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Author name: Vinod Jha

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अब्दुल्ला शफीक ने 49 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, वेस्टइंडीज में ऐसा करने वाले पहले पाकिस्तानी बने

Abdullah Shafique Century: पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज अब्दुल्ला शफीक ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार बल्लेबाजी करते हुए इतिहास रच दिया. वेस्टइंडीज के पोर्ट ऑफ स्पेन में स्पोर्ट्से जा रहे मुकाबले की पहली पारी में शफीक ने नाबाद 160 रन बनाए और पाकिस्तान को पहली पारी में 43 रन की अहम बढ़त दिलाई. तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे शफीक ने 323 गेंदों का सामना किया और अपनी पारी में 15 चौके और 3 छक्के लगाए. इस शानदार पारी के साथ वह इतिहास रचने वाले पाकिस्तान के पांचवें बल्लेबाज बन गए, जिन्होंने वेस्टइंडीज की धरती पर टेस्ट की एक पारी में 150 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं. 49 साल बाद हुआ यह कारनामा वेस्टइंडीज में टेस्ट मैच की एक पारी में 150 से ज्यादा रन बनाने वाले शफीक 49 साल बाद पहले पाकिस्तानी बल्लेबाज बने हैं. इससे पहले माजिद खान ने मार्च 1977 में जॉर्जटाउन टेस्ट की दूसरी पारी में 167 रन बनाए थे. वेस्टइंडीज में टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तानी बल्लेबाजों के सर्वोच्च स्कोर बल्लेबाज रन गेंद चौके छक्के पारी मैदान वर्ष हनीफ मोहम्मद 337 – 24 0 तीसरी ब्रिजटाउन 1958 वजीर मोहम्मद 189 – 22 0 दूसरी पोर्ट ऑफ स्पेन 1958 माजिद खान 167 – 25 0 तीसरी जॉर्जटाउन 1977 अब्दुल्ला शफीक 160* 323 15 3 दूसरी पोर्ट ऑफ स्पेन 2026 सईद अहमद 150 – 16 0 पहली जॉर्जटाउन 1958 आसिफ इकबाल 135 – 20 1 चौथी किंग्स्टन 1977 इंजमाम-उल-हक 135 254 20 0 पहली जॉर्जटाउन 2000 तौफीक उमर 135 314 13 0 तीसरी बासेटेरे 2011 इमरान नजीर 131 180 20 0 तीसरी ब्रिजटाउन 2000 अजहर अली 127 334 8 2 पहली रोज़ो 2017 हनीफ मोहम्मद के नाम है ये रिकॉर्ड वेस्टइंडीज में किसी पाकिस्तानी बल्लेबाज का सर्वोच्च टेस्ट स्कोर हनीफ मोहम्मद के नाम दर्ज है. उन्होंने जनवरी 1958 में ब्रिजटाउन टेस्ट की दूसरी पारी में 337 रन बनाए थे. वहीं, वेस्टइंडीज में टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर ब्रायन लारा के नाम है. उन्होंने अगस्त 2004 में इंग्लैंड के खिलाफ सेंट जॉन्स टेस्ट में नाबाद 400 रन बनाए थे. वेस्टइंडीज में टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारियां खिलाड़ी देश रन गेंद चौके छक्के विपक्षी टीम मैदान वर्ष ब्रायन लारा वेस्टइंडीज 400* 582 43 4 इंग्लैंड सेंट जॉन्स 2004 ब्रायन लारा वेस्टइंडीज 375 538 45 0 इंग्लैंड सेंट जॉन्स 1994 गैरी सोबर्स वेस्टइंडीज 365* – 38 0 पाकिस्तान किंग्स्टन 1958 हनीफ मोहम्मद पाकिस्तान 337 – 24 0 वेस्टइंडीज ब्रिजटाउन 1958 एंडी सैंडहम इंग्लैंड 325 640 28 0 वेस्टइंडीज किंग्स्टन 1930 क्रिस गेल वेस्टइंडीज 317 483 37 3 दक्षिण अफ्रीका सेंट जॉन्स 2005 लॉरेंस रो वेस्टइंडीज 302 430 36 1 इंग्लैंड ब्रिजटाउन 1974 रामनरेश सरवन वेस्टइंडीज 291 452 30 2 इंग्लैंड ब्रिजटाउन 2009 जॉर्ज हेडली वेस्टइंडीज 270* – 30 0 इंग्लैंड किंग्स्टन 1935 डेनिस एमिस इंग्लैंड 262* 563 40 1 वेस्टइंडीज किंग्स्टन 1974 रामनरेश सरवन वेस्टइंडीज 261* 402 32 0 बांग्लादेश किंग्स्टन 2004 कॉनराड हंटे वेस्टइंडीज 260 – 28 1 पाकिस्तान किंग्स्टन 1958 बाबर आजम के साथ की 183 रन की साझेदारी अब्दुल्ला शफीक ने कप्तान बाबर आजम के साथ दूसरे विकेट के लिए 224 गेंदों में 183 रन की साझेदारी की. बाबर आजम ने 147 गेंदों पर 88 रन बनाए. वह शतक से चूक गए, लेकिन उनकी पारी ने पाकिस्तान को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. ये भी पढ़ें: 1317 दिन से टेस्ट शतक का इंतजार, अब रन आउट के रिकॉर्ड ने बढ़ाई बाबर आजम की मुश्किलें The post अब्दुल्ला शफीक ने 49 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, वेस्टइंडीज में ऐसा करने वाले पहले पाकिस्तानी बने appeared first on Naya Vichar.

