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Author name: Vinod Jha

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भाजपा के साथ नहीं जायेंगे NCPI नेता अबू ताहेर, तीन मुस्लिम सांसदों ने TMC में वापसी के दिये संकेत

कोलकाता. एनसीपीआई के तीन मुस्लिम सांसदों के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में लौटने को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं. पिछले सप्ताह एनडीए की बैठक में इन सांसदों की अनुपस्थिति और सौगता रॉय की संदिग्ध टिप्पणियों ने इन अटकलों को और हवा दी. अब एनसीपीआई में शामिल हुए तीन सांसदों अबू ताहेर, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने काकली गुट की बेचैनी और बढ़ा दी है. वे आज एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए. इतना ही नहीं, अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने अपना नेतृत्वक रुख भी स्पष्ट कर दिया है. अबू ताहेर की बड़ी घोषणा अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने स्पष्ट कर दिया है कि वे एनसीपीआई में तो हैं, लेकिन एनडीए में नहीं हैं. वे किसी भी हालत में भाजपा के साथ नहीं जा सकते. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कोई विधेयक मुसलमानों के हितों के खिलाफ आता है, तो वे उसका भी विरोध करेंगे. नेतृत्वक विश्लेषकों के अनुसार, उनके अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्वक जिम्मेदारियां हैं. उम्मीद थी कि वे वहां की जनसंख्या के अनुपात में अपनी नेतृत्वक स्थिति तय करेंगे. एनसीपीआई सांसदों का भविष्य पर संकट पिछले हफ्ते, काकली और शास्त्राना को पहली बार एनडीए की बैठक में सहयोगी के तौर पर आमंत्रित किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बैठक में उनका परिचय सहयोगी सांसदों के रूप में कराया. हालांकि, बैठक में तीन मुस्लिम सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर अटकलें शुरू हो गईं. सूत्रों का कहना है कि अगर खलीलुर और अबू ताहेर एनसीपीआई में शामिल भी हो जाते हैं, तो भी वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें कई सांसदों की घर वापसी के दावे इस बीच, संसद परिसर में खलीलुर और अबू ताहेर की सौगत रॉय से हुई बातचीत को लेकर अटकलें तेज हो रही हैं. सौगत रॉय ने दावा किया कि कई सांसद उनके संपर्क में हैं. इस सूची में तीन अल्पसंख्यक सांसद भी शामिल हैं. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल से लेकर एनसीपी और एनडीए तक, कई लोग इसे पसंद नहीं कर रहे हैं. दूसरे शब्दों में, उन्होंने कहा कि कई लोग एनडीए में शामिल होने की बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. अब अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है. Also Read: पश्चिम बंगाल बनेगा देश का ‘सीड हब’, खुलेंगे चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र The post भाजपा के साथ नहीं जायेंगे NCPI नेता अबू ताहेर, तीन मुस्लिम सांसदों ने TMC में वापसी के दिये संकेत appeared first on Naya Vichar.

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भारत से पहले पाकिस्तान की जर्सी में उतरे थे सचिन तेंदुलकर, जानिए पूरा किस्सा

