Hot News

Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

‘कबीर सिंह’ के 20 मिनट भी नहीं झेल पाए अदिल हुसैन, फिल्म करने का आज भी पछतावा, 200 करोड़ के ऑफर पर कही ये बात

किसी एक्टर की पहचान हमेशा उसके सबसे बड़े रोल से नहीं होती. कई बार पर्दे पर कुछ मिनट का किरदार भी ऐसा असर छोड़ जाता है कि पूरी फिल्म के बाद वही चेहरा याद रह जाता है. अदिल हुसैन इसी तरह के एक्टर हैं. उन्होंने न तो पारंपरिक तरीके से बॉलीवुड में एंट्री ली और न ही खुद को सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित रखा. असम के छोटे से शहर गोलपाड़ा से निकले अदिल ने थिएटर किया, स्टैंड-अप कॉमेडी की, मोबाइल थिएटर में काम किया, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचे और फिर इंटरनेशनल सिनेमा तक अपनी जगह बनाई. आज उनके 63वें जन्मदिन के मौके पर जानिए एक छोटे से कस्बे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अदाकारी से अलग पहचान बनाने तक का उनका पूरा सफर. 5 साल की उम्र में शुरू हुआ जुनून अदिल हुसैन का जन्म 5 अक्टूबर 1963 को असम के गोलपाड़ा में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल हेडमास्टर थे और चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी करके अंग्रेजी का प्रोफेसर या शिक्षक बने. लेकिन अदिल की किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था. आदिल हुसैन शुरुआती दिनों में थिएटर और मंच पर परफॉर्म करते अदिल हुसैन. बचपन के अनोखे किस्से: 5 साल में पहली परफॉर्मेंस: जब वह सिर्फ 5 साल के थे, तभी से मोहल्ले के लोगों को इकट्ठा करके उनके सामने स्टैंड-अप कॉमेडी करने लगे थे. 16 साल में लिया फैसला: स्कूल के नाटकों में भाग लेते-लेते 16 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें एक्टर ही बनना है. पिता से मतभेद: पिता एक सुरक्षित प्रशासनी नौकरी चाहते थे. एक्टिंग के फैसले की वजह से पिता उनसे कई सालों तक नाराज रहे, लेकिन अदिल ने अपना रास्ता नहीं बदला. कॉमेडी और मिमिक्री: गुवाहाटी के बी. बरुआ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने लगभग 6 साल तक स्टैंड-अप कॉमेडी की और मशहूर बॉलीवुड स्टार्स की नकल उतारी. असम का मोबाइल थिएटर: उन्होंने असम की मशहूर ‘मोबाइल थिएटर’ परंपरा में काम किया और गांव-गांव घूमकर लाइव ऑडियंस के सामने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. जब NSD पहुंचकर टूटा स्टार बनने का सपना शुरुआत में अदिल भी आम लड़कों की तरह बड़े स्टार्स के दीवाने थे. वह अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और राजेश खन्ना जैसा बड़ा सुपरस्टार बनना चाहते थे. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के दिनों में अदिल हुसैन. 27 साल की उम्र में जब वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचे, तो सुपरस्टार बनने का उनका यह सपना बदल गया. NSD में उन्होंने समझा कि एक्टर बनने का मतलब सिर्फ स्टारडम हासिल करना नहीं, बल्कि किरदार को ईमानदारी से जीना है. इसके बाद उन्हें चार्ल्स वॉलेस स्कॉलरशिप मिली और वह ड्रामा स्टूडियो लंदन में एक्टिंग सीखने गए. 2012 में बदला करियर, मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान अदिल हुसैन ने असमिया, बंगाली, तमिल, मलयालम, मराठी, हिंदी और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में काम किया. लेकिन साल 2012 उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ और ‘लाइफ ऑफ पाई’ में अदिल हुसैन के आइकॉनिक रोल्स. साल फिल्म किरदार खासियत / उपलब्धि 2012 इंग्लिश विंग्लिश सतीश गोडबोले (श्रीदेवी के पति) कम बोलने वाले, व्यावहारिक पति के रोल में बिना ड्रामे के छाप छोड़ी. 2012 लाइफ ऑफ पाई संतोष पटेल (पाई के पिता) ऑस्कर विजेता फिल्म, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. 2017 मुक्ति भवन / मज राति केतकी दया / सोमनाथ 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दोनों फिल्मों के लिए Special Mention Award मिला. 2018 व्हाट विल पीपल से मिर्जा (नॉर्वेजियन फिल्म) नॉर्वे का प्रतिष्ठित Amanda Award जीता. 2019 कबीर सिंह कॉलेज डीन छोटा सा रोल, लेकिन आज भी फिल्म चुनने को लेकर पछतावा जताया. 2026 ऑपरेशन सफेद सागर एयर मार्शल विनोद पाटनी नेटफ्लिक्स सीरीज में 1999 कारगिल युद्ध के एयर कमांडर का दमदार रोल. ‘कबीर सिंह’: जब अपनी ही फिल्म की कर दी पब्लिक में बुराई अदिल हुसैन के करियर में ‘कबीर सिंह’ सबसे चर्चित विवादों में से एक रहा. वह अकेले ऐसे एक्टर रहे जिन्होंने खुलेआम अपनी ही हिट फिल्म की आलोचना की. फिल्म ‘कबीर सिंह’ में कॉलेज डीन के किरदार में अदिल हुसैन. बिना स्क्रिप्ट पढ़े की फिल्म: अदिल ने बताया कि ‘कबीर सिंह’ इकलौती ऐसी फिल्म थी, जिसे उन्होंने बिना पूरी स्क्रिप्ट पढ़े साइन किया था. 20 मिनट में थिएटर से बाहर: जब वह फिल्म देखने थिएटर पहुंचे, तो 20 मिनट बाद ही बाहर निकल आए. उन्होंने कहा कि फिल्म में स्त्रीओं के प्रति गलत बर्ताव और हिंसा को सही ठहराया गया है, जिसका उन्हें पछतावा है. 100-200 करोड़ का ऑफर भी ठुकरा दें: निर्देशक संदीप रेड्दी वांगा से सोशल मीडिया पर बहस के बाद अदिल ने साफ कहा कि अगर उन्हें ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों के लिए 200 करोड़ रुपये भी मिले, तो भी वह ऐसी फिल्में नहीं करेंगे. 2026 में लगातार एक्टिव: एयर मार्शल के रोल में दिखे 63 साल की उम्र में भी अदिल का सफर जारी है. साल 2026 में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में उन्होंने 1999 कारगिल युद्ध के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ रहे एयर मार्शल विनोद पाटनी का किरदार निभाया. 2026 की सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में एयर मार्शल के रोल में अदिल हुसैन. View on Instagram अदिल का मानना है कि रोल छोटा हो या बड़ा, जब तक कैमरा आपके ऊपर है, किरदार एकदम असली और सच्चा लगना चाहिए. अमिताभ और धर्मेंद्र जैसा स्टार बनने का सपना देखने वाले अदिल हुसैन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वह साबित करते हैं कि स्टारडम से बड़ी चीज होती है- एक बेहतरीन और सच्चा कलाकार होना. ये भी पढ़ें: ‘मैं सुनीता नहीं हूं, तेरी धज्जियां उड़ा दूंगी’, गोविंदा की रूमर्ड GF पर भड़कीं राखी सावंत, कहा- ‘पति चोर’ ये भी पढ़ें: बड़ी फिल्म दिलाऊंगा, शो के बाद भी मेरे साथ रहना… क्या इरीना रुदाकोवा पर आया तेज प्रताप यादव का दिल? The post ‘कबीर सिंह’ के 20 मिनट भी नहीं झेल पाए अदिल हुसैन, फिल्म करने का आज भी पछतावा, 200 करोड़ के ऑफर पर कही ये बात appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Maruti Cars क्यों हैं इतनी पॉपुलर? एक्सपर्ट ने बताया बिक्री का राज, Brezza की डिमांड से E20 पेट्रोल तक जानें पूरी कहानी

