हेमंत सोरेन सिर्फ एक नेतृत्वक व्यक्ति या मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि वे नेमरा गांव के ‘मांझी हड़ाम’ हैं. ये भी पढ़ें: JPSC-JSSC विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र और झारखंड प्रशासन को नोटिस गांव छोड़कर कहीं भी करें विरोध मांझी हड़ाम चेतन टुडू, जोग मांझी विश्वनाथ बेसरा, विजय सोरेन और मंगल टुडू सहित ग्रामीणों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार सभी को है. यात्रा गोला या रामगढ़ में कहीं से भी निकाली जाए, वे उसका विरोध नहीं करेंगे, लेकिन गांव की सीमा के अंदर इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. 3 बजे लुकैयाटांड पहुंची यात्रा रामगढ़ के नेमरा में विरोध के बाद देवेंद्र महतो के नेतृत्व में ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ दोपहर लगभग तीन बजे बरलंगा चौक होते हुए लुकैयाटांड मैदान पहुंची. मैदान में लगी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा के समक्ष देवेंद्र महतो व अन्य यात्रियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. सफेद टी-शर्ट पहने यात्रा में शामिल युवा हाथों में भगवान बिरसा मुंडा, बिनोद बिहारी महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीरें लिए हुए थे. इस दौरान युवाओं ने ‘जय झारखंड’ और महापुरुषों के अमर रहने के नारे लगाए. ये भी पढ़ें: बिहार की सिपाही भर्ती में जो गया था जेल, उसे CGL परीक्षा की मिली जिम्मेवारी The post रामगढ़ के नेमरा में गरमाया माहौल, देवेंद्र महतो की भर्ती यात्रा पर भड़के ग्रामीण, बोले- मुख्यमंत्री का विरोध बर्दाश्त नहीं appeared first on Naya Vichar.

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PM Surya Ghar Application Rejected: फॉर्म भरने में की है ये भूल, तो ऐसे करें ऑनलाइन ठीक

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी कई बार छोटी-मोटी कागजी गलतियों या तकनीकी खामियों की वजह से अटक जाती है या खारिज (Reject) हो जाती है. टाटा पावर की वेबसाइट के अनुसार, केंद्र प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी योजना में अब तक लाखों लोग आवेदन कर चुके हैं, लेकिन बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) और नेशनल पोर्टल के सख्त जांच नियमों के कारण कई अर्जियों को हरी झंडी नहीं मिल पाती. अगर आपका आवेदन भी रिजेक्ट हो गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ज्यादातर कारण ऐसे होते हैं जिन्हें आसानी से सुधारकर दोबारा सबमिट किया जा सकता है. वेंडर और सोलर पैनल नियमों का पालन न होना गैर-सूचीबद्ध (Non-Empanelled) वेंडर से इंस्टालेशन: अगर आपने MNRE या अपनी DISCOM के पोर्टल पर रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर के अलावा किसी अन्य लोकल वेंडर से सोलर सिस्टम लगवाया है, तो सब्सिडी जारी नहीं होगी. हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर्ड वेंडर का ही चुनाव करें. ALMM सूची से बाहर के पैनल: योजना के तहत केवल प्रशासन की ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) सूची में शामिल सोलर मॉडल्स और DCR (मेड इन इंडिया) पैनल ही मान्य हैं. यदि वेंडर ने सस्ते या गैर-प्रमाणित पैनल लगाए हैं, तो रिपोर्ट खारिज कर दी जाएगी. दस्तावेज और नाम में मिसमैच की समस्या नाम में अंतर: आपके आधार कार्ड, बिजली बिल और बैंक पासबुक में नाम की स्पेलिंग (अक्षर-दर-अक्षर) बिल्कुल एक समान होनी चाहिए. थोड़ा सा भी स्पेलिंग का अंतर या उपनाम (Surname) न होना आवेदन रद्द करा सकता है. गलत कंज्यूमर नंबर और IFSC कोड: बिजली बिल पर दर्ज कंज्यूमर नंबर (Consumer Account Number) की जगह मीटर नंबर डालने से सिस्टम उसे अमान्य कर देता है. इसी तरह बैंक खाते का गलत या पुराना IFSC कोड डालने पर सब्सिडी ट्रांसफर (DBT) फेल हो जाता है. अस्पष्ट या अधूरी तस्वीरें: कमीशनिंग रिपोर्ट अपलोड करते समय धुंधली छत की फोटो, बिना सीरियल नंबर वाले पैनल की फोटो या अधूरे दस्तावेज अपलोड करने से जांच टीम आवेदन को पेंडिंग में डाल देती है. कनेक्शन और स्वीकृत भार (Sanctioned Load) से जुड़ी कमियां स्वीकृत भार से बड़ा सोलर सिस्टम: यदि आपके बिजली बिल पर स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) 2 kW है और आपने 5 kW का सोलर प्लांट लगा लिया है, तो DISCOM की फिजिबिलिटी रिपोर्ट रिजेक्ट हो जाएगी. पुराना बकाया बिल: अगर आपके बिजली कनेक्शन पर कोई पुराना बकाया (Dues) है, तो DISCOM फिजिबिलिटी क्लियर नहीं करती. आवेदन से पहले पूरा बकाया जमा करना अनिवार्य है. गलत कनेक्शन कैटेगरी: यह योजना केवल आवासीय (Residential/Domestic) ग्राहकों के लिए है. अगर आपका कनेक्शन कमर्शियल या एग्रीकल्चर श्रेणी में दर्ज है, तो अर्जी खारिज हो जाएगी. बैंक खाता और प्रॉपर्टी ओनरशिप से जुड़े कारण Aadhaar Seeding (DBT) का न होना: आपका बैंक खाता आपके आधार से लिंक होने के साथ-साथ NPCI मैपर पर Direct Benefit Transfer (DBT) के लिए एक्टिव होना अनिवार्य है. संयुक्त संपत्ति और बिना NOC के आवेदन: यदि मकान एक से अधिक लोगों के नाम पर (Joint Property) है या पुश्तैनी है, तो अन्य सह-मालिकों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अपलोड न करने पर ओनरशिप चेक फेल हो जाता है. एक ही पते पर multiple कनेक्शन: एक परिवार या एक मकान के लिए केवल एक ही सब्सिडी मान्य है. एक ही पते पर कई कनेक्शन होने पर डुप्लीकेट एप्लीकेशन का फ्लैग लग जाता है. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) {“type”:”faq”,”question”:”Q1. PM सूर्य घर योजना में आवेदन रिजेक्ट होने के बाद क्या दोबारा अप्लाई कर सकते हैं?”,”answer”:”उत्तर: हां, आप पोर्टल पर लॉगिन करके रिजेक्शन का कारण देख सकते हैं और त्रुटि सुधारकर (जैसे दस्तावेज अपडेट करना या लोड बढ़ाना) अपनी अर्जी दोबारा सबमिट कर सकते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q2. अगर आधार और बिजली बिल में नाम अलग-अलग है तो क्या करें?”,”answer”:”उत्तर: आप अपनी DISCOM ऑफिस में आवेदन देकर बिजली बिल पर नाम सुधरवा सकते हैं या आधार के अनुसार सही नाम दर्ज कराके नया बिल अपलोड कर सकते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q3. क्या किराए के मकान में रहने वाले लोग इस योजना का लाभ ले सकते हैं?”,”answer”:”उत्तर: नहीं, इस योजना के लिए स्वयं का मकान और छत का मालिकाना हक होना अनिवार्य है.”} ये भी पढ़ें: PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: फ्री बिजली के साथ मिलेगी ₹78,000 तक सब्सिडी, ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई ये भी पढ़ें: EPFO Interest Credit: आपके PF खाते में ब्याज आया या नहीं, 2 मिनट में ऐसे करें चेक The post PM Surya Ghar Application Rejected: फॉर्म भरने में की है ये भूल, तो ऐसे करें ऑनलाइन ठीक appeared first on Naya Vichar.

