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Author name: Vinod Jha

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कर्नाटक पुलिस भर्ती विवाद: इस्तीफे की मांग पर प्रियांक खड़गे का तंज- पहले 25 दिन भूख हड़ताल, फिर लाठीचार्ज

कर्नाटक राज्य पुलिस भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. परीक्षा केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थियों के विरोध और पुलिस कार्रवाई के बीच राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का इस्तीफे की मांग पर की.पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक,प्रियांक खड़गे ने कहा कि यदि कोई मेरे इस्तीफे की मांग कर रहा है तो पहले उम्मीदवार 25 दिन की भूख हड़ताल करें, फिर लाठीचार्ज हो और उसके बाद मैं इस्तीफा दे दूंगा, जैसा कि NEET विवाद के दौरान देखने को मिला था. इस्तीफे पर दिया गया उनका यह बयान अब नेतृत्वक बहस का नया मुद्दा बनता जा रहा है. OMR को लेकर फैली गलतफहमी पर दी सफाई प्रियांक खड़गे ने कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों में यह गलतफहमी फैल गई थी कि OMR शीट का सीरियल नंबर और प्रश्नपत्र का सीरियल नंबर एक जैसा होना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं था और परीक्षा प्राधिकरण ने कहीं भी ऐसी शर्त नहीं रखी थी. उन्होंने कहा कि कुछ उम्मीदवार इसी भ्रम में परीक्षा केंद्र छोड़कर बाहर चले गए. प्रियांक खड़गे इस्तीफे की मांग पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि PSI भर्ती घोटाले के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था. उन्होंने दावा किया कि लाखों उम्मीदवारों ने परीक्षा दी, जबकि विवाद केवल करीब 120 अभ्यर्थियों तक सीमित रहा. View on Instagram बाहर निकले तो दोबारा प्रवेश संभव नहीं गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि परीक्षा नियमों के अनुसार कोई भी उम्मीदवार OMR शीट लेकर परीक्षा केंद्र से बाहर निकलने के बाद दोबारा प्रवेश नहीं कर सकता. अधिकारियों ने उम्मीदवारों को पहले ही समझाने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ लोगों ने नियमों की अनदेखी की. बाद में जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने दोबारा अंदर आने की मांग की, जिसे नियमों के कारण स्वीकार नहीं किया जा सका. हिरासत और इस्तीफे की मांग पर पलटवार प्रियांक खड़गे ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का बचाव करते हुए कहा कि यदि कोई परीक्षा केंद्र की व्यवस्था बिगाड़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश करेगा तो पुलिस कार्रवाई करना स्वाभाविक है. बीजेपी का कांग्रेस पर वार कर्नाटक में वेटरनरी प्रवेश परीक्षा और पुलिस भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासत तेज हो गई है.बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर छात्रों के हितों के नाम पर नेतृत्व करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र हितों के प्रति कांग्रेस की कथित संवेदनशीलता का मुखौटा उतार दिया है. ये भी पढ़ें: संसद में हंगामे के बीच दो अहम विधेयक पास; किरेन रिजिजू बोले- कांग्रेस को राह दिखाने वाला कोई नहीं The post कर्नाटक पुलिस भर्ती विवाद: इस्तीफे की मांग पर प्रियांक खड़गे का तंज- पहले 25 दिन भूख हड़ताल, फिर लाठीचार्ज appeared first on Naya Vichar.

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‘मैं मरा नहीं हूं, वापस आऊंगा’… Prashant Kishor

बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी कभी सिर्फ पानी नहीं होता. वह शासन की दरारों में भरा हुआ भरोसा भी होता है. पटना की एक सड़क पर ऐसा ही पानी जमा था. लोग रोज गुजरते थे. शिकायतें भी होती थीं. लेकिन प्रशासन की नजर वहां नहीं पहुंची. फिर एक कैमरा पहुंचा. सोशल मीडिया पर एक वीडियो आया. कुछ घंटों बाद प्रशासनी मशीनें भी पहुंच गईं. उस दिन सड़क से सिर्फ पानी नहीं निकला था. यह भ्रम भी बह गया था कि विपक्ष केवल चुनाव के समय दिखाई देता है. शायद वहीं से बांकीपुर की कहानी शुरू हुई. ‘मैं मरा नहीं हूं, वापस आऊंगा’ करीब तीन साल पहले जब JanSuraaj यात्रा शुरू हुई थी, तब बहुत लोगों ने इसे नेतृत्वक प्रयोग माना. कहा गया कि रणनीति बनाना और चुनाव जीतना दो अलग बातें हैं. कई लोगों ने यहां तक कह दिया कि प्रशांत किशोर का नेतृत्वक अध्याय शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया. लेकिन प्रशांत किशोर बार-बार एक ही बात कहते रहे. मैं मरा नहीं हूं, वापस आऊंगा. Bankipur का नतीजा उसी वाक्य की नेतृत्वक वापसी जैसा दिखता है. नेतृत्व का नया व्याकरण बिहार की नेतृत्व लंबे समय तक जातियों के जोड़-घटाव की भाषा में लिखी गई. हर चुनाव एक सामाजिक समीकरण था. हर प्रत्याशी एक जातीय प्रतिनिधि. हर रैली पहचान का उत्सव. लेकिन इतिहास कभी एक भाषा में हमेशा नहीं लिखा जाता. जब समाज बदलता है, तो नेतृत्व का व्याकरण भी बदलता है. बांकीपुर शायद उसी बदलाव का पहला स्पष्ट वाक्य है. ध्यान देने वाली बात यह है कि इन मुद्दों का संबंध किसी जाति या धर्म से नहीं है. इनका संबंध हर परिवार से है. यही कारण है कि उनकी नेतृत्व को कई विश्लेषक एजेंडा आधारित नेतृत्व कह रहे हैं. अगर यह प्रयोग आगे भी सफल होता है, तो बिहार की चुनावी भाषा बदल सकती है. नई पीढ़ी का नया मतदाता बांकीपुर का परिणाम एक और बदलाव की ओर संकेत करता है. आज का मतदाता 1990 के दशक वाला मतदाता नहीं है. मोबाइल, सोशल मीडिया, डिजिटल भुगतान, प्रतियोगी परीक्षाएं, स्टार्टअप, रोजगार, माइग्रेशन और वैश्विक अवसरों के बीच पली-बढ़ी पीढ़ी की प्राथमिकताएं अलग हैं. Gen Z और युवा मतदाता जाति को पूरी तरह नहीं छोड़ते, लेकिन केवल उसी आधार पर वोट भी नहीं देते. यही सवाल अब चुनावी नेतृत्व की दिशा बदल रहे हैं. तीसरी ताकत की औपचारिक एंट्री बिहार लंबे समय से दो बड़े ध्रुवों के बीच घूमता रहा है. एक ओर एनडीए. दूसरी ओर राजद गठबंधन. बांकीपुर की जीत ने पहली बार यह संभावना मजबूत की है कि राज्य में तीसरी नेतृत्वक धुरी भी प्रभावी बन सकती है. यह केवल सीटों का सवाल नहीं है. यह नेतृत्वक प्रतिस्पर्धा को नया आयाम देने का संकेत है. Bankipur के बाद बिहार बांकीपुर का परिणाम अंतिम फैसला नहीं है. एक उपचुनाव पूरे राज्य का भविष्य तय नहीं करता. लेकिन कुछ चुनाव ऐसे होते हैं जो आने वाले वर्षों की दिशा बता देते हैं. 1977, 1989 और 2014 ऐसे ही चुनाव थे. क्या 2026 का बांकीपुर भी उसी श्रेणी में शामिल होगा? इसका उत्तर अभी भविष्य देगा. लेकिन इतना स्पष्ट है कि बिहार की नेतृत्व अब पहले जैसी नहीं रहेगी. जाति रहेगी, पहचान भी रहेगी, लेकिन उनके साथ अब काम, जवाबदेही और एजेंडा भी बराबरी से खड़े होंगे. और शायद यही इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश है. यह भी पढ़ें : Prashant Kishor : दूसरों की प्रशासन बनाने वाले PK, बांकीपुर उपचुनाव में क्या साबित करना चाहते हैं? The post ‘मैं मरा नहीं हूं, वापस आऊंगा’… Prashant Kishor appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल कांग्रेस की ओवरहॉलिंग की तैयारी, 32 संगठनात्मक जिलों में पर्यवेक्षक भेजेंगे मल्लिकार्जुन खरगे

