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Author name: Vinod Jha

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समस्तीपुर

बिहार दिवस 2026 के भव्य आयोजन हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा बैठक संपन्न

नया विचार न्यूज समस्तीपुर | समाहरणालय सभागार, समस्तीपुर में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आगामी ‘बिहार दिवस 2026’ के सफल एवं भव्य आयोजन की तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के प्रारंभ में गत वर्ष की कार्यवाहियों (Proceedings) का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। बैठक के मुख्य निर्णय एवं निर्देश: प्रभात फेरी का आयोजन: जिलाधिकारी द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया गया कि बिहार दिवस के अवसर पर गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सुबह 07:00 बजे भव्य प्रभात फेरी निकाली जाए। इसमें स्कूली बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक रूट चार्ट एवं अन्य तैयारियां समय पूर्व पूर्ण करने का आदेश दिया गया। स्पोर्ट्स एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम:  जिला स्पोर्ट्स पदाधिकारी को जिले में विभिन्न स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी को पेंटिंग (चित्रकला) एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं के आयोजन हेतु निर्देशित किया गया, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सके। प्रखंड स्तरीय गतिविधियाँ: जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बिहार दिवस के कार्यक्रम केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहें। सभी प्रखंडों में स्पोर्ट्स, चित्रकला एवं अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। नीली रोशनी (Illumination): उत्सव के उल्लास को प्रदर्शित करने हेतु सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने-अपने कार्यालय भवनों को नीली रोशनी (Blue Lights) से सुसज्जित करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में श्री सूर्य प्रताप सिंह, उप विकास आयुक्त (DDC), समस्तीपुर,श्री ब्रजेश कुमार, अपर समाहर्ता (ADM), समस्तीपुर,श्री राजेश सिंह, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन),श्री दिलीप कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), समस्तीपुर उपस्थित रहे. बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि बिहार दिवस 2026 के अवसर पर जिले की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन हो सके।

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50% आरक्षण से लेकर शराबबंदी तक: सीएम नीतीश के 10 क्रांतिकारी फैसले, जिसने बदली बिहार की सूरत