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TRE-4 की पीटी में बदल सकता है सिलेबस, बिहार से होंगे 30% प्रश्न, शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजा पत्र

BPSC TRE-4 Prelims Syllabus Change: शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में बदलाव की तैयारी है. शिक्षा विभाग ने परीक्षा के सिलेबस को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग को पत्र भेजा है. इसमें प्रारंभिक परीक्षा में 50 प्रतिशत सवाल बाल मनोविज्ञान से और 50 प्रतिशत सवाल सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन से पूछने का सुझाव दिया गया है. हालांकि, इन बदलावों पर अंतिम फैसला अभी बिहार लोक सेवा आयोग को लेना है. बाल मनोविज्ञान पर रहेगा खास जोर शिक्षा विभाग के अनुसार, टीआरई-4 में शिक्षक बनने के लिए बीएड और डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बाल मनोविज्ञान और पढ़ाने की जानकारी काफी जरूरी है. इसी को देखते हुए छात्र संघों ने प्रारंभिक परीक्षा में बाल मनोविज्ञान से 50 प्रतिशत सवाल रखने की मांग की थी. विभाग ने इस मांग को बिहार लोक सेवा आयोग के सामने रखा है. सामान्य ज्ञान में बिहार से 30% सवाल की मांग प्रारंभिक परीक्षा में बाकी 50 प्रतिशत सवाल सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन से रखने की बात कही गई है. इसमें से 30 प्रतिशत सवाल बिहार से जुड़े सामान्य ज्ञान पर आधारित रखने का सुझाव दिया गया है. इन सवालों में बिहार का इतिहास, नेतृत्व, वित्तीय स्थिति और भौगोलिक जानकारी समेत दूसरे जरूरी विषय शामिल किए जा सकते हैं. छात्र संघों से बैठक के बाद शिक्षा विभाग ने भेजा पत्र टीआरई-4 की आने वाली परीक्षा को लेकर छात्र संघों ने अपनी कई मांगें शिक्षा विभाग के सामने रखी थीं. इन मांगों पर सोमवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और छात्र संघों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई. बैठक सोमवार देर शाम तक चली. इसके बाद शिक्षा विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग को पत्र भेजकर छात्र संघों की मांगों से अवगत कराया. शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने सोमवार देर रात बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजा. पत्र में बताया गया कि अलग-अलग छात्र संघों के प्रतिनिधियों ने टीआरई-4 को लेकर विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत की और परीक्षा से जुड़ी अपनी मांगें रखीं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें एक अभ्यर्थी-एक परिणाम की मांग भी पहुंची आयोग तक छात्र संघों ने टीआरई-4 को लेकर ‘एक अभ्यर्थी-एक परिणाम’ की मांग भी उठाई है. शिक्षा विभाग ने इस मांग को भी बिहार लोक सेवा आयोग को भेज दिया है. विभाग ने आयोग से छात्र संघों की मांगों पर जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. अब टीआरई-4 की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में ये बदलाव होंगे या नहीं, इसका अंतिम फैसला बिहार लोक सेवा आयोग को करना है. फिलहाल शिक्षा विभाग ने बाल मनोविज्ञान, सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन में बिहार से जुड़े सवाल और एक अभ्यर्थी-एक परिणाम से जुड़ी मांग आयोग के सामने रख दी है. इसे भी पढ़ें:  कोइलवर से गंगा किनारे आगे बढ़ेगा मरीन ड्राइव, 70 हजार करोड़ से बनेगा 126 किमी लंबा मार्ग, सीएम ने क्या बताया The post TRE-4 की पीटी में बदल सकता है सिलेबस, बिहार से होंगे 30% प्रश्न, शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजा पत्र appeared first on Naya Vichar.

