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Author name: Vinod Jha

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Sugar Price: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? जानें ISMA ने क्या दिया जवाब

Sugar Price: ISMA के महानिदेशक दीपक बधानी ने न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत में कहा, पिछले 20 दिनों में चीनी के दामों में हुई बढ़ोतरी का कारण वास्तविक किल्लत नहीं, बल्कि सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग के कारण हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. उन्होंने इथेनॉल डायवर्जन को भी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने से इनकार किया और कहा कि घरेलू खपत हमेशा पहली प्राथमिकता रहती है. खुदरा कीमतों में उछाल : जुलाई में चीनी का भाव लगभग 48 रुपये प्रति किलो था, जो अगस्त में सट्टेबाजी के कारण बढ़कर 55-56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया. मजबूत क्लोजिंग स्टॉक : सीजन के अंत तक देश के पास करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहेगा, जो नवंबर तक की जरूरतों के लिए पर्याप्त है. उत्पादन अनुमान : वर्ष 2025-26 में देश का कुल नेट चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है. 10 लाख मीट्रिक टन कच्चे चीनी के आयात को मंजूरी : प्रशासन ने एहतियातन और त्योहारी सीजन में आपूर्ति बनाए रखने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन (1 मिलियन टन) कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है. डीलरों के लिए 400 टन चीनी की स्टॉक सीमा तय ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने बताया कि एसोसिएशन ने प्रशासन से व्यापारियों की स्टॉक सीमा को 400 टन से घटाकर 200 टन करने का अनुरोध किया है, ताकि बाजार में अधिक चीनी जारी हो सके. इसके अलावा, प्रशासन ने भी सख्त कदम उठाते हुए डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा, बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की इन्वेंट्री कैप और मिलों से चीनी उठाने की 7 दिनों की समयसीमा तय की है. ये भी पढ़ें: त्योहारों से पहले चीनी की कीमत पर नजर, जानें सप्लाई और स्टॉक से क्या होगा बाजार का हाल The post Sugar Price: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? जानें ISMA ने क्या दिया जवाब appeared first on Naya Vichar.

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Explainer: बिहार में बारिश कम फिर भी नदियां उफान पर, गंगा, गंडक और कोसी में कहां से आई बाढ़?