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ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी बातचीत की उम्मीद, ट्रंप बोले- 48 घंटे में साफ होगी पूरी तस्वीर

Iran US Talks : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत में “काफी प्रगति” हुई है और अगले 48 घंटे में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. उन्होंने कहा कि ईरान ने खुद अमेरिका से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई है और समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. कैलिफोर्निया से लास वेगास रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अगले 48 घंटे में सब कुछ साफ हो जाएगा. ईरान बातचीत करना चाहता है और समझौता करना उसके लिए समझदारी होगी.” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ईरान की ओर से किस स्तर पर संपर्क किया गया या संभावित समझौते में क्या शर्तें होंगी. होर्मुज स्ट्रेट पर भी दिया बड़ा संकेत ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच एक अंतरिम समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में है. उनके मुताबिक, यदि समझौता हो जाता है तो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट जल्द खोला जा सकता है. उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान समझौते से पीछे हटता है तो उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे. ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा. क्यों खास है यह समझौता? होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग है. दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक वित्तीय स्थिति पर पड़ता है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने और समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने के लिए बातचीत तेज हो गई है. अब पूरी दुनिया की नजर अगले 48 घंटों पर है, जब यह साफ हो सकता है कि दोनों देशों के बीच समझौता होता है या पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ता है. Also read : शेख हसीना का यूनुस प्रशासन पर हमला, बोलीं- छात्रों के आंदोलन को हिंसक बनाकर हथियाई गई सत्ता The post ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी बातचीत की उम्मीद, ट्रंप बोले- 48 घंटे में साफ होगी पूरी तस्वीर appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC विवाद पर इंडिया गठबंधन की बैठक, सरकार से एसआईटी गठन और छात्रों से वार्ता की मांग

JPSC Student Protest: जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच इंडिया गठबंधन में शामिल दलों ने बुधवार को रांची स्थित हिंदुस्तानीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य कार्यालय सभागार में सर्वदलीय बैठक की. बैठक में प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए विवाद, छात्रों की मांगों और राज्य में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश महासचिव इरफान अहमद अंसारी ने की. एसआईटी गठन की प्रमुख मांग बैठक में सर्वसम्मति से झारखंड प्रशासन से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की गई. गठबंधन के नेताओं का कहना था कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच होने से छात्रों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान होगा और भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास बहाल किया जा सकेगा. विश्वसनीय एजेंसी से परीक्षा कराने की मांग बैठक में यह भी मांग उठी कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन किसी विश्वसनीय घरेलू एजेंसी के माध्यम से कराया जाए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे. नेताओं ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार विवाद सामने आने से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, इसलिए प्रशासन को स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए. छात्रों की समस्याओं पर भी हुई चर्चा बैठक में केवल परीक्षा विवाद ही नहीं, बल्कि छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई. नेताओं ने प्रशासन से छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की. उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए. प्रशासन से संवाद कर आंदोलन समाप्त कराने की अपील इंडिया गठबंधन के नेताओं ने प्रशासन से आंदोलनरत छात्रों के साथ जल्द से जल्द संवाद स्थापित करने की अपील की. बैठक में कहा गया कि बातचीत के माध्यम से छात्रों की मांगों का समाधान निकालना ही सबसे बेहतर रास्ता है. गठबंधन ने प्रशासन से विशेष हस्तक्षेप कर आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने की मांग की. 6 अगस्त को मंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 6 अगस्त की सुबह 9 बजे इंडिया गठबंधन और विभिन्न छात्र संगठनों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल राज्य के श्रम एवं उद्योग मंत्री से मुलाकात करेगा. प्रतिनिधिमंडल छात्रों की मांगों और बैठक में लिए गए निर्णयों से प्रशासन को अवगत कराएगा तथा शीघ्र समाधान की मांग करेगा. इस प्रतिनिधिमंडल में गठबंधन से जुड़े विभिन्न दलों के प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहेंगे. कई दलों और छात्र संगठनों की रही भागीदारी बैठक में कांग्रेस, भाकपा, माकपा, तृणमूल कांग्रेस, माले लोक सेवा समिति, मुस्लिम मजलिसे उलेमा, आइसा, एआईएसएफ, एआईबीवाईएफ और एसएफआई सहित कई नेतृत्वक और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. राजद के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र महतो, कांग्रेस के योगेंद्र सिंह, भाकपा (माले) के आर.एन. सिंह, भाकपा के अजय कुमार और कृष्णा कुमार वर्मा, एआईएमएमयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल्लाह अजहर समेत कई नेताओं ने अपने विचार रखे. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्रों के आंदोलन पर बोले राधाकृष्ण किशोर, प्रशासन पर रखें भरोसा बैठक में छात्र संगठन के ये लोग रहे शामिल छात्र संगठनों की ओर से ओजस्वी राज, अमन, दानिश, त्रिलोकी नाथ, हिमांशु सिंह, अफजल दुर्रानी, एहतेशाम परवीन, तेजू मिर्धा सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे. बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों के भविष्य की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसी उद्देश्य से प्रशासन को निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और छात्रों के साथ सकारात्मक संवाद की दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्रों से वार्ता के लिए प्रशासन ने बनाई चार मंत्रियों की कमेटी, अपर मुख्य सचिव अजय सिंह भी होंगे शामिल The post JPSC-JSSC विवाद पर इंडिया गठबंधन की बैठक, प्रशासन से एसआईटी गठन और छात्रों से वार्ता की मांग appeared first on Naya Vichar.

