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Author name: Vinod Jha

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संसद मार्च के बाद CJP पर पुलिस का एक्शन, जंतर-मंतर से हटाया धरना, जानें दिनभर क्या-क्या हुआ

CJP Parliament March: दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को हटा दिया. हालांकि, संसद मार्च के बाद प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया. आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा. पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बनाया गया मंच भी हटा दिया. इसके अलावा मौके से ट्रैम्पोलिन, कालीन, गद्दे और अन्य सामान भी हटाया गया. इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लाउडस्पीकर लगे एक टेंपो से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा. संसद मार्च के बाद बढ़ा विवाद CJP ने सबसे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय प्रदर्शन किया था. इसके बाद संगठन ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. सोमवार (20 जुलाई) को हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे थे. संसद मार्ग के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. CJP प्रतिनिधियों ने की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात संसद मार्च के बीच केंद्र प्रशासन ने आंदोलनरत CJP के प्रतिनिधियों से बातचीत की. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी मांगों पर विचार करेगी और उचित समय पर निर्णय से अवगत कराएगी. CJP के अनुसार, उसके प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास ने सोमवार को जेपी नड्डा से उनके आवास पर दो चरणों में मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की बिना किसी प्रतिबंध के रिहाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग शामिल थी. क्या हैं CJP की तीन प्रमुख मांगें? CJP ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं… सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी आवाजाही प्रतिबंध के रिहा किया जाए. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए. नीट 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. कई छात्र संगठनों ने किया CJP का समर्थन शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर CJP के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) समेत कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों ने हिस्सा लिया. बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद बढ़ा तनाव प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब सुबह करीब 11 बजे प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग पुलिस थाने के सामने लगाए गए एक प्रमुख बैरिकेड को तोड़ दिया और संसद की ओर बढ़ने लगे. यह स्थान जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर है. इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई. अधिकारियों के मुताबिक, भीड़ में मौजूद कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और अन्य सामान फेंके, जिससे कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. 20 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में, इंटरनेट सेवा भी निलंबित अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-2 के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. इस दौरान 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. सुरक्षा के लिहाज से नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं. दोपहर करीब एक बजे हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर किसी भी प्रकार की सभा पर प्रतिबंध लगा दिया गया. नई दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संसद और आसपास के इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त अर्धसैनिक कंपनियां तैनात की गईं और विभिन्न जिलों से पुलिस बल बुलाया गया. दंगा-रोधी उपकरणों से लैस अर्धसैनिक बलों को रविवार रात से ही तैनात कर दिया गया था. लुटियंस दिल्ली के प्रमुख चौराहों, प्रशासनी इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. कई नेताओं ने भी प्रदर्शन में दर्ज कराई मौजूदगी विरोध प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद और मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी शामिल हुईं. दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. पांच मेट्रो स्टेशन रहे बंद सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया. सुरक्षा व्यवस्था सामान्य होने के बाद सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया. Also Read: CJP Sansad March Live : CJP प्रोटेस्ट मार्च में हिंसा, 50 से अधिक पुलिस और पैरामिलिट्री जवान घायल The post संसद मार्च के बाद CJP पर पुलिस का एक्शन, जंतर-मंतर से हटाया धरना, जानें दिनभर क्या-क्या हुआ appeared first on Naya Vichar.

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जंतर-मंतर से संसद तक: प्रदर्शन, टकराव और बवाल… तस्वीरों में देखें CJP का प्रोटेस्ट

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन देश की राजधानी दिल्ली में जमकर बवाल हुआ. शिक्षा सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े. रास्ते में कई जगह बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश, पुलिस के साथ झड़प, लाठीचार्ज, आंसू गैस और हिरासत जैसी घटनाएं सामने आईं. तस्वीरों के जरिए जानिए सुबह से शाम तक क्या-क्या हुआ. The post जंतर-मंतर से संसद तक: प्रदर्शन, टकराव और बवाल… तस्वीरों में देखें CJP का प्रोटेस्ट appeared first on Naya Vichar.