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ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ सख्ती जरूरी, पढ़ें विराग गुप्ता का लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से संबोधन में नशे के खिलाफ जंग का आह्वान किया है. उन्होंने बच्चों को रीलबाजी से दूर रहकर किताबें पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया है. केंद्र प्रशासन के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के अनुसार, जंक फूड, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की तिकड़ी से बर्बाद होते युवा नौकरियों के लिए अनफिट हो रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान देश में करोड़ों शिशु ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर जुआ और सट्टेबाजी की लत का शिकार हो गये. बीते वर्ष अगस्त में संसद में पारित कानून में लिखा था कि ऑनलाइन मनी गेमिंग से परिवार और समाज के साथ वित्तीय स्थिति तबाह हो रही है. आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध और टैक्स चोरी जैसे गंभीर वित्तीय अपराध बढ़ रहे हैं. संसद से बने नये कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ऑनलाइन गेमिंग का मकड़जाल हिंदुस्तान में कम नहीं हो रहा. बच्चों और युवाओं को गेमिंग के नशे से बचाने के लिए इन छह कानूनी पहलुओं को समझना बेहद आवश्यक है. पहला-संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, सट्टेबाजी, लॉटरी, जुआ पर कानून बनाने और टैक्स वसूली के लिए राज्यों को अधिकार हैं. ताश के पत्तों से कुछेक हजार रुपये का जुआ स्पोर्ट्सने वालों को पुलिस जेल में डाल देती है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, गैंबलिंग एक्ट के अनुसार, देश में 2021 में 1.64 लाख, 2022 में 1.69 लाख और 2023 में 1.66 लाख लोगों के खिलाफ मुकदमे दायर हुए. पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के संगठित अपराधों को रोकने के लिए केंद्र प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रही. नये कानून में गैर-कानूनी एप्स को ब्लॉक करने और अवैध पेमेंट गेटवे को रोकने के लिए राज्यों की पुलिस को अधिकार नहीं हैं. गेमिंग विधेयक को लोकसभा में मात्र सात मिनट में और राज्यसभा में 26 मिनट में चर्चा के बगैर ही पारित कर दिया गया था. पीआइबी द्वारा जारी बैकग्राउंडर नोट में गैंबलिंग, लॉटरी और सट्टेबाजी को रोकने की बात कही गयी है. पर कानून में स्पष्ट तौर पर इस बारे में कोई प्रावधान न होने से लोगों में भ्रम बढ़ रहा है. दूसरा-सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री एल मुरगन ने विगत मार्च में लोकसभा में जवाब दिया था. उनके अनुसार, सभी तरह के ऑनलाइन मनी गेम के विज्ञापन, प्रमोशन और संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध है. इसका उल्लंघन करने वालों के अभियोजन के साथ नये कानून के अनुसार भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. गेमिंग एप्स को ब्लॉक करने के लिए केंद्र प्रशासन आइटी कानून की धारा-69-ए के तहत कार्रवाई कर सकती है. थिंक टैंक सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज (सीएएससी) ने सुप्रीम कोर्ट में 2,000 से ज्यादा एप्स का विवरण देकर उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने पिछले साल 17 अक्तूबर और फिर तीन नवंबर को केंद्र प्रशासन से कार्रवाई के लिए लिखित आदेश जारी किया. पिछले एक साल से केंद्र प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई जवाब या स्टेटस रिपोर्ट दायर नहीं की. तीसरा-संसदीय समिति की रिपोर्ट और एनआइए जांच के अनुसार, गेमिंग की चैट से युवाओं को कट्टरपंथ और आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है. चीनी गेमिंग एप फीविन की इडी जांच में म्यूल खातों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के जरिये खरबों के लेन-देन का खुलासा हुआ था. चीनी एप्स को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए 2020 में प्रशासन ने सैकड़ों चाइनीज एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. गेमिंग के नये कानून के बाद ड्रीम-11 कंपनी 26 करोड़ यूजर्स के डाटा के दम पर वित्तीय और एआइ सेक्टर