मारुति सुजुकी की कारों की बाजार में मजबूत बिक्री के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. मारुति की गाड़ियां कम रनिंग कॉस्ट और बेहतर माइलेज के लिए जानी जाती हैं, जिससे ग्राहकों के लिए इनका इस्तेमाल कॉस्ट-इफेक्टिव रहता है. इसके अलावा इन कारों की मेंटेनेंस कॉस्ट भी रिलेटिवली कम होती है. कार खरीदते समय ग्राहक सिर्फ शुरुआती कीमत नहीं देखता, बल्कि लंबे समय में होने वाले खर्च और कार की रीसेल वैल्यू को भी ध्यान में रखता है. मारुति की कारों को 5 साल बाद बेचने पर भी अच्छी रीसेल वैल्यू मिल जाती है. इन्हीं सब बातों को लेकर हमने ऑटो एक्सपर्ट राजीव चक्रवर्ती से बातचीत की है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा है.  वर्तमान में मारुति का कौन-सा मॉडल सबसे ज्यादा बिक रहा है? मौजूदा समय में मारुति सुजुकी के पोर्टफोलियो में Brezza और Victoris की मांग काफी मजबूत बताई जा रही है. एक्सपर्ट राजीव चक्रवर्ती के अनुसार, 2026 Brezza मॉडल के आने के बाद ग्राहकों की ओर से इसकी डिमांड और क्वेरीज में काफी बढ़ोतरी हुई है. फेस्टिव सीजन से पहले ही Brezza को 2 लाख से अधिक बुकिंग्स मिलने की बात कही गई है. इसके पॉपुलर होने की एक बड़ी वजह इसके आकर्षक फीचर्स के साथ इसकी किफायती कीमत है, जो इसे ग्राहकों के लिए एक मजबूत ऑप्शन बनाती है. मारुति अपनी कारों को कंपटीटर्स के मुकाबले अफोर्डेबल कैसे बनाती है? मारुति सुजुकी अपनी कारों को किफायती बनाने के लिए ग्राहकों की मांग और बाजार की जरूरतों को समझने पर फोकस करती है. इसपर राजीव का कहना है कि, कंपनी कार को डिजाइन करते समय यह ध्यान रखती है कि ग्राहकों को किन फीचर्स की जरूरत है और बाजार में किस तरह की कार की मांग है. इसी आधार पर जरूरी फीचर्स को शामिल किया जाता है, जिससे कार की कीमत को ग्राहकों की जरूरत और बजट के हिसाब से रखा जा सके. नई कार खरीदते समय ग्राहक किन बातों का ध्यान रखते हैं? नई कार खरीदते समय ग्राहक के मन में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि 8-10 लाख रुपये खर्च करने पर उसे इसका कितना रिटर्न मिलेगा और क्या वह अपने पैसे का सही इस्तेमाल कर रहा है. एक्सपर्ट के अनुसार, ग्राहक मुख्य रूप से कार के माइलेज, मेंटेनेंस खर्च और भविष्य की रीसेल वैल्यू पर ध्यान देते हैं. यही वजह है कि कम रनिंग कॉस्ट वाली कारों की मांग बनी रहती है. उदाहरण के तौर पर S-Presso का CNG वेरिएंट 30 किलोमीटर प्रति किलोग्राम से ज्यादा का माइलेज देता है, जो माइलेज को प्राथमिकता देने वाले ग्राहकों को अट्रैक्ट करता है. ये भी पढ़ें: EV में आग क्यों लगती है, क्या पेट्रोल कारों से ज्यादा है खतरा? ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट ने बताया पूरा स्पोर्ट्स फेस्टिव सीजन में क्या तैयारियां और ऑफर्स हैं? दशहरा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान कारों की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में फेस्टिव ऑफर्स और मांग को लेकर राजीव चक्रवर्ती ने बताया कि, डीलर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त स्टॉक और कारों की उपलब्धता बनाए रखना होती है. शोरूम में कार खड़ी करने से पहले उसकी PDI यानी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन की जाती है, ताकि ग्राहक को डिलीवरी के समय सही स्थिति में वाहन दिया जा सके. फेस्टिव सीजन में ग्राहकों के लिए एक्सचेंज ऑफर्स भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं. दिवाली के दौरान पुरानी कार को एक्सचेंज करने पर मिलने वाला एक्सचेंज बोनस ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है. अक्टूबर महीने में S-Presso पर 35,000 रुपये तक के ऑफर या बोनस भी देखने को मिले हैं. साल के किस महीने में कार खरीदना बेहतर होता है? कार खरीदने का सबसे सही समय ग्राहक की व्यक्तिगत जरूरत पर निर्भर करता है. हालांकि, नवंबर और दिसंबर यानी साल के अंत में कार खरीदना कई मामलों में फायदेमंद माना जाता है. इस दौरान डीलर्स पुराने स्टॉक को क्लियर करने के लिए ज्यादा डिस्काउंट और ऑफर्स दे सकते हैं. इसके अलावा ग्राहक को नए साल के बैच कोड वाली गाड़ी मिलने की संभावना रहती है. हालांकि, कई ग्राहक धार्मिक आस्था और शुभ मुहूर्त को देखते हुए दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान ही नई कार खरीदना पसंद करते हैं. ये भी पढ़ें: कंपनी बताती है 200Km, लेकिन मिलती है कम, एक्सपर्ट ने समझाया इलेक्ट्रिक स्कूटर की रियल रेंज का गणित मारुति और टोयोटा के सहयोग को बाजार से कैसा रिस्पॉन्स मिला? मारुति सुजुकी और टोयोटा के सहयोग को बाजार में पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है. इस साझेदारी के तहत टोयोटा की इलेक्ट्रिकल और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी का लाभ मारुति को मिला है, जबकि मारुति ने अपनी कॉम्पैक्ट कार टेक्नोलॉजी टोयोटा के साथ साझा की है. इसका एक उदाहरण Maruti Baleno और Toyota Glanza हैं, जहां दोनों कंपनियों के बीच टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट शेयरिंग देखने को मिलती है. एक्सपर्ट के अनुसार, ग्राहक इस तरह के सहयोग पर भरोसा कर रहे हैं और बाजार में इसका रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा है. E20 पेट्रोल का कारों पर क्या असर पड़ रहा है? E20 पेट्रोल को लेकर मारुति सुजुकी की तैयारियां काफी पहले से चल रही हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, कंपनी 2020 से ही E20 ईंधन के लिए तैयारी कर रही है. ग्राहकों से मिले फीडबैक के आधार पर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में मामूली अंतर देखने को मिला है, लेकिन इंजन में किसी तरह की खराबी या नुकसान की रिपोर्ट सामने नहीं आई है. एक्सपर्ट के अनुसार, E20 से अगर छोटी-मोटी समस्या आती भी है तो वह कैटेलिटिक कनवर्टर के चोक होने या स्पार्क प्लग के जल्दी गंदा होने जैसी हो सकती है. हालांकि, इंजन खराब होने जैसी किसी बड़ी समस्या की रिपोर्ट नहीं मिली है. The post Maruti Cars क्यों हैं इतनी पॉपुलर? एक्सपर्ट ने बताया बिक्री का राज, Brezza की डिमांड से E20 पेट्रोल तक जानें पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