Nitish Kumar: बिहार की नेतृत्व में विकास और सामाजिक बदलाव की चर्चा जब भी होती है, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई फैसलों का जिक्र जरूर होता है. खासकर स्त्रीओं के सशक्तीकरण और समाज के कमजोर तबकों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी प्रशासन ने कई अहम योजनाएं लागू कीं. पंचायतों में स्त्रीओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने से लेकर शराबबंदी और रोजगार योजनाओं तक, इन फैसलों ने बिहार के सामाजिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने का दावा किया जाता है. पंचायतों में 50% आरक्षण से बढ़ी स्त्रीओं की भागीदारी नीतीश कुमार प्रशासन ने देश में पहली बार बिहार में स्त्रीओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया. इस निर्णय के बाद गांव से लेकर शहर तक स्थानीय नेतृत्व में स्त्रीओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी. आज स्थिति यह है कि बिहार में स्थानीय निकायों में स्त्रीओं की भागीदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. बिहार के इस मॉडल को बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों ने भी अपनाया. पुलिस और प्रशासनी नौकरियों में भी बढ़ा स्त्रीओं का प्रतिनिधित्व स्त्रीओं को सुरक्षा व्यवस्था में भी बराबर अवसर देने के लिए वर्ष 2013 में बिहार पुलिस में 35 प्रतिशत स्त्री आरक्षण लागू किया गया. इसका असर यह हुआ कि आज राज्य के कुल पुलिस बल में लगभग 30 प्रतिशत स्त्रीएं हैं और स्त्री पुलिसकर्मियों की संख्या 31 हजार से अधिक हो चुकी है. इसके अलावा 2016 से सभी प्रशासनी सेवाओं में भी स्त्रीओं के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया. इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में भी लड़कियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है. ‘जीविका दीदी’ बनीं ग्रामीण वित्तीय स्थिति की ताकत ग्रामीण स्त्रीओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2006 में ‘जीविका’ परियोजना की शुरुआत की गई. इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के जरिए स्त्रीओं को रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया. आज राज्य में 1 करोड़ 40 लाख से अधिक स्त्रीएं ‘जीविका दीदी’ के रूप में काम कर रही हैं और 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं. इस मॉडल की सफलता को देखते हुए केंद्र प्रशासन ने भी देशभर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन लागू किया. मुख्यमंत्री स्त्री रोजगार योजना से आर्थिक मदद स्त्रीओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री स्त्री रोजगार योजना शुरू की गई. इसके तहत अब तक करीब 1.81 करोड़ स्त्रीओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि भेजी जा चुकी है. इसके अलावा जो स्त्रीएं अपना रोजगार बढ़ाना चाहती हैं, उन्हें दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की भी व्यवस्था की गई है. कन्या उत्थान योजना से बदली लड़कियों की स्थिति स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए नीतीश प्रशासन ने कन्या उत्थान योजना शुरू की. इस योजना का असर यह हुआ कि राज्य में जन्म पंजीकरण की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार जन्म पंजीकरण में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं जननी बाल सुरक्षा योजना के कारण अस्पतालों में प्रसव कराने वाली स्त्रीओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी. जहां 2006-07 में केवल 4 प्रतिशत स्त्रीएं ही अस्पताल में प्रसव के लिए जाती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो चुका है. शराबबंदी को बताया गया सामाजिक सुधार का कदम अप्रैल 2016 में बिहार प्रशासन ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया. इसके बाद 2 अक्टूबर 2016 को नया मद्य निषेध कानून लागू किया गया. प्रशासन का दावा है कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आई और परिवारों में आर्थिक बचत बढ़ी है. खासकर ग्रामीण इलाकों में स्त्रीओं ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया. कानून व्यवस्था सुधार से बदली बिहार की छवि 2005 के बाद बिहार में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग की नीति अपनाई गई. इसके चलते कई कुख्यात अपराधियों को जेल भेजा गया. प्रशासन का दावा है कि इन कदमों से राज्य की छवि में बड़ा बदलाव आया और लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ा. बाल विवाह और दहेज के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान साल 2017 में बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया गया. इस अभियान में करीब ढाई करोड़ लोगों ने इन सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की शपथ ली. स्त्री हेल्पलाइन की स्थापना भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जाता है. राज्य के सभी 38 जिलों में स्थापित हेल्पलाइन घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न से पीड़ित स्त्रीओं को कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता देती है. शिक्षा और कौशल विकास पर भी जोर स्त्रीओं की साक्षरता बढ़ाने के लिए 2009-10 में अक्षर अंचल योजना शुरू की गई, जिसके जरिए 67 लाख से अधिक स्त्रीओं को साक्षर बनाया गया. बाद में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस अभियान से जोड़ा गया. इसके अलावा ‘हुनर’ और ‘औजार’ कार्यक्रमों के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और टूल किट उपलब्ध कराई गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें. 20 साल में कई योजनाएं की गईं लागू पिछले दो दशकों में बिहार में स्त्रीओं के सशक्तीकरण, सामाजिक सुधार और कमजोर वर्गों के उत्थान को लेकर कई योजनाएं लागू की गईं. पंचायतों में आरक्षण से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक, इन पहलों ने राज्य के सामाजिक ढांचे को प्रभावित किया है. प्रशासन का दावा है कि इन योजनाओं ने बिहार की स्त्रीओं को न सिर्फ अधिकार दिए, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से भी मजबूत बनाया. Also Read: पटना को मिलेगा दूसरा ‘ताज’, बांकीपुर बस स्टैंड की जमीन पर बनेगा 500 कमरों का लग्जरी फाइव स्टार होटल The post 50% आरक्षण से लेकर शराबबंदी तक: सीएम नीतीश के 10 क्रांतिकारी फैसले, जिसने बदली बिहार की सूरत appeared first on Naya Vichar.

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दुनिया की ‘तेल वाली नस’ पर संकट, होर्मुज का रास्ता बंद, क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल ?