पश्चिम बंगाल में अपनी खोयी हुई नेतृत्वक जमीन वापस पाने और संगठन में नयी जान फूंकने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने कमर कस ली है. ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य के सभी 32 संगठनात्मक जिलों में अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों को भेजने का फैसला किया है. ये पर्यवेक्षक सीधे जिला नेताओं, ब्लॉक अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर स्थिति का जायजा लेंगे. पर्यवेक्षकों की जल्द घोषणा करेंगे खरगे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को बताया कि इसका उद्देश्य जिला अध्यक्षों के चयन में पारदर्शिता लाना है. पहले यह शिकायतें आती थीं कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में केवल राज्य स्तर के शीर्ष नेताओं की पसंद को ही तवज्जो दी जाती थी. अब एआईसीसी पर्यवेक्षकों की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर ही जिलाध्यक्ष बनाये जायेंगे. प्रत्येक जिले के लिए अलग पर्यवेक्षक नियुक्त किया जा सकता है, जिसकी घोषणा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जल्द करेंगे. नये एआईसीसी प्रभारी प्रकाश जोशी ने कमान संभाली हाल ही में गुलाम मीर की जगह उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता प्रकाश जोशी को पश्चिम बंगाल का नया कांग्रेस प्रभारी बनाया गया है. प्रभारी बनने के बाद प्रकाश जोशी ने कोलकाता पहुंचकर सोमवार से प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के साथ पहले दौर की महत्वपूर्ण बैठकें शुरू कर दी हैं. बैठकों का दौर मंगलवार को भी जारी रहेगा. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल के कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर हटाये गये, जानें कौन बने नये प्रभारी जिला स्तर के नेताओं को मिला था 10-सूत्रीय संगठनात्मक एजेंडा बैठक से पहले जिला स्तर के नेताओं को एक 10-सूत्रीय संगठनात्मक एजेंडा भेजा गया था, जिसके तहत संगठन की वर्तमान स्थिति, नगर पालिकाओं, नगर निगमों और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों का पूरा ब्योरा मांगा गया है. नये कार्यकर्ताओं की बनेगी सूची, दागी नेताओं के लिए दरवाजे बंद समीक्षा बैठक के तहत प्रभारी प्रकाश जोशी ने विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी में शामिल हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं का पूरा ब्योरा मांगा है. इसमें वे किस नेतृत्वक दल (जैसे टीएमसी या भाजपा) से आये हैं, उनकी नेतृत्वक पृष्ठभूमि, उम्र और उन्हें पार्टी में दी गयी जिम्मेदारियों की जानकारी मांगी गयी है. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी ने मांगी INDIA की मदद, लेफ्ट ने याद दिलाये पुराने दिन, कांग्रेस बोली- पहले गलती स्वीकार करें, फिर होगी बात भ्रष्टाचार या आपराधिक छवि वालों के लिए कांग्रेस के दरवाजे बंद हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस समेत कई दलों से नेता कांग्रेस में शामिल हुए हैं. पार्टी ने साफ कहा है कि वह किसी भी दागी नेता को शरण नहीं देगी. एआईसीसी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि अन्य दलों से आये स्वच्छ छवि के नेताओं का पार्टी में स्वागत होगा, लेकिन जिन पर भ्रष्टाचार या गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर कांग्रेस में शामिल नहीं किया जायेगा. The post बंगाल कांग्रेस की ओवरहॉलिंग की तैयारी, 32 संगठनात्मक जिलों में पर्यवेक्षक भेजेंगे मल्लिकार्जुन खरगे appeared first on Naya Vichar.

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भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को नई रफ्तार, जयशंकर बोले- अब साझेदारी को माइनिंग सेक्टर तक ले जाना चाहते हैं