अब रिचार्ज के लिए पूरी ऐप नहीं खंगालनी पड़ेगी, TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों को दिया आदेश, सबसे पहले दिखेंगे ये खास प्लान

अब मोबाइल रिचार्ज करने वाले लोगों के लिए जरूरी प्लान ढूंढना आसान हो जाएगा. TRAI ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप में “TRAI-Mandated Packs” नाम से एक अलग सेक्शन बनाने को कहा है. इस सेक्शन में TRAI के नियम के तहत दिए जाने वाले जरूरी रिचार्ज प्लान दिखेंगे. इससे ग्राहकों को अपनी जरूरत का प्लान ढूंढने के लिए पूरी वेबसाइट या ऐप में इधर-उधर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आइए इसे डिटेल में समझते हैं. ग्राहकों की शिकायतों के बाद TRAI ने उठाया कदम TRAI ने यह निर्देश 1 अक्टूबर 2026 को जारी किया. इसकी वजह ग्राहकों की शिकायतें थीं. लोगों का कहना था कि टेलीकॉम कंपनियों की वेबसाइट और ऐप पर जरूरी वाउचर आसानी से नहीं मिलते. कई बार यह समझना भी मुश्किल होता है कि वाउचर कहां जाकर मिलेगा. TRAI ने जब कंपनियों की वेबसाइट और ऐप की जांच की, तो वहां भी यही परेशानी देखने को मिली. कई जगह वाउचर साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहे थे. कुछ कंपनियों ने इन्हें अलग-अलग कैटेगरी में रखा था, जबकि कई जगह वाउचर तक पहुंचने के लिए यूजर्स को कई पेज खोलने पड़ते थे. TRAI के अनिवार्य रिचार्ज के लिए होंगे अलग सेक्शन नए निर्देश के तहत अब टेलीकॉम कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर प्रीपेड रिचार्ज सेक्शन खोलते ही सबसे पहले “TRAI-Mandated Packs” का टैब दिखाई देगा. इस सेक्शन में TRAI के नियमों के तहत जरूरी अलग-अलग तरह के रिचार्ज वाउचर शामिल होंगे. इतना ही नहीं, कंपनियों को अपने खास स्टोर और रिचार्ज सेंटर पर भी इन प्लान्स की जानकारी साफ-साफ दिखानी होगी. TRAI के रिचार्ज प्लान से जुड़े नियम TRAI के नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों को अपने ग्राहकों के लिए कम से कम एक ऐसा Plan Voucher, Special Tariff Voucher (STV) और Combo Voucher देना जरूरी है, जिसकी वैलिडिटी 30 दिनों की हो. इसके अलावा, ऐसे रिचार्ज प्लान भी उपलब्ध होने चाहिए जिन्हें हर महीने उसी तारीख पर दोबारा रिन्यू कराया जा सके. TRAI के नियमों के मुताबिक, ऐसे रिचार्ज प्लान भी होने चाहिए, जिनमें ग्राहक को सिर्फ फोन करने और SMS भेजने की सुविधा मिलती हो. ये भी पढ़ें: TRAI Data: अगस्त में जियो ने फिर रचा इतिहास, मोबाइल और होम ब्रॉडबैंड दोनों में बनी नंबर वन; देखें पूरा रिपोर्ट कार्ड The post अब रिचार्ज के लिए पूरी ऐप नहीं खंगालनी पड़ेगी, TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों को दिया आदेश, सबसे पहले दिखेंगे ये खास प्लान appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

क्या करें बाहर रहने वाले बिहारी? छठ पर घर वापसी मुश्किल, ट्रेन में टिकट नहीं और हवाई सफर महंगा

