Hot News

Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के बाद AAP ने खोला मोर्चा, केजरीवाल ने मांगा CEC क इस्तीफा

Aam Aadmi Party: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज होता जा रहा है. INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के बाद अब आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है. AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. पूरा देश मांग रहा है ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा- केजरीवाल गोवा के तीन दिन के दौरे पर पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर उठ रही है. उन्होंने दावा किया कि पूरा देश इस मांग को लेकर एकजुट हो रहा है. मैं अगले तीन दिनों के लिए गोवा में हूं और विभिन्न लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मेरी कई बैठकें निर्धारित हैं. लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग राष्ट्रीय स्तर पर है; पूरा देश अब इसके लिए एकजुट हो रहा है- अरविंद केजरीवाल, AAP के राष्ट्रीय संयोजक SIR को लेकर केजरीवाल ने लगाए आरोप अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में चुनावों के दौरान असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए. केजरीवाल ने दावा किया कि चुनाव इसी प्रक्रिया के जरिए जीते गए. उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया का मजाक बन गया है. पिछले कुछ वर्षों में यह बात सामने आ रही है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जितने भी चुनाव जीते हैं, वे केवल असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाकर और फर्जी मतदाताओं के नाम एसआईआर के माध्यम से जुड़वाकर ही जीते हैं. यह सरासर गलत और लोकतंत्र के खिलाफ है. उन्होंने एक तरह से लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है. इसलिए हम इस मांग का समर्थन करते हैं और ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए- अरविंद केजरीवाल, AAP के राष्ट्रीय संयोजक वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन को AAP का समर्थन AAP प्रमुख ने साफ कहा कि उनकी पार्टी कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में इस तरह की गड़बड़ियां हो रही हैं तो यह गंभीर मामला है और मुख्य चुनाव आयुक्त को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. INDIA ब्लॉक ने भी किया था प्रदर्शन इससे पहले मंगलवार (6 अक्टूबर) को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था. विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, जिसके बाद विपक्ष के नेताओं को पुलिस में हिरासत में ले लिया गया था. Also Read: चुनाव आयोग के खिलाफ CJP और INDIA गठबंधन का आंदोलन: मुद्दा एक, रास्ता अलग; जानिए दोनों में क्या है समानता और अंतर The post ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के बाद AAP ने खोला मोर्चा, केजरीवाल ने मांगा CEC क इस्तीफा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

वृंदावन में दर्दनाक हादसा: पानी की टंकी में जहरीली गैस से चार संस्कृत छात्रों की मौत, एक की हालत गंभीर

UP News: मथुरा-वृंदावन के चैतन्य विहार इलाके में मंगलवार की रात बड़ा हादसा हो गया. महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुल विद्यालय में पानी की अंडरग्राउंड टंकी की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार छात्रों की मौत हो गई. हादसे में एक अन्य छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है. टंकी की सफाई के लिए उतरा छात्र, बचाने पहुंचे साथी भी फंसे जानकारी के अनुसार, गुरुकुल परिसर में करीब 12 से 14 फीट गहरी अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनी है. पिछले कई दिनों से टंकी से दुर्गंध आ रही थी. मंगलवार रात करीब 10 बजे एक छात्र बदबू दूर करने के लिए टंकी की सफाई करने नीचे उतरा. टंकी के भीतर जहरीली गैस होने के कारण छात्र अचानक बेहोश हो गया. उसे बचाने के लिए उसके चार साथी भी बारी-बारी से टंकी में उतर गए. कुछ ही देर में जहरीली गैस ने सभी को अपनी चपेट में ले लिया और पांचों छात्र बेहोश होकर टंकी में गिर गए. चार छात्रों ने अस्पताल में तोड़ा दम, एक की हालत गंभीर हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत-बचाव अभियान शुरू किया. सभी पांचों छात्रों को टंकी से बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में डॉक्टरों ने मनु कटारे, विशु, देवांश और आर्यन को मृत घोषित कर दिया. मृतकों की उम्र करीब 16 से 18 वर्ष के बीच बताई जा रही है. वहीं 15 वर्षीय रुद्र का उपचार जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई गई है. तीन साल से संचालित हो रहा था गुरुकुल जानकारी के मुताबिक, महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुल विद्यालय पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित हो रहा है. इसका संचालन मध्य प्रदेश निवासी आशीष कुमार शर्मा द्वारा किए जाने की बात सामने आई है. तीन मंजिला भवन में चल रहे गुरुकुल में करीब 200 छात्रों का पंजीकरण बताया गया है, जबकि लगभग 100 छात्र परिसर में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. गुरुकुल के एक छात्र के मुताबिक, टंकी से लगातार बदबू आने के कारण उसकी सफाई कराने का निर्णय लिया गया था. इसी दौरान यह हादसा हो गया. डीएम ने माना, जहरीली गैस बनने से हुआ हादसा मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि करीब 12 फीट गहरी पानी की टंकी लंबे समय से बंद थी और उसमें पानी भी भरा हुआ था. बंद टंकी के भीतर गैस बनने के कारण उसमें उतरे छात्र बेहोश हो गए. डीएम ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी. गुरुकुल की मान्यता, संचालन व्यवस्था और छात्रों से टंकी की सफाई क्यों कराई गई, इसके साथ ही सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही हुई या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच होगी. सीएम योगी ने लिया संज्ञान, सभी गुरुकुलों की होगी जांच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने तथा घायल छात्र को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जिले में संचालित गुरुकुलों की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों की जांच कराने की बात कही है. हादसे के बाद मृत छात्रों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है. यह भी पढ़ें: कानपुर चिड़ियाघर में काले हिरण पर संक्रमण का कहर, 15 दिन में चार की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबको चौकाया The post वृंदावन में दर्दनाक हादसा: पानी की टंकी में जहरीली गैस से चार संस्कृत छात्रों की मौत, एक की हालत गंभीर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

IND vs WI 2nd T20: रांची में टिकट के लिए चुकाने होंगे सबसे ज्यादा पैसे, लखनऊ से 4 गुना तो इंदौर से 1.6 गुना महंगा