India Uzbekistan Relations : हिंदुस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में अहम पहल हुई है. चार दिवसीय हिंदुस्तान दौरे पर आए उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, रेयर अर्थ मिनरल्स, माइनिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की. हिंदुस्तान ने साफ किया कि अब वह उज्बेकिस्तान के साथ साझेदारी को माइनिंग सेक्टर तक ले जाना चाहता है. माइनिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स पर रहेगा फोकस बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान उज्बेकिस्तान को अपने एक्सटेंडेड नेवरहुड (विस्तारित पड़ोस) का अहम हिस्सा मानता है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और व्यापार का संबंध सदियों पुराना है और अब यह रिश्ता नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है. जयशंकर ने कहा कि निर्माण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा के बाद अब दोनों देश माइनिंग सेक्टर, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच मौजूदा व्यापार लगभग एक अरब डॉलर का है, लेकिन दोनों देशों की क्षमता इससे कहीं अधिक है. इसलिए व्यापार और निवेश को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा. राष्ट्रपति मुर्मू ने बताई अपार संभावनाएं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाकात में कहा कि दोनों देशों के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और माइनिंग के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने हिंदुस्तान-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम का भी स्वागत किया और कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को नई दिशा मिलेगी. राष्ट्रपति ने बताया कि हिंदुस्तान के ITEC और स्कॉलरशिप कार्यक्रमों के तहत अब तक 3,000 से अधिक उज्बेक अधिकारी, पेशेवर और छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 16,000 से अधिक हिंदुस्तानीय छात्र फिलहाल उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं. NAM अध्यक्षता पर हिंदुस्तान का समर्थन, आतंकवाद पर साझा रुख बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2027-29 के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को हिंदुस्तान का समर्थन देने की घोषणा की. साथ ही BRICS में साझेदार देश के रूप में हिंदुस्तान की अध्यक्षता के दौरान सहयोग के लिए उज्बेकिस्तान का आभार भी जताया. जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान और उज्बेकिस्तान आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर समान सोच रखते हैं. उन्होंने उज्बेकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने हर प्रकार के आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है. सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि उच्चस्तरीय बैठकों और लगातार बढ़ते संवाद से हिंदुस्तान-उज्बेकिस्तान के रिश्ते और मजबूत होंगे. दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग, तकनीक और मध्य एशिया में साझेदारी को लेकर भविष्य में और बड़े कदम उठाए जाएंगे. Also read : ताइवान के छात्रों के लिए चीन में समर कैंप : ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट ने बताया चीन AI के जरिए कर सकता है ब्लैकमेल The post हिंदुस्तान-उज्बेकिस्तान रिश्तों को नई रफ्तार, जयशंकर बोले- अब साझेदारी को माइनिंग सेक्टर तक ले जाना चाहते हैं appeared first on Naya Vichar.

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जसप्रीत बुमराह की चोट ने खोली फिटनेस सिस्टम की पोल? BCCI ने CoE से मांगा जवाब

Jasprit Bumrah Injury: हिंदुस्तानीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर होने के बाद हिंदुस्तानीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के चोट और फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं. बताया जा रहा है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की स्पोर्ट्स साइंस और मेडिकल टीम तथा राष्ट्रीय चयन समिति के बीच तालमेल की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई. सूत्रों के मुताबिक, चयनकर्ताओं को पहले बताया गया था कि बुमराह 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए उपलब्ध रहेंगे, लेकिन बाद में जानकारी मिली कि उनकी चोट पहले के अनुमान से ज्यादा गंभीर है. इससे चयन प्रक्रिया भी प्रभावित हुई. वीवीएस लक्ष्मण और अजीत अगरकर की बैठक मामले को लेकर सोमवार को वीवीएस लक्ष्मण, चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बीच खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस मैनेजमेंट पर समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया भी समन्वयक (Coordinator) के तौर पर शामिल हुए. CoE की कार्यप्रणाली पर सवाल बीसीसीआई में नितिन पटेल के जाने के बाद से स्पोर्ट्स साइंस विभाग के प्रमुख का पद खाली है. फिलहाल धनंजय कौशिक अंतरिम प्रमुख के तौर पर बेंगलुरु स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. हालांकि उनकी योग्यता पर सवाल नहीं हैं, लेकिन खिलाड़ियों की वापसी की समयसीमा तय करने और ‘रिटर्न टू प्ले’ प्रोटोकॉल के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हर्षित राणा और दूसरे खिलाड़ियों का भी जिक्र रिपोर्ट में हर्षित राणा का मामला भी सामने आया है. सवाल यह है कि वजन अधिक होने के बावजूद उन्हें फिट कैसे घोषित किया गया, जबकि बाद में उनकी हैमस्ट्रिंग की चोट फिर उभर आई. इसके अलावा वाशिंगटन सुंदर और नीतीश कुमार रेड्डी के बार-बार चोटिल होने को लेकर भी CoE की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. यह भी चर्चा है कि क्या नीतीश रेड्डी की गेंदबाजी गति बढ़ाने के प्रयास ने उनकी चोट का जोखिम बढ़ाया. साई सुदर्शन की फिटनेस पर भी नजर एक बीसीसीआई अधिकारी के मुताबिक, चयनकर्ताओं को बताया गया है कि साई सुदर्शन नेट्स में करीब 75 मिनट बल्लेबाजी कर रहे हैं और उनकी रिकवरी अच्छी है. हालांकि अगर बाद में उनकी फिटनेस को लेकर भी बदलाव होता है, तो इसका असर चयन प्रक्रिया पर पड़ सकता है. फिजियो की भूमिका भी समीक्षा में हिंदुस्तानीय टीम के फिजियो कामलेश जैन, जो पिछले करीब पांच वर्षों से टीम के साथ हैं, उनकी भूमिका भी समीक्षा के दायरे में बताई जा रही है. माना जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और अजीत अगरकर इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: दिलीप ट्रॉफी: नॉर्थ जोन की टीम घोषित, अर्शदीप सिंह को मिली जगह; जम्मू-कश्मीर से 6 खिलाड़ियों की एंट्री The post जसप्रीत बुमराह की चोट ने खोली फिटनेस सिस्टम की पोल? BCCI ने CoE से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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SBI ने जारी किए CBO भर्ती 2026 के फाइनल मार्क्स, ऐसे करें डाउनलोड