Chhath Puja Train Ticket Crisis: अक्टूबर का महीना शुरू होते ही देश भर में त्योहारों का मौसम दस्तक दे चुका है. दुर्गा पूजा के बाद हर किसी की निगाहें दिवाली और लोकआस्था के महापर्व छठ पर टिकी रहती है. दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु और पंजाब जैसे शहरों में पसीना बहा रहे लाखों बिहारियों के लिए यह सिर्फ एक छुट्टी का समय नहीं होता. यह वह वक्त होता है जब वे अपने घर, परिवार, मिट्टी और संस्कृति से दोबारा जुड़ते हैं. लेकिन हर साल की तरह इस बार भी बिहार लौटने का यह सफर किसी महा-सर्कस से कम साबित नहीं हो रहा है. जैसे-जैसे त्योहारों की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे बिहारियों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं. घर जाने की खुशी पर टिकट न मिलने का तनाव पूरी तरह हावी हो चुका है. ट्रेनों में 3 महीने पहले से नो-रूम अगर आप आज दिल्ली से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर या भागलपुर के लिए ट्रेन का कन्फर्म टिकट तलाश रहे हैं, तो आपको सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी. देश के प्रमुख रेल मार्गों पर चलने वाली प्रीमियम और सुपरफास्ट ट्रेनों का हाल बेहद बुरा है. संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, विक्रमशिला एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस और सप्त क्रांति एक्सप्रेस जैसी चर्चित ट्रेनों में बुकिंग खुलते ही महज कुछ ही मिनटों में सभी सीटें भर गईं. स्थिति यह है कि इन ट्रेनों में अक्टूबर के दूसरे हफ्ते से लेकर नवंबर तक रिग्रेट और नो-रूम के बोर्ड लग चुके हैं. कई मुख्य रूटों पर 200 से 300 से भी ज्यादा की वेटिंग लिस्ट चल रही है. ऐसे में आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर लॉग इन करते ही यात्रियों के हाथ सिर्फ मायूसी लग रही है. जो लोग तत्काल टिकट के भरोसे बैठे हैं, उनके लिए भी एक-एक सीट के लिए हजार लोग कतार में खड़े हैं. पूजा स्पेशल ट्रेनों की जमीनी हकीकत क्या है यात्रियों की इस भारी भीड़ और हाहाकार को देखते हुए हिंदुस्तानीय रेलवे हर साल सैकड़ों पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाने का ढिंढोरा पीटता है. दावे किए जाते हैं कि अतिरिक्त ट्रेनें चलाकर हर यात्री को उसके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया जाएगा. लेकिन क्या वास्तव में यह व्यवस्था कारगर साबित होती है? जमीनी हकीकत यह है कि इन पूजा स्पेशल ट्रेनों का कोई भरोसा नहीं होता. इन ट्रेनों को अक्सर नियमित ट्रेनों को रास्ता देने के लिए आउटर सिग्नलों पर घंटों खड़ा रख दिया जाता है. 12 से 15 घंटे का सफर तय करने वाली स्पेशल ट्रेनें 24 से 30 घंटे में पटना या मुजफ्फरपुर पहुंचती हैं. इसके अलावा, इन ट्रेनों के जनरल और स्लीपर कोचों की स्थिति तो और भी डरावनी होती है. डिब्बों में क्षमता से चार गुना ज्यादा लोग ठुंसे रहते हैं. शौचालय के पास, गलियारों में और यहां तक कि दो डिब्बों के जोड़ पर बैठकर लोग हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर करने को मजबूर हैं. यह सफर आरामदायक तो दूर, बुनियादी मानवीय सुविधाओं से भी परे होता है. फ्लाइट के किराए में भयंकर उछाल जब ट्रेनों के सभी दरवाजे बंद दिखते हैं, तो मध्यमवर्गीय और कामकाजी लोग मजबूरी में हवाई जहाज यानी फ्लाइट का रुख करते हैं. लेकिन विमानन कंपनियों ने भी इस मजबूरी का पूरा फायदा उठाना शुरू कर दिया है. त्योहारों के सीजन में डायनेमिक फेयर के नाम पर हवाई किराए में आग लगी हुई है. सामान्य दिनों में दिल्ली से पटना का हवाई किराया 4000 से 5000 रुपये के बीच होता है. लेकिन दिवाली और छठ के ठीक 2-3 दिन पहले का किराया 15000 से लेकर 22000 रुपये प्रति व्यक्ति तक पहुंच चुका है. यदि परिवार में 4 सदस्य हैं, तो सिर्फ एक तरफ का हवाई किराया 80000 रुपये के पार जा रहा है. यही हाल दिल्ली से दरभंगा, मुंबई से पटना और बेंगलुरु से पटना जाने वाली फ्लाइट्स का भी है. एक आम नौकरीपेशा इंसान के लिए अपनी पूरी महीने की कमाई सिर्फ घर जाने के टिकट पर खर्च कर देना कतई मुमकिन नहीं है. बसों का किराया भी बढ़ा दिया जाता है ट्रेन और फ्लाइट से निराश होने के बाद प्रवासियों का अंतिम सहारा बनती हैं प्राइवेट बसें. दिल्ली के आनंद विहार, कश्मीरी गेट या सूरत और मुंबई से बिहार के विभिन्न जिलों के लिए चलने वाली प्राइवेट स्लीपर बसों का किराया भी तीन से चार गुना बढ़ा दिया जाता है. जो बसें आम दिनों में 1500 से 2000 रुपये लेती थीं, वे अब 5000 से 7000 रुपये प्रति सीट वसूलती हैं. इसके बावजूद, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लंबे ट्रैफिक जाम के बीच लोग किसी तरह अपने घर पहुंचने की उम्मीद में यह भारी रकम चुकाने को विवश रहते हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें स्थायी समाधान की दरकार और प्रशासनी व्यवस्था पर सवाल हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीने में बिहार जाने वाले रेल और सड़क मार्गों पर यही संकट देखने को मिलता है. यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही है. इसके बावजूद अब तक इसका कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है. केवल कुछ स्पेशल ट्रेनें चला देना या अतिरिक्त बोगियां जोड़ देना इस विशाल जनसैलाब के आगे ऊंट के मुंह में जीरा साबित होता है. आवश्यकता इस बात की है कि उत्तर हिंदुस्तान से बिहार को जोड़ने वाले रेल कॉरिडोर का स्थायी विस्तार किया जाए. नई नियमित ट्रेनें चलाई जाएं और हवाई किराए की ऊपरी सीमा तय की जाए ताकि त्यौहार के समय बिहारियों का शोषण न हो सके. बिहार की वित्तीय स्थिति को बाहर से पैसा भेजकर मजबूत करने वाले इन लाखों लोगों को हर साल अपनी ही सरजमीं पर वापस लौटने के लिए इतनी बड़ी जद्दोजहद और अपमान सहना पड़े, यह व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है. The post क्या करें बाहर रहने वाले बिहारी? छठ पर घर वापसी मुश्किल, ट्रेन में टिकट नहीं और हवाई सफर महंगा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Asian Games Opinion: 800 करोड़ खर्च, फिर भी दक्षिण कोरिया से क्यों पीछे भारत? 140 करोड़ वाले देश के खेल सिस्टम से कौन पूछेगा सवाल