Sachin Tendulkar play for Pakistan: क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर को भगवान का दर्जा दिया जाता है. हिंदुस्तान के लिए स्पोर्ट्सते हुए उन्होंने बल्ले से ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी सपने से कम नहीं हैं. लेकिन सचिन के करियर से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा है, जिसे सुनकर शायद कई क्रिकेट फैंस हैरान रह जाएं. हिंदुस्तान की जर्सी पहनने से पहले ही सचिन एक बार पाकिस्तान टीम का हिस्सा बन चुके थे. हालांकि, यह कोई आधिकारिक मुकाबला नहीं था और न ही सचिन ने पाकिस्तान के लिए बल्लेबाजी की थी. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने पाकिस्तान टीम के लिए बतौर सब्स्टीट्यूट फील्डर मैदान संभाला था. 1987 में ब्रेबोर्न स्टेडियम में हुआ था यह खास वाकया साल 1987 में पाकिस्तान की टीम हिंदुस्तान दौरे पर थी। मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच एक प्रदर्शनी मुकाबला स्पोर्ट्सा जा रहा था. यह मैच 40-40 ओवर का था और इसमें दोनों देशों के कई दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर मौजूद थे. उस समय सचिन तेंदुलकर सिर्फ 13 साल के थे और क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की राह पर थे. वह मुंबई क्रिकेट से जुड़े हुए थे और बड़े खिलाड़ियों के बीच स्पोर्ट्स को करीब से देख रहे थे. इमरान खान की टीम में अचानक मिली जगह मैच के दौरान लंच ब्रेक में पाकिस्तान के दो खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर चले गए. पाकिस्तान टीम को कुछ समय के लिए सब्स्टीट्यूट फील्डरों की जरूरत थी. उस समय पाकिस्तान के कप्तान इमरान खान ने क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के कप्तान हेमंत केनकरे से मदद मांगी. उनसे स्थानीय युवा खिलाड़ियों को फील्डिंग के लिए भेजने को कहा गया. लेकिन इससे पहले कि कोई फैसला होता, युवा सचिन खुद मैदान पर उतरने के लिए तैयार हो गए. उन्हें पाकिस्तान की हरी जर्सी पहनाई गई और वह इमरान खान की टीम के लिए फील्डिंग करने लगे. सामने थे कपिल देव, हाथ में नहीं आया कैच इस मैच में सचिन के लिए सबसे यादगार पल तब आया, जब हिंदुस्तानीय कप्तान कपिल देव ने उनकी तरफ शॉट स्पोर्ट्सा. सचिन उस समय आउटफील्ड में फील्डिंग कर रहे थे. हालांकि वह गेंद कैच के लिए नहीं थी और बाउंड्री की ओर चली गई. लेकिन 13 साल के सचिन के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच मैदान पर खड़ा होना ही किसी सपने जैसा था. सचिन ने अपनी आत्मकथा प्लेइंग इट माई वे में इस घटना को याद करते हुए लिखा था कि उन्हें नहीं पता कि इमरान खान को आज भी यह बात याद है या नहीं कि उन्होंने कभी उनकी पाकिस्तान टीम के लिए फील्डिंग की थी. बाउंड्री पर खड़े किए जाने से थोड़े निराश थे सचिन सचिन के बचपन के दोस्त मार्कस कौटो ने भी इस घटना का जिक्र किया था. उनके अनुसार, सचिन को उम्मीद थी कि उन्हें कोई शानदार मौका मिलेगा, लेकिन जब उन्हें बाउंड्री लाइन पर खड़ा किया गया तो वह थोड़े निराश हो गए. सचिन ने उनसे पूछा था कि क्या कोई बड़ा शॉट उनकी तरफ कैच के लिए आ सकता था. जवाब में उन्हें बताया गया कि बल्लेबाजों के शॉट तो स्टेडियम के पहले टियर तक पहुंच रहे थे. छह विकेट से जीता हिंदुस्तान इस प्रदर्शनी मुकाबले में हिंदुस्तान ने पाकिस्तान को छह विकेट से मात दी थी. लेकिन इस मैच के करीब दो साल बाद क्रिकेट की तस्वीर बदल चुकी थी. 1989 में सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा. अब वह पाकिस्तान टीम के लिए फील्डिंग करने वाला 13 साल का बच्चा नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की कैप पहनने वाला युवा बल्लेबाज था. उनका सामना एक बार फिर इमरान खान, वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे दिग्गजों से हुआ. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार सचिन मैदान पर हिंदुस्तान के लिए उतरे थे. इतिहास में दर्ज हो गया सचिन का नाम आगे चलकर सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बनने से लेकर कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं. 13 साल की उम्र में पाकिस्तान की जर्सी पहनकर फील्डिंग करने वाला वह छोटा सा पल आज उनके महान क्रिकेट सफर की सबसे अनोखी कहानियों में शामिल है. इसे भी पढ़े- धोनी के पास हैं 100 से ज्यादा बाइक्स, जानिए उनकी पसंदीदा मोटरसाइकिलों के बारे में The post हिंदुस्तान से पहले पाकिस्तान की जर्सी में उतरे थे सचिन तेंदुलकर, जानिए पूरा किस्सा appeared first on Naya Vichar.