IND vs WI T20 Ranchi Ticket Price: हिंदुस्तान और वेस्टइंडीज के बीच 9 अक्टूबर को रांची के जेएससीए स्टेडियम में होने वाले टी20 मुकाबले को लेकर क्रिकेट फैंस में उत्साह है. लेकिन मैच देखने के लिए रांची में दर्शकों को लखनऊ और इंदौर के मुकाबले काफी ज्यादा जेब ढीली करनी होगी. तीनों शहरों में होने वाले मुकाबलों के टिकट की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है. रांची में सबसे सस्ता सामान्य टिकट 1600 रुपये का रखा गया है, जबकि लखनऊ में यही टिकट 399 रुपये और इंदौर में 1000 रुपये में उपलब्ध है. यानी रांची का सबसे सस्ता टिकट लखनऊ की तुलना में करीब चार गुना महंगा है. रांची में 1600 से शुरू है टिकट की कीमत जेएससीए स्टेडियम में होने वाले हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज मुकाबले के लिए सामान्य टिकट की शुरुआती कीमत 1600 रुपये रखी गई है. वहीं, लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज के पहले टी20 मैच का सबसे सस्ता टिकट 399 रुपये था. इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को होने वाले तीसरे टी20 मुकाबले के लिए सबसे कम कीमत 1000 रुपये रखी गई है. श्रेणी के हिसाब से टिकट रांची में सामान्य टिकट की कीमत अलग-अलग श्रेणी के हिसाब से 1600 से 4500 रुपये तक है. इसके अलावा कॉरपोरेट बॉक्स के टिकट की कीमत 8000 रुपये, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स की 9000 रुपये, एमएस धोनी पवेलियन की 10 हजार रुपये और कॉरपोरेट लाउंज की कीमत 15 हजार रुपये तक है. रांची में सबसे महंगा टिकट 18 हजार रुपये का बताया गया है. इसकी तुलना में लखनऊ में सबसे महंगा टिकट 13,500 रुपये और इंदौर में 12,500 रुपये तक है. ब्लैक में 3200 रुपये तक पहुंची कीमत रांची में टिकट की कीमत को लेकर एक और बात चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेडियम के बाहर सबसे सस्ता टिकट भी 3200 रुपये तक में बिक रहा है. सोमवार को पुलिस ने टिकटों की कालाबाजारी करने वाले कुछ लोगों को हिरासत में लिया था. यानी जो टिकट आधिकारिक तौर पर 1600 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, उसके लिए फैंस को बाहर दोगुनी कीमत तक चुकानी पड़ रही है. ये भी पढ़ें: ICC प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए दो हिंदुस्तानीय ओपनर्स नॉमिनेट, लिस्ट में जिम्बाब्वे के कप्तान भी शामिल तीनों शहरों में टिकट की कीमत में कितना अंतर? टिकट श्रेणी रांची इंदौर लखनऊ सबसे सस्ता सामान्य टिकट ₹1,600 ₹1,000 ₹399 सबसे महंगा टिकट ₹18,000 ₹12,500 ₹13,500 सामान्य टिकट की रेंज ₹1,600–4,500 ₹1,000–8,500 ₹399–1,099 हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज सीरीज के मुकाबलों के लिए तीनों शहरों में टिकट की कीमतों में यह अंतर अब क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. खासकर रांची में सबसे सस्ता टिकट ही 1600 रुपये का होने से दर्शकों को लखनऊ के मुकाबले काफी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. 17 मिनट में बिक गए थे 4022 ऑनलाइन टिकट ऑनलाइन टिकट बिक्री को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन बिक्री शुरू होने के महज 17 मिनट में 4022 टिकट बिक गए. इसके बाद टिकटों की उपलब्धता को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच सवाल उठने लगे. इंडिया बनाम वेस्टइंडीज मैच का टिकट पिछले साल रांची में हिंदुस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबले के दौरान भी ऑनलाइन टिकट वितरण को लेकर शिकायतें सामने आई थीं. इस बार भी ऑनलाइन टिकट बिक्री शुरू होने के कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में टिकट बिकने के बाद व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है. ये भी पढ़ें: भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी, पत्नी नूपुर का पोस्ट हुआ वायरल; एक शब्द ने खींचा फैंस का ध्यान 39 हजार टिकट छापे गए, 11 करोड़ से ज्यादा की कमाई का अनुमान जेएससीए स्टेडियम की दर्शक क्षमता करीब 39,500 बताई गई है. इस मुकाबले के लिए करीब 39 हजार टिकटों की छपाई का आदेश दिया गया है. सभी टिकट बिकने की स्थिति में इससे 11 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने का अनुमान है. हालांकि, टिकटों की पूरी बिक्री के बाद ही वास्तविक कमाई का आंकड़ा सामने आएगा. 10 फीसदी तक कॉम्प्लिमेंट्री टिकट बांटने का दावा टिकटों के वितरण को लेकर कॉम्प्लिमेंट्री पास का मुद्दा भी सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल टिकटों के करीब 10 फीसदी तक कॉम्प्लिमेंट्री टिकट दिए जाने का दावा किया जा रहा है. इसे लेकर मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉम्प्लिमेंट्री टिकट वितरण पर निगरानी की बात कही गई है. प्रशासन, मीडिया और मैच संचालन से जुड़े लोगों के लिए दिए जाने वाले टिकटों का भी रिकॉर्ड रखने की बात कही गई है. ये भी पढ़ें: Richest Cricket Board: आखिर कौन है दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड? देखें टॉप-10 की पूरी लिस्ट The post IND vs WI 2nd T20: रांची में टिकट के लिए चुकाने होंगे सबसे ज्यादा पैसे, लखनऊ से 4 गुना तो इंदौर से 1.6 गुना महंगा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

पटना : CBI नहीं खोज पाई कौन है नीट छात्रा की मौत का दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट किया दाखिल