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Lock Upp 2 Winner: शिवांगी जोशी को पीछे छोड़ श्रेया कालरा बनीं ‘लॉक अप 2’ की विनर, जीते 1 करोड़ रुपए

Lock Upp: Sach Ya Sazaa Winner: करीब 35 दिन तक चले ड्रामा, इमोशनल खुलासों, तगड़े टास्क और हाई-वोल्टेज फाइट्स के बाद आखिरकार ‘लॉक अप: सच या सजा’ को अपना विनर मिल गया है. श्रेया कालरा ने ग्रैंड फिनाले में बाजी मारते हुए ट्रॉफी अपने नाम कर ली, जबकि शिवांगी जोशी रनर-अप रहीं. पूरे सीजन श्रेया अपने बेबाक अंदाज, दमदार गेम, विवादों और बिना डरे अपनी बात रखने की वजह से सबसे अलग नजर आईं. कई बार उन्हें ट्रोल भी किया गया, लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना किया और आखिर में ट्रॉफी अपने नाम कर ली. फिनाले में इन 5 कंटेस्टेंट्स के बीच थी टक्कर View on Instagram ग्रैंड फिनाले में श्रेया कालरा, शिवांगी जोशी, राम कपूर, शिल्पा शिंदे और योगेश रावत के बीच ट्रॉफी की कांटे की टक्कर देखने को मिली. आखिरी टास्क, ज्यूरी के सवाल और पूरे सीजन के प्रदर्शन के बाद फाइनली श्रेया कालरा को इस सीजन का विनर अनाउंस किया गया. वहीं शिवांगी जोशी रनर-अप रहीं. रिजल्ट सुनते ही श्रेया काफी इमोशनल हो गईं और अपनी खुशी जाहिर करती नजर आईं. ट्रॉफी के साथ मिला ₹1 करोड़ का कैश प्राइज श्रेया कालरा ने ‘लॉक अप: सच या सजा’ की ट्रॉफी जीतने के साथ ₹1 करोड़ का कैश प्राइज भी अपने नाम किया. शुरुआत से ही गेम में रहीं सबसे आगे View on Instagram श्रेया कालरा ने शो की शुरुआत से ही अपने बेखौफ अंदाज से सभी का ध्यान खींचा. उन्होंने हर टास्क में पूरी ताकत लगाई और अपनी राय खुलकर रखी. कई बार उनके फैसलों पर सवाल भी उठे, लेकिन उन्होंने कभी अपना गेम नहीं बदला. यही कॉन्फिडेंस उन्हें फिनाले तक लेकर आया. हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच भी रहीं सबसे आगे पूरे सीजन श्रेया कालरा कई बड़े विवादों का हिस्सा रहीं. राम कपूर के साथ पर्सनल बाउंड्री को लेकर बहस, आकांक्षा चौधरी संग हाई-वोल्टेज लड़ाई, कुशाल टंडन के DM वाला मामला और कई तीखी नोकझोंक ने उन्हें लगातार सुर्खियों में रखा. हालांकि इन सबके बीच उन्होंने गेम पर अपनी पकड़ मजबूत रखी और आखिर में ट्रॉफी अपने नाम कर ली. ये भी पढ़ें: Lock Upp 2 की फाइनलिस्ट श्रेया कालरा कौन हैं? TikTok से शुरू हुआ सफर, आज हैं शो की सबसे चर्चित कंटेस्टेंट The post Lock Upp 2 Winner: शिवांगी जोशी को पीछे छोड़ श्रेया कालरा बनीं ‘लॉक अप 2’ की विनर, जीते 1 करोड़ रुपए appeared first on Naya Vichar.