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अब सड़क पर एक-दूसरे से ‘बात’ करेंगी गाड़ियां! सरकार ला रही है V2V सिस्टम

इसी सोच के साथ केंद्र प्रशासन देश में Vehicle-to-Vehicle (V2V) Communication System लागू करने की तैयारी कर रही है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें नई गाड़ियों में V2V सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. V2V सिस्टम क्या है और कैसे करेगा काम? V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication ऐसी तकनीक है, जिसमें आसपास चल रही गाड़ियां वायरलेस तरीके से एक-दूसरे के साथ जरूरी जानकारी शेयर करेंगी. इसमें गाड़ी की स्पीड, दिशा, लोकेशन और एक्सेलरेशन जैसी जानकारी शामिल होगी. इसका फायदा यह होगा कि ड्राइवर को उन खतरों की भी पहले से चेतावनी मिल सकेगी जो अभी उसकी नजर में नहीं हैं. उदाहरण के लिए: आगे कई गाड़ियों बाद अचानक ब्रेक लगना कोई वाहन गलत दिशा से आना इमरजेंसी वाहन का पास आना असुरक्षित लेन बदलना प्रशासन का मानना है कि यह तकनीक मौजूदा ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स को और बेहतर बनाएगी. कब से लागू होगा नया नियम? मंत्रालय ने दो चरणों में इसे लागू करने का प्रस्ताव दिया है. यह नियम L, M और N कैटेगरी के वाहनों पर लागू होगा, जिनमें दोपहिया, पैसेंजर और कमर्शियल वाहन शामिल हैं. तारीख क्या होगा? 1 अक्टूबर 2027 जिन वाहनों में V2V सिस्टम होगा, उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा. 1 अक्टूबर 2028 इन सभी नई गाड़ियों में AIS-230 के मुताबिक V2V सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. प्रशासन का कहना है कि यह समय ऑटो कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को तैयारी का मौका देने के लिए रखा गया है. AIS-230 क्या है? AIS-230 हिंदुस्तान का नया तकनीकी मानक है, जो V2V सिस्टम के लिए जरूरी नियम तय करता है. इसमें तकनीक के प्रदर्शन से लेकर साइबर सुरक्षा तक कई पहलुओं को शामिल किया गया है. इस मानक में मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया है: रेडियो और फ्रीक्वेंसी परफॉर्मेंस GNSS आधारित लोकेशन सिस्टम इलेक्ट्रिकल और पावर सप्लाई परफॉर्मेंस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी साइबर सिक्योरिटी और सुरक्षित कम्युनिकेशन सड़क सुरक्षा से जुड़े परफॉर्मेंस मानक ड्राइवर को क्या फायदा मिलेगा? AIS-230 के तहत कई सेफ्टी फीचर्स भी जोड़े जाएंगे, जिन्हें जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकेगा. इनमें शामिल हैं: इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट  फॉरवर्ड कॉलिजन वॉर्निंग  रॉन्ग-वे ड्राइविंग अलर्ट  इमरजेंसी व्हीकल अलर्ट  मंत्रालय के मुताबिक, इन फीचर्स का मकसद ड्राइवर को समय रहते खतरे की जानकारी देना और सड़क हादसों का जोखिम कम करना है. फिलहाल यह प्रस्ताव ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के रूप में सार्वजनिक किया गया है. मंत्रालय अगले 30 दिनों तक लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगेगा. इसके बाद सुझावों की समीक्षा कर अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. अगर यह लागू होता है, तो यह हिंदुस्तान में कनेक्टेड और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक अहम कदम माना जाएगा. ये भी पढ़ें: मालदीव से हिंदुस्तान पैसे भेजना हुआ आसान, UPI और Favara हुए कनेक्ट, जानिए किसे मिलेगा फायदा The post अब सड़क पर एक-दूसरे से ‘बात’ करेंगी गाड़ियां! प्रशासन ला रही है V2V सिस्टम appeared first on Naya Vichar.