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छात्रों पर लाठीचार्ज से गुस्साए राहुल गांधी, पीएम मोदी को बताया इतिहास का सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री

Rahul Gandhi Slams PM Modi: राहुल गांधी ने एक्स पर अपना एक वीडियो शेयर किया. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग कर रही है. उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी इतने युवा-विरोधी हैं कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते.’’ राहुल गांधी का दावा, 152 पेपर लीक मामले में 7.5 करोड़ छात्र हुए प्रभावित राहुल गांधी ने दावा किया कि 152 पेपर लीक की घटनाओं से 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन किसी दोषी को सजा नहीं मिली. उन्होंने कहा- इसके बजाय मेहनती युवाओं को सजा दी जा रही है और शिक्षा से जुड़े जायज सवाल उठाने वाले छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है. दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र अपराधी नहीं हैं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं. राहुल गांधी ने कहा- छात्रों का अधिकार है कि उन्हें ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिले जो निष्पक्ष हो, उनका सम्मान करे और ठीक से काम करे. प्रधानमंत्री मोदी देश के युवाओं का अनादर करते हैं : राहुल गांधी राहुल गांधी का कहना था कि छात्रों पर आंसू गैस का इस्तेमाल और लाठीचार्ज लोकतांत्रिक तरीका नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रशासन को छात्रों की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए. उन्होंने कहा- लोग शिक्षा व्यवस्था की स्थिति से परेशान हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शिक्षा व्यवस्था तथा संस्थानों पर कब्जा कर लिया है. राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी देश के युवाओं का अनादर करते हैं और असत्य तथा हिंसा में विश्वास करते हैं. ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट, एम्स डायरेक्टर को किया तलब; कल आएगा फैसला ये भी पढ़ें: CJP का दावा, प्रदर्शनकारियों की तीन मांगों पर विचार के लिए केंद्रीय मंत्री नड्डा ने मांगा समय ये भी पढ़ें: C/JP प्रदर्शन के बीच वांगचुक ने रखी अनशन खत्म करने की नई शर्त, कहा- युवाओं को सांसदों से मिलने दो या… The post छात्रों पर लाठीचार्ज से गुस्साए राहुल गांधी, पीएम मोदी को बताया इतिहास का सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री appeared first on Naya Vichar.

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CJP प्रदर्शन के बीच वांगचुक ने रखी अनशन खत्म करने की नई शर्त, कहा- युवाओं को सांसदों से मिलने दो या…

Sonam Wangchuk Hunger Strike: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने ट्वीट किया, “शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे युवाओं के साथ जिस बेरहमी से बर्ताव किया जा रहा है, उसे देखते हुए मैंने फैसला किया है कि मैं अपना अनशन तब तक जारी रखूंगा जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं मिल जाती, या मुझे उनसे यहीं अस्पताल में मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती.” संसद के सामने छात्रों को अपनी शिकायतें रखने की इजाजत देकर इस मुद्दे को सुलझाएं : वांगचुक वांगचुक ने कहा- “उम्मीद है कि प्रशासन शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी. मैं प्रशासन और पुलिस बल से अपील करता हूं कि वे छात्रों को आज या कल संसद के सामने अपनी शिकायतें रखने की इजाजत देकर इस मुद्दे को सुलझाएं. मुझे यकीन है कि युवा प्रदर्शनकारी कल भी वैसा ही धैर्य और सहनशीलता दिखाएंगे जैसा उन्होंने आज दिखाया है.” वांगचुक की पत्नी का दावा, 5 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हैं 25 लाख से ज्यादा युवा इधर संसद मार्च में शामिल सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ गीतांजलि आंग्मो ने कहा, “यह एक ऐसा आंदोलन है जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है. यहां पूरे देश से लोग आए हैं और 5 किलोमीटर के दायरे में 25 लाख से ज्यादा युवा मौजूद हैं. पुलिस और प्रशासन हालात को काबू में करने के लिए सिर्फ झूठ का सहारा ले रही हैं. वे बस लाठीचार्ज कर रहे हैं, अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और झूठ बोल रहे हैं. वे अब कह रहे हैं कि विरोध खत्म हो गया है, वापस चले जाओ. प्रशासन ने आज मेट्रो, उबर और बाकी सब कुछ बंद करने की कोशिश की. मैंने डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर देखा कि कितने सारे लोग आए हैं. यह प्रशासन के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए कि भविष्य में ताकत और जोर-जबरदस्ती से काम नहीं चलेगा. अब इसका समाधान निकालना होगा और इस पर ध्यान देना होगा. वे सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप का स्पोर्ट्स नहीं स्पोर्ट्स सकते और झूठ का सहारा नहीं ले सकते. वे हर चीज के बारे में जानकारी छिपाते रहे हैं. यह उनके लिए एक चेतावनी है कि वे जो करते आ रहे हैं, उसे जारी नहीं रख सकते. 12 साल पहले सभी ने उन्हें इस उम्मीद के साथ सत्ता में चुना था कि वे हिंदुस्तान को सुपरपावर और विकसित देश बनाएंगे, लेकिन वे बुरी तरह नाकाम रहे हैं.” यह भी पढ़ें-अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने की समाचार निकली झूठी, दिल्ली पुलिस बोली- अब भी मंच पर हैं मौजूद CJP संस्थापक ये भी पढ़ें: ‘कौन हैं नड्डा, किस हैसियत से मिले?’ CJP नेताओं से मुलाकात पर भड़कीं सुप्रिया श्रीनेत, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा ये भी पढ़ें: C/JP का दावा, प्रदर्शनकारियों की तीन मांगों पर विचार के लिए केंद्रीय मंत्री नड्डा ने मांगा समय The post CJP प्रदर्शन के बीच वांगचुक ने रखी अनशन खत्म करने की नई शर्त, कहा- युवाओं को सांसदों से मिलने दो या… appeared first on Naya Vichar.