में कारोबार बढ़ा रही है. गेमिंग के डाटा के कारोबार से बच्चों की सुरक्षा में सेंध लगने के साथ साइबर अपराध बढ़ रहे हैं. संसद ने 2023 में डाटा सुरक्षा कानून बनाया था, जिसे लागू न करने से डाटा के अवैध कारोबार के साथ टैक्स चोरी बढ़ रही है. चौथा-विधि आयोग की 2018 में पेश रिपोर्ट के अनुसार, महाहिंदुस्तान काल में जुए के खिलाफ कानून होता, तो द्रौपदी दांव पर नहीं लगती. वर्ष 2021 में केंद्र प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा में कहा था कि ऑनलाइन गैंबलिंग और सट्टेबाजी रोकने के लिए राज्यों को कानून बनाने का अधिकार है. उसके बाद तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कई राज्यों ने कानून बनाकर गेमिंग कंपनियों की नकेल कसने की कोशिश की. पर राज्यों के दखल को रोकने के लिए केंद्र ने 2023 में गेमिंग कंपनियों को इंटरमीडियरी का सुरक्षा कवच और स्व-नियमन का विशेषाधिकार दे दिया. अधिकांश राज्यों में जुआ और सट्टेबाजी रोकने के लिए पहले से ही कानून बने हुए हैं. लेकिन केंद्र प्रशासन के नये कानून से भ्रम बढ़ रहा है, जिसका फायदा गेमिंग कंपनियां उठा रही हैं. पांचवां-हेरफेर करने वाले फीचर्स, लत वाले एल्गोरिदम और बॉट्स के माध्यम से गेमिंग कंपनियां सालाना कई लाख करोड़ की ठगी का कारोबार कर रही हैं. कई गेमिंग एप कंपनियों ने लगभग 2.5 लाख करोड़ की जीएसटी और 58 हजार करोड़ की आयकर चोरी की थी. जीएसटी वसूली की प्रक्रिया के खिलाफ कई कंपनियां अदालत गयीं. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने 27 मई के आदेश से अपीलों को निरस्त करते हुए टैक्स वसूली का मार्ग प्रशस्त कर दिया. विदेशों से संचालित हो रहे एप्स को रोकने और उनसे टैक्स वसूली के लिए इंटरपोल की मदद से प्रशासन ने प्रभावी कारवाई नहीं की है. नये कानून की आड़ में सट्टेबाजी और गैंबलिंग के एप्स को शिक्षा और स्पोर्ट्स के नाम पर मान्यता और वित्तीय प्रोत्साहन देने से यह नासूर और बढ़ेगा. छठा-जुआ और सट्टेबाजी के नाम पर गांवों में गरीबों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल में बंद कर दिया जाता है. लेकिन ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में गैंबलिंग और सट्टेबाजी के संगठित अपराधियों के खिलाफ प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं कर रही. अठारह साल से कम उम्र के शिशु गेमिंग कंपनियों के साथ अनुबंध नहीं कर सकते. तो फिर इ-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग की आड़ में नाबालिग बच्चों को गेमिंग के नशे के शिकंजे में फंसाने के लिए नये कानून में इजाजत क्यों दी जा रही है? गेमिंग की लत की वजह से बच्चों और युवाओं में अवसाद, आत्महत्या और नाबालिग अपराध के मामले

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राहुल गांधी ने CM फडणवीस को लिखा पत्र, आदिवासी छात्रों की मांगें उठाईं; प्रेग्नेंसी टेस्ट पर सवाल

राहुल गांधी ने एक्स पर लेटर की कॉपी शेयर की है, जिसमें लिखा, “महाराष्ट्र के कई आदिवासी छात्र अपने अधिकारों की मांग को लेकर 10 दिनों से ज्यादा समय से भूख हड़ताल पर हैं. पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान, छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में 30 साल की अनावश्यक उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और स्त्रीओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट जैसे अमानवीय नियम लागू हैं. दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आए ये छात्र कोई खैरात नहीं मांग रहे हैं—वे अपने जायज हक की मांग कर रहे हैं. उम्मीद है कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करेंगे.” राहुल गांधी के पत्र की मुख्य बातें? 