बिहार में इस मानसून अब तक सामान्य से करीब 42 फीसदी कम बारिश हुई है. कई इलाकों में खेतों को पानी की जरूरत है और धान की फसल पर भी असर पड़ रहा है. लेकिन दूसरी तरफ गंगा और उसकी कई सहायक नदियां उफान पर हैं. पटना, हाथीदह और सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. बेगूसराय के बछवाड़ा और भागलपुर के खरीक में तटबंध टूटने की समाचारें भी सामने आई है. लेकिन सवाल ये है कि जब बिहार में बारिश कम हुई, तो नदियों में इतना पानी आया कहां से? कम बारिश के बावजूद बिहार में बाढ़ जैसी हालात क्यों? सबसे पहले एक बात समझना जरूरी है कि बाढ़ का पानी जरूरी नहीं कि उसी जगह की बारिश से आया हो, जहां बाढ़ दिखाई दे रही है.गंगा का इलाका बहुत बड़ा है. नदी के ऊपरी हिस्से में बारिश होती है तो उसका पानी धीरे-धीरे नीचे आता है. इसके अलावा नेपाल से आने वाली गंडक और कोसी जैसी नदियां भी बिहार में पानी लेकर आती हैं. सोन और घाघरा जैसी नदियां भी गंगा में पानी छोड़ते हैं. यानी बिहार में बारिश कम होने के बावजूद यहां की नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है. 24 अगस्त की सुबह के आंकड़ों के मुताबिक पटना के गांधी घाट पर गंगा 49.57 मीटर थी, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है. यानी नदी करीब 97 सेंटीमीटर ऊपर थी. हाथीदह में जलस्तर 42.51 मीटर था, जो खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर था. सुल्तानगंज में नदी खतरे के निशान से करीब 1.17 मीटर ऊपर थी. ये भी पढ़ें: 12 महीने की पेड फेलोशिप और 7.38 लाख स्टाइपेंड का मौका! जानें कौन कर सकता है आवेदन बिहार में बारिश कितनी हुई है? मौसम विभाग द्वारा जारी 24 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में इस मानसून सामान्य से करीब 42 फीसदी कम बारिश हुई है. सामान्य तौर पर इस अवधि तक बिहार में करीब 711 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक करीब 414 मिलीमीटर बारिश हुई है. यानी करीब 297 मिली मीटर की कमी है. 24 अगस्त सुबह के प्रशासनी आंकड़ों में गंडक के डुमरिया घाट पर जलस्तर 62.91 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 62.22 मीटर है. यानी गंडक वहां करीब 69 सेंटीमीटर ऊपर थी. कोसी के बलतारा में भी नदी खतरे के निशान से ऊपर थी. सोन के मनेर और बूढ़ी गंडक के खगड़िया स्टेशन पर भी जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया. यानी इस समय मामला सिर्फ गंगा का नहीं है. कई नदियों का पानी एक साथ नीचे की ओर आ रहा है. लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि जब बिहार में बारिश इतनी कम है, तो फिर नदियां इतनी चढ़ी हुई क्यों हैं? गंगा समेत बिहार की दूसरी नदियों में पानी कहां से आया? गंगा को सिर्फ बिहार में नहीं बहती है, बल्कि गंगोत्री से निकलकर बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने के लिए यह लगभग पूरा हिंदुस्तान घूम लेती है और जहां नहीं पहुंचा वहीं इसकी सहायक नदी पहुंच जाती है. यानी कि इसका पूरा नदी क्षेत्र बिहार से बहुत आगे तक फैला है. नतीजा गंगा के ऊपरी इलाके में बारिश होती है तो उसका पानी गंगा के रास्ते नीचे आता है और नेपाल और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर गंडक और कोसी जैसी नदियों पर पड़ता है. इन नदियों का पानी बिहार में पहुंचता है और आगे गंगा में मिलता है. क्या फरक्का बराज का भी इस कहानी में कोई रोल है? गंगा का जलस्तर बढ़ने के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बराज के गेट खोलने का आग्रह किया है. बिहार प्रशासन का कहना है कि इससे गंगा का पानी नीचे की ओर तेजी से निकल सकेगा और बिहार में नदी के दबाव को कुछ कम करने में मदद मिल सकती है. दरअसल, फरक्का गंगा के पानी को नियंत्रित करने वाली एक बड़ी संरचना है. इसका एक काम गंगा के पानी के एक हिस्से को भागीरथी-हुगली नदी तंत्र की ओर ले जाना भी है. इसलिए फरक्का इस पूरी कहानी का एक हिस्सा जरूर है, लेकिन बिहार में अभी जो स्थिति बनी है, उसके लिए काफी हद तक ऊपर से आने वाले पानी, सहायक नदियों के बढ़े प्रवाह ही जिम्मेदार हैं. ये भी पढ़ें: कैसे तय होती है EPFO की ब्याज दर और आपके PF पर इसका क्या असर पड़ता है? असली तस्वीर क्या है? कुल मिलाकर बिहार में इस समय एक अजीब स्थिति है. बारिश कम है, लेकिन नदियों में पानी ज्यादा है. एक तरफ जहां खेती सुखने वाली थी वहीं दूसरे तरफ अब स्थिति ये है कि वो डूब सकती है. हालांकि यह सुनने में विरोधाभासी जरूर लगता है, लेकिन नदी का पानी और खेत के लिए मिलने वाला बारिश का पानी एक ही चीज नहीं है. बिहार में बारिश कम होने के बावजूद अगर ऊपर की नदी घाटियों में ज्यादा बारिश होती है, तो उसका पानी नदियों के रास्ते बिहार तक पहुंच सकता है. यानी इस बार बिहार की कहानी सिर्फ यह नहीं है कि बारिश हुई और बाढ़ आ गई.असल कहानी यह है कि पानी कहीं और गिरा, नदियों के रास्ते बिहार पहुंचा और वहां पहुंचकर उसका दबाव गंगा, उसकी सहायक नदियों और तटबंधों पर दिखाई देने लगा. इसीलिए एक ही समय में बिहार में दो तस्वीरें दिखाई दे रही हैं कि कहीं खेत बारिश का इंतजार कर रहे हैं और कहीं खेत डूबने वाली है. पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल समाचार The post Explainer: बिहार में बारिश कम फिर भी नदियां उफान पर, गंगा, गंडक और कोसी में कहां से आई बाढ़? appeared first on Naya Vichar.

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रक्षाबंधन से पहले मिलेंगे सूर्य-बुध, 5 राशि के लोगों को भारी नुकसान!