Hormuz Strait Impact on India: अगर हम कहें कि दुनिया के पहिए जिस तेल से चलते हैं, उसका 20% हिस्सा एक संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वह रास्ता कितना जरूरी है. इसी रास्ते का नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, यहां सन्नाटा पसरा है. जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) की 6 मार्च की रिपोर्ट डराने वाली है. पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से जहां दर्जनों विशाल तेल टैंकर गुजरते थे, वहां से एक भी तेल टैंकर नहीं निकला. सिर्फ दो जहाज ही वहां से गुजर पाए. जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर की रिपोर्ट दुनिया में तेल की सप्लाइ का बेहद अहम रूट क्यों डरे हुए हैं जहाज चलाने वाले ? मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाज रोक दिए हैं. समंदर के इस हिस्से में ‘क्रिटिकल’ सिक्योरिटी अलर्ट जारी है. इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस पूरे इलाके को युद्ध के मैदान में बदल दिया है, जिससे अरबों डॉलर का कारोबार दांव पर लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल साफ महसूस किया जा रहा है. मिडिल ईस्ट के तनाव का असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहाँ ब्रेंट क्रूड फिलहाल 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है. बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसा महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता इसी तरह बंद रहता है, तो सप्लाई चेन टूटने की वजह से तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर सकती हैं. कच्चे तेल में होने वाली इस भारी बढ़ोतरी का सीधा और कड़वा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि इसके कारण पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में तगड़ा इजाफा होना लगभग तय है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी: ‘न्यू नॉर्मल’ खतरनाक हिंदुस्तान के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि “यह इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए बेहद जरूरी है. सप्लाई में रुकावट का सीधा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ता है. जिस तरह से समुद्र, हवा और अब अंतरिक्ष तक युद्ध की अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, वह ‘न्यू नॉर्मल’ बनता जा रहा है, जो दुनिया के लिए बहुत खतरनाक है.” हिंदुस्तान पर क्या होगा असर ? हिंदुस्तान अपनी जरूरत का अधिकांश तेल और गैस इसी रास्ते से मंगाता है. अगर होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो माल ढुलाई (Shipping cost) महंगी हो जाएगी. चीजों के दाम बढ़ सकते हैं. सप्लाई में देरी हो सकती है. फिलहाल प्रशासन और तेल कंपनियां बैकअप प्लान पर काम कर रही हैं, लेकिन ग्लोबल मार्केट की यह उथल-पुथल आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकती है. Also Read: नवंबर में बनी प्लानिंग, 6 महीने बाद खामेनेई को मारना है; तो फरवरी में क्यों हुआ अटैक? इजरायली रक्षामंत्री का खुलासा The post दुनिया की ‘तेल वाली नस’ पर संकट, होर्मुज का रास्ता बंद, क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल ? appeared first on Naya Vichar.

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यूपीएससी CSE फाइनल परीक्षा का रिजल्ट जारी, यहां देखें पहले 10 टॉपर के नाम

UPSC CSE Final Result 2025 Out: यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. इस बार कुल 958 कैंडिडेट्स हुए सेलेक्ट. राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने AIR रैंक-1 के साथ किया टॉप. ऐसे कैंडिडेट्स जो इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. UPSC की ऑफिशियल वेबसाइट का पता है, upsc.gov.in देखें UPSC के पहले 10 टॉपर के नाम अनुज अग्निहोत्री राजेश्वरी सुवे एम आकांक्षा धुल राघव झुनझुनवाला ईशान भटनागर जिन्निया ऑरोरा ए आर राजाह मोहाईदीन पक्षाल सेक्रेट्री आस्था जैन उज्ज्वल प्रियंक CSE_2025_FR_Eng_06032026Download कैसे चेक करें रिजल्ट? ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं. होमपेज पर रिजल्ट पर क्लिक करें. UPSC CSE 2025 Final Result लिंक चेक करें. पीडीएफ फाइल खुलने पर अपना नाम खोजें. फिर इसे सेव कर लें. समाचार अपडेट हो रही है… यह भी पढ़ें- रिटेन में Topper शक्ति दुबे से आगे आदित्य श्रीवास्तव, IPS से बने IAS The post यूपीएससी CSE फाइनल परीक्षा का रिजल्ट जारी, यहां देखें पहले 10 टॉपर के नाम appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में SIR ने फंसाया पेंच, 7 मई तक नहीं बनी नयी सरकार तो लगेगा राष्ट्रपति शासन