30 वर्ष की आयु सीमा का नियम: राहुल गांधी ने उल्लेख किया है कि प्रशासनी छात्रावासों में प्रवेश के लिए 30 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का नया नियम उन आदिवासी छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने से वंचित कर रहा है, जो दूर-दराज के गांवों से शहर आते हैं. छात्रावासों की बदहाल और असुरक्षित स्थिति: छात्रावासों में भोजन, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है. छात्रों को सांप के काटने (Snake bites) जैसी घटनाओं और चोटों का सामना करना पड़ा है. स्त्री छात्रों के सम्मान से खिलवाड़: लंबी अनुपस्थिति के बाद लौटने वाली छात्राओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट (Pregnancy test) और अन्य मेडिकल टेस्ट अनिवार्य किए जाने वाले नियम को राहुल गांधी ने छात्रों की गरिमा, स्वाभिमान और मानवीय अधिकारों पर सीधा हमला बताया है. मुख्यमंत्री से मांग: राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे प्रदर्शनकारी आदिवासी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें, उनकी समस्याओं को सुनें और उनका तुरंत समाधान करें. राहुल गांधी ने रखी मांगें शासनादेश (GR) और आयु सीमा: 5 और 14 अगस्त 2026 के GR को रद्द किया जाए, 2011 के GR को संशोधित किया जाए, तथा छात्रावास में प्रवेश की आयु सीमा को हटाकर या 30 से बढ़ाकर 36 वर्ष किया जाए. मुआवजा नीति: छात्रावास या आश्रम स्कूल में छात्र की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर ₹1 करोड़, स्थाई विकलांगता पर ₹50 लाख और गंभीर चोट लगने पर ₹25 लाख का मुआवजा निर्धारित किया जाए. फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर कार्रवाई: फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वालों पर सख्त कानूनी और आपराधिक कार्रवाई हो तथा 95,000 आरक्षित पदों की सुरक्षा करते हुए 12,500 लंबित रिक्तियों को तुरंत भरा जाए. DBT व्यवस्था की समाप्ति: DBT (Direct Benefit Transfer) भोजन व्यवस्था को समाप्त कर छात्रावासों में सीधे पौष्टिक और स्वच्छ भोजन (Direct meal system) की व्यवस्था की जाए. एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom): सभी आश्रम शालाओं और प्रशासनी हॉस्टलों में पर्याप्त मात्रा में सर्पदंश-रोधी दवा (ASV) और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. PESA भर्ती कर्मचारियों की बहाली: PESA प्रक्रिया से भर्ती होकर हटाए गए कर्मचारियों को सेवा में पुनः बहाल किया जाए. आदिवासी एवरेस्ट विजेताओं का सम्मान: महाराष्ट्र के आदिवासी एवरेस्ट विजेताओं को विशेष नीति के तहत प्रशासनी नौकरी और वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाए. ये भी पढ़ें: Sugar Price: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? जानें ISMA ने क्या दिया जवाब The post राहुल गांधी ने CM फडणवीस को लिखा पत्र, आदिवासी छात्रों की मांगें उठाईं; प्रेग्नेंसी टेस्ट पर सवाल appeared first on Naya Vichar.

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होटल क्रिस्टल के मालिक पर ताबड़तोड़ फायरिंग, चार गोलियां लगीं, मौत

जमशेदपुर : चांडिल के टेंथ माइल स्टोन होटल में मीटिंग खत्म हुई और कदमा निवासी व होटल क्रिस्टल के मालिक निखार सबलोक अपने दोस्तों के साथ बाहर निकले. अभी वह होटल की सीढ़ियों से उतरकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ ही रहे थे कि पहले से घात लगाये बैठे दो अज्ञात हमलावरों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. अचानक हुई फायरिंग से होटल परिसर में अफरा-तफरी मच गयी. निखार को चार गोलियां लगीं. वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों हमलावर मौके से फरार हो गये. दोस्त निखार को लेकर टीएमएच अस्पताल पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. निखार सबलोक (फाइल फोटो). घटनास्थल से मिले 9 खोखे घटना की सूचना मिलते ही चांडिल पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस ने घटनास्थल से 9 खोखे बरामद किया है. अपराधियों ने किस वजह से निखार की हत्या की और वारदात के पीछे कौन लोग हैं, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है. भाजपा से भी जुड़े थे निखार सबलोक निखार सबलोक होटल कारोबारी होने के साथ-साथ हिंदुस्तानीय जनता पार्टी से भी जुड़े हुए थे. दिनदहाड़े होटल परिसर में हुई इस हत्या से इलाके में सनसनी फैल गयी है. वहीं, मिली जानकारी के मुताबिक निखार विधायक सरयू राय के भी करीबी बताए जाते हैं. हालांकि, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. The post होटल क्रिस्टल के मालिक पर ताबड़तोड़ फायरिंग, चार गोलियां लगीं, मौत appeared first on Naya Vichar.