Surya Budh Yuti Yog 2026 Unlucky Zodiacs: द्रिक पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य और बुध 27 अगस्त को युति दृष्टि योग का निर्माण करेंगे. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, युति दृष्टि योग तब बनता है जब दो ग्रह एकसाथ आते हैं. ज्योतिषाचार्य पं. धनंजय पांडेय ने बताया कि जब दो ग्रह एकसाथ आते हैं, तो कुछ राशि वालों के जीवन में लाभ के कई अवसर मिलते हैं. बुध सूर्य के युति योग से 4 राशि वालों को खास सावधान रहना होगा. कब बनेगा सूर्य-बुध का युति दृष्टि योग? द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य-बुध का युति योग गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को रात 10 बजकर 31 मिनट पर बनेगा. वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बनता है. ये भी पढ़ें: गुरु के नक्षत्र गोचर से संवर जाएगी 5 राशि वालों की तकदीर! बंपर लाभ के हैं योग वृषभ राशि नौकरीपेशा लोगों को बॉस की बातों का कष्ट हो सकता है. बिजनेस करने वाले लोग कुछ हद तक आर्थिक नुकसान झेल सकते हैं. निवेश में पैसा फंस सकता है. आंख से जुड़ी परेशानी हो सकती है. खर्च पर नियंत्रण रहना होगा. तुला राशि सेहत को लेकर सावधान रहना होगा. हड्डी से जुड़ी दिक्कतें उभर सकती हैं. नौकरी से जुड़ा कोई बड़ा काम आगे बढ़ सकता है. व्यापार में निवेश के अनुकूल रिटर्न नहीं मिलेगा. निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. पिता से विवाद हो सकता है. पिता के सामने सोच-विचारकर अपनी बातों को रखें. मकर राशि जरूरी कार्यों में अनावश्यक देरी होगी. अगर आपने पहले कहीं निवेश किया था, तो उसमें कुछ हद तक नुकसान हो सकता है. कारोबार में बड़ा निवेश कुछ समय के लिए टाल देना अच्छा रहेगा. नौकरी में कार्यस्थल पर सहकर्मियों से विवाद हो सकता है, सावधान रहना होगा. कुंभ राशि कार्यक्षेत्र में मेहनत के अनुकूल फल नहीं मिलेगा, जिससे मन में निराशा होगी. प्रशासनी नौकरी करने वालों को बड़े काम में निराशा हो सकती है. कारोबार में दैनिक आमदनी में कमी आ सकती है. व्यापार में और अधिक मेहनत करना होगा. ये भी पढ़ें: ‘नवपंचम राजयोग’ लाएगा मकर राशि वालों के जीवन में बहार, धन और करियर में होगी बड़ी तरक्की मीन राशि किसी भी बड़े काम के लिए निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में बड़ा निर्णय लेने से पहले बड़े-बुजुर्गों और अनुभवी लोगों से सलाह जरूर लें. कार्यक्षेत्र या वर्कप्लेस पर अपनी बात रखने से पहले अच्छी तरह विचार कर लें. नौकरी या व्यापार से जुड़े कार्यों को लेकर अधिक तनाव, घबराहट या मानसिक उलझनों का सामना करना पड़ा सकता है. गला या स्किन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. सेहत को लेकर अलर्ट रहना होगा. The post रक्षाबंधन से पहले मिलेंगे सूर्य-बुध, 5 राशि के लोगों को भारी नुकसान! appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO: गुरुग्राम में सड़कों पर पानी ही पानी, कतार में खड़ी स्कूल बसें; अंदर बैठे बच्चे देखते रहे जलभराव का मंजर

Gurugram rain : दिल्ली-NCR में सोमवार को हुई भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आई. इसी बीच गुरुग्राम से स्कूल बसों का एक वीडियो सामने आया है. इसमें कई स्कूल बसें पानी से भरी सड़क पर कतार में खड़ी दिखाई दे रही हैं. बसों के पहिए पानी में डूबे हैं और शिशु खिड़कियों से बाहर जलभराव का मंजर देखते नजर आ रहे हैं. वीडियो में क्या दिख रहा है? न्यूज एजेंसी PTI की ओर से साझा किए गए वीडियो में कई स्कूल बसें एक के पीछे एक खड़ी दिखाई दे रही हैं. सड़क पर काफी पानी जमा है और बसों के पहिए पानी में डूबे नजर आ रहे हैं. बसों के अंदर शिशु बैठे हुए हैं, जो खिड़कियों से बाहर पानी से भरी सड़क को देखते दिखाई दे रहे हैं. यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब सोमवार को हुई भारी बारिश के कारण गुरुग्राम समेत दिल्ली-NCR के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी. गुरुग्राम में बारिश ने बढ़ाई परेशानी गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद कई प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया और यातायात प्रभावित हुआ. स्कूल बसों के फंसने की घटनाओं के कारण बच्चों और उनके अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कई शिशु घंटों तक ट्रैफिक और जलभराव के बीच फंसे रहे. 25 अगस्त को स्कूल बंद हैं या नहीं? गुरुग्राम में भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने 25 अगस्त को प्रशासनी और निजी स्कूलों समेत संस्थानों के लिए वर्क फ्रॉम होम/ऑनलाइन क्लास की सलाह जारी की है. प्रशासन का यह कदम जलभराव और ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए लिया गया है. दिल्ली में 25 अगस्त को स्कूल बंद रखने को लेकर अलग से आधिकारिक आदेश की जानकारी संबंधित प्रशासन या स्कूल की ओर से जारी अपडेट के आधार पर ही मानी जानी चाहिए. Also read : दिल्ली में बारिश ने खोली नालों की सफाई की पोल, ITO से सदर बाजार तक पानी-पानी; AAP ने BJP को घेरा दिल्ली में भी कई इलाकों में भारी बारिश सोमवार को दिल्ली के कई हिस्सों में भारी बारिश और गरज-चमक दर्ज की गई. मौसम विभाग ने कुछ जिलों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट और कुछ क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया. दक्षिण-पूर्व दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मध्य दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और नई दिल्ली समेत कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना बताई गई थी. 25 अगस्त को कैसा रहेगा मौसम? IMD के 24 अगस्त के दिल्ली पूर्वानुमान के अनुसार 25 अगस्त के लिए दिल्ली में अलग से भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं थी. हालांकि मौसम की स्थिति बदल सकती है, इसलिए बाहर निकलने से पहले ताजा मौसम और ट्रैफिक अपडेट देखना जरूरी है. बारिश के कारण सोमवार को दिल्ली-NCR में कई जगह जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी. ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए स्थानीय प्रशासन और स्कूल की ओर से जारी ताजा सूचना पर नजर रखना जरूरी है. The post VIDEO: गुरुग्राम में सड़कों पर पानी ही पानी, कतार में खड़ी स्कूल बसें; अंदर बैठे शिशु देखते रहे जलभराव का मंजर appeared first on Naya Vichar.