SBI CBO Result 2026: बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स के लिए जरूरी समाचार है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सर्किल बेस्ड ऑफिसर (CBO) भर्ती 2026 के फाइनल मार्क्स जारी कर दिए हैं. जिन कैंडिडेट्स ने इस भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, वे अब SBI की ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाकर अपने लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंक देख सकते हैं. इस भर्ती का फाइनल रिजल्ट पहले ही 24 जुलाई 2026 को जारी किया जा चुका था. अब कैंडिडेट्स के लिए मार्क्स भी उपलब्ध करा दिए गए हैं. ऐसे चेक करें अपने मार्क्स कैंडिडेट सबसे पहले SBI की ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाएं. इसके बाद Careers सेक्शन में जाकर Recruitment Result ऑप्शन पर क्लिक करें. अब स्क्रीन पर दिखाई दे रहे “CBO Recruitment 2026 Marks” लिंक पर क्लिक करें. अब अपना Registration Number या Roll Number और Password/Date of Birth डाल कर लॉगिन करें. लॉगिन करते ही स्क्रीन पर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त मार्क्स दिखाई देंगे. कैंडिडेट भविष्य के लिए अपने स्कोरकार्ड का प्रिंटआउट या PDF डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें. ये भी पढ़ें: SSC JE का फाइनल रिजल्ट जारी, 1731 पदों पर हुआ सेलेक्शन 2050 पदों पर हो रही है भर्ती SBI ने Circle Based Officer (CBO) के कुल 2050 पदों पर भर्ती निकाली थी. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 29 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक लिए गए थे. लिखित परीक्षा मार्च 2026 में आयोजित हुई थी. इसके बाद 30 जून को रिजल्ट, 13 जुलाई से इंटरव्यू और 24 जुलाई 2026 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. अब 3 अगस्त 2026 को कैंडिडेट्स के फाइनल मार्क्स भी जारी कर दिए गए हैं. स्थानीय भाषा का ज्ञान था जरूरी SBI CBO भर्ती के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पास होना अनिवार्य था. इसके साथ कैंडिडेट्स के लिए संबंधित राज्यों की स्थानीय भाषा का ज्ञान भी जरूरी रखा गया था. भर्ती के तहत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल समेत देश के विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग रिक्तियां निर्धारित की गई थीं. इसी वजह से प्रत्येक सर्किल के अनुसार स्थानीय भाषा की शर्त भी लागू की गई थी. आप डायरेक्ट नीचे दिए लिंक पर भी क्लिक कर अपना मार्क्स देख सकते हैं. Check Here SBI CBO Recruitment 2026 Marks ये भी पढ़ें: बैंक में डेटा बचाने के लिए इन एक्सपर्ट की पड़ती है जरूरत, आप भी शुरू कर सकते हैं अपना करियर The post SBI ने जारी किए CBO भर्ती 2026 के फाइनल मार्क्स, ऐसे करें डाउनलोड appeared first on Naya Vichar.