Asian Games Opinion: हिंदुस्तान ने एशियन गेम्स 2026 में 85 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया. 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज के साथ यह प्रदर्शन हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धि को दिखाता है. आखिरी दिनों में जिस तरह हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों ने एक के बाद एक पदक जीते, उससे पूरे देश को जश्न मनाने का मौका मिला. लेकिन अब जब एशियन गेम्स का शोर थम चुका है और पदक तालिका सामने है, तो जश्न के साथ एक जरूरी सवाल भी खड़ा होता है. क्या हिंदुस्तान का स्पोर्ट्स सिस्टम उस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, जिस रफ्तार से उससे उम्मीद की जा रही है? सवाल खिलाड़ियों की मेहनत पर नहीं है. जिन्होंने मैदान पर उतरकर देश के लिए पदक जीता, उनकी उपलब्धि का सम्मान होना ही चाहिए. सवाल उस सिस्टम पर है, जो इन खिलाड़ियों को तैयार करता है, उन्हें ट्रेनिंग देता है, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर दिलाता है और बड़े मंच तक पहुंचाता है. 107 से 85 मेडल पर पहुंचा हिंदुस्तान हांगझोउ एक स्टार खिलाड़ी मिलना सिस्टम की सफलता नहीं है स्पोर्ट्स एसोसिएशन (फोटो-AI) प्रशासन पैसा और सुविधाएं दे सकती है, लेकिन मैदान पर खिलाड़ी तैयार करने की जिम्मेदारी कई स्तरों पर बंटी होती है. स्पोर्ट्स महासंघ, कोचिंग सिस्टम, हाई परफॉर्मेंस सेंटर, विशेषज्ञ, सपोर्ट स्टाफ और खुद खिलाड़ी, सभी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं. इसलिए किसी बड़े आयोजन के बाद सिर्फ खिलाड़ियों की सफलता का जश्न मनाना और असफलता की स्थिति में खिलाड़ी की परफॉर्मेंस पर सवाल उठाना सही तरीका नहीं हो सकता. जहां पदक नहीं आया, वहां यह पता लगाना भी जरूरी है कि कमी खिलाड़ी में थी या तैयारी में. अगर किसी खिलाड़ी को पर्याप्त ट्रेनिंग, बेहतर कोचिंग, स्पोर्ट्स विज्ञान या अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का एक्सपोजर नहीं मिला, तो उसकी असफलता को सिर्फ उसके प्रदर्शन के खाते में डाल देना सबसे आसान रास्ता है. वहीं अगर सिस्टम ने पूरी तैयारी दी थी और फिर भी किसी स्पोर्ट्स में प्रदर्शन गिरा, तो यह जानना जरूरी है कि कमी कहां रह गई. यही फर्क एक गंभीर स्पोर्ट्स व्यवस्था और सिर्फ प्रतियोगिता-दर-प्रतियोगिता तैयारी करने वाली व्यवस्था के बीच होता है. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान-पाक में कोई मुकाबला नहीं बचा, हर मैच के बाद मिलती है सिर्फ शर्मिंदगी- शोएब अख्तर तो क्या हिंदुस्तान का स्पोर्ट्स सिस्टम सही दिशा में बढ़ रहा है? अब शुरुआत में उठाए गए सवाल पर लौटते हैं. क्या हिंदुस्तान का स्पोर्ट्स सिस्टम उस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, जिसकी उससे उम्मीद की जा रही है? मौजूदा आंकड़े इसका पूरी तरह हां में जवाब नहीं देते. हिंदुस्तान का स्पोर्ट्स सिस्टम पहले से मजबूत हुआ है. कई स्पोर्ट्सों में विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार हुए हैं और 21 गोल्ड इसकी बड़ी मिसाल हैं. लेकिन 107 से 85 पदकों तक की गिरावट, गोल्ड की संख्या में कमी और लगातार दो एशियन गेम्स में चौथे स्थान पर बने रहना यह बताता है कि अभी हिंदुस्तान को लंबी छलांग लगाने के लिए काफी काम करना बाकी है. यानी समस्या प्रतिभा की कमी से ज्यादा प्रतिभा को लगातार चैंपियन बनाने, अलग-अलग स्पोर्ट्सों में गहराई तैयार करने और तैयारी को ज्यादा प्रभावी बनाने की है. अब अगला लक्ष्य सिर्फ 85 से 86 पदक करना नहीं होना चाहिए एशियन गेम्स 2026 का सबसे बड़ा सबक यही है कि हिंदुस्तान को पदकों के जश्न और प्रदर्शन की समीक्षा, दोनों को साथ लेकर चलना होगा. 85 पदक शानदार उपलब्धि हैं. 21 गोल्ड के लिए खिलाड़ियों को बधाई मिलनी ही चाहिए. लेकिन हांगझोउ के 107 पदकों से इस बार के 85 तक पहुंचने का आंकड़ा भी उतना ही महत्वपूर्ण है. खासकर तब, जब पिछले तीन वर्षों में एशियन गेम्स की तैयारी पर करीब ₹800 करोड़ खर्च हुए हैं. अगला लक्ष्य सिर्फ 85 से 86 पदक करना नहीं होना चाहिए. लक्ष्य ऐसा सिस्टम तैयार करना होना चाहिए, जिसमें एक खिलाड़ी के अनुपलब्ध होने पर उसकी जिम्मेदारी संभालने वाला दूसरा खिलाड़ी तैयार हो, एक पीढ़ी के बाद अगली पीढ़ी पहले से मजबूत हो और हर बड़े टूर्नामेंट के बाद सिर्फ पदकों की संख्या नहीं, बल्कि तैयारी की गुणवत्ता भी बेहतर दिखाई दे. 85 पदकों पर जश्न मनाइए. खिलाड़ियों को सलाम कीजिए. उनकी मेहनत का सम्मान कीजिए. लेकिन इसी जश्न के बीच सिस्टम से यह सवाल भी पूछिए. 107 से 85 तक आने के बाद हमने क्या सीखा और अगली बार 85 से आगे जाने के लिए अभी से क्या बदल रहा है? The post Asian Games Opinion: 800 करोड़ खर्च, फिर भी दक्षिण कोरिया से क्यों पीछे हिंदुस्तान? 140 करोड़ वाले देश के स्पोर्ट्स सिस्टम से कौन पूछेगा सवाल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

AI vs Accountants: अकाउंटिंग टेस्ट में AI ने 12 प्रोफेशनल्स को पछाड़ा, क्या अब CA की नौकरी पर भी आएगी आफत?

AI Accounting Test: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच अकाउंटिंग प्रोफेशन को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है. AI रिक्रूटिंग कंपनी Mercor की एक नई स्टडी में Claude Opus 5 ने कुछ जटिल अकाउंटिंग टास्क में अनुभवी प्रोफेशनल अकाउंटेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है. Mercor ने इस तुलना के लिए 12 लाइसेंस्ड CPA को शामिल किया. इन सभी के पास औसतन करीब साढ़े पांच साल का अकाउंटिंग अनुभव था. उन्हें महीने के अंत में होने वाले अकाउंटिंग काम से जुड़े चार टास्क दिए गए, जो वास्तविक कामकाजी परिस्थितियों पर आधारित थे. इनमें कंपनी की फाइलों से सही आंकड़े ढूंढना, गणना करना और नतीजे टेबल के रूप में तैयार करना शामिल था. अमेरिका के CPA को हिंदुस्तान के CA से ऐसे समझें CPA यानी अमेरिका में अकाउंटिंग का पेशेवर लाइसेंस हासिल करने वाले लोग. इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि हिंदुस्तान में CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) होते हैं, उसी तरह अमेरिका में CPA (Certified Public Accountant) होते हैं. दोनों की भूमिका काफी हद तक मिलती-जुलती है, हालांकि दोनों की पढ़ाई, परीक्षा और लाइसेंस के नियम अलग हैं. 10 मिनट से कम समय में 100% स्कोर इस टेस्ट का नतीजा AI की मौजूदा क्षमता को दिखाता है. Claude Opus 5 ने किए गए सभी 20 प्रयासों में 100% स्कोर हासिल किया. उसने हर टास्क को 10 मिनट से भी कम समय में पूरा किया. वहीं, टेस्ट देने वाले लोगों की सटीकता अलग-अलग प्रयासों में 0 से करीब 90% के बीच रही और उनका औसत स्कोर करीब 37% था. ज्यादातर लोगों को टेस्ट पूरा करने में 30 से 180 मिनट का समय लगा. यानी साफ निर्देशों और तय तरीके से किए जाने वाले कामों में AI ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अकाउंटिंग के हर तरह के काम को लगातार और भरोसेमंद तरीके से करना अभी भी चुनौती है. क्या सच में CA की नौकरी खतरे में है? CA की नौकरी सिर्फ आंकड़े ढूंढने और गणना करने तक सीमित नहीं है. असल अकाउंटिंग काम में क्लाइंट से बात करना, सही सवाल पूछना, कारोबार की पूरी स्थिति समझना, नतीजों की जांच करना और उसके आधार पर फैसला लेना भी जरूरी होता है. इनमें से कई चीजें इस टेस्ट का हिस्सा ही नहीं थीं. इसलिए 100% स्कोर को पूरी CA या अकाउंटेंट की नौकरी के बराबर मानना सही नहीं होगा. हालांकि, यह जरूर संकेत देता है कि अकाउंटिंग के कई दोहराए जाने वाले और तय तरीके से किए जाने वाले काम AI तेजी से संभाल सकता है. AI से बदल सकता है अकाउंटिंग का काम आने वाले समय में डेटा खोजना, शुरुआती गणना और कुछ तय तरीके वाले अकाउंटिंग टास्क AI संभाल सकता है. वहीं अकाउंटेंट्स को नतीजों की जांच, क्लाइंट से बातचीत, कारोबार की स्थिति समझने और अपने अनुभव के आधार पर फैसला लेने जैसे कामों पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है. इसलिए इस स्टडी को “AI ने अकाउंटेंट्स की नौकरी खत्म कर दी” के तौर पर देखने के बजाय यह समझना ज्यादा सही होगा कि अकाउंटिंग के कुछ कामों में AI की रफ्तार और सटीकता तेजी से बढ़ रही है. ये भी पढ़ें: Weekly Top Jobs: शिक्षक से पुलिस और रेलवे तक, देखें इस हफ्ते की ये प्रशासनी भर्तियां The post AI vs Accountants: अकाउंटिंग टेस्ट में AI ने 12 प्रोफेशनल्स को पछाड़ा, क्या अब CA की नौकरी पर भी आएगी आफत? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