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2 साल बाद बंद कैमरे के साथ जनता के सामने आईं शेख हसीना, जानिए क्यों नहीं दिखाया चेहरा

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को करीब दो साल बाद पहली बार वर्चुअल माध्यम से लोगों को संबोधित किया. लगभग 25 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने सिर्फ ऑडियो के जरिए अपनी बात रखी और कैमरा बंद रखा. लेकिन सवाल है कि शेख हसीना का कैमरा बंद क्यों था. इसके पीछे कोई खास वजह है या कुछ और? इसके साथ साथ यह भी जानेंगे कि क्या इतिहास में कभी ऐसा हुआ है. कैमरा बंद रखने के पीछे क्या थीं वजहें? सुरक्षा और लोकेशन उजागर होने का खतरा शेख हसीना आखिरी बार 5 अगस्त 2024 को सार्वजनिक रूप से दिखाई दी थीं, जब वे ढाका से हिंदुस्तान पहुंची थीं. इसके बाद से उनके किसी सुरक्षित और गोपनीय स्थान पर रहने की समाचारें सामने आती रही हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वीडियो के जरिए सामने आने पर उनके बैकग्राउंड, लोकेशन या सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने का जोखिम था. इसलिए उन्होंने केवल ऑडियो के माध्यम से संबोधन किया. हिंदुस्तान-बांग्लादेश संबंधों की संवेदनशीलता शेख हसीना के इस संबोधन से पहले ही बांग्लादेश कह चुका है कि हिंदुस्तान की धरती से शेख हसीना की नेतृत्वक गतिविधियां दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं. इसी संदर्भ में हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी इस कार्यक्रम से खुद को अलग बताया है.ऐसे में जानकारों का मानना है कि यदि हसीना वीडियो के जरिए कोई बड़ा नेतृत्वक संदेश देतीं तो कूटनीतिक विवाद बढ़ने की आशंका रहती. कानूनी और कूटनीतिक दबाव बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है. उन्हें एक मामले में सजा सुनाए जाने की समाचारें हैं और बांग्लादेश प्रशासन द्वारा उनका प्रत्यर्पण भी मांगा गया है. ऐसे में कैमरे पर सार्वजनिक रूप से आने से कानूनी और कूटनीतिक विवाद और गहरा सकता था. इसी कारण उन्होंने वीडियो के बजाय केवल ऑडियो के माध्यम से अपनी बात रखी. क्या पहले भी किसी नेता ने कैमरा बंद रखकर जनता को संबोधित किया है? इतिहास में ऐसा कब-कब हुआ आम तौर पर राष्ट्राध्यक्ष या पूर्व प्रधानमंत्री वीडियो के जरिए ही जनता को संबोधित करते हैं ताकि उनकी पहचान और संदेश की विश्वसनीयता बनी रहे. हालांकि, सुरक्षा, नेतृत्वक या असाधारण परिस्थितियों में कुछ नेताओं ने बिना कैमरे के भी संदेश जारी किए हैं. इमरान खान: जेल से AI की मदद से पहुंचा संदेश पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं. इस दौरान वे कई बार अपने वकीलों के जरिए लिखित संदेश जारी करते रहे. फरवरी 2024 के आम चुनाव के दौरान उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने उनके लिखित संदेशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी आवाज में बदलकर ऑडियो संदेश के रूप में जारी किया. उस समय यह दुनिया के पहले बड़े नेतृत्वक अभियानों में से एक माना गया, जिसमें जेल में बंद नेता का AI-जनरेटेड ऑडियो चुनाव प्रचार में इस्तेमाल हुआ. फिदेल कास्त्रो: बीमारी के बाद लिखित संदेशों का सहारा क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने 2006 में गंभीर रूप से बीमार होने के बाद सत्ता अपने भाई राउल कास्त्रो को सौंप दी थी.इसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से कैमरों के सामने नहीं आए. इस दौरान उन्होंने ‘Reflections’ नाम से लेख लिखकर अपने विचार साझा किए, जिन्हें क्यूबा के प्रशासनी अखबार Granma में प्रकाशित किया जाता था. यही उनके आधिकारिक सार्वजनिक संदेश माने जाते थे. सद्दाम हुसैन: फरारी के दौरान ऑडियो टेप 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के बाद सद्दाम हुसैन कई महीनों तक अंडरग्राउंड रहे. इस दौरान उन्होंने वीडियो के बजाय रिकॉर्डेड ऑडियो संदेश जारी किए, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने प्रसारित किया. इन संदेशों में वे अपने समर्थकों से अमेरिकी सेना का विरोध जारी रखने की अपील करते थे. मुअम्मर गद्दाफी: फोन कॉल के जरिए संबोधन 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान जब मुअम्मर गद्दाफी की सत्ता संकट में थी और उन्हें छिपकर रहना पड़ रहा था, तब उन्होंने कई बार टेलीविजन चैनलों को फोन कॉल के जरिए ऑडियो संदेश दिए. सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपनी लोकेशन या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया. मोज्तबा खमेनेई: सत्ता संभालने के बाद भी कैमरे से दूरी पारंपरिक रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता नवरोज (फारसी नववर्ष) के अवसर पर राष्ट्र के नाम टेलीविजन पर संबोधन देते रहे हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. नवरोज के मौके पर मोज्तबा खमेनेई की ओर से एक लिखित संदेश जारी किया गया, जिसे प्रशासनी मीडिया ने प्रसारित किया. इस दौरान न तो उनका कोई वीडियो जारी किया गया और न ही कोई ऑडियो संदेश सामने आया. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके कैमरे पर न आने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं. रिपोर्टों में कहा गया कि क्षेत्रीय युद्ध, सुरक्षा कारणों और उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया. ये भी पढ़ें : सड़क पर Gen Z का जलवा, लेकिन संसद में कितनी बुलंद है नई पीढ़ी की आवाज? The post 2 साल बाद बंद कैमरे के साथ जनता के सामने आईं शेख हसीना, जानिए क्यों नहीं दिखाया चेहरा appeared first on Naya Vichar.