मुख्य बातें भाजपा नेता करते रहे हैं मांग दस्तावेजों के सत्यापन में लगेगा वक्त कार्यवाहक प्रशासन की उम्मीद कम Bengal News: कोलकाता: बंगाल में SIR का काम जिस गति से हो रहा है, उससे लगता है कि चुनाव की तारीख घोषित होने में अभी और वक्त लगेगा. हाईकोर्ट की निगरानी में हो रहे इस काम को पूरा होने में अभी और वक्त लगाने की बात कही जा रही है. बिना यह काम पूरा किये बंगाल में चुनाव मुश्किल है. ऐसे में समय पर नयी प्रशासन का गठन हो पायेगा या नहीं, इसको लेकर संशय बरकरार है. पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है. यानी सब कुछ दो महीने के भीतर करना होगा. ऐसे में राज्यपाल के इस्तीफे की समाचार से राष्ट्रपति शासन की अटकलें और तेज हो गई हैं. भाजपा नेता करते रहे हैं मांग सीवी आनंद बोस ने गुरुवार रात अचानक इस्तीफा दे दिया. सूत्रों के अनुसार, उन्हें अचानक दिल्ली बुलाया गया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पोस्ट से पता चला है कि आरएन रवि नए राज्यपाल होंगे. तब से अटकलें तेज हो गई हैं. ठीक एक साल पहले, जब मुर्शिदाबाद में भीषण अशांति थी, तब विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति शासन के तहत बंगाल में चुनाव कराने की मांग की थी. उनका दावा था कि अकेले चुनाव आयोग के लिए बंगाल में चुनाव कराना संभव नहीं होगा. राष्ट्रपति शासन लागू होने पर ही सभी लोग मतदान कर सकेंगे. अब, एसआईआर की स्थिति को देखते हुए, यह अटकलें और भी बढ़ गई हैं. दस्तावेजों के सत्यापन में लगेगा वक्त अंतिम सूची जारी होने के बावजूद, 60 लाख नामों के सत्यापन की प्रक्रिया अभी भी लंबित है. इनमें से केवल 6,15,000 मतदाताओं की जानकारी का ही सत्यापन हो पाया है. अनुमान के अनुसार, अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद भी शेष 54 लाख दस्तावेजों पर विचार करने में लंबा समय लगेगा. अब सवाल यह उठता है कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद मतदान कराने में कितना समय लगेगा. यह नया संकट एसआईआर प्रक्रिया के साथ ही उत्पन्न हुआ है. इस प्रशासन का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है. ऐसी आशंका है कि इस स्थिति में संवैधानिक संकट उत्पन्न हो सकता है. उस स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. बंगाल की समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें कार्यवाहक प्रशासन की उम्मीद कम राज्यपाल को बदलने की अटकलें और तेज हो गई हैं, क्योंकि इस स्थिति में ऐसे राज्यपाल की आवश्यकता है, जिनके पास प्रशासनिक कौशल, संवैधानिक अनुभव और नेतृत्वक अनुभव हो. सीवी आनंद बोस शायद इन योग्यताओं में पीछे रह गए हैं. तृणमूल नेता जयप्रकाश मजूमदार कहते हैं- ऐसा स्वाभाविक रूप से नहीं होना चाहिए. यह स्थिति आयोग की वजह से उत्पन्न हुई है. आयोग को एक तटस्थ निकाय कहा जाता है. नियमों के अनुसार, कार्यवाहक प्रशासन कम से कम 6 महीने तक सत्ता में रह सकती है. तृणमूल नेता का तर्क नियम के आधार पर जो रहे, लेकिन वास्तविकता यही है कि अगर 7 मई तक नयी प्रशासन का गठन नहीं होता है तो बंगाल में राष्ट्रपति शासन तय है. Also Read: तृणमूल उम्मीदवार राजीव कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा पर्चा, पूर्व नौकरशाह का रहा है नेतृत्व से गहरा रिश्ता The post बंगाल में SIR ने फंसाया पेंच, 7 मई तक नहीं बनी नयी प्रशासन तो लगेगा राष्ट्रपति शासन appeared first on Naya Vichar.

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रोजे में दिनभर नहीं लगेगी प्यास और न होगी कमजोरी, सहरी में भूलकर भी न खाएं ये 3 चीजें