NEET Student Death Case : पटना में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI को जांच के दौरान किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. एजेंसी ने 6 अक्टूबर 2026 को विशेष पॉक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी. कोर्ट ने छात्रा के परिजनों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. CBI को नहीं मिला मौत का कारण या दोषी सीबीआइ ने मंगलवार को पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद के अनुसार, जांच एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाया जा सके. 13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी. कोर्ट ने मामले के सूचक यानी छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है. हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी छात्रा मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है. यहां जहानाबाद की रहने वाली छात्रा NEET प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही थी. 6 जनवरी 2026 को वह हॉस्टल के एक बंद कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी. इलाज के दौरान छात्रा की हो गयी थी मौत बेहोशी की हालत में मिलने के बाद छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 11 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. छात्रा के पिता ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी और दुष्कर्म के प्रयास की आशंका भी जतायी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बढ़ा था मामला छात्रा की मौत के बाद पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच से जुड़े निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया था. जांच के दौरान शारीरिक चोट और दुष्कर्म की आशंका से जुड़े बिंदुओं की भी जांच की गयी. अंडरगारमेंट से स्पर्म मिलने की बात भी सामने आयी थी. DNA जांच में नहीं मिला मेल मामले की जांच के दौरान छात्रा के परिजनों और उसके करीबियों के DNA सैंपल लिये गये थे. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसी भी सैंपल का मिलान अंडरगारमेंट पर मिले स्पर्म से नहीं हुआ. इसके बाद भी पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच जारी रखी. दो पुलिस अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई मामले में जांच के शुरुआती स्तर पर लापरवाही के आरोप भी लगे थे. तत्कालीन चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित किया गया था. हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. प्रशासन ने CBI को सौंपी थी जांच छात्रा की मौत के बाद मामले को लेकर पुलिस की जांच पर सवाल उठे और विवाद बढ़ा. इसके बाद बिहार प्रशासन ने मामले की जांच CBI से कराने की सिफारिश की. फरवरी 2026 में CBI ने जांच शुरू की और पटना के हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की. छह अक्टूबर को जांच पूरी कर दाखिल की रिपोर्ट कई महीनों की जांच के बाद CBI ने 6 अक्टूबर 2026 को अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. अब इस रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है. क्या होती है क्लोजर रिपोर्ट क्लोजर रिपोर्ट को फाइनल रिपोर्ट या FR भी कहा जाता है. जांच एजेंसी तब ऐसी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करती है, जब उसे FIR में लगाए गये आरोपों के संबंध में किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त या ठोस साक्ष्य नहीं मिलते. हालांकि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने भर से मामला अपने आप खत्म नहीं हो जाता. क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट के पास क्या विकल्प अदालत जांच एजेंसी की रिपोर्ट को स्वीकार कर मामले को बंद कर सकती है. इसके अलावा कोर्ट जरूरत महसूस होने पर आगे या दोबारा जांच का आदेश भी दे सकती है. अदालत जांच एजेंसी की राय से असहमत होकर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है. परिजनों को मिल सकता है विरोध का अधिकार क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से पहले शिकायतकर्ता या पीड़ित पक्ष को नोटिस दिया जाता है. छात्रा के पिता इस रिपोर्ट का विरोध करते हुए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर सकते हैं. इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों और दलीलों के आधार पर आगे का निर्णय लेगी. मामले की पूरी टाइमलाइन 6 जनवरी 2026: पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बंद कमरे में NEET की तैयारी कर रही छात्रा अचेत अवस्था में मिली. 9 जनवरी 2026: छात्रा के पिता ने दुष्कर्म की आशंका जताते हुए चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. 11 जनवरी 2026: इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गयी. इसके बाद मामले को लेकर छात्रों और परिजनों में आक्रोश बढ़ा. जनवरी 2026: मामले की जांच के लिए IG जितेंद्र राणा के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया. मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्षों के बाद जांच का दायरा बढ़ा. फरवरी 2026: बिहार प्रशासन ने मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की. इसके बाद CBI ने अपनी जांच शुरू की. 6 अक्टूबर 2026: CBI ने जांच पूरी करने के बाद विशेष पॉक्सो अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. अब आगे क्या होगा फिलहाल इस मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट के बाद गेंद अदालत के पाले में है. 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय कर सकता है. छात्रा के परिजनों को नोटिस मिलने के बाद वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति भी अदालत के सामने रख सकते हैं. Also Read : पटना में पिछले 6 महीने से जारी है आंदोलनों का सिलसिला, छात्र-शिक्षक से लेकर किसान तक सड़क पर, 1000 घंटे से अधिक बाधित रहा ट्रैफिक The post पटना : CBI नहीं खोज पाई कौन है नीट छात्रा की मौत का दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट किया दाखिल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Magha Shraddha 2026: आज मघा श्राद्ध पर बना खास संयोग, 6 आसन उपाय दूर कर देंगे पितृ दोष

Magha Shraddha 2026: पितृ पक्ष के 12वें दिन (द्वादशी तिथि) मघा श्राद्ध के नाम से जाना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन मघा नक्षत्र में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज खुश होते हैं. पंचांग के अनुसार आज, 7 अक्टूबर 2026 को मघा श्राद्ध किया जाएगा. ऐसे में जानिए मघा नक्षत्र का ज्योतिष से संबध और आज किन 6 आसान उपायों को करने से पितृ दोष दूर हो सकता है. मघा नक्षत्र का ज्योतिष से क्या संबंध है वैदिक ज्योतिष शास्त्र में अश्विनी से लेकर रेवती तक 27 नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है. इनमें 10वां स्थान मघा का है. इस नक्षत्र के देवता पितृ माने गए हैं. जबकि इस नक्षत्र का स्वामी केतु ग्रह है. इसलिए मघा को पूर्वज, कुल, वंश और पितृ देव से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के जानकार पं. धनंजय पांडेय ने बताया कि पितृ पक्ष में द्वादशी तिथि में मघा नक्षत्र का संयोग होने पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होकर वंशजों को खुशहाल रहने का आशीर्वाद देते हैं. मघा श्राद्ध पर पितृ दोष दूर करने के 6 आसान उपाय 1. पितरों के नाम से तर्पण ज्योतिषाचार्य पं. धनंजय पांडेय ने बताया कि पानी में काला तिल मिलाकर तर्पण (दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके) करना चाहिए. इस उपाय को मघा नक्षत्र में करने से पितरों के नाम से पूर्वज प्रसन्न होते हैं, जिससे पितृ दोष दूर होता है. 2. पितरों के लिए पिंडदान करें क्षमता के मुताबिक पितरों के नाम पिंडदान करने से पितृ दोष शांत होता है. अगर घर में ऐसा नहीं कर सकें, तो किसी तीर्थ स्थान या श्राद्ध के लिए उपयुक्त जगह पर पंडित जी से कराया जा सकता है. 3. तिल और अन्न का दान मघा नक्षत्र में पितरों को याद करते हुए काले तिल, चावल, आटा, दाल और कपड़े आदि का दान करने की परंपरा है. ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है. शास्त्रों के अनुसार, दान जरूरतमंद व्यक्ति को करना बेहतर है. 4. कौआ, गाय और कुत्ते को भोजन कराएं शास्त्रों में मघा श्राद्ध पंचबलि का उल्लेख मिलता है. इसमें कौआ, गाय, कुत्ते, चींटी और अतिथि (देवता) को भोजन कराने की परंपरा है. ऐसा करने से पितरों की विशेष कृपा मिलती है, जिससे पितृ दोष शांत होता है. 5. बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें वैसे तो पितृ पक्ष में हर दिन जीवित माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करना चाहिए. लेकिन, मघा श्राद्ध के दिन परिवार के अलावा भी अन्य बड़े-बुजुर्गों का आदर करने से पूर्वज खुश होते हैं. इससे पितृ दोष दूर होता है. 6. पितरों के नाम से भोजन कराएं मघा श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज के) बनाकर ब्राह्मण या जरूरतमंद इंसान को भोजन कराने की परंपरा है. ऐसा करने से पूर्वजों की कृपा से पितृ दोष दूर होने की मान्यता है. मघा श्राद्ध पर ‘पंचबलि’ का महत्व पंचबलि जीव धार्मिक मान्यता और महत्व गौ (गाय) बलि सुख-समृद्धि और सात्विक ऊर्जा की प्राप्ति काक (कौआ) बलि पितरों तक संदेश पहुंचाने का माध्यम श्वान (कुत्ता) बलि यमदेव के मार्गरक्षक के रूप में तृप्ति पिपीलिकादि (चींटी) बलि सूक्ष्म जीवों को अन्न देकर ऋण मुक्ति देव या अतिथि बलि घर में अन्नपूर्णा और पितृ देव का आशीर्वाद मघा श्राद्ध पर पंचबलि की दर्शाती तस्वीर (फोटो- एआई) The post Magha Shraddha 2026: आज मघा श्राद्ध पर बना खास संयोग, 6 आसन उपाय दूर कर देंगे पितृ दोष appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