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शुभेंदु अधिकारी का गंभीर आरोप- मनीष गुप्ता को बचाने के लिए ममता बनर्जी ने दबाकर रखी ‘21 जुलाई कमीशन’ की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई की ‘शहीद दिवस’ रैली से ठीक पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में घोषणा की है कि उनकी प्रशासन वर्ष 1993 में हुए बहुचर्चित पुलिस गोलीकांड की जांच के लिए गठित ‘21 जुलाई आयोग’ की मूल रिपोर्ट सार्वजनिक करने जा रही है. मुख्यमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी और हाल ही में टीएमसी छोड़ने वाले पूर्व नौकरशाह व पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता का नाम लिये बिना उन पर गंभीर आरोप लगाये. 21 जुलाई 1993 को हुई पुलिस फायरिंग में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की हुई थी मौत. ममता बनर्जी प्रशासन ने फायरिंग की जांच के लिए 2011 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी आयोग का गठन किया था. 2024 में प्रशासन को जस्टिस सुशांत चटर्जी कमीशन की रिपोर्ट मिली, ममता बनर्जी ने रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की. शुभेंदु का दावा : घटना से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज ‘राइटर्स बिल्डिंग’ से गायब हो गये, प्रशासन ने ‘नकारात्मक और उदासीन’ रवैया अपनाया. 21 जुलाई कमीशन की प्रमुख सिफारिशें मृतकों के निकट परिजनों को 25-25 लाख रुपए मुआवजा दिया जाये. घायलों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाये. पीड़ितों को ममता बनर्जी प्रशासन ने क्या दिया? मारे गये लोगों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए दिये. घायलों को 15-15 हजार रुपए का मुआवजा दिया. पीड़ित परिवारों को मुआवजा देगी शुभेंदु प्रशासन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि 21 जुलाई 1993 के पीड़ित परिवार नयी प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं. सीएम ने साथ ही कहा कि मौजूदा हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रशासन उनकी हर तरह की कानूनी मदद करेगी. शुभेंदु ने कहा कि उनकी प्रशासन मुख्यमंत्री राहत कोष से 21 जुलाई कमीशन की सिफारिश के तहत शेष मुआवजे की राशि का भुगतान करेगी. फायरिंग पर 21 जुलाई कमीशन की रिपोर्ट में क्या? शुभेंदु अधिकारी ने आयोग की रिपोर्ट के कुछ अंश पढ़कर सुनाते हुए कहा कि रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि युवा कांग्रेस की रैली पर पुलिस की गोलीबारी की कोई जरूरत नहीं थी और बल प्रयोग को ‘गैर-जरूरी, अनुचित और बिना उकसावे की’ कार्रवाई करार दिया गया है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, आयोग ने पाया कि प्रदर्शनकारियों के राइटर्स बिल्डिंग (जो उस समय राज्य का सचिवालय था) में जबरन दाखिल होने की आशंका ‘काल्पनिक’ थी और मेयो रोड, डोरिना चौराहा और एस्प्लेनेड पर पुलिस की गोलीबारी पूरी तरह से गैर-जरूरी थी. शुभेंदु अधिकारी ने पूछे सवाल ममता बनर्जी को बयान देने के लिए कभी क्यों नहीं बुलाया गया, जबकि आयोग ने 300 से अधिक लोगों से पूछताछ की थी. मुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी को इस घटना का ‘सबसे बड़ा गवाह’ बताया. शुभेंदु ने आयोग के समक्ष रखे गये साक्ष्यों का संदर्भ देते हुए दावा किया कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष पंकज बनर्जी को गवाह के तौर पर बुलाया गया था और उन्होंने गोलीबारी के लिए तत्कालीन गृह सचिव मनीष गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग ने 44 अहम गवाहों की एक सूची तैयार की थी, जिसमें मनीष गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य, कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर तुषार तालुकदार, वरिष्ठ वामपंथी नेता बिमान बोस और कांग्रेस के पूर्व नेता सोमेन मित्रा शामिल थे. लेकिन ममता बनर्जी से पूछताछ नहीं की गयी. ‘ममता प्रशासन ने रिपोर्ट के सुझावों को क्यों किया खारिज?’ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2011 में जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ था, तब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली प्रशासन ने ही ओडिशा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सुशांत चट्टोपाध्याय की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था. उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) ने जरूरी दस्तावेज और जानकारियां उपलब्ध नहीं करायीं. अगर सारी बातें सामने आ जातीं, तो उनके बिजली मंत्री (मनीष गुप्ता) फंस सकते थे. 21 जुलाई मनाने वालों को देना होगा जवाब : शुभेंदु शुभेंदु ने कहा कि जो लोग 21 जुलाई को शहीद दिवस मना रहे हैं, उन्होंने 15 वर्षों तक राज्य पर शासन किया. उन्हें बंगाल की जनता को जवाब देना होगा कि जस्टिस सुशांत चट्टोपाध्याय की कितनी सिफारिशों को लागू किया गया और कितनों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया. क्या है 21 जुलाई 1993 का यह पूरा मामला? यह पूरा विवाद आज से 33 वर्ष पहले का है, जब वर्तमान टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की नेता हुआ करती थीं. 21 जुलाई 1993 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में तत्कालीन वाम मोर्चा (Left Front) प्रशासन के खिलाफ महाकरण अभियान (राइटर्स बिल्डिंग चलो) का आयोजन किया गया था. इस दौरान पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जान चली गयी थी. ममता बनर्जी स्वयं पुलिस की कार्रवाई में घायल हो गयीं थीं. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में हिंदुस्तानीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी, जिन्होंने तत्कालीन वाम मोर्चा प्रशासन के दौरान अपनी राज्य में सेवा दी थी. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी की 21 जुलाई शहीद दिवस रैली का स्थल बदला, कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगायी 4 शर्तें बिना जांच के कैसे बन गये मंत्री? वर्ष 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने उन्हीं मनीष गुप्ता को तृणमूल कांग्रेस में शामिल कराया, चुनाव लड़वाया और कैबिनेट मंत्री तक बना दिया. हाल ही में टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हुईं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर मांग की थी कि वर्ष 1993 के इस कांड की दोबारा निष्पक्ष जांच करायी जाये. ये भी पढ़ें: टीएमसी के 2 धड़ों में ‘शहीद दिवस’ पर महासंग्राम, ममता और रीतब्रत गुट ने किया रैलियों का ऐलान ‘शहीद दिवस’ से पहले मनीष गुप्ता का इस्तीफा और विवाद पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता ने 16 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि अब इस पार्टी में उनके लिए करने को कुछ नहीं बचा है. इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक क्षमता की जमकर तारीफ की थी. शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि उचित जांच रिपोर्ट नहीं होने की वजह से पुलिस द्वारा की गयी फायरिंग की वैधानिकता और औचित्य कभी सिद्ध ही नहीं हो पायी, क्योंकि न्यायिक समीक्षा से इसे दूर रखा गया था. ये भी