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बांकीपुर जीत पर जनसुराज अध्यक्ष उदय सिंह का बयान, बोले- जनता ने अहंकारी व्यवस्था को दिया जवाब

Prashant Kishor Won Bankipur Seat: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर की जीत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने जनता और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया. उन्होंने इस जीत को लोकतंत्र और जनविश्वास की जीत बताते हुए कहा कि बांकीपुर की जनता ने अहंकारी व्यवस्था को करारा जवाब दिया है. जनता का हृदय से आभार जताया उदय सिंह ने अपने बयान में कहा कि बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम आ चुके हैं और जनसुराज के सूत्रधार एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत किशोर ने बहुमत से जीत दर्ज की है. इसके लिए उन्होंने बांकीपुर की जनता का हृदय से धन्यवाद देते हुए कहा कि मतदाताओं ने लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखा और अपने मतदान से स्पष्ट संदेश दिया है. ‘अहंकारी व्यवस्था को मिला जवाब’ उन्होंने कहा कि इस चुनाव परिणाम के माध्यम से जनता ने एक अहंकारी व्यवस्था को उचित जवाब दिया है. यह परिणाम केवल एक सीट की जीत नहीं, बल्कि बिहार में वैकल्पिक नेतृत्व के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत है. ‘प्रभावी विधायक के रूप में उठेगी जनता की आवाज’ उदय सिंह ने विश्वास जताया कि प्रशांत किशोर एक प्रभावी विधायक के रूप में विधानसभा में जनता की आवाज मजबूती से उठाएंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि प्रशांत किशोर अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे. कार्यकर्ताओं का भी जताया आभार जनसुराज अध्यक्ष ने चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और पदाधिकारियों का भी धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास ने इस ऐतिहासिक जीत को संभव बनाया है. बिहार की नेतृत्व में नए अध्याय का दावा उदय सिंह ने कहा कि बांकीपुर का जनादेश बिहार की नेतृत्व में एक नए अध्याय की शुरुआत है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में जनसुराज राज्यभर में और मजबूती के साथ जनता के बीच अपनी भूमिका निभाएगा. Also Read: Bankipur By Election Result: बांकीपुर में छा गए प्रशांत किशोर, 2025 में हार के 9 महीनों बाद ऐसा क्या बदला कि BJP को उसी के गढ़ में पछाड़ दिया The post बांकीपुर जीत पर जनसुराज अध्यक्ष उदय सिंह का बयान, बोले- जनता ने अहंकारी व्यवस्था को दिया जवाब appeared first on Naya Vichar.

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मार खाने के डर से जब इस दिग्गज एक्टर ने बदल लिया था अपना नाम… जानिए यूसुफ खान की अनसुनी कहानी

दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार को आज भी उनके करीबी लोग प्यार से उनके असली नाम यूसुफ खान के नाम से याद करते हैं. हालांकि उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में इस नाम का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने साल 1944 में अमिया चक्रवर्ती की फिल्म ‘ज्वार भाटा’ से दिलीप कुमार नाम के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया और यही नाम उनकी पहचान बन गया. दिलीप कुमार ने क्यों बदला था अपना असली नाम? दिलीप कुमार ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने यूसुफ खान की जगह दिलीप कुमार नाम क्यों अपनाया. एक्टर ने कहा था, “मैंने दिलीप कुमार नाम इसलिए रखा, क्योंकि मुझे डर था कि कहीं मुझे मार न पड़े.” फिल्मों के खिलाफ थे दिलीप कुमार के पिता उन्होंने बताया कि उनके स्वर्गीय पिता फिल्मों के सख्त खिलाफ थे और वह नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्म इंडस्ट्री में काम करे. दिलीप कुमार ने याद किया कि उनके पिता के करीबी दोस्त लाला बशेशर नाथ थे, जिनके बेटे पृथ्वीराज कपूर भी फिल्मों में एक्टिंग करते थे. दिलीप कुमार के मुताबिक, उनके पिता अक्सर बशेशर नाथ से कहते थे, “तुमने अपने बेटे के साथ क्या किया? देखो, तुम्हारा बेटा कितना अच्छा और स्वस्थ है, लेकिन वह फिल्मों में काम कर रहा है.” दिलीप कुमार के लिए इन 3 नामों पर हुआ था विचार दिलीप कुमार ने बताया कि जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा तो उन्हें अपने पिता की प्रतिक्रिया का डर था. उन्होंने कहा कि उनके पिता (लाला गुलाम सरवर अली खान) काफी सख्त और गुस्सैल स्वभाव के थे, इसलिए उन्हें चिंता थी कि अगर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आने की बात पता चली तो वह नाराज हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि उस समय उनके लिए कुछ नामों पर विचार किया गया था, जैसे यूसुफ खान, दिलीप कुमार और बासुदेव. दिलीप कुमार ने मजाकिया अंदाज में कहा, “मैंने खुद कहा था कि बस यूसुफ खान नाम मत रखना, बाकी कुछ भी चलेगा.” उन्होंने आगे बताया कि करीब दो-तीन महीने बाद उन्होंने एक विज्ञापन में अपना नाम दिलीप कुमार देखा और तब उन्हें पता चला कि अब यही उनकी नई पहचान बन चुकी है. दिलीप कुमार नाम किसने दिया था? दिलीप कुमार ने अपनी साल 2014 में आई ऑटोबायोग्राफी ‘द सब्सटेंस एंड द शैडो’ में खुलासा किया था कि उनका स्क्रीन नेम ‘दिलीप कुमार’ रखने का आइडिया दिग्गज अभिनेत्री और बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी का था. बॉम्बे टॉकीज ने ही दिलीप कुमार की पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ (1944) को प्रोड्यूस किया था. देविका रानी को लगा कि एक रोमांटिक हीरो के तौर पर उनकी स्क्रीन इमेज के लिए दिलीप कुमार नाम ज्यादा बेहतर और दर्शकों से जुड़ने वाला रहेगा. देविका रानी ने स्क्रीन नेम को लेकर क्या कहा था दिलीप कुमार से दिलीप कुमार ने अपनी किताब में लिखा था कि देविका रानी ने उनसे कहा था, “यूसुफ, मैं तुम्हारी बतौर अभिनेता लॉन्चिंग के बारे में सोच रही थी. मुझे लगा कि अगर तुम एक स्क्रीन नेम अपना लो तो यह अच्छा रहेगा. ऐसा नाम, जिससे दर्शक तुम्हें आसानी से पहचान सकें और जो तुम्हारी रोमांटिक छवि से भी मेल खाए.” देविका का यह फैसला ऐतिहासिक साबित हुआ, क्योंकि दिलीप कुमार आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे महान कलाकारों में शामिल हुए. पद्म विभूषण से सम्मानित दिलीप कुमार का 98 साल की उम्र में साल 2022 में निधन हो गया था. ये भी पढ़ें: Ramayana Cast Fees: 4000 करोड़ की ‘रामायण’ में रणबीर कपूर बने सबसे महंगे स्टार, यश को मिले इतने, इस एक्टर ने फ्री में किया काम The post मार खाने के डर से जब इस दिग्गज एक्टर ने बदल लिया था अपना नाम… जानिए यूसुफ खान की अनसुनी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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संसद में हंगामे के बीच दो अहम विधेयक पास; किरेन रिजिजू बोले- कांग्रेस को राह दिखाने वाला कोई नहीं

संसद के मानसून सत्र में सोमवार को भारी हंगामे के बीच दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो गए. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सांसद कांग्रेस के सांसद दिशाहीन हो गए हैं. किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद में शोर- शराबे दोनों बिल पास हो गए. पहला बिल सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया और दूसरा राज्यसभा ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी. उन्होंने कहा कि विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों में सामान्य चर्चा नहीं हो सकी. महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा जरूरी थी किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष की अपनी मांगें हो सकती हैं, लेकिन राष्ट्रीय महत्व के विधेयकों पर चर्चा से बचना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहती थी कि सभी दलों के सांसद इन विधेयकों पर अपनी राय रखें, लेकिन विपक्ष ने पूरे समय हंगामा किया। उन्होंने इसे संसद की कार्यवाही के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के सांसद “पूरी तरह भटक गए हैं” और उन्हें सही दिशा दिखाने वाला कोई नेता नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी सांसदों को समझाने का आग्रह किया था, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला. विपक्ष के विरोध के बीच राज्यसभा में एमएसएमई बिल पास राज्यसभा में विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति और दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे. इसी शोर-शराबे के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में पारित कराया. यह विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा में पेश किया गया था. एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों को दूर करना, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, कारोबार में आसानी बढ़ाना और भरोसे पर आधारित नियामक व्यवस्था विकसित करना है. प्रशासन का दावा है कि इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भुगतान, अनुपालन और व्यवसाय संचालन में राहत मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे चार नए जज लोकसभा से पारित सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी. इसमें हिंदुस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की संख्या शामिल नहीं है. प्रशासन का कहना है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सकेगा. संसद में इन दोनों विधेयकों के पारित होने के साथ ही प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव भी एक बार फिर खुलकर सामने आ गया. ये भी पढ़ें: साइकेट्रिस्ट ने 5वीं मंजिल से कूदकर दी जान, परिवार का दावा- तलाक के बाद मानसिक तनाव में थी The post संसद में हंगामे के बीच दो अहम विधेयक पास; किरेन रिजिजू बोले- कांग्रेस को राह दिखाने वाला कोई नहीं appeared first on Naya Vichar.