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पहले दस्तावेज दें, फिर दूंगी पूरा जवाब… हॉकी इंडिया से भिड़ी असुंता लकड़ा

हिंदुस्तानीय स्त्री हॉकी टीम की पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा ने हॉकी इंडिया की ओर से मिले कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा बताया है. साथ ही कहा कि हॉकी इंडिया की आचरण समिति ने नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया. असुंता लकड़ा ने नौ पन्नों का जवाब आचरण समिति के अध्यक्ष को भेजा है. उन्होंने कहा कि पूर्व खिलाड़ी अलबेला रानी टोप्पो की शिकायत में लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. समिति पर उठाए सवाल लकड़ा का कहना है कि हॉकी इंडिया के नियमों के मुताबिक किसी भी मामले की जांच शुरू करने से पहले अध्यक्ष की मंजूरी जरूरी होती है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. इसलिए उन्होंने पूछा है कि आखिर समिति ने किस आधार पर कार्रवाई शुरू की. उन्होंने यह भी कहा कि हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर आचरण समिति के सिर्फ दो सदस्यों के नाम हैं, जबकि नियमों के मुताबिक इसमें तीन सदस्य होने चाहिए. ये भी पढ़ें: ‘अपनी औकात में रहो’, हॉकी इंडिया महासचिव ने असुंता लकड़ा को धमकाया मांगे शिकायत से जुड़े सभी कागजात असुंता लकड़ा ने समिति से शिकायत की पूरी कॉपी और उससे जुड़े सभी दस्तावेज देने की मांग की है. उनका कहना है कि उन्हें जो कागजात मिले हैं, वे अधूरे हैं और कई हिस्से पढ़े भी नहीं जा सकते. ऐसे में सही जवाब देना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज मिलने के बाद उन्हें जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए. साथ ही जब तक पूरा मामला साफ नहीं हो जाता, तब तक उनके खिलाफ कोई फैसला या कार्रवाई न की जाए. क्या है मामला? पिछले महीने झारखंड की पूर्व हॉकी खिलाड़ी अलबेला रानी टोप्पो की शिकायत के बाद हॉकी इंडिया ने असुंता लकड़ा को कारण बताओ नोटिस भेजा था. इससे पहले लकड़ा ने झारखंड हॉकी से जुड़े एक मामले में कथित यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी. इसके बाद यह विवाद और चर्चा में आ गया. असुंता लकड़ा ने कहा कि अगर झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई, तो वह संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी. ये भी पढ़ें: CWG 2026: मीराबाई से नीरज चोपड़ा तक… किस खिलाड़ी को मिली सबसे ज्यादा प्रशासनी फंडिंग? देखें पूरी लिस्ट The post पहले दस्तावेज दें, फिर दूंगी पूरा जवाब… हॉकी इंडिया से भिड़ी असुंता लकड़ा appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: छात्रों से वार्ता के लिए सरकार ने बनाई चार मंत्रियों की कमेटी, अपर मुख्य सचिव अजय सिंह भी होंगे शामिल