Ramadan Health Tips: रमजान के पाक महीने में रोजा रखना इबादत का काम है, लेकिन चिलचिलाती धूप और लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से शरीर में कमजोरी और पानी की कमी हो सकती है. अक्सर सहरी में गलत चीजों का चुनाव हमें दिनभर परेशान करता है. अगर आप चाहते हैं कि आपको पूरे दिन प्यास न सताए और आप एनर्जेटिक महसूस करें, तो अपनी सहरी की थाली पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. आज हम आपको उन 3 चीजों के बारे में बताएंगे जिन्हें सहरी में खाने से प्यास ज्यादा लगती है. इन आसान टिप्स को अपनाकर आप अपने रोजे को सेहतमंद और आसान बना सकते हैं. नमक और चटपटा खाना सहरी के समय बहुत ज्यादा नमक वाली चीजें या चटपटा खाना बिल्कुल न खाएं. नमक शरीर के अंदर मौजूद पानी को जल्दी सोख लेता है. इसकी वजह से आपको दिनभर बार-बार गला सूखने और प्यास लगने की समस्या हो सकती है. सहरी में हमेशा हल्का और कम मसाले वाला सादा खाना ही खाएं. चाय और कॉफी का सेवन बहुत से लोगों को सहरी के बाद चाय या कॉफी पीने की आदत होती है. चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन शरीर से पानी को बाहर निकालने का काम करता है. इससे आपके शरीर में डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है. प्यास से बचने के लिए चाय की जगह ताजे फलों का जूस या नारियल पानी पीना बेहतर है. ज्यादा चीनी और मीठा खाना सहरी में बहुत ज्यादा मिठाई या चीनी वाली चीजें खाने से शरीर में एनर्जी लेवल अचानक बढ़ जाता है. लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह लेवल तेजी से गिरता है जिससे आपको बहुत कमजोरी महसूस होने लगती है. मीठा खाने से भूख भी जल्दी लगती है इसलिए इसकी जगह खजूर खाना सबसे अच्छा है. रोजे में प्यास और कमजोरी से बचने के उपाय सहरी में दही जरूर खाएं: दही पेट को ठंडा रखता है और इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन में मदद करते हैं. सहरी में एक कटोरी दही खाने से दिनभर प्यास कम लगती है. पानी धीरे-धीरे पिएं: इफ्तार से लेकर सहरी के बीच एक साथ बहुत सारा पानी पीने की गलती न करें. थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर पानी पीते रहें ताकि शरीर में नमी बनी रहे. फाइबर वाली चीजें शामिल करें: अपने खाने में दलिया, ओट्स या साबुत अनाज जैसी चीजें शामिल करें. ये चीजें धीरे-धीरे पचती हैं और आपको लंबे समय तक भूख का अहसास नहीं होने देतीं. ये भी पढ़ें: Best Iftar Recipes 2026: तला-भुना खाकर हो गए हैं परेशान? इफ्तार में बनाएं ये 5 झटपट और टेस्टी प्रोटीन से भरपूर डिशेज ये भी पढ़ें: Energy Foods for Sehri: सहरी में शामिल करें ये 2 सुपरफूड्स, 14 घंटे के रोजे में भी शरीर में बनी रहेगी घोड़े जैसी ताकत ये भी पढ़ें: Hydration Tips for Ramadan: इफ्तार से सहरी तक पानी पीने का सही तरीका जान लें, शरीर में कभी नहीं होगी डिहाइड्रेशन की समस्या ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: इफ्तार और सेहरी के लिए 5 हेल्दी डाइट टिप्स, दिनभर रहेंगे फ्रेश Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post रोजे में दिनभर नहीं लगेगी प्यास और न होगी कमजोरी, सहरी में भूलकर भी न खाएं ये 3 चीजें appeared first on Naya Vichar.

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धुरंधर 2 की रिलीज डेट आई सामने, रणवीर सिंह ने खुद किया अनाउंस

Dhurandhar 2 Trailer: रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ की रिलीज डेट नजदीक आ रही है. फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में आने वाली है, लेकिन उससे पहले दर्शकों की नजर इसके ट्रेलर पर टिकी हुई है. कई दिनों से सोशल मीडिया पर ट्रेलर रिलीज को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही थीं. काफी लोगों को उम्मीद थी कि ट्रेलर होली से पहले रिलीज कर दिया जाएगा. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि 6 मार्च को ट्रेलर सामने आ सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और फैंस को एक दिन और इंतजार करना पड़ेगा. रणवीर सिंह ने किया अनाउंस View this post on Instagram A post shared by Ranveer Singh (@ranveersingh) दरअसल, मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर जारी करते हुए ट्रेलर की आधिकारिक तारीख का ऐलान कर दिया है. पोस्टर के मुताबिक ‘धुरंधर: द रिवेंज’ का ट्रेलर शनिवार यानी 7 मार्च को सुबह ठीक 11 बजकर 1 मिनट पर रिलीज किया जाएगा. रिलीज किये गये पोस्टर में रणवीर सिंह का दमदार अंदाज देखने को मिल रहा है. वह हाथ में गन लिए बेहद इंटेंस लुक में नजर आ रहे हैं. फिल्म में उनका किरदार ‘हमजा’ काफी दमदार बताया जा रहा है. इस पोस्टर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए रणवीर सिंह ने कैप्शन में लिखा, “तैयार हो जाओ.” टल गयी टॉक्सिक की रिलीज डेट पोस्टर सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है. लोग अब ट्रेलर देखने का इंतजार कर रहे हैं और फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इस बीच फिल्म के बॉक्स ऑफिस क्लैश को लेकर भी एक बड़ी समाचार सामने आई है. पहले माना जा रहा था कि यश की फिल्म टॉक्सिक और ‘धुरंधर 2’ एक ही दिन रिलीज होंगी. लेकिन अब यह क्लैश टल गया है. 4 जून को सिनेमाघरों में आएगी टॉक्सिक यश ने हाल ही में घोषणा की कि उनकी फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई है. अब यह फिल्म 19 मार्च की जगह 4 जून को सिनेमाघरों में आएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से रिलीज डेट बदली गई है. बताया जा रहा है कि डायरेक्टर आदित्य धर की ‘धुरंधर 2’ पहले पार्ट से कहीं ज्यादा बड़े पैमाने पर बनाई गई है. फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और आर माधवन भी अहम किरदार निभाते नजर आएंगे. यह भी पढे़ं: ‘तबाही’ लेकर आया यश का टॉक्सिक, 19 मार्च को सिनेमाघरों में मचाएगा धमाल The post धुरंधर 2 की रिलीज डेट आई सामने, रणवीर सिंह ने खुद किया अनाउंस appeared first on Naya Vichar.