चुनाव आयोग के खिलाफ CJP और INDIA गठबंधन का आंदोलन: मुद्दा एक, रास्ता अलग; जानिए दोनों में क्या है समानता और अंतर

SIR के विरोध में देशभर में सियासत गर्म है. चुनाव आयोग के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इसके चार दिन बाद, 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसद भी सड़क पर उतर आए और संसद से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला, लेकिन बीच में ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया. 9 घंटे के विरोध-प्रदर्शन और धरना के बाद राहुल गांधी समेत 250 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया गया. सवाल है कि अगर मुद्दा एक है, तो फिर CJP और इंडिया गठबंधन के आंदोलन में फर्क क्या है? दोनों की मांगें कितनी मिलती-जुलती हैं और दोनों का तरीका कितना अलग है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं. CJP और INDIA गठबंधन क्यों आंदोलन कर रहे हैं चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और अपडेट करने के लिए SIR करवा रही है. आयोग का कहना है कि इसका मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि मृत हो चुके, हमेशा के लिए दूसरी जगह जा चुके, डुप्लीकेट या सत्यापन के दौरान नहीं मिलने वाले लोगों की पहचान की जा सके और मतदाता सूची में वही लोग शामिल रहें जो योग्य नागरिक हैं. सड़क पर क्यों उतरा INDIA गठबंधन? 6 अक्टूबर का आंदोलन सीधे तौर पर विपक्षी दलों की नेतृत्वक लामबंदी था. इंडिया गठबंधन के सांसद संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने निकले. हालांकि इंडिया गठबंधन के इस मार्च को पुलिस ने संसद मार्ग के पास रोक दिया. जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने बैठ गए. इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। हालांकि मंगलवार के आंदोलन में पूरा विपक्ष एक साथ नहीं था. आम आदमी पार्टी ने 6 अक्टूबर के इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं होने का फैसला किया और कहा कि वह अपना अलग अभियान चलाएगी. आम आदमी पार्टी ने 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर प्रदर्शन किया था. दोनों आंदोलनों में समानता और अंतर 2 अक्टूबर को सीजेपी और 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसदों के प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा एक ही था, SIR और चुनाव आयोग की जवाबदेही. दोनों ही आंदोलन में SIR के जरिए मतदाता सूची में हो रहे बदलावों पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. लेकिन दोनों आंदोलनों में बड़ा अंतर संगठन और नेतृत्वक स्वरूप का है. सीजेपी का आंदोलन अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चल रहा स्वतंत्र नेतृत्वक अभियान है. उनका जोर युवाओं की लामबंदी पर है. इसके विपरीत, 6 अक्टूबर का इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन स्थापित विपक्षी दलों और उनके सांसदों का नेतृत्वक आंदोलन था. यानी मुद्दा काफी हद तक समान है, लेकिन आंदोलन का मंच और तरीका अलग है. सीजेपी इसे युवा आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है, जबकि इंडिया गठबंधन ने इसे विपक्षी दलों की सामूहिक नेतृत्वक कार्रवाई के तौर पर उठाया है. The post चुनाव आयोग के खिलाफ CJP और INDIA गठबंधन का आंदोलन: मुद्दा एक, रास्ता अलग; जानिए दोनों में क्या है समानता और अंतर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

पटना में पिछले 6 महीने से जारी है आंदोलनों का सिलसिला, छात्र-शिक्षक से लेकर किसान तक सड़क पर, 1000 घंटे से अधिक बाधित रहा ट्रैफिक