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Suzuki Access 125 का सबसे सस्ता मॉडल खरीदें या नहीं? जानें कौन-से फीचर्स मिलते हैं और क्या छूट जाता है

अगर आप 125cc का नया स्कूटर खरीदने का सोच रहे हैं, तो Suzuki Access 125 एक ऐसा नाम है जिस पर लोग सालों से भरोसा करते आ रहे हैं. इसका सबसे सस्ता बेस वेरिएंट भी रोजमर्रा के काम के लिए अच्छा है. इसमें कुछ महंगे मॉडल वाले फीचर्स, जैसे डिजिटल डिस्प्ले और दूसरे प्रीमियम फीचर्स नहीं मिलते. लेकिन सवाल यह है कि इन चीजों की कमी से कितना फर्क पड़ता है? आइए समझते हैं कि यह बेस वेरिएंट आपके लिए सही रहेगा या नहीं. Suzuki Access 125: कीमत इसकी एक्स-शोरूम कीमत 81,585 रुपये (दिल्ली) है और यही Access रेंज का सबसे किफायती मॉडल भी है. अच्छी बात यह है कि इसमें वही दमदार इंजन और CVT गियरबॉक्स मिलता है, जो इसके महंगे वेरिएंट्स में दिया गया है. यानी परफॉर्मेंस के मामले में आपको कोई समझौता नहीं करना पड़ता. Suzuki Access 125: डिजाइन  लुक की बात करें तो यह स्कूटर देखने में काफी अच्छा लगता है. इसमें सामने चौकोर हेडलाइट, गोल क्रोम वाले शीशे और साइड में बनी स्टाइलिश डिजाइन दी गई है. इसका फुट रखने वाला हिस्सा (फुटबोर्ड) चौड़ा और सपाट है, जिससे डेली यूज में सामान रखना और पैर रखना आसान रहता है. वहीं, आगे का मेटल फेंडर और लेग शील्ड इसे मजबूत बनाते हैं. कंपनी इसे Metallic Mat Black, Metallic Mat Stellar Blue और Pearl Grace White जैसे तीन रंगों में बेचती है. Suzuki Access 125: फीचर्स स्टैंडर्ड वेरिएंट में आपको फीचर्स के मामले में थोड़ा समझौता करना पड़ता है. इसमें बेसिक LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, इसलिए फोन कनेक्टिविटी, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और कॉल या SMS अलर्ट जैसी सुविधाएं इसमें नहीं दी गई हैं. एक और बात ध्यान देने वाली है कि इस वेरिएंट में आगे की तरफ USB चार्जिंग पोर्ट भी नहीं मिलता. यह फीचर सिर्फ इसके महंगे वेरिएंट्स में दिया गया है. ये भी पढ़ें: 10 से 14 साल के बच्चों के लिए लॉन्च हुई TVS Apache RR 200 Mini, दौड़ती है 110 km/h की स्पीड से हालांकि, डेली यूज के लिए जरूरी फीचर्स की कमी नहीं है. इसमें आगे सामान रखने के लिए स्टोरेज पॉकेट, 24.4 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज, LED हेडलाइट और टेललाइट, सीट और फ्यूल लिड के लिए वन-पुश सेंट्रल लॉक सिस्टम, साथ ही साइड-स्टैंड इंजन कट-ऑफ जैसे फीचर्स मिलते हैं. Suzuki Access 125: सेफ्टी और हार्डवेयर स्टैंडर्ड एडिशन में आगे और पीछे दोनों तरफ ड्रम ब्रेक दिए गए हैं, जिनके साथ कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) मिलता है. बाकी फीचर्स की बात करें तो इस वेरिएंट में भी वही हार्डवेयर मिलता है जो दूसरे मॉडल्स में दिया गया है. इसमें आगे टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क और पीछे सिंगल शॉक एब्जॉर्बर दिया गया है. इसके अलावा, 12-इंच का फ्रंट और 10-इंच का रियर ट्यूबलेस टायर, दोनों अलॉय व्हील्स के साथ आते हैं. स्कूटर का कर्ब वेट 107 kg है. Suzuki Access 125: इंजन Suzuki Access 125 का बेस वेरिएंट भी उसी 124cc, एयर-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन के साथ आता है, जो इसके बाकी सभी वेरिएंट्स में मिलता है. यह इंजन 8.4PS की पावर और 10.2Nm का टॉर्क देता है. इसमें 5.3 लीटर का फ्यूल टैंक आपको मिल जाता है. क्या आपको खरीदना चाहिए? अगर आपके लिए Bluetooth कनेक्टिविटी, TFT स्क्रीन और फ्रंट डिस्क ब्रेक बहुत जरूरी फीचर नहीं हैं, तो Standard Edition एक बढ़िया ऑप्शन है. इसमें वही दमदार इंजन, वही मजबूत चेसिस और लगभग वही सभी रोजमर्रा के काम आने वाले फीचर्स मिलते हैं, जो इसके महंगे वेरिएंट्स में दिए गए हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें कुछ प्रीमियम टेक फीचर्स नहीं मिलते. ये भी पढ़ें: 125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर The post Suzuki Access 125 का सबसे सस्ता मॉडल खरीदें या नहीं? जानें कौन-से फीचर्स मिलते हैं और क्या छूट जाता है appeared first on Naya Vichar.