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फेक बाबा… भारत की जीत के बाद सिद्धू का मोहम्मद आमिर पर फूटा गुस्सा

Highlights मुंबई में हिंदुस्तान ने दिखाया अपना दम  सिद्धू ने आमिर को दिया करारा जवाब  आमिर की भविष्यवाणी निकली झूठी  Navjot Singh Sidhu Slams Amir: हिंदुस्तानीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 (T20 World Cup 2026) के फाइनल में अपनी शानदार जगह बना ली है. गुरुवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में रोमांचक सेमीफाइनल मैच स्पोर्ट्सा गया. इस मैच में हिंदुस्तानीय टीम ने इंग्लैंड को 7 रन से हरा दिया. टीम इंडिया की इस जीत के बाद पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर (Mohammad Amir) की जमकर क्लास लगाई है. सिद्धू ने आमिर के पुराने बयानों को लेकर उन पर सीधा निशाना साधा है और उन्हें ‘फेक बाबा’ तक कह दिया. मुंबई में हिंदुस्तान ने दिखाया अपना दम  वानखेड़े स्टेडियम में हिंदुस्तान और इंग्लैंड की टीमें आमने-सामने थीं. दोनों टीमों ने जीत के लिए अपना पूरा जोर लगाया लेकिन बाजी हिंदुस्तान के हाथ लगी. हिंदुस्तानीय टीम ने इंग्लैंड को 7 रन से हराया और फाइनल में एंट्री ली. पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया का प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा है और इस मैच में भी खिलाड़ियों ने उसी लय को बरकरार रखा. सिद्धू ने आमिर को दिया करारा जवाब  हिंदुस्तान के फाइनल में पहुंचने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने मोहम्मद आमिर की कड़ी आलोचना की. सिद्धू ने सीधे शब्दों में आमिर को ‘फेक बाबा’ कहा. सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि कुछ लोगों को बिना सिर-पैर की भविष्यवाणी करने की आदत पड़ गई है. अगर उनकी कही बात सच निकल जाए तो वे उसे अपनी बहुत बड़ी कामयाबी बताते हैं. लेकिन जब वही बात गलत साबित हो जाए, तो उसे सिर्फ एक अंदाजा बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं.  सिद्धू का साफ मानना है कि ऐसे लोग खुद को किसी बहुत बड़े और ज्ञानी बाबा की तरह दुनिया के सामने पेश करते हैं, जबकि उनकी बातों का असल हकीकत से कोई लेना-देना नहीं होता है. View this post on Instagram A post shared by Navjot Singh Sidhu (@navjotsinghsidhu) आमिर की भविष्यवाणी निकली झूठी  नवजोत सिंह सिद्धू का गुस्सा इसलिए ज्यादा फूटा क्योंकि मोहम्मद आमिर ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही कई दावे किए थे. आमिर ने पहले ही कह दिया था कि हिंदुस्तानीय टीम इस बार सेमीफाइनल के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाएगी. आमिर ने भविष्यवाणी की थी कि वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका आगे जाएंगी. लेकिन टूर्नामेंट के नतीजे उनके दावों के बिल्कुल उलट रहे.  हिंदुस्तान टूर्नामेंट में आगे बढ़ा, जबकि दक्षिण अफ्रीका की टीम सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई. वेस्टइंडीज भी पहले ही रेस से बाहर हो गई. सेमीफाइनल मैच से पहले भी आमिर ने दावा किया था कि इंग्लैंड यह मैच जीतेगा, लेकिन उनकी यह बात भी पूरी तरह से गलत साबित हुई. ये भी पढ़ें- मैच में हार्दिक पर क्यों गुस्सा हुए अगस्त्य? वजह जान हैरान रह जाएंगे आप, Video Video: हवा में उड़कर अक्षर का मैजिक, चीते जैसी फुर्ती देख धोनी रिएक्शन हुआ वायरल Viral Video: माही भाई…धोनी को देख हार्दिक से नहीं हुआ कंट्रोल मैदान में चिल्लाए The post फेक बाबा… हिंदुस्तान की जीत के बाद सिद्धू का मोहम्मद आमिर पर फूटा गुस्सा appeared first on Naya Vichar.