Patna Protest In last 6 months : बिहार की राजधानी पटना में पिछले छह महीनों के दौरान अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन हुए. छात्र-अभ्यर्थियों से लेकर शिक्षक, किसान-मजदूर, कर्मचारी और नेतृत्वक दल तक सड़क पर उतरे. भर्ती परीक्षाओं से लेकर विश्वविद्यालय की फीस, जमीन अधिग्रहण, महंगाई, रोजगार और चुनावी मुद्दों तक अलग-अलग मांगों को लेकर मार्च निकाले गए. इन आंदोलनों से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रदर्शन के कारण 1000 घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित रहा, वहीं कारोबार पर भी असर पड़ा. भर्ती से चुनाव तक, अलग-अलग मुद्दों पर सड़क पर उतरे लोग मार्च से सितंबर के बीच पटना में हुए प्रदर्शनों के मुद्दे अलग-अलग रहे, लेकिन इनमें एक बड़ा हिस्सा रोजगार, भर्ती परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा रहा. शिक्षक अभ्यर्थियों, BPSC और BSSC अभ्यर्थियों, विश्वविद्यालय के छात्रों और स्वास्थ्य विज्ञान के विद्यार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया. दूसरी ओर किसान-मजदूर संगठनों और नेतृत्वक दलों ने जमीन, महंगाई, रोजगार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया. गांधी मैदान से निकलता है मार्च, जेपी गोलंबर पर पहला बड़ा पड़ाव पटना में होने वाले कई बड़े प्रदर्शनों की शुरुआत गांधी मैदान के आसपास से होती है. प्रदर्शनकारी अक्सर गेट नंबर 10 से निकलकर जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और आयकर गोलंबर की ओर बढ़ते हैं. इसके बाद उनका लक्ष्य विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास या राजभवन की ओर मार्च करना रहता है. प्रशासन आम तौर पर जेपी गोलंबर या डाकबंगला के आसपास ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करता है. इन इलाकों में ही क्यों बार-बार पहुंचते हैं प्रदर्शनकारी गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, डाकबंगला, आयकर गोलंबर, GPO गोलंबर, बेली रोड और गर्दनीबाग पटना के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और यातायात क्षेत्र हैं. इन मार्गों से विधानसभा, राजभवन, मुख्यमंत्री आवास और दूसरे प्रशासनी कार्यालयों तक पहुंच बनाई जा सकती है. यही वजह है कि अपनी मांग प्रशासन और प्रशासन तक सीधे पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी इन रास्तों को चुनते हैं. प्रदर्शन का असर सिर्फ जाम तक सीमित नहीं जब बड़ी संख्या में लोग इन प्रमुख सड़कों पर उतरते हैं तो पुलिस को कानून-व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है. जगह-जगह बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और रूट डायवर्जन की जरूरत पड़ती है. इससे सेंट्रल पटना के कई प्रमुख मार्गों पर आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बैरिकेडिंग से टकराव तक पहुंची कई बार स्थिति शांतिपूर्ण प्रदर्शन निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहे तो पुलिस व्यवस्था का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है. लेकिन जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने या आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं तो स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है. पिछले महीनों में कुछ प्रदर्शनों के दौरान पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई की समाचारें सामने आईं. मई में TRE-4 अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और जुलाई में AISA के आंदोलन के दौरान ऐसी स्थिति बनी. 29 मार्च को NEET छात्रा की मौत के मामले में प्रदर्शन 29 मार्च को गर्दनीबाग में NEET छात्रा की मौत के मामले में परिजनों और समर्थकों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच में तेजी और न्याय की मांग की. परिजनों की ओर से जांच की प्रगति पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की गई. 30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध 30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने विरोध किया. उस समय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कार्यक्रम में मौजूद थे. प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी. 10 अप्रैल को FIR और छात्र अधिकारों को लेकर मार्च 10 अप्रैल को पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पहले के आंदोलन से जुड़े मामलों में FIR, गिरफ्तारी और छात्र अधिकारों के मुद्दे पर मार्च किया. यह विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े छात्र आंदोलनों की अगली कड़ी के रूप में सामने आया. 8 मई को TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई 8 मई को बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 का विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे. पटना कॉलेज से BPSC कार्यालय की ओर बढ़ रहे अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर के पास रोक दिया गया. बैरिकेडिंग के बाद स्थिति बिगड़ी और पुलिस लाठीचार्ज की समाचार सामने आई. कई अभ्यर्थियों के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई. प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ मामला इस प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से करीब 5,000 अज्ञात अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने और चार लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई. पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान यातायात प्रभावित हुआ और बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई थी. 10 मई को शिक्षक अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन 8 मई की कार्रवाई के विरोध में 10 मई को छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया. GPO गोलंबर के आसपास हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के प्रमुख यातायात मार्गों पर पुलिस व्यवस्था बढ़ाई गई. 24 मई को सीनेट बैठक के दौरान छात्र आंदोलन 24 मई को पटना यूनिवर्सिटी में सीनेट की बैठक के दौरान छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. छात्र कल्याण से जुड़े प्रावधान और फीस बढ़ोतरी का विरोध उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था. विश्वविद्यालय गेट के पास तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया. 28 मई को पेट्रोल-डीजल-CNG की कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन 28 मई को परिवहन संगठनों ने पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी तथा महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान दो घंटे वाहन संचालन बंद रखने का आह्वान किया गया. इससे परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ा. 17 जून को RJD का महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन 17 जून को RJD ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर पटना में धरना दिया. यह प्रदर्शन पार्टी के राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा था. 1 जुलाई को वेतन-पेंशन के लिए विश्वविद्यालय शिक्षकों का आंदोलन 1 जुलाई को विश्वविद्यालय और कॉलेजों के शिक्षकों ने वेतन और पेंशन भुगतान में देरी के विरोध में प्रदर्शन किया. आंदोलन का केंद्र शिक्षकों की सेवा शर्तों और लंबित भुगतान से जुड़े मुद्दे रहे. 22 जुलाई को AISA का लोकभवन मार्च 22 जुलाई को AISA ने कथित NEET पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकभवन मार्च निकाला. गांधी मैदान से आगे

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Bihar Domicile Rule: बिहार में शिक्षक बनने का है सपना, शादीशुदा महिलाओं के लिए डोमिसाइल का नया नियम समझिए