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क्या नीतीश कुमार अगर CM रहते तो बांकीपुर नहीं हारती BJP? JDU MLA अनंत सिंह का जानिए जवाब

Anant Singh On PK Victory: बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत पर बीजेपी के नेता भी उन्हें बधाई दे रहे हैं और खुद की हार पर मंथन की बात कह रहे हैं. ऐसे में अब जेडीयू के विधायक अनंत सिंह ने भी प्रशांत किशोर की जीत पर रिएक्शन दिया. अनंत सिंह ने कहा, जिनको जनता ने वोट दिया वह जीते हैं और जिनको नहीं दिया वह हार गए. सीधी बात है, जनता मालिक होती है और जनता ही फैसला लेती है. नीतीश कुमार पर क्या कहा? मीडिया ने अनंत सिंह से यह सवाल किया कि अगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होते तो बांकीपुर का चुनाव बीजेपी नहीं हारती. इस पर उन्होंने कहा, जनता के बीच यह बात फैल गई है कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को हटा दिया है. लेकिन नेता का कहना है कि यह फैसला मिलजुल कर लिया गया है. उन्होंने कहा जनता का मानना है कि हमने नीतीश कुमार को वोट दिया है लेकिन मुख्यमंत्री किसी और को बना दिया गया. यह जनता को अच्छा नहीं लगा है. राजद प्रत्याशी की जमानत जब्त होने पर रिएक्शन इसके साथ ही बांकीपुर में राजद प्रत्याशी की जमानत जब्त होने पर उन्होंने कहा, हमने कई बार कहा है कि वह तो पार्टी ही नहीं है. जनता अपना वोट बर्बाद करना नहीं चाह रही थी. उनका वोट कहीं कन्वर्ट कर गया. इस तरह से अनंत सिंह ने साफ कहा कि नीतीश कुमार ने खुद ही मुख्यमंत्री पद को छोड़ा, ना कि किसी और के दबाव में आकर. पीके की जीत ने नई बहस छेड़ी दूसरी तरफ, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की नेतृत्व में नई बहस छेड़ दी है. लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर मिली जीत को नेतृत्वक जानकार केवल एक उपचुनाव का परिणाम नहीं, बल्कि बदलते नेतृत्वक समीकरणों का संकेत मान रहे हैं. इस नतीजे के बाद राज्य में तीसरे नेतृत्वक विकल्प, शहरी मतदाताओं की नई पसंद और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. Also Read: प्रशांत किशोर की जीत के पीछे 3 रणनीतिकार कौन? जिनकी मदद से नितिन नवीन के किले को ढहाया The post क्या नीतीश कुमार अगर CM रहते तो बांकीपुर नहीं हारती BJP? JDU MLA अनंत सिंह का जानिए जवाब appeared first on Naya Vichar.