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Video: ईशान किशन ने दिलाई धोनी की याद, गेंद हाथ से छूटी फिर भी कर दी ऐसी स्टंपिंग कि बल्लेबाज रह गया हैरान

Ishan Kishan Stumping Video: दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे ईशान किशन भले ही बल्ले से कुछ खास नहीं कर पाए, लेकिन विकेट के पीछे उन्होंने ऐसी फुर्ती दिखाई कि हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है. नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ईशान ने शानदार स्टंपिंग करते हुए बल्लेबाज आशीष थापा को पवेलियन भेज दिया. इस स्टंपिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. फास्ट बॉलर के बॉलिंग पर की स्टंपिंग ईशान ने यह स्टंपिंग तेज गेंदबाज की गेंद पर की. पहली कोशिश में गेंद उनके दस्तानों से छूट भी गई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अगले ही पल गेंद को दोबारा पकड़कर गिल्लियां बिखेर दीं. ईशान की इस तेजी को देखकर कई फैंस को पूर्व हिंदुस्तानीय कप्तान और दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी की याद आ गई. गेंद छूटी, लेकिन ईशान ने नहीं छोड़ा मौका नॉर्थ ईस्ट जोन की पारी के 21वें ओवर में यह शानदार वाकया देखने को मिला. अभिजीत प्रशासन ने लेग साइड की ओर फुल गेंद डाली. बल्लेबाज आशीष थापा ने गेंद को स्पोर्ट्सने के लिए आगे कदम बढ़ाया, लेकिन गेंद बल्ले से नहीं लगी. ईशान किशन उस समय स्टंप्स के बेहद करीब खड़े थे. उन्होंने तुरंत गेंद को पकड़कर स्टंपिंग करने की कोशिश की, लेकिन पहली कोशिश में गेंद उनके दस्तानों से निकल गई. आमतौर पर ऐसी स्थिति में बल्लेबाज को बच निकलने का मौका मिल जाता है, लेकिन यहां थापा खुद भी शॉट स्पोर्ट्सने के प्रयास में अपना संतुलन खो चुके थे और उनका पैर क्रीज से बाहर था. ईशान ने बिना एक पल गंवाए गेंद को दोबारा अपने दस्तानों में लिया और तुरंत गिल्लियां उड़ा दीं. थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखने के बाद आशीष थापा को आउट करार दिया. माही की आई याद ईशान की इस स्टंपिंग का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस को एमएस धोनी की याद आ गई. माही भी इसी फुर्तीं की तरह ही विकेट के पीछे गेंद को पकड़ने, पहली कोशिश नाकाम होने के बावजूद तुरंत दूसरी कोशिश करने और बिना समय गंवाए स्टंप उखाड़ने की उनकी क्षमता रखते थें. Also Read: IND vs AFG: हिंदुस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए अफगानिस्तान टीम का ऐलान, इब्राहिम जादरान संभालेंगे कप्तानी 111 रन पर ढेर हुआ नॉर्थ ईस्ट जोन मुकाबले की बात करें तो ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने नॉर्थ ईस्ट जोन की बल्लेबाजी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. नॉर्थ ईस्ट जोन की पूरी टीम सिर्फ 111 रन पर ऑलआउट हो गई. इसके बाद ईस्ट जोन ने उसे फॉलोऑन दे दिया. ईस्ट जोन की ओर से अभिजीत प्रशासन सबसे सफल गेंदबाज रहे. उन्होंने 5 विकेट अपने नाम किए. शाहबाज अहमद ने 3 विकेट चटकाए, जबकि मुकेश कुमार और अनुकूल रॉय को एक-एक सफलता मिली. अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी इस पारी में कोई विकेट नहीं ले सके. नॉर्थ ईस्ट जोन की ओर से आशीष थापा ने 32 रन बनाए, लेकिन किशन की शानदार स्टंपिंग ने उनकी पारी का अंत कर दिया. सुदीप घरामी और शाहबाज ने मचाया धमाल इससे पहले ईस्ट जोन ने अपनी पहली पारी में बड़ा स्कोर खड़ा किया. टीम ने 467 रन बनाए. शुरुआत हालांकि बेहद खराब रही थी और महज 25 रन के स्कोर पर वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन के विकेट गिर गए थे. इसके बाद कुमार कुशाग्र और सुदीप कुमार घरामी ने पारी को संभाला. दोनों के बीच 92 रन की साझेदारी हुई. कुशाग्र ने 55 रन बनाए. उनके आउट होने के बाद भी घरामी ने मोर्चा संभाले रखा. सुदीप कुमार घरामी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 185 गेंदों पर 146 रन की पारी स्पोर्ट्सी. घरामी के आउट होने के बाद शाहबाज ने पारी को आगे बढ़ाया और शानदार 164 रन ठोक दिए. निचले क्रम के बल्लेबाजों के उपयोगी योगदान से ईस्ट जोन का स्कोर 460 के पार पहुंच गया. Also Read: Video: एर्लिंग हालैंड ने बदला लुक, नया बज कट देख फैंस भी रह गए हैरान The post Video: ईशान किशन ने दिलाई धोनी की याद, गेंद हाथ से छूटी फिर भी कर दी ऐसी स्टंपिंग कि बल्लेबाज रह गया हैरान appeared first on Naya Vichar.