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Video: ध्रुव जुरेल के शतक का जश्न बना चर्चा का विषय, ‘जय जवान-जय किसान’ टैटू दिखाकर जीत लिया करोड़ों फैंस का दिल

Dhruv Jurel Century Celebration: श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में स्पोर्ट्से जा रहे दूसरे टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने शानदार शतक लगाकर हिंदुस्तानीय पारी को मजबूती दी. लेकिन जुरेल के शतक से ज्यादा चर्चा उनके सेलिब्रेशन की हो रही है. तीन अंकों का आंकड़ा छूते ही हिंदुस्तानीय बल्लेबाज ने अपने बाइसेप्स पर बना ‘जय जवान-जय किसान’ का टैटू दिखाया. उनका यह अंदाज देखते ही देखते सोशल मीडिया पर इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खुब वायरल हो रहा है. शतक पूरा करते ही दिखाया खास टैटू ध्रुव जुरेल हिंदुस्तान की पहली पारी में नंबर-7 पर बल्लेबाजी करने उतरे थे. उन्होंने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाजों का डटकर सामना किया और मुश्किल परिस्थितियों में शानदार पारी स्पोर्ट्सी. जुरेल ने तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो की गेंद पर सिंगल लेकर अपना दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया. सेंचुरी पूरी होते ही उन्होंने बाइसेप्स फ्लेक्स किया और अपना नया टैटू कैमरे के सामने दिखाया. उनके हाथ पर ‘जय जवान, जय किसान’ लिखा हुआ है. जुरेल का यह सेलिब्रेशन सिर्फ एक सामान्य जश्न नहीं था, बल्कि इसके पीछे उनके परिवार और सेना से जुड़ी एक खास कहानी भी है. जुरेल के ‘जय जवान-जय किसान’ टैटू की कहानी क्या है? ध्रुव जुरेल के पिता नेमचंद जुरेल हिंदुस्तानीय सेना में रहे हैं. वह 1999 के कारगिल युद्ध में भी हिस्सा ले चुके हैं. पिता की सैन्य पृष्ठभूमि का जुरेल के जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है. क्रिकेट में आने से पहले ध्रुव खुद भी सेना में शामिल होने का सपना देखते थे. मैदान पर भी वह कई बार अपने बल्ले को बंदूक की तरह पकड़कर सलामी देने वाला सेलिब्रेशन करते नजर आ चुके हैं. अब ‘जय जवान-जय किसान’ का टैटू दिखाकर जुरेल ने एक बार फिर हिंदुस्तानीय जवानों के प्रति अपने सम्मान को खास अंदाज में जाहिर किया है. श्रीलंका में नं-7 पर शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे हिंदुस्तानीय ध्रुव जुरेल का यह शतक आंकड़ों के लिहाज से भी बेहद खास है. वह श्रीलंका की धरती पर टेस्ट मैच में नंबर-7 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे हिंदुस्तानीय बल्लेबाज बन गए हैं. उनसे पहले यह कारनामा हार्दिक पांड्या ने किया था. हार्दिक ने 2017 में पल्लेकेले टेस्ट में नंबर-7 पर बल्लेबाजी करते हुए 108 रन की पारी स्पोर्ट्सी थी. वहीं हिंदुस्तान के लिए नंबर-7 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए टेस्ट शतक लगाने वाले हालिया बल्लेबाजों में नितीश कुमार रेड्डी का नाम भी शामिल है. उन्होंने 2024 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टेस्ट में 114 रन बनाए थे. Also Read: Video: ईशान किशन ने दिलाई धोनी की याद, गेंद हाथ से छूटी फिर भी कर दी ऐसी स्टंपिंग कि बल्लेबाज रह गया हैरान जुरेल ने 115 रन की नाबाद पारी स्पोर्ट्सी ध्रुव जुरेल ने अपनी पारी में 177 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 115 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 9 चौके और 2 छक्के