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट JPSC Student Protest: जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए झारखंड प्रशासन ने चार मंत्रियों की एक कमेटी का गठन किया है. प्रशासन का उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर चर्चा करना और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है. चार मंत्री करेंगे छात्रों से संवाद प्रशासन की ओर से गठित कमेटी में मंत्री दीपिका पांडे सिंह, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, मंत्री संजय यादव और मंत्री चमरा लिंडा को शामिल किया गया है. यह कमेटी आंदोलनरत छात्रों से संपर्क कर उनकी मांगों पर विस्तार से बातचीत करेगी और प्रशासन के समक्ष उनकी बात रखेगी. अपर मुख्य सचिव अजय सिंह भी कमेटी में प्रशासन ने प्रशासनिक स्तर पर भी इस पहल को मजबूती देने के लिए अपर मुख्य सचिव अजय सिंह को कमेटी में शामिल किया है. माना जा रहा है कि उनके शामिल होने से वार्ता के दौरान प्रशासनिक और नीतिगत पहलुओं पर भी प्रभावी चर्चा हो सकेगी. ‘अब छात्रों के फैसले का इंतजार’ मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कमेटी के गठन की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रशासन बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि अब यह छात्रों पर निर्भर करता है कि वे कब वार्ता के लिए तैयार होते हैं. प्रशासन चाहती है कि संवाद के माध्यम से सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकले. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्रों के आंदोलन पर बोले राधाकृष्ण किशोर, प्रशासन पर रखें भरोसा संवाद से समाधान की कोशिश पिछले कई दिनों से जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं. इसी बीच प्रशासन ने बातचीत का रास्ता अपनाते हुए मंत्रियों की कमेटी गठित की है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आंदोलनरत छात्र प्रशासन के वार्ता प्रस्ताव को कब स्वीकार करते हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत कब शुरू होती है. यदि वार्ता होती है, तो इससे लंबे समय से चल रहे गतिरोध के समाप्त होने की उम्मीद भी बढ़ सकती है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: सीएम हाउस से छात्रों को आया संदेश, पांच लोगों के प्रतिनिधि से बात करेगी प्रशासन The post JPSC Student Protest: छात्रों से वार्ता के लिए प्रशासन ने बनाई चार मंत्रियों की कमेटी, अपर मुख्य सचिव अजय सिंह भी होंगे शामिल appeared first on Naya Vichar.

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‘बांग्लादेश बना दूसरा पाकिस्तान, ISI को मिली खुली छूट’: शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद का दावा

सजीब वाजेद ने जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा- UN ने मृतकों की संख्या 1,400 बताई है, जबकि प्रशासनी आंकड़ा लगभग 800 का है. उन्होंने पूछा कि अतिरिक्त 600 लोग कौन हैं और UN को यह सूची कहां से मिली? उन्होंने आगे कहा- “अवामी लीग के वकीलों द्वारा UN को कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद अब तक नामावली प्रदान नहीं की गई है. UN का आकलन केवल 15 अगस्त 2024 तक का है, जबकि हिंसा और मौतें उसके बाद भी जारी रहीं.” उपद्रवियों को ‘सुरक्षा कवच’ देने का आरोप पूर्व अंतरिम प्रशासन पर हमला बोलते हुए वाजेद ने कहा कि यूनुस प्रशासन का पहला काम ‘इंडेम्निटी बिल’ पारित करना था. इसके तहत प्रदर्शनकारियों को आम नागरिकों, अवामी लीग के नेताओं और पुलिसकर्मियों की हत्या के मामलों में पूर्ण कानूनी सुरक्षा दे दी गई. उन्होंने इसे मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का सीधा उल्लंघन बताया. हजारों नेता-कार्यकर्ता बिना ट्रायल के जेल में बंद अवामी लीग के नेता ने दावा किया कि अगस्त 2024 के बाद से पार्टी के हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना किसी मुकदमे, निष्पक्ष सुनवाई या जमानत के हिरासत में रखा गया है. जेल में बंद कई नेताओं की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है. हिरासत के दौरान कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. हिंदुस्तान की सुरक्षा पर गंभीर चिंता हिंदुस्तान के लिए सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हुए वाजेद ने कहा कि सीमा पार बदलता घटनाक्रम हिंदुस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय होना चाहिए. उनके अनुसार, आईएसआई जैसी एजेंसियों की मौजूदगी से हिंदुस्तान के पूर्वी हिस्से में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है. हिंदुस्तान प्रशासन ने शहीना के प्रेस कॉन्फ्रेंस से साधी दूरी शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम को लेकर हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह आयोजन एक निजी मीडिया संस्था द्वारा आयोजित किया गया है. हिंदुस्तान प्रशासन का इससे कोई लेना-देना नहीं है और न ही प्रशासन इसमें व्यक्त किए गए किसी विचार का समर्थन करती है. ये भी पढ़ें: भावुक हुईं शेख हसीना, बोलीं- मुझे बांग्लादेश से दूर किया गया, लेकिन अपने लोगों से नहीं The post ‘बांग्लादेश बना दूसरा पाकिस्तान, ISI को मिली खुली छूट’: शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद का दावा appeared first on Naya Vichar.