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Dengue vaccine: भारत में डेंगू के पहले वैक्सीन QDENGA को मंजूरी, जानिए किसे लगेगा, कैसे करेगा बचाव

Dengue vaccine: हिंदुस्तान में डेंगू से बचाव के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने घोषणा की है कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने उसके डेंगू वैक्सीन QDENGA को 4 से 60 साल की आयु के लोगों के लिए मंजूरी दे दी है. कंपनी के अनुसार, यह हिंदुस्तान में मंजूर होने वाला पहला डेंगू टीका है, जिसे लगाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होगी कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं. क्या है QDENGA? QDENGA जापान की फार्मास्यूटिकल कंपनी Takeda की ओर से विकसित डेंगू से बचाव करने वाली पहली वैक्सीन है. इसे हिंदुस्तान के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) की ओर से मंजूरी दे दी गई है. यह वैक्सीन डेंगू के चारों वायरस स्ट्रेन (DENV-1, 2, 3 और 4) से सुरक्षा देती है. इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रकार (सीरोटाइप) से सुरक्षा दे सके. कैसे दिया जाता है QDENGA का टीका QDENGA टीका को दो खुराक में लगाया जाता है और दोनों डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है. यह मंजूरी क्यों है जरूरी? हिंदुस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का सबसे अधिक बोझ है. हर साल लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं. डेंगू का कोई विशेष इलाज नहीं है और गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है. ऐसे में बीमारी से बचाव के लिए इसे प्रभावी वैक्सीन माना जा रहा है. हिंदुस्तान में क्या है डेंगू की स्थिति? जानकारी के अनुसार, हिंदुस्तान में पूरी दुनिया के मुकाबले एक तिहाई डेंगू के मामले आते हैं. साल 2025 में 1.13 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए थे. क्लीनिकल ट्रायल में क्या मिले नतीजे? कंपनी के अनुसार, इस वैक्सीन की मंजूरी 28 हजार से अधिक लोगों पर किए गए वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल के आधार पर मिली है. इनमें हिंदुस्तान के प्रतिभागी भी शामिल थे. अध्ययन में सामने आया कि.. दूसरी खुराक के 12 महीने बाद डेंगू संक्रमण से बचाव में 80.2% प्रभावकारिता दर्ज की गई. डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने से बचाव में 90.4% प्रभावकारिता मिली. 4.5 साल बाद भी अस्पताल में भर्ती होने से बचाव में 84.1% प्रभावकारिता बनी रही. सात सालों तक डेंगू वायरस के चारों प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा के प्रमाण भी मिले है. क्या वैक्सीन लगवाने से पहले डेंगू टेस्ट जरूरी है ? नहीं, इस वैक्सीन को लेने से पहले यह जरूरी नहीं है कि पहले डेंगू हुआ है या नहीं. WHO की सिफारिश विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में QDENGA के इस्तेमाल की सिफारिश कर चुका है. इस टीके को WHO की प्री-क्वालिफिकेशन भी मिल चुकी है, जो इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता की पुष्टि करती है. कंपनी ने क्या कहा? टाकेडा के इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स प्रमुख डॉ. महेंद्र नायक ने कहा कि हिंदुस्तान में डेंगू तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है. उनके अनुसार, QDENGA के सात सालों के आंकड़े बताते हैं कि यह टीका संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में प्रभावी है. उन्होंने कहा कि 2022 में लॉन्च होने के बाद इसे 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और दुनिया भर में 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया और हिंदुस्तान क्लस्टर के महाप्रबंधक पीटर स्ट्रीबल ने कहा कि डेंगू से निपटने के लिए केवल टीकाकरण ही नहीं, बल्कि मच्छर नियंत्रण, जागरूकता और निगरानी जैसे उपाय भी जरूरी हैं. वहीं चिकित्सा मामलों के प्रमुख डॉ. गोह चू बेंग ने कहा कि हिंदुस्तान में डेंगू वायरस के चारों प्रकार मौजूद हैं, इसलिए ऐसा टीका जो सभी प्रकारों से सुरक्षा दे, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. Also Read: दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट, एम्स डायरेक्टर को किया तलब; कल आएगा फैसला The post Dengue vaccine: हिंदुस्तान में डेंगू के पहले वैक्सीन QDENGA को मंजूरी, जानिए किसे लगेगा, कैसे करेगा बचाव appeared first on Naya Vichar.