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कुछ बाइक्स के ब्रेक के पास दिखने वाला छोटा बॉक्स क्या होता है? जानिए इसका असली काम

अगर आप किसी भी एडवांस्ड मोटरसाइकिल के हैंडलबार को ध्यान से देखें, तो फ्रंट ब्रेक लीवर के ठीक ऊपर एक छोटा-सा चौकोर डिब्बा लगा हुआ दिखाई देगा. कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर यह छोटा बॉक्स क्या होता है और इसे वहां क्यों लगाया जाता है? दरअसल, यह कोई नॉर्मल डिब्बा नहीं बल्कि बाइक के ब्रेक सिस्टम का एक बेहद अहम हिस्सा होता है. आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं. क्या कहते हैं उस छोटा चौकोर बॉक्स को? फ्रंट ब्रेक लीवर के पास लगा यह छोटा चौकोर बॉक्स ब्रेक फ्लूइड रिजर्वायर कहलाता है. इसी में हाइड्रोलिक ब्रेक फ्लूइड भरा रहता है. यह बाइक के ब्रेक को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत गाड़ी को रोकने में अहम भूमिका निभाता है. कैसे काम करता है ब्रेक फ्लूइड रिजर्वायर? जब कोई राइडर बाइक का फ्रंट ब्रेक लीवर दबाता है, तो असल में अंदर एक दिलचस्प प्रोसेस शुरू हो जाती है. लीवर दबाते ही ब्रेक फ्लूइड के जरिए हाइड्रोलिक प्रेशर बनता है, जो इस ताकत को ब्रेक कैलिपर तक पहुंचाता है. इसके बाद ब्रेक पैड्स डिस्क रोटर को मजबूती से पकड़ लेते हैं. इससे बाइक की स्पीड धीरे-धीरे कम होती है या वह पूरी तरह रुक जाती है. अगर यह रिजर्वायर और इसके अंदर मौजूद ब्रेक फ्लूइड न हो, तो हाइड्रोलिक ब्रेकिंग सिस्टम सही तरीके से काम ही नहीं कर पाएगा. यानी सेफ ब्रेकिंग के लिए यह छोटा-सा हिस्सा बेहद जरूरी होता है. ब्रेक फ्लूइड रिजर्वायर हैंडलबार के पास ही क्यों लगाया जाता है?  दरअसल, इसकी एक खास वजह होती है. असल में यह रिजर्वायर सीधे मास्टर सिलेंडर से जुड़ा होता है, जो ब्रेक लीवर असेंबली के अंदर लगा रहता है. हैंडलबार के पास होने से जब भी राइडर ब्रेक दबाता है, तो ब्रेक फ्लूड तुरंत और आसानी से ब्रेक लाइनों के जरिए आगे बढ़ता है. इससे ब्रेक सही तरीके से काम करते हैं. साथ ही, यह जगह ऐसी होती है जहां राइडर या मैकेनिक के लिए ब्रेक फ्लूड को चेक करना और मेंटेनेंस करना भी आसान हो जाता है. कई बाइक में इस रिजर्वायर पर एक छोटा-सा ट्रांसपेरेंट विंडो या लेवल मार्क भी होता है. इससे बिना ढक्कन खोले ही फ्लूड का लेवल देखा जा सकता है. ब्रेक फ्लूइड का सही लेवल बनाए रखना क्यों जरूरी?  दरअसल, सेफ ब्रेकिंग के लिए इसका सही लेवल में होना बेहद जरूरी है. अगर ब्रेक फ्लूइड कम हो जाए, तो ब्रेक की पकड़ कमजोर पड़ सकती है और खतरे वाली स्थिति में ब्रेक ठीक से काम भी नहीं कर सकते. समय के साथ ब्रेक पैड के घिसने या सिस्टम में हल्की-फुल्की लीकेज की वजह से ब्रेक फ्लूइड धीरे-धीरे कम हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ब्रेक फ्लूइड का लेवल समय-समय पर जरूर चेक करते रहें और रेगुलर सर्विस के दौरान इसे बदलवाना भी न भूलें. यह भी पढ़ें: ट्रक के टायरों के पास क्यों लटकाई जाती हैं रबर की पट्टियां? कई लोग नहीं जानते वजह The post कुछ बाइक्स के ब्रेक के पास दिखने वाला छोटा बॉक्स क्या होता है? जानिए इसका असली काम appeared first on Naya Vichar.