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रक्षाबंधन पर यात्रियों को राहत, फिरोजाबाद में ठहरेंगी पांच विशेष ट्रेनें; दिल्ली-कानपुर के बीच भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

रक्षाबंधन पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने पांच विशेष ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है. इनमें तीन साप्ताहिक और दो आरक्षित सुपरफास्ट विशेष ट्रेनें शामिल हैं. इन ट्रेनों के चलने से दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा. सभी विशेष ट्रेनों का टूंडला में भी ठहराव रहेगा. सूबेदारगंज-शकूरबस्ती के बीच चलेंगी विशेष ट्रेनें मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार, ट्रेन संख्या 02275 सूबेदारगंज-शकूरबस्ती साप्ताहिक विशेष 25 और 30 अगस्त को तीन-तीन फेरे लगाएगी. वापसी में ट्रेन संख्या 02276 शकूरबस्ती-सूबेदारगंज 26 और 31 अगस्त से तीन-तीन फेरे लगाएगी. इन ट्रेनों का भी मिलेगा यात्रियों को फायदा ट्रेन संख्या 04147 सूबेदारगंज-शकूरबस्ती 26 अगस्त को एक फेरा लगाएगी, जबकि 04148 शकूरबस्ती-सूबेदारगंज 27 अगस्त को चलेगी. वहीं, ट्रेन संख्या 04163 सूबेदारगंज-शकूरबस्ती 27 अगस्त और इसकी वापसी ट्रेन संख्या 04164 शकूरबस्ती-सूबेदारगंज 28 अगस्त को संचालित होगी. टूंडला में दो मिनट का ठहराव सूबेदारगंज से चलने वाली ये ट्रेनें फतेहपुर, कानपुर और इटावा होते हुए रात करीब 2:20 बजे टूंडला जंक्शन पहुंचेंगी. यहां दो मिनट रुकने के बाद अलीगढ़ और दिल्ली के रास्ते सुबह 10 बजे शकूरबस्ती पहुंचेंगी. वापसी में शकूरबस्ती से दोपहर 12 बजे रवाना होकर ट्रेन करीब 3:40 बजे टूंडला पहुंचेगी. नई दिल्ली-कानपुर के बीच भी स्पेशल ट्रेन इसके अलावा नई दिल्ली-कानपुर सेंट्रल के बीच आरक्षित सुपरफास्ट विशेष ट्रेन चलेगी. ट्रेन संख्या 02456 28 अगस्त को नई दिल्ली से सुबह 7:15 बजे रवाना होकर 9:55 बजे टूंडला पहुंचेगी. वापसी में 02455 कानपुर सेंट्रल से दोपहर 1:30 बजे चलकर 3:30 बजे टूंडला पहुंचेगी. आनंद विहार से भी मिलेगा अतिरिक्त विकल्प आनंद विहार टर्मिनल-कानपुर सेंट्रल के बीच भी 30 अगस्त को विशेष ट्रेन चलेगी. ट्रेन संख्या 02458 आनंद विहार से सुबह 7:20 बजे रवाना होकर 9:55 बजे टूंडला पहुंचेगी. वापसी में 02457 कानपुर सेंट्रल से दोपहर 1:30 बजे चलकर 3:30 बजे टूंडला पहुंचेगी. रेल प्रशासन के इस कदम से रक्षाबंधन पर घर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ये भी पढ़ें: रक्षाबंधन पर रेलवे ने चलाई स्पेशल ट्रेन, जानें रूट और टाइमिंग The post रक्षाबंधन पर यात्रियों को राहत, फिरोजाबाद में ठहरेंगी पांच विशेष ट्रेनें; दिल्ली-कानपुर के बीच भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर के स्कूल में सांप ने बच्चे को डंसा