5 अक्टूबर की टॉप 20 खबरें : महिला पत्रकार का आरोप- ACP ने सीने पर मारा हाथ; जयशंकर बोले- जब दुनिया पाकिस्तान के साथ थी, रूस ने दिया भारत का साथ

1. स्त्री पत्रकार का आरोप- दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत ने मेरा ब्रेस्ट प्रेस किया, पुलिस ने कहा- जांच कर रहे हैं एक स्त्री पत्रकार ने दिल्ली पुलिस पर गलत तरीके से छूने के आरोप लगाए हैं. इसका वीडियो सामने आया है. जिसे एक्स पर अभिजीत दीपके ने शेयर किया है. इसके अलावा एक अन्य वीडियो kuldeepkumaraap नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से शेयर किया गया है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 2. India Russia Ties: जयशंकर बोले- जब दुनिया पाकिस्तान के साथ थी, रूस ने हिंदुस्तान का दिया साथ India Russia Ties: रूस के साथ हिंदुस्तान के रिश्तों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिंदुस्तान का रुख साफ किया है. उन्होंने कहा कि रूस ने मुश्किल समय में हिंदुस्तान का साथ दिया है और देश अपने पुराने अनुभव को नहीं भूल सकता. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 3. नेहा बोरा हिरासत के बाद रिहा, अभिजीत दीपके बोले- ‘दिल्ली पुलिस से बेटियों को बचाओ’ AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा हो गई हैं, लेकिन उनके फोन और बैग अभी भी पुलिस के पास हैं. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 4. यूक्रेन में हिंदुस्तानीय दवा कंपनी पर रूसी ड्रोन हमला, 1994 से चल रहा था कारोबार; 400 करोड़ के नुकसान का दावा यूक्रेन के सूमी में हिंदुस्तानीय दवा कंपनी पर रूस ने ड्रोन हमला कर दिया है. इस दवा कंपनी को कुसुम ग्रुप का बताया जा रहा है. कुसुम ग्रुप ने यूक्रेन में अपना कारोबार 1994 में सेटअप किया था. जिसे इस हमले में 400 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 5. तीन मेडल जीतकर एशियन गेम्स 2026 की स्टार बनीं नीरू ढांडा, क्लोजिंग सेरेमनी में थामेंगी हिंदुस्तानीय तिरंगा एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तान की ध्वजवाहक होंगी निशानेबाज नीरू ढांडा. जानिए किसान की बेटी के संघर्षों से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 6. सोना-चांदी इंपोर्ट पर बैंकों और नॉमिनेटेड एजेंसियों की GST छूट हो सकती है खत्म, 7 अक्टूबर को फैसला संभव GST Council Meeting: माल एवं सेवा कर (GST) परिषद बैंकों और प्रशासन द्वारा नामित एजेंसियों को सोना, चांदी और प्लैटिनम के इंपोर्ट पर मिलने वाली एकीकृत जीएसटी (IGST) छूट वापस लेने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है. पीटीआई के अनुसार, इस संबंध में 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा हो सकती है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 7. दवा नहीं सांसों का सौदा: जनऔषधि केंद्र में 90 फीसद तक सस्ती दवाएं, फिर भी RIMS में मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने की मजबूरी; सप्लाई ने बढ़ाई परेशानी कैंसर की दवाएं जनऔषधि केंद्रों पर 50-90% सस्ती उपलब्ध हैं, पर सप्लाई की कमी और डॉक्टरों के दबाव के चलते मरीजों को भारी नुकसान हो रहा है. जानें क्या है पूरी कहानी. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 8. बिहार के इस जिले में 1720 करोड़ की लागत से बनेगी 67 किमी फोरलेन सड़क, झारखंड जाना होगा आसान Bihar Road Project: बिहार में भागलपुर से झारखंड सीमा तक 67 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाने की तैयारी तेज हो गई है. इस परियोजना पर 1720 करोड़ रुपये खर्च होंगे और निर्माण दो चरणों में होगा. सड़क बनने से भागलपुर और बांका के लोगों के साथ झारखंड आने-जाने वाले यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 9. वाराणसी एयर शो पर आचार संहिता का ब्रेक: PM मोदी के दौरे में बदला प्लान, रोपवे-क्रिकेट स्टेडियम समेत कई परियोजनाओं का लोकार्पण टला UP News: वाराणसी में होने वाले भव्य एयर शो की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन एमएलसी चुनाव की आचार संहिता के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन और विकास परियोजनाओं के लोकार्पण पर असर पड़ा है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 10. सिंधु जल संधि की बहाली के लिए छटपटा रहा पाकिस्तान, अब हिंदुस्तान को दे रहा नियम-कानून की दुहाई! Indus Water Treaty Dispute: पाकिस्तान का कहना है कि हिंदुस्तान अकेले अपने दम पर सिंधु जल संधि को रोक नहीं सकता, वहीं, हिंदुस्तान का कहना है कि जब तक आतंकवाद पर लगाम नहीं लगता, तब तक सिंधु जल संधि बहाल नहीं होगी. इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स दोनों देशों के बीच ‘जल युद्ध’ होने का संकेत दे रहे हैं. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 11. ईरान-रूस युद्ध से तेल बाजार में भूचाल: कच्चा तेल $100 पार… मैक्रों ने ट्रंप से फोन पर क्यों की बात? ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट से वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं. मैक्रों ने ट्रंप से बात कर G7 की बैठक का प्रस्ताव दिया. दोनों नेताओं के बीच फोन पर क्या- क्या हुई बात. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 12. दिलजीत का फिर चलेगा जादू: हिंदुस्तान के 7 शहरों में गूंजेगा ‘ऑरा टूर’, टिकट बुकिंग से लेकर शेड्यूल तक की पूरी डिटेल ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ ‘ऑरा टूर’ के साथ हिंदुस्तान में लाइव कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं. दिल्ली, लखनऊ, इंदौर, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु सहित 7 शहरों में धूम मचाने के लिए तैयार. जानें पूरी डेट और टिकट बुकिंग की जानकारी. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 13. स्लो कंप्यूटर को फास्ट बना देगा JioPC, बिना नया सिस्टम खरीदे मिलेगा 1TB स्टोरेज, AI Apps चलेगा शानदार आपका भी पुराना लैपटॉप या कंप्यूटर स्लो हो गया है, बार-बार हैंग हो रहा है या नए AI ऐप्स चलाने में परेशानी आ रही है, तो इसे तुरंत बदलने की जरूरत नहीं है. आप Reliance Jio के JioPC का इस्तेमाल करके इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 14. Delhi Protest : स्त्रीओं को घसीटा, युवकों से धक्का-मुक्की, पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा; देखिए वीडियो दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इस दौरान स्त्रीओं, युवकों और पत्रकारों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई का वीडियो वायरल हो रहा है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 15. सिंगल चार्ज में बिहार से मुंबई, 1,770 KM रेंज वाली हाइब्रिड SUV, 1 घंटे में 43,900 गाड़ियां बुक चीन