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संबित पात्रा का पलटवार, कहा- झारखंड के बच्चों का दर्द समझें राहुल गांधी; मासूमों के कंधे पर बंदूक रखकर न करें राजनीति

बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा, “झारखंड के शिशु भी शिशु ही हैं. वे भी विरोध कर रहे हैं. राहुल गांधी को झारखंड के कुछ बच्चों से भी बात करनी चाहिए. उन्हें उनका दर्द और तकलीफ समझनी चाहिए… इस चुनिंदा रवैये के कारण, जहां झारखंड के युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है, राहुल गांधी इस मुद्दे को अपनी सुविधा के अनुसार दबा रहे हैं. वे झारखंड क्यों नहीं जा रहे हैं?” पात्रा ने राहुल गांधी को बताया झूठ का पुलिंदा पात्रा ने कहा, “आज जो शिशु राहुल गांधी के साथ थे, उनसे मैं बहुत प्यार से कहना चाहता हूं: निडर रहें. हम उस झूठी कहानी और ‘झूठ के पुलिंदे’ को बेनकाब करना चाहते हैं जिसे राहुल गांधी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, और उस चुनिंदा नजरिए को भी जो उन्होंने अपनाया है. देश के बच्चों को निडर रहना चाहिए. जब भी आंदोलन या ऐसी किसी चीज की जरूरत हो, तो उससे डरना नहीं चाहिए.” प्रेस ब्रीफिंग राहुल गांधी के लिए है, बच्चों के लिए नहीं : पात्रा बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा, “कुछ देर पहले, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कुछ बातें कहीं. उनके साथ वे शिशु भी थे जिन्होंने 20 तारीख को दिल्ली में ‘संसद मार्च’ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. मैं बहुत साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि मैं जो प्रेस कॉन्फ्रेंस या ब्रीफिंग अभी कर रहा हूं, वह राहुल गांधी के लिए है, उन बच्चों के लिए नहीं; आखिरकार, शिशु तो शिशु ही होते हैं. वे हमारे देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं.” जंतर-मंतर पर कोई फायरिंग नहीं हुई : संबित पात्रा जंतर-मंतर पर फायरिंग के आरोप का जवाब देते हुए पात्रा ने कहा- “सबसे पहले, मैं फिर से वही बात दोहराना चाहता हूं जो बीजेपी ने इसी मंच से और सदन के बाहर भी बहुत साफ तौर पर कही है कि 20 तारीख को दिल्ली में ‘संसद मार्च’ विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई गोली नहीं चली थी. हमने उस समय भी पूरी जिम्मेदारी के साथ यही बात कही थी, क्योंकि यह एक संवेदनशील मुद्दा है.” जब गृह मंत्री के विभाग पर चर्चा होगी, तो शाह निश्चित रूप से संसद में मौजूद रहेंगे : पात्रा बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा, “राहुल गांधी का यह कहना कि अमित शाह सदन में नहीं आ रहे हैं. राहुल जी, क्या आप सदन को चलने भी दे रहे हैं? राहुल गांधी और उनके सांसद इतना हंगामा करते हैं कि सदन को दो मिनट के भीतर ही स्थगित करना पड़ता है. जिस विभाग पर चर्चा हो रही होती है, उसके प्रभारी मंत्री हमेशा मौजूद रहते हैं. जब गृह मंत्री के विभाग पर चर्चा होती है, तो वे निश्चित रूप से मौजूद रहेंगे, और वे हैं भी.” ये न सोचें कोई इस देश के बच्चों को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रहा है : पात्रा राहुल गांधी पर हमला करते हुए पात्रा ने कहा, “दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर नैरेटिव सेट करने की यह कोशिश नेतृत्व में उचित नहीं है. मुस्कान नाम की युवती के बारे में बात करते हुए पात्रा ने कहा- चाहे आप मुस्कान शर्मा हों या मुस्कान खान, आप हमारे देश की बेटी हैं. यह देश ‘सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास’ के सामूहिक प्रयास से आगे बढ़ता है. इसलिए, राहुल गांधी ने जो बांटने वाला एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश की है, वह पूरी तरह गलत है. कभी यह न सोचें कि कोई इस देश के बच्चों को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रहा है.” ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह को बताया डरपोक, कहा-गुंडे भेजकर छात्रों से मंगवा रहे हैं माफी The post संबित पात्रा का पलटवार, कहा- झारखंड के बच्चों का दर्द समझें राहुल गांधी; मासूमों के कंधे पर बंदूक रखकर न करें नेतृत्व appeared first on Naya Vichar.