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CWG 2026: 76 साल की महिला ने रचा इतिहास, बनीं सबसे उम्रदराज गोल्ड मेडलिस्ट

Commonwealth Games 2026: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आखिरी दिन ऑस्ट्रेलिया की लुईस हॉस्किन्स (Louise Hoskins) ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो अब तक कोई नहीं कर सका था. 76 साल और 173 दिन की उम्र में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास की सबसे उम्रदराज स्वर्ण पदक विजेता बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. हॉस्किन्स ने अपनी जोड़ीदार सेरेना बॉनेल के साथ पैरा स्त्री पेयर्स B6-B8 स्पर्धा के फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता. इसके साथ ही उन्होंने स्कॉटलैंड के जॉर्ज मिलर का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने बर्मिंघम 2022 में 75 वर्ष की उम्र में पैरा बॉल्स में गोल्ड जीतकर यह रिकॉर्ड बनाया था. ‘बॉल्स हर उम्र के लोगों का स्पोर्ट्स है’ ऐतिहासिक जीत के बाद हॉस्किन्स ने कहा, “यह साबित करता है कि कोई भी यह कर सकता है। युवा हों या बुजुर्ग, बॉल्स हर किसी के लिए है.” वहीं उनकी जोड़ीदार सेरेना बॉनेल ने कहा, “हम अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और गोल्ड मेडल के साथ लौटना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है.” ऑस्ट्रेलिया ने जीते दो गोल्ड ऑस्ट्रेलिया ने पैरा बॉल्स में एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया. डेमियन डेलगाडो और जेमी रेनॉल्ड्स की जोड़ी ने पुरुषों की B6-B8 स्पर्धा के फाइनल में न्यूजीलैंड को सीधे सेटों में हराकर गोल्ड जीता. डेलगाडो ने कहा, “हमने शुरुआत से ही गोल्ड जीतने का लक्ष्य रखा था और आखिरकार उसे हासिल कर लिया। इस उपलब्धि पर मुझे बेहद गर्व है।” नॉर्दर्न आयरलैंड और इंग्लैंड को भी मिली सफलता पुरुषों की पेयर्स स्पर्धा में एडम मैकक्यून और गैरी केली की नॉर्दर्न आयरलैंड की जोड़ी ने इंग्लैंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता. यह ग्लासगो 2026 में नॉर्दर्न आयरलैंड का तीसरा गोल्ड और कुल 16वां पदक रहा. स्त्री सिंगल्स में इंग्लैंड की कैथरीन रेडनॉल ने ग्वेर्नसे की अली मेरियन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. नॉरफॉक आइलैंड को मिला ऐतिहासिक पदक स्त्री सिंगल्स में शे विल्सन ने मलेशिया की एम्मा फिरयाना सरोजी को हराकर कांस्य पदक जीता. इसके साथ ही नॉरफॉक आइलैंड ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का अपना पहला और इतिहास का तीसरा पदक हासिल किया. ये भी पढ़ें: CWG 2026: किस स्पोर्ट्स ने बढ़ाया हिंदुस्तान का मान, कौन रहा फिसड्डी? देखें पूरा रिपोर्ट कार्ड The post CWG 2026: 76 साल की स्त्री ने रचा इतिहास, बनीं सबसे उम्रदराज गोल्ड मेडलिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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