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नवंबर में बनी प्लानिंग, 6 महीने बाद खामेनेई को मारना है; तो फरवरी में क्यों हुआ अटैक? इजरायली रक्षामंत्री का खुलासा

Ali Khamenei Death: इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के ऊपर एयरस्ट्राइक की. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. इजरायल ने यह हमला इतनी सटीकता के साथ किया कि किसी को भनक नहीं लगी. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने गुरुवार को खुलासा किया कि खामेनेई को मारने का फैसला पिछले साल नवंबर में ही कर लिया था. इस ऑपरेशन को लगभग छह महीने बाद अंजाम देने की योजना बनाई गई थी. गुरुवार को काट्ज़ ने बताया कि यह रणनीतिक लक्ष्य पिछले साल के अंत में हुई एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक के दौरान तय किया गया था. उन्होंने कहा, ‘नवंबर में ही प्रधानमंत्री के साथ एक बेहद सीमित बैठक हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खामेनेई को खत्म करने का लक्ष्य तय किया था.’ काट्ज़ के मुताबिक शुरुआत में इस ऑपरेशन को लगभग छह महीने बाद, यानी 2026 के मध्य तक अंजाम देने की योजना थी. लेकिन बाद में ईरान में आंतरिक अशांति बढ़ने के बाद इस योजना के समय में बदलाव कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने अपनी इस रणनीति की जानकारी वॉशिंगटन को भी दी और जनवरी के आसपास ऑपरेशन को आगे बढ़ाने का फैसला किया. काट्ज़ ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि आशंका थी कि तेहरान का दबाव झेल रहा धार्मिक नेतृत्व मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर हमले शुरू कर सकता है.  क्या है ईरान पर हमले का कारण? खामेनेई की हत्या अमेरिका-इजरायल के साझा हवाई अभियान में की गई. इस कार्रवाई को इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया. हाल कि दिनों में यह किसी संप्रभु देश के सर्वोच्च नेता को हवाई हमले में मार गिराने की पहली घटना मानी जा रही है. इजरायल का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु परियोजना से पैदा हो रहे ‘अस्तित्वगत खतरे’ को खत्म करना है. इसके साथ ही वह ईरान में ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन का भी समर्थन करता है. हालांकि काफी हमले झेलने के बाद भी ईरान के शासकों ने अब तक सत्ता छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है. ये भी पढ़ें:- जंग में फंसे ईरान ने अजरबैजान पर हमला क्यों किया? एक और देश से मोल ली दुश्मनी; अटैक का खतरा युद्ध के 7 दिन बीते, अब क्या हाल हैं? इस संयुक्त हवाई अभियान को अब एक सप्ताह हो चुके हैं. शुरुआती हमलों में ईरान के शीर्ष नेताओं की मौत हो गई, जिसके बाद क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई. इसके बाद ईरान ने इजरायल, खाड़ी देशों और इराक में हमले किए, जबकि इजरायल ने ईरान और लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह पर भी हमले किए. इस शुरुआती हमले के बाद इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने ईरान पर अपने हवाई हमलों को और तेज कर दिया है. गुरुवार को आईडीएफ ने बताया कि उसने तेहरान में हमलों की 12वीं लहर पूरी कर ली है, जिसमें ईरान की सुरक्षा और सैन्य ढांचे से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया. ये भी पढ़ें:- ईरान युद्ध में US और 5 देश यूक्रेन की मदद चाहते हैं, जेलेंस्की ने इस शर्त पर दी रजामंदी इन हमलों में अलबोर्ज प्रांत में स्थित एक विशेष यूनिट के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया, जो आंतरिक सुरक्षा बलों का संचालन करती है. इजरायली एयरफोर्स ने बताया कि इसके अलावा आईआरजीसी और बासिज फोर्स के ठिकानों पर भी हमले किए गए. आईएएफ ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा बलों के एक केंद्रीय कमांड सेंटर को भी निशाना बनाया. इसके अलावा हथियारों के भंडारण और निर्माण से जुड़े दर्जनों अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए. The post नवंबर में बनी प्लानिंग, 6 महीने बाद खामेनेई को मारना है; तो फरवरी में क्यों हुआ अटैक? इजरायली रक्षामंत्री का खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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