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अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर रोक 6 अक्टूबर तक बढ़ी, इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को धमकी भरा भाषण देने के मामले में दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी, लेकिन उन्हें आंखों का इलाज कराने के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर डराने-धमकाने वाले बयान देने के मामले में दंडात्मक कार्रवाई से मिली अंतरिम राहत 6 अक्टूबर तक बढ़ा दी. जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव को जांच में सहयोग करने और अदालत की इजाजत के बिना विदेश यात्रा न करने का निर्देश दिया. अंतरिम राहत की शर्तों में बदलाव पर सुनवाई अगस्त में जस्टिस भट्टाचार्य ने अभिषेक बनर्जी को दी गयी अंतरिम राहत 6 अक्टूबर तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, बढ़ा दी. उन्होंने कहा कि अंतरिम राहत की शर्तों में बदलाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव की याचिका पर अगस्त में सुनवाई होगी, लेकिन उन्होंने कोई विशेष तारीख तय नहीं की. आंख का इलाज कराने के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं डायमंड हार्बर के लोकसभा सदस्य और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी. कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा की अनुमति देना उचित नहीं होगा. न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि कोलकाता में आंखों के कई नामी अस्पताल हैं. ये भी पढ़ें: बुलडोजर एक्शन से भड़के अभिषेक बनर्जी, कहा- 2031 में हमारी प्रशासन बनी तो बीजेपी के दफ्तर ऐसे ही तोड़ेंगे कोलकाता में इलाज संभव नहीं, तभी देंगे विदेश जाने की इजाजत : कोर्ट अभिषेक के वकील ने जब कहा कि उनके मुवक्किल ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जांच में सहयोग किया है, तो न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि वह तब तक टीएमसी नेता को विदेश जाने की अनुमति नहीं देंगे, जब तक यह पता न चल जाये कि कोलकाता में उसका इलाज संभव नहीं है. ये भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर बुलडोजर एक्शन पर हाईकोर्ट की रोक, जानें अदालत ने क्या कहा जज बोले- अंतरात्मा को संतुष्ट करना होगा कोर्ट को जब उनके वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को अपना डॉक्टर चुनने का अधिकार है, तो जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत को भी अपनी अंतरात्मा को संतुष्ट करना होगा. कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच जारी है, बनर्जी को सहयोग जारी रखना चाहिए. अदालत ने 21 मई को डराने-धमकाने वाले भाषण मामले में अभिषेक को 31 जुलाई तक सख्त कार्रवाई से राहत दी थी. तब उन्हें जांच में सहयोग करने और अदालत की इजाजत के बिना विदेश यात्रा न करने का निर्देश दिया था. The post अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर रोक 6 अक्टूबर तक बढ़ी, इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं appeared first on Naya Vichar.

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लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश ने माउंट कुन फतह कर रचा इतिहास, सैनिक स्कूल तिलैया से कर चुके हैं पढ़ाई