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Video : उदयनिधि स्टालिन हिरासत में, एक्ट्रेस तृषा पर किया था कमेंट

Video : अतिरिक्त पुलिस आयुक्त नरेंद्रन नायर ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में DMK नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके आवास से पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया और न ही कोई अभद्र टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “मैं हर नतीजे का सामना करने के लिए तैयार हूं. मुझे गिरफ्तारी का कोई डर नहीं है.” अभिनेत्री तृषा पर टिप्पणी से घिरे उदयनिधि स्टालिन उदयनिधि स्टालिन सोमवार (3 अगस्त) को अभिनेत्री तृषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए. उदयनिधि ने कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला. रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने ”तृषा, तृषा” के नारे लगाए. उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘द्विअर्थी’आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका नेतृत्वक विरोध शुरू हो गया. टीवीके ने पुलिस और स्त्री आयोग में दर्ज कराई शिकायत तमिलनाडु में एक्ट्रेस तृषा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उदयनिधि स्टालिन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने उनके खिलाफ विरोध तेज करते हुए स्थानीय पुलिस और राष्ट्रीय स्त्री आयोग (NCW) में शिकायत दर्ज कराई है. इसी मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में लिया. टीवीके की तंजावुर मध्य जिला स्त्री इकाई की संयोजक एस. भैरवी ने तंजावुर पूर्व थाने में उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है. The post Video : उदयनिधि स्टालिन हिरासत में, एक्ट्रेस तृषा पर किया था कमेंट appeared first on Naya Vichar.

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14th JPSC Scam: CM हेमंत सोरेन के रांची लौटते ही एक्शन में सरकार, छात्रों से बात करेगी मंत्रियों-IAS अफसरों की कमेटी

रांची : 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में कथित धांधली को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन को राज्य प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सोमवार को बेंगलुरू से रांची लौटने के बाद प्रशासन ने छात्रों से संवाद के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी के गठन पर विचार शुरू कर दिया है. प्रस्तावित कमेटी छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों से अवगत होगी और आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास करेगी. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, कमेटी में दो मंत्री, कैबिनेट सचिवालय सह गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अपर मुख्य सचिव के अलावा तीन अन्य वरीय आईएएस अधिकारियों और विभिन्न नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. औपचारिक वार्ता जल्द शुरू होने की उम्मीद प्रशासन की मंशा है कि आंदोलन के और उम्र होने से पहले छात्रों को उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार का भरोसा दिया जाए और बातचीत के जरिये समाधान निकाला जाये. जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितता के विरोध में छात्र इन दिनों अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठ गए हैं. जल्द ही इन छात्रों से औपचारिक वार्ता की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है. सूत्रों ने बताया कि मंगलवार या बुधवार को कमेटी छात्रों से बात कर सकती है. ये भी पढ़ें: Indian Railways: रेल यात्री ध्यान दे! सितम्बर में करना है सफर तो जरूर चेक कर ले अपनी ट्रेन का स्टेटस, रेलवे करने जा रहा है ये काम जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक की सीआईडी जांच पर उठे सवाल झारखंड के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा-2023 के पेपर लीक की लंबे समय से चल रही सीआईडी जांच पर गंभीर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने अभ्यर्थियों के नाम जारी एक संदेश में आरोप लगाया है कि सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में राज्य प्रशासन, जेएसएससी और सीआईडी ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया है. ये भी पढ़ें: सुजीत सिन्हा एनकाउंटर: शरीर से मिलीं 2 गोलियां, परिजनों ने उठाए सवाल, कहा- ‘पहले से था जान का खतरा’ The post 14th JPSC Scam: CM हेमंत सोरेन के रांची लौटते ही एक्शन में प्रशासन, छात्रों से बात करेगी मंत्रियों-IAS अफसरों की कमेटी appeared first on Naya Vichar.