Kolkata School Snake Bite: कोलकाता के भवानीपुर क्षेत्र में शहर के प्रसिद्ध मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल में सोमवार को हड़कंप मच गया, जब पहली कक्षा में पढ़ने वाले 6 साल के छात्र द्रुप्तो पाल को टिफिन ब्रेक के दौरान सांप ने काट लिया. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बंगाल चुनाव 2026 में इसी सीट से निर्वाचित हुए हैं. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी यहीं से चुनाव लड़ी थीं. छात्र टॉलीगंज का रहने वाला है. घटना के बाद तुरंत हरकत में आये स्कूल प्रशासन ने परिजनों को सूचित किया और शिशु को गंभीर हालत में पास के प्रशासनी एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में इलाज जारी, वन विभाग को दी गयी सूचना एसएसकेएम अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, शिशु को विशेष निगरानी में रखा गया है और जरूरी प्राथमिक जांच की जा रही हैं. फिलहाल छात्र की हालत स्थिर है. रिपोर्ट के आधार पर आगे का इलाज तय किया जायेगा. ये भी पढ़ें: सर्पदंश का इलाज करने वाले कृष्ण मंडल को जहरीले सांप चंद्रबोड़ा ने डंसा, हो गयी मौत कैंपस की जांच के निर्देश घटना के तुरंत बाद स्कूल प्रशासन ने वन विभाग (Forest Department) को सूचित किया. वन विभाग की टीम को स्कूल परिसर में बुलाकर उनसे झाड़ियों व संदिग्ध कोनों का निरीक्षण करने और सुरक्षा जांच करने की अपील की गयी है. ये भी पढ़ें: बांकुड़ा : बारिश का मौसम आते ही बढ़ने लगे सर्पदंश के मामले, दहशत में किसान बढ़ती घटनाएं और अभिभावकों की चिंता कुछ दिनों पहले ही कोलकाता के एक अन्य प्रमुख निजी स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र को सांप काटने की समाचार सामने आयी थी. शहर के स्कूलों में लगातार हो रही इन घटनाओं से अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता व्याप्त है. The post ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर के स्कूल में सांप ने शिशु को डंसा appeared first on Naya Vichar.

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Smash the Patriarchy 1 : प्यार-मोहब्बत अपनी जगह,सेल्फ आइडेंटिटी से समझौता नहीं चाहती हैं Gen Z लड़कियां