कोडरमा से विकास कुमार की रिपोर्ट Mount Kun Expedition: सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्व छात्र और बोकारो जिले के फुसरो निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार (सेना मेडल) ने एक बार फिर देश और झारखंड का नाम रोशन किया है. उनके नेतृत्व में हिंदुस्तानीय सेना के 28 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने 17 जुलाई की सुबह 8:20 बजे लद्दाख की जांस्कर पर्वतमाला स्थित 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर नया इतिहास रच दिया. यह उपलब्धि हिंदुस्तानीय सेना के महत्वाकांक्षी प्री-एवरेस्ट मैसिफ अभियान का हिस्सा है, जो वर्ष 2027 में प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट, माउंट ल्होत्से और माउंट नुप्त्से अभियान की तैयारी के लिए चलाया जा रहा है. नई दिल्ली से शुरू हुआ चुनौतीपूर्ण अभियान हिंदुस्तानीय सेना का यह विशेष पर्वतारोहण दल 5 जून 2026 को नई दिल्ली से रवाना हुआ था. लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार के नेतृत्व में टीम पहले लेह पहुंची और वहां से अनुकूलन तथा विशेष प्रशिक्षण के लिए शाफत नाला रोड हेड में डेरा डाला. ऊंचाई वाले क्षेत्र में शरीर को अनुकूल बनाने और कठिन परिस्थितियों से तालमेल बैठाने के बाद दल ने आगे की चढ़ाई शुरू की. अभियान का प्रत्येक चरण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जहां मौसम और भूगोल दोनों ने पर्वतारोहियों की परीक्षा ली. भारी बर्फबारी और खराब मौसम के बीच बनाई रणनीति जुलाई के पहले सप्ताह में दल ने प्रतिकूल मौसम और भारी बर्फबारी का सामना करते हुए कठिन शाफत ग्लेशियर पार किया तथा लगभग 4,500 मीटर की ऊंचाई पर बेस कैंप स्थापित किया. लगातार बदलते मौसम के कारण अभियान की रणनीति में कई बार बदलाव करना पड़ा. इसके बावजूद पर्वतारोहियों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा और पूरी टीम ने अनुशासन तथा समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ाया. तीन हाई कैंप और 2,400 मीटर तक फिक्स की रस्सियां 5 से 15 जुलाई के बीच दल ने क्रमशः 5,300 मीटर, 6,150 मीटर और 6,350 मीटर की ऊंचाई पर तीन हाई कैंप स्थापित किए. इस दौरान लगभग 2,000 मीटर लंबी फिक्स्ड रोप लगाई गई ताकि अंतिम चढ़ाई सुरक्षित ढंग से पूरी की जा सके. 16 जुलाई की रात 11:30 बजे अंतिम शिखर अभियान शुरू हुआ. टीम ने बर्फ से ढकी खड़ी दीवारों, बेहद संकरी नाइफ रिज और कठिन समिट रिज को पार करते हुए लगभग 2,400 मीटर तक अतिरिक्त रस्सियां फिक्स कीं. लगातार नौ घंटे से अधिक समय तक कठिन चढ़ाई करने के बाद 17 जुलाई की सुबह 8:20 बजे पूरा दल माउंट कुन की चोटी पर पहुंचा और वहां तिरंगा फहराया. हिंदुस्तानीय सेना के नाम दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड इस सफल अभियान के साथ हिंदुस्तानीय सेना ने एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया. एक ही दिन में किसी एक दल द्वारा माउंट कुन की चोटी पर सर्वाधिक पर्वतारोहियों के पहुंचने का रिकॉर्ड हिंदुस्तानीय सेना के इस अभियान दल के नाम दर्ज हो गया. यह उपलब्धि न केवल हिंदुस्तानीय सेना की पर्वतारोहण क्षमता को दर्शाती है, बल्कि कठिन हिमालयी अभियानों में उसकी तकनीकी दक्षता और टीमवर्क का भी उत्कृष्ट उदाहरण है. अब माउंट सतोपंथ होगी अगली चुनौती हिंदुस्तानीय सेना का यह अभियान यहीं समाप्त नहीं होगा. अभियान दल अब अगस्त-सितंबर 2026 में उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय स्थित 7,075 मीटर ऊंचे माउंट सतोपंथ पर चढ़ाई करेगा. इसे वर्ष 2027 में प्रस्तावित एवरेस्ट मैसिफ मिशन की अंतिम तैयारी माना जा रहा है. सेना का लक्ष्य दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों में शामिल माउंट एवरेस्ट, माउंट ल्होत्से और माउंट नुप्त्से पर सफल अभियान चलाना है. इसे भी पढ़ें: पलामू जिला स्कूल में एडमिशन स्कैम, टेस्ट में फेल बच्चों भी नामांकित कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं जय प्रकाश लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार पर्वतारोहण की दुनिया का जाना-पहचाना नाम हैं. उन्हें इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. वर्ष 2005 से हिंदुस्तानीय सेना में सेवा दे रहे जय प्रकाश अब तक हिंदुस्तान और विदेशों में 55 से अधिक पर्वत चोटियों पर सफल आरोहण कर चुके हैं. उनकी प्रमुख उपलब्धियों में 2019 में माउंट एवरेस्ट और 2024 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफल चढ़ाई शामिल है. अब वर्ष 2027 में हिंदुस्तानीय सेना के महत्वाकांक्षी एवरेस्ट मैसिफ मिशन का नेतृत्व भी वही करेंगे. सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्व छात्र की यह उपलब्धि न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अनुशासन, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों को भी सफलता में बदला जा सकता है. इसे भी पढ़ें: गिरिडीह के झरखट्टा गांव में खुखड़ी खाने से 7 लोग बीमार, सदर अस्पताल में भर्ती The post लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश ने माउंट कुन फतह कर रचा इतिहास, सैनिक स्कूल तिलैया से कर चुके हैं पढ़ाई appeared first on Naya Vichar.