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प्रशांत किशोर की जीत के पीछे 3 रणनीतिकार कौन? जिनकी मदद से नितिन नवीन के किले को ढहाया

Prashant Kishor Won Bankipur Seat: सोमवार को बिहार की नेतृत्व में उलटफेर देखने के लिए मिला. जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के किले को ढहा दिया और जीत दर्ज की. बीजेपी को उसके गढ़ में शिकस्त देकर प्रशांत किशोर ने ना सिर्फ एक चुनाव जीता, बल्कि बिहार की सियासत में एक नया संदेश लिख दिया है. क्यों खास रहा बांकीपुर का नतीजा? नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर के मतदाताओं ने सिर्फ उम्मीदवार को वोट नहीं दिया, बल्कि उस बेबाक अंदाज, आक्रामक तेवर और खुलकर बोलने वाली छवि को भी समर्थन दिया है, जिसके साथ प्रशांत किशोर बिहार की नेतृत्व में अपनी नई जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. बांकीपुर का ये नतीजा इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां से अब सिर्फ एक विधायक नहीं निकला है बल्कि बिहार की सियासत में एक नई नेतृत्वक चुनौती ने दस्तक दे दी है. किसी भी चुनाव में जीत हार वोटर तय करते हैं. मुद्दों का गणित समीकरण को बनाता और बिगाड़ता है. लेकिन कामयाबी की हर कहानी लिखने के पीछे रणनीतिकारों की एक टीम जरूर होती है. प्रशांत की इस जीत में वैसे तो पूरी टीम की मेहनत लगी है, लेकिन तीन चेहरों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. ये हैं तीन प्रमुख चेहरे जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज हिंदुस्तानी- कहा जाता है कि मनोज हिंदुस्तानी ने प्रशांत किशोर को चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया. साथ ही प्रचार को लेकर रणनीति भी बनाई. मनोज हिंदुस्तानी चुनाव के शुरुआत से आखिर तक एक्टिव रहे. उन्होंने जीत की रणनीति बनाई उसे एग्जीक्यूट भी किया. जन सुराज की जीत पर उन्होंने पूरा फोकस किया. पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना- किशोर कुमार मुन्ना के बारे में बताया जाता है कि वे एक वक्त पटना के चर्चित छात्र नेता हुआ करते थे. ऐसे में उन्हें शहर की बारीकियों का बखूबी अंदाजा था. हर बूथ के लिए अलग-अलग रणनीति मुन्ना ने ही तैयार की थी. किस इलाके के वोटर और किस तरह से सोचते हैं, इसके बारे में उन्हें अच्छे से जानकारी है. अनूप मैथिल- जनसुराज संघर्ष वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष हैं अनूप मैथिल. जमीन पर इन्होंने ही एजेंडा सेट किया. उन्होंने बांकीपुर से जुड़े छोटे से छोटे मुद्दे को उठाया और उसे मीडिया तक पहुंचाया. इस तरह से जमीनी स्तर से जुड़े मुद्दों को उछाला गया. इसका नतीजा यह देखने के लिए मिला कि जन सुराज ने बांकीपुर में बीजेपी को बैकफुट पर धकेल दिया. आने वाले दिनों में बदल सकती है चुनाव की तस्वीर नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत के बाद भाजपा, जदयू, राजद और कांग्रेस सभी अपनी चुनावी रणनीति की समीक्षा करेंगे. यदि जन सुराज आने वाले समय में अन्य इलाकों में भी इसी तरह का प्रदर्शन करती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला पहले की तुलना में अधिक त्रिकोणीय हो सकता है. Also Read: 3675 करोड़ की लागत से पटना में यहां बनेगा 12 किमी लंबा एलिवेटेड-एटग्रेड रोड, बिहार प्रशासन ने केंद्र से मांगी मदद The post प्रशांत किशोर की जीत के पीछे 3 रणनीतिकार कौन? जिनकी मदद से नितिन नवीन के किले को ढहाया appeared first on Naya Vichar.