हमारे देश का संविधान स्त्रीओं को पुरुषों के बराबर ही अधिकार देता है, लेकिन समाज में भेदभाव मौजूद है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. इन परिस्थितियों में देश की युवा पीढ़ी यानी Gen Z क्या सोचती है, इसपर नया विचार एक सीरीज शुरू कर रहा है, जिसमें Gen Z की सोच को सामने लाया जाएगा. इस स्टोरी में इस बात पर चर्चा है कि क्या शादी के बाद लड़कियों को अपना सरनेम बदलना चाहिए? अगर मेरा हैसबैंड मुझे बहुत प्यार करेगा और मेरी सारी जिम्मेदारियां भी उठाएगा, तब भी मैं उसकी सरनेम कैरी नहीं करूंगी. इसकी वजह यह है कि मेरी अपनी आइडेंटिटी है, मैं उस आइडेंटिटी के साथ ही पली बढ़ी हूं. ऐसा कैसे संभव है कि अचानक शादी के बाद मैं अपनी आइडेंटिटी बदल दूं. यह तो मेरी पहचान पर सवाल होगा, इसलिए मैं ऐसा नहीं करूंगी. यह कहना है बिहार के छपरा की रहने वाली सोनम सिंह का. सरनेम बदलना आइडेंटिटी से समझौता है सोनम सिंह एक जेन जी हैं और फिलहाल एक निजी कंपनी में काम करती हैं. उनका कहना है कि मैं जिस फैमिली से आती हूं वहां हमारी मां ने वह सबकुछ किया जो उनसे करवाया गया. उन्होंने यह समझा कि शादी के बाद अपना नाम बदलना (सरनेम) एक रिचुअल है, जिसे उन्हें करना है. उनके पास कोई विकल्प नहीं था, लेकिन मेरी स्थिति वैसी नहीं है. मैं जानती हूं कि मेरी अपनी पहचान है. मैं अपने पति से यह बता दूंगी कि मैं किसी भी परिस्थिति में अपना सरनेम चेंज नहीं करूंगी. अगर वो मुझे इसके लिए फोर्स करेगा, तो फिर मैं अपने रास्ते और वो अपने रास्ते. रांची की सौम्या शाहदेव कहती हैं कि पेट्रियारकी स्त्रीओं को दबाने और उन्हें नियंत्रित करने का एक जरिया है. हम अपनी पहचान खोना नहीं चाहते हैं, इसलिए मैं अपना सरनेम चेंज करने में बिलकुल भी यकीन नहीं रखती हूं. प्रशासन को भी चाहिए कि वो कोई ऐसी व्यवस्था बनाए, ताकि शादी के बाद फीमेल को अपनी आइडेंटिटी के साथ कोई समझौता ना करना पड़े. आखिर कब तक पेट्रियारकी औरतों को दबाने का काम करता रहेगा? सरनेम बदलना है या नहीं यह मेरी च्वाइस रांची की जूही कुमारी कहती हैं कि सरनेम बदलना तो नहीं चाहिए क्योंकि यह आइडेंटिी से जुड़ा मसला है. जहां तक मेरी बात करें तो मेरे नाम के साथ कुमारी जुड़ा है, इसलिए शादी के बाद मैं अपना सरनेम तो जरूर बदलूंगी. हां, यह जरूर ध्यान दूंगी कि कोई ऐसा बंदा मिले जिसका सरनेम मेरा नाम से मैच करता हो, तो मैं उसका सरनेम अपने नाम के साथ लगा लूंगी. जहां तक मेरे अपने सरनेम का सवाल है, तो मैं उसे इसलिए कैरी नहीं करूंगी क्योंकि वो मुझे पसंद नहीं है. परंपरा है, इसलिए सरनेम बदल लूंगी मेजॉरिटी ऑफ जेन जी लड़कियां यह मानती हैं कि सरनेम चेंज करना उनकी आइडेंटिटी से जुड़ा मसला है, इसलिए वो सरनेम चेंज नहीं करेंगी. वहीं कुछ ऐसी लड़कियां भी हैं, जो यह मानती हैं कि यह हमारी परंपरा का हिस्सा है, इसलिए वो सरनेम चेंज कर लेंगी. जमशेदपुर की प्रियंका गोरांई कहती है कि उन्हें इस बात की नाॅलेज है कि यह उनकी पहचान से जुड़ा मसला है, बावजूद इसके वे अपना सरनेम चेंज करेंगी. इसके पीछे वजह यह है कि यह हमारी परंपरा का हिस्सा है. आखिर क्या है Patriarchy जिसका हो रहा है विरोध? Patriarchy यानी पितृसत्ता एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जिसमें पुरुषों के पास प्रमुख शक्ति होती है. प्रसिद्ध नारीवादी इतिहासकार और समाजशास्त्री गर्डा लर्नर (Gerda Lerner) के अनुसार पितृसत्ता परिवार में स्त्रीओं और बच्चों पर पुरुषों के वर्चस्व की अभिव्यक्ति और संस्थागतकरण तथा सामान्य रूप से स्त्रीओं पर पुरुषों के सामाजिक वर्चस्व का विस्तार है. पितृसत्ता की अवधारणा यानी सोच में परिवार, समाज, नेतृत्व तथा वित्तीय स्थिति के हर क्षेत्र में नेतृत्व का अधिकार पुरुषों के पास होता है. इस सोच आधारित समाज में स्त्रीओं को पुरुषों के अधीन माना जाता है और उन्हें एक स्वतंत्र इकाई के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है. इसी सोच के तहत स्त्रीओं को जन्म से पिता, शादी के बाद पति और वृद्धावस्था में पुत्र के अधीन रखा गया है. वर्तमान समय में लड़कियां स्वतंत्र हैं और आर्थिक रूप से भी इंडिपेंडेंट हैं, इस वजह से वे पितृसत्ता का विरोध कर रही हैं. क्या लड़कियों के सरनेम चेंज करने को लेकर देश में है कोई कानून? हिंदुस्तान में चाहे हिंदू मैरिज एक्ट हो या मुस्लिम मैरिज एक्ट उनका निर्माण समाज में मौजूद परंपराओं के आधार पर हुआ है. जो अधिनियम बनाए गए हैं उनका डॉक्यूमेंटेशन यानी दस्तावेजीकरण परंपराओं के आधार पर हुआ है. इस संबंध में झारखंड हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अवनीश रंजन मिश्रा ने बताया कि लड़कियों के सरनेम चेंज करने से संबंधित कोई कानून देश में नहीं है. संविधान ने स्त्रीओं को पुरुषों के बराबर माना है और उन्हें समान अधिकार दिए हैं. इसके साथ ही समाज से लिंग आधारित भेदभाव मिटाने के लिए समय-समय पर कई तरह के कानून भी बनाए गए हैं, जो स्त्रीओं को सशक्त करते हैं. जहां तक बात शादी के बाद सरनेम बदलने की है, तो यह सिर्फ और सिर्फ रूढ़ी और परंपरा आधारित व्यवस्था है, इसका कानून से कोई संबंध नहीं है. ये भी पढ़ें : राहुल गांधी के Smash the Patriarchy नारे के बीच क्यों ट्रेंड कर रहीं शाहबानो? जानिए पूरा मामला The post Smash the Patriarchy 1 : प्यार-मोहब्बत अपनी जगह,सेल्फ आइडेंटिटी से समझौता नहीं चाहती हैं Gen Z लड़कियां appeared first on Naya Vichar.