निकले. जुरेल की पारी की खास बात यह रही कि उन्होंने तेजी से रन बनाने के बजाय परिस्थिति के हिसाब से बल्लेबाजी की. उनकी पारी ने हिंदुस्तान को 500 रन के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. हिंदुस्तान का स्कोर 503 रन हिंदुस्तान ने दूसरे दिन 9 विकेट पर 503 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित कर दी. देवदत्त पडिक्कल ने टीम के लिए सबसे ज्यादा 117 रन बनाए, जबकि ऋषभ पंत ने 63 और शुभमन गिल ने 50 रन की उपयोगी पारियां स्पोर्ट्सीं. दूसरे दिन का स्पोर्ट्स समाप्त होंने तक श्रीलंका का 8 रन पर दो विकेट गिर चुके है. Also Read: Video: एर्लिंग हालैंड ने बदला लुक, नया बज कट देख फैंस भी रह गए हैरान The post Video: ध्रुव जुरेल के शतक का जश्न बना चर्चा का विषय, ‘जय जवान-जय किसान’ टैटू दिखाकर जीत लिया करोड़ों फैंस का दिल appeared first on Naya Vichar.

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भोजपुरी बवाल’ के मंच पर तेज प्रताप के साथ पहुंचे लालू यादव बोले- मन खुश हो गया

Grand Finale of ‘Bhojpuri Bawaal : राजधानी पटना के ज्ञान भवन में सोमवार को ‘भोजपुरी बवाल’ के भव्य आयोजन में नेतृत्व और भोजपुरी मनोरंजन जगत का दिलचस्प संगम देखने को मिला. एक ही मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव नजर आये. लालू प्रसाद अपने बेटे तेज प्रताप यादव के साथ कार्यक्रम में पहुंचे. वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. लालू यादव बोले- ‘बहुत प्रसन्नता हो रही है’ कार्यक्रम स्थल पर मीडिया से बातचीत करते हुए लालू प्रसाद यादव ने ‘भोजपुरी बवाल’ की सराहना की. उन्होंने कहा, “भोजपुरी बवाल देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है. जितने भी लोग हैं, सब बधाई के पात्र हैं.” लालू प्रसाद की मौजूदगी से कार्यक्रम में खास उत्साह देखने को मिला. उनके साथ उनके बेटे तेज प्रताप यादव भी मौजूद रहे, जो ‘भोजपुरी बवाल’ के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. खास बात यह है कि शो अभी मिड सीजन में है, लेकिन फिनाले की शूटिंग को लेकर पटना में सितारों का जमावड़ा लगा है. मंच पर सीएम सम्राट, पवन सिंह, दिनेश लाल यादव अैर अन्य मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी कार्यक्रम में हुए शामिल ज्ञान भवन में होने वाले ग्रैंड इवेंट में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. मुख्यमंत्री की मौजूदगी से कार्यक्रम को लेकर उत्साह और बढ़ गया है. कार्यक्रम में मौजूद काजल राघवानी पांचों स्टार्स बने फाइनलिस्ट ‘भोजपुरी बवाल’ के ग्रैंड इवेंट में पवन सिंह, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, आम्रपाली दुबे, काजल राघवानी और तेज प्रताप यादव फाइनलिस्ट के तौर पर नजर आएंगे. शो के फिनाले को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गयी हैं. 6 सितंबर को होगा प्रसारण ग्रैंड फिनाले की शूटिंग 24 अगस्त को पटना में हो रही है, जबकि इसका टेलीविजन प्रसारण 6 सितंबर को किया जाएगा. शो के प्रशंसकों को अब फिनाले के प्रसारण का इंतजार है. इसे भी पढ़ें : तहार मुस्कराहट बड़ा लाजवाब बा… मल्लिका शेरावत की स्माइल पर फिदा हुए तेजू भैया, हाथ देखकर कह दी ये बात The post भोजपुरी बवाल’ के मंच पर तेज प्रताप के साथ पहुंचे लालू यादव बोले- मन खुश हो गया appeared first on Naya Vichar.

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