Bihar Domicile Rule: बिहार में प्रशासनी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहीं शादीशुदा स्त्रीओं के लिए एक नया नियम आया है. अगर कोई विवाहित स्त्री शिक्षक भर्ती में आरक्षण का लाभ लेना चाहती है, तो उसके जाति, निवास और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र पिता के स्थायी पते के आधार पर होने चाहिए. सिर्फ बिहार में शादी हो जाने या पति के बिहार का रहने वाला होने से स्त्री को बिहार के आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा. उसके अपने मूल निवास की स्थिति भी देखी जाएगी. आखिर यह नियम क्यों चर्चा में है? इस नियम की चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 चल रही है. शुरुआत में इस भर्ती में 32388 पद थे. अब 932 और पद जोड़ दिए गए हैं. इसके बाद कुल पदों की संख्या बढ़कर 33320 हो गई है. नए 932 पदों में 493 पद कक्षा 9 से 10 और 439 पद कक्षा 11 से 12 के शिक्षकों के हैं. हजारों उम्मीदवारों के लिए इस समय शिक्षक बनने का मौका है. ऐसे में प्रमाणपत्र से जुड़ा यह नियम उम्मीदवारों के लिए समझना बहुत जरूरी हो गया है. शादी के बाद पति का पता इस्तेमाल करने से क्या होगा? मान लीजिए कोई स्त्री बिहार की रहने वाली नहीं है. उसकी शादी बिहार के किसी युवक से हुई है और शादी के बाद वह बिहार में रहने लगी. उसके पति के पास बिहार का निवास प्रमाणपत्र है. सिर्फ पति के बिहार के पते के आधार पर स्त्री बिहार की मूल निवासी नहीं मानी जाएगी. अगर वह बिहार के आरक्षण का लाभ लेना चाहती है, तो उसे अपने मूल निवास की शर्त पूरी करनी होगी. BPSC से जुड़े नियमों में शादीशुदा स्त्री के लिए जाति, निवास और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र पिता के नाम और पिता के स्थायी पते से जारी होने की बात साफ की गई है. बिहार की बेटी के लिए क्या है नियम? अगर किसी स्त्री का मायका यानी पिता का स्थायी पता बिहार में है और वह बिहार की मूल निवासी है, तो शादी के बाद भी उसके लिए यह प्रमाणपत्र पिता के स्थायी पते से बनाया जाएगा. इसका मतलब यह है कि शादी के बाद उसका पता बदलने से उसके मूल निवास का आधार पति का पता नहीं हो जाता. आरक्षण के लिए उसके पिता के स्थायी पते से जुड़ा रिकॉर्ड जरूरी है. यही वजह है कि आवेदन भरते समय स्त्री उम्मीदवारों को अपने प्रमाणपत्रों की जानकारी बहुत ध्यान से देखनी होगी. कौन-कौन से प्रमाणपत्र जरूरी हैं? शादीशुदा स्त्री अगर आरक्षण का दावा कर रही है, तो नियम के मुताबिक मुख्य रूप से तीन प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण हैं- जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र. इन प्रमाणपत्रों में पिता का स्थायी पता आधार बनेगा. पति के पते से बने प्रमाणपत्र को आरक्षण के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता. EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मामले में अलग व्यवस्था है. प्रशासनी नियम के अनुसार विवाहित स्त्री का आय और संपत्ति प्रमाणपत्र पति के स्थायी निवास वाले स्थान से जारी हो सकता है, अगर वह पति के साथ रह रही है. लेकिन बिहार की मूल निवासी होने का प्रमाण पिता के स्थायी निवास से देना जरूरी है. इसका सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा? इस नियम को समझने के लिए दो अलग स्थिति देखना जरूरी है. पहली स्थिति में स्त्री खुद बिहार की मूल निवासी है और उसकी शादी बिहार में हुई है. ऐसी स्त्री अपने पिता के स्थायी पते से जरूरी प्रमाणपत्र देकर आरक्षण का दावा कर सकती है. दूसरी स्थिति में स्त्री किसी दूसरे राज्य की मूल निवासी है और उसकी शादी बिहार में हुई है. केवल शादी के बाद बिहार में रहने लगने से उसे बिहार की मूल निवासी स्त्रीओं वाला आरक्षण नहीं मिल जाता. यानी यहां सबसे अहम बात शादी नहीं, बल्कि मूल निवास है. बिहार में स्त्रीओं को कितना आरक्षण मिलता है? बिहार प्रशासन ने जुलाई 2025 में प्रशासनी सेवाओं में सीधी नियुक्ति के लिए राज्य की मूल निवासी स्त्री उम्मीदवारों को 35 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया था. इसका मतलब यह आरक्षण बिहार की मूल निवासी स्त्रीओं के लिए है. इसलिए शादीशुदा स्त्री उम्मीदवार के मामले में यह देखना जरूरी है कि वह बिहार की मूल निवासी है या नहीं. यही कारण है कि सिर्फ पति का बिहार का पता होने से किसी स्त्री को इस 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल जाता. TRE-4 में कितनी है भर्ती? TRE-4 में पहले 32388 शिक्षक पदों पर भर्ती होनी थी. 6 अक्टूबर 2026 को BPSC ने 932 और पद जोड़ दिए. इसके बाद कुल रिक्तियों की संख्या 33320 हो गई है. इनमें 9वीं-10वीं के 493 और 11वीं-12वीं के 439 अतिरिक्त पद शामिल हैं. BPSC ने इन नई रिक्तियों का विषय और श्रेणी के हिसाब से विवरण भी जारी किया है. भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया 25 सितंबर से शुरू हो चुकी है. आवेदन की आखिरी तारीख 26 अक्टूबर 2026 बताई गई है. परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है. प्रशासन का क्या मकसद है बिहार ने 2025 में प्रशासनी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के नियमों में बदलाव किया था. इसके तहत राज्य के स्थायी निवासियों को शिक्षक भर्ती में प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई. प्रशासन ने इस बदलाव का उद्देश्य बिहार के स्थानीय उम्मीदवारों को शिक्षक भर्ती में प्राथमिकता देना बताया था. यह व्यवस्था TRE-4 और आगे की शिक्षक भर्तियों में लागू होनी है. पहले की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में दूसरे राज्यों के उम्मीदवार भी बड़ी संख्या में नियुक्त हुए थे. अब नई डोमिसाइल व्यवस्था के कारण आवेदन और आरक्षण से जुड़े नियम पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. उम्मीदवार आवेदन से पहले क्या जांच लें? शादीशुदा स्त्री उम्मीदवारों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वह बिहार की मूल निवासी हैं या नहीं. अगर वह बिहार की मूल निवासी हैं और आरक्षण का दावा कर रही हैं, तो जाति, निवास और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र में पिता के स्थायी पते से जुड़ी जानकारी सही होनी चाहिए. सिर्फ पति के बिहार वाले पते पर बने प्रमाणपत्र के भरोसे आवेदन करना सही नहीं होगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें असली बात क्या है? इस पूरे नियम का सबसे आसान

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

कभी स्कॉलरशिप के सहारे पढ़े, 22 की उम्र तक नहीं देखा शहर, फिर 1.8 लाख रुपये से खड़ी कर दी HCL