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Pitru Paksha Dashami 2026: पितृपक्ष की दशमी आज, जानें किसका होता है श्राद्ध, शुभ मुहूर्त और पूरी विधि

Pitru Paksha 2026 Dashami Shradh: पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व माना गया है. आज 05 अक्टूबर 2026 को पितृपक्ष की दशमी तिथि है. आइए जानें इस दिन श्राद्ध का मुहूर्त और धार्मिक महत्व कब से कब तक है दशमी तिथि? दशमी तिथि का आरंभ 05 अक्टूबर को तड़के 03:53 बजे होगा और इसका समापन 06 अक्टूबर 2026 को तड़के 02:07 बजे होगा. पितृपक्ष दशमी पर आज इसका करें श्राद्ध आज पितृपक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार जिन लोगों का निधन दशमी तिथि को हुआ है, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है. श्राद्ध कर्म के लिए शुभ समय इस प्रकार है: कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:46 से 12:33 बजे तक रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 से 01:20 बजे तक अपराह्न काल: दोपहर 01:20 से शाम 03:41 बजे तक दशमी श्राद्ध का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशमी तिथि पर विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है. पितरों की कृपा से परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. पिंडदान के माध्यम से कष्ट भोग रही आत्माओं को मुक्ति मिलने की भी मान्यता है. यह भी कहा जाता है कि दशमी के दिन किसी पवित्र कुएं के समीप पिंडदान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. ये भी पढ़ें: Indira Ekadashi 2026 पर किन पितरों का करें श्राद्ध? मृत्यु तिथि याद नहीं तो जानें क्या है सही नियम दशमी श्राद्ध की विधि संभव हो तो गंगा नदी या किसी पवित्र नदी के किनारे श्राद्ध कर्म करवाएं. नदी किनारे श्राद्ध संभव न हो तो घर पर भी श्रद्धापूर्वक श्राद्ध किया जा सकता है. दोपहर के समय श्राद्ध पूजा शुरू करें और योग्य ब्राह्मण की सहायता से मंत्रोच्चार करें. पूजा के बाद विधि-विधान से जल का तर्पण करें. श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उन्हें दान-दक्षिणा दें. भोग में से गाय, कुत्ते और कौवे के लिए हिस्सा अलग रखें. उन्हें भोजन कराते समय अपने पितरों का स्मरण करें और मन ही मन श्राद्ध स्वीकार करने की प्रार्थना करें. श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है. ये भी पढ़ें: Indira Ekadashi Daan: इंदिरा एकादशी पर क्या दान करें? पितरों की शांति के लिए इन चीजों का दान माना जाता है शुभ The post Pitru Paksha Dashami 2026: पितृपक्ष की दशमी आज, जानें किसका होता है श्राद्ध, शुभ मुहूर्त और पूरी विधि appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Aaj Ka Rashifal 5 October 2026: सिंह की कमाई बढ़ेगी, मकर की योजना अटकेगी, यहां से पढ़ें आज का राशिफल