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Arvind Kejriwal March Live : E20 विरोध मार्च से पहले सुरक्षा सख्त, केजरीवाल के मार्च को नहीं मिली अनुमति

Arvind Kejriwal March Live : E20 पेट्रोल के विरोध में अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेंगे. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक 100 स्वयंसेवकों के साथ पीएम आवास पहुंचकर ऑनलाइन अभियान के जरिए जुटाए गए दो लाख हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपने की कोशिश करेंगे. हर अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ. The post Arvind Kejriwal March Live : E20 विरोध मार्च से पहले सुरक्षा सख्त, केजरीवाल के मार्च को नहीं मिली अनुमति appeared first on Naya Vichar.

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सुजीत सिन्हा एनकाउंटर: शरीर से मिलीं 2 गोलियां, परिजनों ने उठाए सवाल, कहा- ‘पहले से था जान का खतरा’

जामताड़ा : गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने पर परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की न्यायिक या किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. दूसरी ओर, मजिस्ट्रेट के रूप में सीओ अविश्वर मुर्मू की मौजूदगी में तीन चिकित्सकों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया. पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करायी गयी. पैनल में डॉ दुर्गेश झा, डॉ मिकी माझी और डॉ विशाल शामिल थे. पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से दो गोलियां बरामद हुई. चिकित्सकों ने बताया कि शरीर पर गोली लगने के निशान भी मिले हैं. विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंपी जायेगी. पोस्टमार्टम के दौरान सुजीत सिन्हा के परिजन भी मौजूद रहे. पुलिस ने परिजनों से की पूछताछ पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत परिजनों से पूछताछ भी की. उल्लेखनीय है कि रविवार रात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को राजमहल एसडीपीओ विमलेश त्रिपाठी व बरहरवा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल के संरक्षण में साहिबगंज जेल से धनबाद जेल शिफ्ट करने के लिए लाया जा रहा था. इसी दौरान जामताड़ा थाना क्षेत्र के सुपायडीह के पास कैदी वैन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर सुजीत सिन्हा ने पुलिस जवान की राइफल छीनकर फायरिंग कर दी थी. इसके बाद पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गयी थी. सोमवार तड़के फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की तीन सदस्यीय टीम रांची से सुपायडीह पहुंची और घटनास्थल से गोलियों के खोखे, रक्त के नमूने, क्राइम सीन मैपिंग सहित अन्य तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्य एकत्र किये. ये भी पढ़ें: दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि आज, नेमरा बनेगा श्रद्धा और विकास का केंद्र, जुटेंगे राज्यभर के लोग सास बोलीं- सुजीत को पहले से ही जान का खतरा था मृतक की सास उषा देवी ने एनकाउंटर को सुनियोजित साजिश बताते हुए कई सवाल उठाये. उनका कहना था कि जो व्यक्ति जेल से बाहर निकलना ही नहीं चाहता था, वह पुलिस हिरासत भागने या जवानों पर गोली चलाने की कोशिश कर करेगा? उन्होंने दावा किया कि सुजीत को पहले से जान का खतरा था और इस संबंध में उसने झारखंड हाइकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की थी. उन्होंने पुलिस की ओर से जारी घटनास्थल की तस्वीरों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले शव सड़क पर दिखा, जबकि बाद की तस्वीरों में जंगल के भीतर दिखाई दिया और मौत के बाद भी उनके हाथों में हथकड़ी लगी दिखी. उषा देवी ने धमकी दी है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनकी बेटी और नाती आत्मदाह करेंगे. ये भी पढ़ें: BARC, नेवी और दरोगा समेत 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर चुका है अभय तिवारी, CID ने एजेंसियों से मांगे सारे रिकॉर्ड The post सुजीत सिन्हा एनकाउंटर: शरीर से मिलीं 2 गोलियां, परिजनों ने उठाए सवाल, कहा- ‘पहले से था जान का खतरा’ appeared first on Naya Vichar.

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