आज जब हिंदुस्तान की बड़ी IT कंपनियों का नाम लिया जाता है, तो HCL का नाम भी सामने आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि HCL की शुरुआत किसी बड़े ऑफिस, करोड़ों रुपये या किसी बड़े कारोबारी परिवार से नहीं हुई थी. इसकी शुरुआत दिल्ली की एक छोटे-से कमरे से हुई थी, जहां कुछ दोस्तों के पास बड़ा सपना तो था, लेकिन पैसे बहुत कम थे. इस कहानी के केंद्र में शिव नादर हैं. एक ऐसे लड़के की कहानी, जिसने गांव और छोटे शहरों में पढ़ाई की, तमिल माध्यम से पढ़े, 22 साल की उम्र में पहली बार शहर देखा और आगे चलकर हिंदुस्तान की कंप्यूटर क्रांति के शुरुआती दौर में बड़ी भूमिका निभाई. दिलचस्प बात यह है कि खुद शिव नादर मानते हैं कि उनकी सफलता की शुरुआत कारोबार से नहीं, बल्कि एक स्कॉलरशिप से हुई थी. ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ की इस कड़ी में आइए जानते हैं शिव नादर के बारे में. आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर पर थे शिव नादर शिव नादर का जन्म 14 जुलाई 1945 को तमिलनाडु के एक गांव में हुआ. उनके पिता जज थे और नौकरी की वजह से उनका परिवार अलग-अलग जगहों पर जाता रहा. इसी कारण नाडर की पढ़ाई भी एक ही जगह नहीं हुई. लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई तमिल में की थी. अंग्रेजी उनके लिए बचपन से पढ़ाई की भाषा नहीं थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्होंने अंग्रेजी में नहीं, बल्कि तमिल में पढ़ाई की. यहां तक कि उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी शहर को तब देखा, जब वह 22 साल के थे. पिता के निधन के बाद परिवार पर आया आर्थिक संकट शिव नादर की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब स्कूल के आखिरी वर्षों में उनके पिता का निधन हो गया. परिवार के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई. इसी दौरान उन्हें पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने PSG College of Technology से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बाद में एक इंटरव्यू में नाडर ने बताया कि स्कॉलरशिप उनके लिए सिर्फ आर्थिक मदद नहीं थी, बल्कि आजादी जैसी थी. इससे वह पैसों की चिंता किए बिना अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सके. दिल्ली पहुंचे तो जिंदगी बदल गई 1960 के दशक में शिव नादर नौकरी के लिए दिल्ली पहुंचे. उन्होंने DCM में काम शुरू किया. यही वह जगह थी जहां उनकी मुलाकात उन लोगों से हुई, जो आगे चलकर HCL की नींव रखने वाले थे. DCM में नादर ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर से जुड़ा काम शुरू किया. उस समय हिंदुस्तान में कंप्यूटर आज की तरह आम चीज नहीं थे. बल्कि कंप्यूटर को देखकर ज्यादातर लोग यही सोचते थे कि इसका इस्तेमाल आखिर करेगा कौन? लेकिन नादर और उनके साथियों को माइक्रोप्रोसेसर में भविष्य दिखाई दे रहा था. उन्होंने महसूस किया कि आने वाले समय में कंप्यूटर दुनिया बदल सकते हैं. यही सोच उन्हें अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़ने की तरफ ले गई. HCL के पास पहले ग्राहक नहीं, सिर्फ एक सपना था जब HCL ने अपना पहला कंप्यूटर बनाने की योजना बनाई, तब मशीन तैयार भी नहीं हुई थी. इसके बावजूद कंपनी की टीम ग्राहकों के पास पहुंचने लगी. उनके पास एक ब्रोशर था, जिसमें उस प्रोडक्ट का मॉडल दिखाया गया था. HCL की इस सोच का फायदा भी मिला. शुरुआती ग्राहकों में IIT Kharagpur और IIT Madras जैसे संस्थान शामिल रहे. उस समय हिंदुस्तान में कंप्यूटर की पहुंच बेहद सीमित थी. नादर के मुताबिक, लोग कंप्यूटर को जरूरत नहीं बल्कि सुविधा समझते थे. IBM के हिंदुस्तान से बाहर जाने के बाद हिंदुस्तानीय कंपनियों के सामने बाजार बनाने की बड़ी चुनौती भी आ गई थी. एक गलती जिसे शिव नादर आज भी मानते हैं शिव नादर की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं है. इसमें एक बड़ी गलती भी शामिल है, जिसे वह खुद स्वीकार करते हैं. जब 1990 के दशक के आखिर और 2000 के आसपास Y2K का दौर आया, तब दुनिया भर में कंप्यूटर सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत बढ़ गई थी. हिंदुस्तान की IT कंपनियों के लिए यह बहुत बड़ा मौका था. लेकिन HCL इस मौके को उतना नहीं भुना पाया, जितना उसके प्रतियोगियों ने किया. एक इंटरव्यू में नाडर ने साफ कहा था कि Y2K का मौका गंवाना “big mistake” था. उनके मुताबिक अगर HCL ने उस मौके को पकड़ लिया होता तो कंपनी नंबर एक तक पहुंच सकती थी. मां ने सिखाया कि पैसा सिर्फ अपने लिए नहीं होता शिव नादर की जिंदगी का एक और बेहद व्यक्तिगत हिस्सा उनकी मां से जुड़ा है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बचपन से उन्होंने अपनी मां को मुश्किल समय में भी कुछ न कुछ दूसरों को देने के लिए अलग रखते देखा था. यही आदत आगे चलकर उनकी सोच का हिस्सा बन गई. नादर ने कहा था कि उनकी मां ने उन्हें याद दिलाया कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी क्या है और शिक्षा वह क्षेत्र है जिसमें उन्हें वापस देना चाहिए. 1994 में उन्होंने Shiv Nadar Foundation की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने सिर्फ पैसे दान करने के बजाय संस्थान बनाने का रास्ता चुना. क्यों बनवाए इतने स्कूल और कॉलेज? नादर के लिए शिक्षा सिर्फ किताब और नौकरी पाने का जरिया नहीं रही. उन्होंने SSN College of Engineering से शुरुआत की. बाद में VidyaGyan, Shiv Nadar University, Shiv Nadar School और दूसरे संस्थानों के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा नेटवर्क खड़ा किया. Foundation के मुताबिक, इसका मकसद सिर्फ ज्यादा बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान बनाना है जो लंबे समय तक काम करते रहें और आने वाली पीढ़ियों को भी फायदा दें. SSN के जरिए हजारों छात्रों को स्कॉलरशिप भी दी गई है. Foundation के अनुसार, SSN के स्कॉलरशिप प्रोग्राम से 5,000 से ज्यादा छात्र लाभान्वित हो चुके हैं, जिनमें 2,000 से ज्यादा फर्स्ट-जनरेशन हैं. बेटी ने कहा, “मैं आपकी जगह नहीं लेना चाहती” शिव नादर और उनकी बेटी रोशनी नादर मल्होत्रा की बातचीत भी उनकी कहानी का दिलचस्प हिस्सा है. एक इंटरव्यू में नादर ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी से पूछा था कि वह जिंदगी में क्या करना चाहती हैं. रोशनी ने