Aaj Ka Rashifal 5 October 2026: आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 का दिन कई राशियों के लिए सफलता, आर्थिक लाभ और पारिवारिक सुख लेकर आएगा. वहीं कुछ राशि वालों को विरोधियों और रोजमर्रा की उलझनों से सावधान रहने की जरूरत होगी. यहां ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा बता रहे हैं आज का राशिफल. आज का मेष राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 के दिन मेष रााशि वालों के जमीन-जायदाद और स्थिर संपत्ति से जुड़े काम पूरे होंगे. दोस्तों से संबंधों में मधुरता आएगी. शत्रु हावी होने का प्रयास कर सकते हैं. स्वास्थ्य सुधरेगा और बुद्धि-चतुरता से आर्थिक परेशानी दूर होगी. शुभ रंग: ऑलिव ग्रीन, शुभ अंक: 4 आज का वृष राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर को वृषभ राशि वालों के भाग्य और कर्म का साथ मिलने से विवादित मामले सुलझेंगे. प्रशासनी पक्ष का सहयोग मिलेगा. मान-यश और प्रतिष्ठा बढ़ेगी. घर में अविवाहित सदस्यों के रिश्ते आ सकते हैं और पारिवारिक वातावरण शांत रहेगा. शुभ रंग: पर्पल, शुभ अंक: 7 आज का मिथुन राशिफल आज 5 अक्टूबर, सोमवार का दिन मिथुन राशि वालों को साहस, पराक्रम और पुरुषार्थ से जरूरी कार्यों में सफलता मिलेगी. रोजगार में प्रगति और संतोषजनक धनलाभ होगा. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और प्रशासनी कामों में विशेष सफलता मिल सकती है. शुभ रंग: मैजेंटा, शुभ अंक: 3 आज का कर्क राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को कर्क राशि वालों को नेतृत्व के क्षेत्र में ऊंचाई हासिल करने का अवसर मिलेगा. शुभ समाचार प्राप्त होंगे और बच्चों की ओर से खुशी मिलेगी. घर-बाहर मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी. आरोग्य अच्छा रहेगा और मकान-वाहन का सुख मिल सकता है. शुभ रंग: गाजरी, शुभ अंक: 1 आज का सिंह राशिफल आज 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को सिंह राशि वालों को गुप्त शत्रुओं पर विजय मिलेगी और दिन सुख-शांति से बीतेगा. आर्थिक लाभ के योग हैं. व्यावहारिक कुशलता से समस्याएं सुलझेंगी. चल-अचल संपत्ति से जुड़े पुराने मामले निपटने की संभावना है. शुभ रंग: वॉएलेट, शुभ अंक: 8 आज का कन्या राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को कन्या राशि वालों की पुराने परिचितों से मुलाकात होगी और अचानक धन या काम मिलने के योग हैं. अपनी सूझबूझ से कार्यों को पूरा करेंगे. रोजगार की स्थिति मजबूत होगी. कारोबार के सिलसिले में यात्रा हो सकती है. शुभ रंग: चारकोल ग्रे, शुभ अंक: 2 ये भी पढ़ें: Kumbh Rashi: साढ़ेसाती खत्म होते ही बदलेगी कुंभ राशि वालों की जिंदगी, जानें करियर पर क्या होगा असर आज का तुला राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को तुला राशि वालों को नौकरी में नया पद, अधिकार या जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. महत्वपूर्ण कार्य सफल होंगे. स्त्रीओं के संपर्क से लाभ मिलेगा. छात्रों के लिए समय उत्साहवर्धक रहेगा और प्रतियोगी परीक्षा में अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं. शुभ रंग: हल्का नीला, शुभ अंक: 4 आज का वृश्चिक राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को वृश्चिक रााशि वालों को रोजगार के क्षेत्र से शुभ समाचार मिलेगा और मान-यश बढ़ेगा. धार्मिक समारोह या मांगलिक कार्य में व्यस्त रहेंगे. मनपसंद उपहार मिल सकते हैं. व्यापार मजबूत होगा और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ेगा. शुभ रंग: सिल्वर, शुभ अंक: 1 आज का धनु राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को धनु राशि वालों को सफलता मिलेगी. प्रशासनी कार्यों में प्रगति होगी और हर्षदायक समाचार मिलेंगे. धनलाभ के अवसर बढ़ेंगे. बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है. जमीन, मकान और कृषि संबंधी काम बनेंगे. शुभ रंग: एक्वा ब्लू, शुभ अंक: 7 आज का मकर राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को मकर राशि वालों के मन में नई महत्वाकांक्षाएं रहेंगी और रोजगार संबंधी समस्याएं दूर होंगी. नए कार्य की योजना सफल हो सकती है. व्यापार में अपेक्षित सफलता मिलेगी. एक से अधिक स्रोतों से आमदनी के योग बनेंगे. शुभ रंग: गुलाबी, शुभ अंक: 3 आज का कुंभ राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को कुंभ राशि वालों को नया कार्य या प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है. घर में शुभ कार्य संपन्न हो सकता है. आर्थिक स्थिति सुधरेगी और संतान पक्ष से सुख मिलेगा. रोजगार मजबूत होगा और विरोधियों पर विजय प्राप्त करेंगे. शुभ रंग: वाइन रेड, शुभ अंक: 9 आज का मीन राशिफल आज सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को मीन राशि वालों की आजीविका में बदलाव की संभावना है और दूर की यात्रा के योग बन सकते हैं. परिवार में नए मेहमान का आगमन होगा. दैनिक समस्याएं सुलझेंगी और पारिवारिक उलझनें दूर होंगी. प्रयासों से आर्थिक लाभ मिलेगा. शुभ रंग: पर्ल व्हाइट, शुभ अंक: 4 The post Aaj Ka Rashifal 5 October 2026: सिंह की कमाई बढ़ेगी, मकर की योजना अटकेगी, यहां से पढ़ें आज का राशिफल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Video: रिहाई के बाद बोलीं नेहा बोरा – कुत्ते-कॉकरोच नहीं, देश के नागरिक हैं हम

Delhi Protests: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को रविवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया. रिहाई के बाद बोरा ने कहा कि देश के नागरिकों को सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने का अधिकार है. उन्होंने कहा, “हम कुत्ते नहीं हैं, कॉकरोच नहीं हैं, हम देश के नागरिक हैं.” बोरा ने कहा, “देश के नागरिकों को अधिकार है कि वे सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछें. जो वोट वे देते हैं, वह वोट कहां जाता है? उसका क्या सौदा होता है?” उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे. हिरासत में लिए जाने और हिंसा के बावजूद यह लड़ाई जारी रहेगी. बोरा ने X पर पोस्ट कर लिखा, “हमने बस अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई है. हम अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे. आपके अपहरण, हिरासत में लेने और हिंसा के बावजूद यह लड़ाई खत्म नहीं हुई है.” नरेला थाने से रिहा हुईं नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्यों के मुताबिक, नेहा बोरा को रविवार को जंतर-मंतर की ओर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था. बाद में उन्हें नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया. AISA सदस्यों का दावा है कि रिहाई के समय बोरा को उनका फोन और बैग नहीं दिया गया. उनकी मदद के लिए संगठन की ओर से वकीलों की एक टीम भी थाने भेजी गई थी. इससे पहले AISA ने दावा किया था कि जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस बोरा को एक निजी वाहन में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गई. संगठन का आरोप था कि वाहन पर आधिकारिक नंबर प्लेट नहीं थी और उसमें कोई स्त्री पुलिस अधिकारी भी मौजूद नहीं थी. AISA ने इसे प्रक्रिया का उल्लंघन बताया. हालांकि, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया. पुलिस का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया और उन्हें काटा. ये भी पढ़ें: VIDEO: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन, स्त्री का आरोप- दिल्ली पुलिस ने घसीटा; कपड़े फाड़े लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन AISA कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी अशोक रोड स्थित आंध्र भवन सर्कल से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे. इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और बैरिकेड्स लगाए गए थे. प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए निर्धारित प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ने की कोशिश की. पुलिस ने जब उन्हें बैरिकेड्स पार करने से रोकने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश करती दिखीं. पुलिसकर्मी उन्हें रोकने का प्रयास करते नजर आए. ये भी पढ़ें: नेहा बोरा हिरासत के बाद रिहा, अभिजीत दीपके बोले- ‘दिल्ली पुलिस से बेटियों को बचाओ’ शुक्रवार और शनिवार को भी हिरासत में लिए गए थे प्रदर्शनकारी यह प्रदर्शन निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं, एसआईआर और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा है. दिल्ली में शनिवार को प्रदर्शन के दौरान 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था. इससे पहले शुक्रवार को मध्य दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ताओं और नेताओं समेत 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था. शुक्रवार को हिरासत में लिए गए लोगों में नेहा बोरा के अलावा आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तथा योगेंद्र यादव भी शामिल थे. पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और मध्य दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था. ये भी पढ़ें: Delhi Protest : ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच जंतर-मंतर में हंगामा, स्त्री प्रदर्शनकारियों को घसीटकर ले गई पुलिस The post Video: रिहाई के बाद बोलीं नेहा बोरा – कुत्ते-कॉकरोच नहीं, देश के नागरिक हैं हम appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top