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Gold Silver Price Today: सोना ₹1,095 और चांदी ₹4,101 महंगी, जानें आज का नया रेट

सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार, 20 जुलाई को तेजी दर्ज की गई. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,095 बढ़कर ₹1,42,000 के पार पहुंच गई है. वहीं, एक किलो चांदी ₹4,101 महंगी होकर करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है. आज का गोल्ड और सिल्वर रेट 24 कैरेट सोना (10 ग्राम): ₹1,42,000 के पार (₹1,095 की बढ़त) चांदी (1 किलो): ₹2.20 लाख (₹4,101 की बढ़त) अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं? देशभर में सोने की कीमतें एक जैसी नहीं होतीं. इसके पीछे कई वजहें होती हैं. ट्रांसपोर्ट और सिक्योरिटी खर्च: एक शहर से दूसरे शहर सोना पहुंचाने में परिवहन और सुरक्षा लागत जुड़ती है. स्थानीय मांग: जिन शहरों में सोने की मांग ज्यादा होती है, वहां कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है. ज्वेलरी एसोसिएशन: स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन मांग और सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं. पुराने स्टॉक की लागत: ज्वेलर्स ने जिस कीमत पर सोना खरीदा होता है, उसका असर बिक्री मूल्य पर पड़ता है. इस साल कितना बदला सोने-चांदी का भाव? साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में करीब ₹9,000 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख था, जो अब बढ़कर ₹1.42 लाख के पार पहुंच गया है. वहीं, चांदी की कीमत में साल की शुरुआत की तुलना में करीब ₹10,000 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है. 31 दिसंबर 2025 को चांदी ₹2.30 लाख प्रति किलो थी, जो फिलहाल करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो है. हालांकि, इस दौरान 29 जनवरी 2026 को दोनों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं. उस दिन सोना ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3.86 लाख प्रति किलो के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी. सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क जरूर देखें : हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें. हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की पुष्टि होती है. 2. खरीदने से पहले रेट जरूर जांचें : सोना खरीदने से पहले IBJA या अन्य विश्वसनीय स्रोतों से 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के ताजा भाव की पुष्टि जरूर कर लें. इससे सही कीमत पर खरीदारी करने में मदद मिलेगी. ये भी पढ़ें: PM Vishwakarma Yojana: इन 18 पारंपरिक कामगारों को मिलते हैं ₹15,000, ₹3 लाख तक का लोन और फ्री ट्रेनिंग, जानें पूरी डिटेल The post Gold Silver Price Today: सोना ₹1,095 और चांदी ₹4,101 महंगी, जानें आज का नया रेट appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट, एम्स डायरेक्टर को किया तलब; कल आएगा फैसला

Sonam Wangchuk Medical Condition: हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने मंगलवार को सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल टीम के प्रमुख, एम्स के डायरेक्टर और एम्स इमरजेंसी मेडिसिन के इंचार्ज डॉ अक्षय को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. इसके अलावा, अदालत ने वांगचुक के परिवार द्वारा नियुक्त डॉक्टर से भी सहायता के लिए मौजूद रहने का अनुरोध किया है. सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर मंगलवार को फैसला करेगा दिल्ली हाईकोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगा. डॉ गीतांजलि आंग्मो ने अपने पति सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर मेदांता अस्पताल में ट्रांसफर करने की इजाजत न देने वाले सिंगल जज के फैसले को चुनौती दी है. आंग्मो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने सिंगल जज के रविवार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष पेश करते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था. इस पर हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, ‘‘ठीक है. आज ही सुनवाई करते हैं.’’ डॉ गीतांजलि के वकील ने कोर्ट में क्या कहा? डॉ गीतांजलि के वकील सिब्बल ने दलील दी कि सिंगल जज ने पीठ के 16 जुलाई के उस आदेश की गलत व्याख्या की है, जिसमें अथॉरिटी को वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन ले गई और अब वह सफदरजंग अस्पताल से अपनी पसंद के अस्पताल में ड्रांसफर होना चाहते हैं. सिब्बल ने कहा कि हर व्यक्ति अपनी पसंद का चिकित्सा उपचार पाने का हकदार है और इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता. दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने गीतांजलि की याचिका को कर दिया था खारिज इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने रविवार को वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा था कि इस स्तर पर वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने संबंधी उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है. 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. ये भी पढ़ें: अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने की समाचार निकली झूठी, दिल्ली पुलिस बोली- अब भी मंच पर हैं मौजूद CJP संस्थापक The post दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट, एम्स डायरेक्टर को किया तलब; कल आएगा फैसला appeared first on Naya Vichar.

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