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“यह वो बांग्लादेश नहीं, जिसके लिए 30 लाख लोगों ने दी शहादत’, वर्चुअल संबोधन में छलका शेख हसीना का दर्द

Sheikh Haseena : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने करीब दो साल बाद सार्वजनिक रूप से मीडिया से बातचीत की. उन्होंने दिल्ली से फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC South Asia) के कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उनका कैमरा बंद रहा. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्हें अपने देश से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन वह कभी भी बांग्लादेश के लोगों से अलग नहीं हुईं. शेख हसीना ने कहा, “मैं सिर्फ पांच बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहने वाली नेता के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में भी आपसे बात कर रही हूं. मैंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश के लोगों के बीच बिताया है. मुझे देश छोड़ने पर मजबूर किया गया, लेकिन मैं कभी अपने लोगों से अलग नहीं हुई.” परिवार को याद कर हुईं भावुक अपने संबोधन की शुरुआत में शेख हसीना ने राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान, स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और 15 अगस्त 1975 को मारे गए अपने परिवार के सदस्यों को याद किया. इस दौरान वह भावुक हो गईं. उन्होंने कहा, “मुझे गहरे दुख के साथ अपने परिवार के उन सदस्यों की याद आती है, जिन्हें मैंने 15 अगस्त 1975 को खो दिया था. आज मेरे भाई का जन्मदिन भी है. वह मुझसे दो साल छोटा था और एक महान स्वतंत्रता सेनानी व युवा नेता था.” ‘संकट के समय सच सामने लाना पत्रकारों की जिम्मेदारी’ शेख हसीना ने अपने संबोधन में पत्रकारों की भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का सबसे बड़ा दायित्व सच की तलाश करना है, खासकर तब जब सत्ता सच्चाई को छिपाने की कोशिश करे. उन्होंने उन पत्रकारों का भी धन्यवाद किया जो बांग्लादेश के घटनाक्रम पर गंभीरता और साहस के साथ नजर बनाए हुए हैं. ‘शुरुआत से ही शांतिपूर्ण नहीं था आंदोलन’ दिल्ली में मीडिया से वर्चुअल बातचीत के दौरान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा, “पिछले दो वर्षों से मैं अपने प्रिय बांग्लादेश को पीड़ित होते देख रही हूं. यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था और न ही वह बांग्लादेश है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान कुर्बान की थी. जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई यह है कि यह कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था. शुरुआत से ही मेरी प्रशासन ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश की. लेकिन सुधार की मांग की आड़ में संगठित समूह छात्रों की मांग को हिंसक नेतृत्वक हथियार में बदलने की कोशिश कर रहे थे.” बांग्लादेश छोड़कर हिंदुस्तान क्यों आई थीं शेख हसीना? 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में प्रशासनी नौकरियों में आरक्षण (कोटा प्रणाली) के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक राष्ट्रव्यापी विरोध में बदल गया. हालात इतने बिगड़ गए कि प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू कर दिया. नेतृत्वक और सुरक्षा संकट के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. इसके बाद वह हिंदुस्तान पहुंचीं, जहां उन्हें मानवीय आधार पर अस्थायी शरण दी गई. तब से वह नई दिल्ली में रह रही हैं. यह उनके जीवन का दूसरा ऐसा अवसर है जब उन्हें अपने देश से बाहर शरण लेनी पड़ी. इससे पहले 1975 में उनके पिता और बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद भी उन्होंने हिंदुस्तान में शरण ली थी. Also read : दित्वाह चक्रवात से उबरने में श्रीलंका की मदद कर रहा हिंदुस्तान, 350 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट से मिलेगा सहारा The post “यह वो बांग्लादेश नहीं, जिसके लिए 30 लाख लोगों ने दी शहादत’, वर्चुअल संबोधन में छलका शेख हसीना का दर्द appeared first on Naya Vichar.

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