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

7 अक्टूबर की टॉप 20 खबरें : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक का मार्च, दिल्ली में भूकंप के झटके; भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI का छापा

1. चुनाव आयोग के बाहर डटे राहुल गांधी : बोले- ‘मोदी-शाह ने वोट चोरी कर देश को किया हाईजैक, हम उन्हें खत्म कर देंगे’ राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं. उन्होंने BJP और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ बीजेपी का मुकाबला नहीं कर रहा, बल्कि उसे ‘खत्म कर देगा’. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 2. VIDEO: दिल्ली पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया, 8 घंटे के धरने के बाद न्यू पुलिस लाइन लाए गए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया. ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 3. पंजाब CM भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI का छापा, OSD और 5 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज पंजाब के CM भगवंत मान के कैंप ऑफिस और OSD राजबीर सिंह घुम्मन के घर CBI ने छापेमारी की. हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हुई. जानें आरोपों का पूरा विवरण. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 4. स्मृति मंधाना बनीं हिंदुस्तानीय स्त्री टीम की कप्तान, हरमनप्रीत कौर की जगह संभालेंगी कमान स्मृति मंधाना को हिंदुस्तानीय स्त्री क्रिकेट टीम की नई फुल-टाइम व्हाइट-बॉल कप्तान बनाया गया है. हरमनप्रीत कौर के कप्तानी छोड़ने के बाद BCCI ने स्मृति के नाम का ऐलान किया. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 5. दिल्ली-NCR में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 4.9 रही तीव्रता Earthquake On Delhi-NCR : दिल्ली-NCR में मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के चमोली में था. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 6. राहुल गांधी के प्रदर्शन के बीच CJP चीफ का दावा- दिल्ली आंदोलन में शामिल नहीं होने का बनाया जा रहा दबाव एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी के आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने महाराष्ट्र के सीएम पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परेशान करने की बजाय उन्हें (दीपके को) गिरफ्तार किया जाये. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 7. बंगाल उपचुनाव : नंदीग्राम में 79.39 प्रतिशत और रेजीनगर में 78.42 प्रतिशत वोट, रिजल्ट 9 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल उपचुनाव में नंदीग्राम और रेजीनगर में 79% मतदान हुआ. हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी पर रिपोर्ट तलब की गयी है. दोनों सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित होंगे. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 8. Naya Vichar Special: झारखंड में स्कूल छोड़ने की दर हो गई खत्म, लेकिन 99,000 से अधिक शिक्षकों के पद अब भी खाली झारखंड में प्राथमिक स्कूल छोड़ने की दर अब शून्य हो गई है. नीति आयोग की रिपोर्ट में सेकेंडरी स्तर पर भी भारी सुधार दिखा है, पर शिक्षकों की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 9. रोहतास में बनेगी नई टाउनशिप, शाहाबाद को मिलेगा एयरपोर्ट, सम्राट चौधरी का ऐलान Samrat Choudhary: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को सासाराम में रोहतास के विकास को लेकर कई बड़े ऐलान किए. जिले में नई रोहतास टाउनशिप और शाहाबाद में एयरपोर्ट विकसित करने की बात कही. सासाराम-औरंगाबाद तक सोन का पानी पहुंचाने और पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने का भी प्लान बताया. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 10. रूस में ‘प्लेग’ की आशंका से अमेरिका अलर्ट, क्या हिंदुस्तान में भी लौट सकता है 1994 वाला खौफ? साइबेरिया में प्लेग की आशंका से चिंता बढ़ी. 200 लोग निगरानी में रखे गए हैं. अमेरिका इसपर नजर बनाए हुए है. रूस में 28 साल की स्त्री की मौत के बाद मामला समाचारों में आया और उसकी मौत के पीछे प्लेग की आशंका बताई जा रही है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 11. PoK में पाकिस्तान के खिलाफ फिर भड़का आंदोलन, JAAC ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का किया ऐलान पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में JAAC ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया है. चार महीने से लंबित मांगों पर प्रशासन की निष्क्रियता के चलते यह कदम उठाया गया. जानें पूरा मामला. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 12. होर्मुज में जहाज पर हमला, 11 हिंदुस्तानीय घायल; हिंदुस्तान बोला- जहाजों पर हमले तुरंत बंद हों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाज MT On Peace पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें 11 हिंदुस्तानीय नाविक घायल हो गए. हिंदुस्तान ने तुरंत हमले रोकने की मांग की. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 13. ‘रिश्ते के पहले ही हफ्ते में पूछा- AIDS तो नहीं?’: बिग बॉस से बाहर होते ही छलका गायत्री का दर्द; पढ़िए टॉक्सिक प्यार का सच गायत्री सुरेश ने बिग बॉस से बाहर निकलते ही अपनी पर्सनल लाइफ का दर्द बयां किया. जानिए कैसे उनके पार्टनर ने रिश्ते के पहले ही हफ्ते में पूछा था ‘क्या तुम्हें AIDS है?’ पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 14. 618km रेंज मिलेगा, 9 एयरबैग और सिर्फ 5 सेकंड में 100kmph की स्पीड… हिंदुस्तान में 1,000+ लोगों ने खरीद ली ये अमेरिकी कार टेस्ला मॉडल Y हिंदुस्तान में 1000 से अधिक यूनिट बेचकर ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंची. 681 किमी रेंज, 5.9 सेकंड में 100 किमी/घंटा स्पीड और 9 एयरबैग्स के साथ लग्जरी ईवी सेगमेंट में मजबूत स्थिति. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 15. एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित होंगे अगले वायुसेना प्रमुख, 31 अक्टूबर को संभालेंगे पद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर से हिंदुस्तानीय वायुसेना के अगले प्रमुख होंगे. जानें उनके चार दशक के अनुभव और विशेषज्ञता के बारे में. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 16. IND vs WI: श्रेयस अय्यर के तूफानी शतक में उड़ा वेस्टइंडीज, हिंदुस्तान ने 8 विकेट से दर्ज की जीत श्रेयस अय्यर के तूफानी शतक के दम पर टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को पहले T20I में 8 विकेट से हराया. इस जीत के साथ हिंदुस्तान ने सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 17. VIDEO: दिल्ली पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top