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होटल से निकलते ही कारोबारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, चार गोली लगी, मौत

जमशेदपुर : चांडिल के टेंथ माइल स्टोन होटल में मीटिंग खत्म हुई और कदमा निवासी व होटल कारोबारी निखार सबलोक अपने दोस्तों के साथ बाहर निकले. अभी वह होटल की सीढ़ियों से उतरकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ ही रहे थे कि पहले से घात लगाये बैठे दो अपराधियों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. अचानक हुई फायरिंग से होटल परिसर में अफरा-तफरी मच गयी. निखार को चार गोलियां लगीं. वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों अपराधी मौके से फरार हो गये. दोस्त निखार को लेकर टीएमएच अस्पताल पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. निखार सबलोक (फाइल फोटो). घटनास्थल से मिले 9 खोखे घटना की सूचना मिलते ही चांडिल पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस ने घटनास्थल से 9 खोखे बरामद किया है. अपराधियों ने किस वजह से निखार की हत्या की और वारदात के पीछे कौन लोग हैं, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है. भाजपा से भी जुड़े थे निखार सबलोक निखार सबलोक होटल कारोबारी होने के साथ-साथ हिंदुस्तानीय जनता पार्टी से भी जुड़े हुए थे. दिनदहाड़े होटल परिसर में हुई इस हत्या से इलाके में सनसनी फैल गयी है. वहीं, मिली जानकारी के मुताबिक निखार विधायक सरयू राय के भी करीबी बताए जाते हैं. हालांकि, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. The post होटल से निकलते ही कारोबारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, चार गोली लगी, मौत appeared first on Naya Vichar.

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अंतिम सोमवारी पर प्रदोष काल में करें 5 आसान काम, शिवजी दूर करेंगे हर कष्ट

Sawan 2026 Last Somvari Pradosh Puja: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज सावन मास का आखिरी सोमवार है. शिव पुराण के अनुसार, इस दिन प्रदोष काल में कुछ काम करने से भगवान शिव समेत माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होगी. साथ ही शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संकट से छुटकारा मिल सकता है. पंचांग के अनुसार, आज यानी 24 अगस्त को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 14 मिनट से रात 8 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. यानी प्रदोष काल में शिव जी की पूजा के लिए 2 घंटे 21 मिनट का समय मिलेगा. ऐसे में इस दिन दौरान पांच आसान काम करने से भगवान शिव समेत माता पार्वती की विशेष कृपा भी प्राप्त होगी. प्रदोष काल में शिव जी की पूजा क्यों होती है खास? शिव पुराण के के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती के साथ रहते हैं. इसलिए इस दौरान उनकी पूजा करने से हर प्रकार की मनोकामना पूरी होती है. शास्त्रों में कहा गया है कि सावन सोमवार के दिन प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करने से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से भी छुटकारा मिल जाता है. शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संकट दूर होते हैं. इसके अलावा सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं और घर-परिवार खुशहाल रहता है. इतना ही नहीं, मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी प्रदोष काल की पूजा बेहद खास मानी गई है. ये भी पढ़ें: सावन की अंतिम सोमवारी: महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय, आर्थिक तंगी और विवाह की बाधाएं होंगी दूर! प्रदोष काल में शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं? जल या गंगाजल- सावन के आखिरी सोमवार पर प्रदोष काल में शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं. तांबे के लोटे में जल या गंगाजल भरकर उसमें कुछ काले तिल मिलाएं और शिवलिंग पर अर्पित करें. इससे शारीरिक कष्ट दूर होता है. बेलपत्र और अक्षत- प्रदोष काल में शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं. इसलिए प्रदोष काल में शिवलिंग पर बिना कटा-फटा बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए. इस दौरान ध्यान रखना चाहिए कि उसका डंठल अपनी ओर हो. गन्ने का रस या केसर मिला हुआ दूध- प्रदोष काल की पूजा में शिवलिंग पर गन्ने का रस या केसर मिला हुआ गाय का कच्चा दूध अर्पित करने से धन-संकट से छुटकारा मिल सकता है. भांग, धतूरा और आक के फूल- पुराणों के अनुसार, भगवान शिव को भांग, आक के फूल और धतूरा अत्यंत प्रिय हैं. इसलिए प्रदोष काल की पूजा के दौरान इन चीजों को शिवलिंग पर चढ़ाने से भोलेनाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. ये भी पढ़ें: सावन की अंतिम सोमवारी पर सजा बाबा बैद्यनाथ का दरबार, गूंजा ‘हर-हर महादेव’ सफेद चंदन या भस्म- प्रदोष काल में शिवलिंग पर सफेद चंदन या भस्म चढ़ाने से मन शांत रहता है. मन की नकारात्मक ऊर्जा होती है. साथ ही गुस्सा कम आता है. इसके अलावा मान-सम्मान मिलता है. The post अंतिम सोमवारी पर प्रदोष काल में करें 5 आसान काम, शिवजी दूर करेंगे हर कष्ट appeared first on Naya Vichar.

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