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Author name: Vinod Jha

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कुछ बाइक्स के ब्रेक के पास दिखने वाला छोटा बॉक्स क्या होता है? जानिए इसका असली काम

अगर आप किसी भी एडवांस्ड मोटरसाइकिल के हैंडलबार को ध्यान से देखें, तो फ्रंट ब्रेक लीवर के ठीक ऊपर एक छोटा-सा चौकोर डिब्बा लगा हुआ दिखाई देगा. कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर यह छोटा बॉक्स क्या होता है और इसे वहां क्यों लगाया जाता है? दरअसल, यह कोई नॉर्मल डिब्बा नहीं बल्कि बाइक के ब्रेक सिस्टम का एक बेहद अहम हिस्सा होता है. आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं. क्या कहते हैं उस छोटा चौकोर बॉक्स को? फ्रंट ब्रेक लीवर के पास लगा यह छोटा चौकोर बॉक्स ब्रेक फ्लूइड रिजर्वायर कहलाता है. इसी में हाइड्रोलिक ब्रेक फ्लूइड भरा रहता है. यह बाइक के ब्रेक को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत गाड़ी को रोकने में अहम भूमिका निभाता है. कैसे काम करता है ब्रेक फ्लूइड रिजर्वायर? जब कोई राइडर बाइक का फ्रंट ब्रेक लीवर दबाता है, तो असल में अंदर एक दिलचस्प प्रोसेस शुरू हो जाती है. लीवर दबाते ही ब्रेक फ्लूइड के जरिए हाइड्रोलिक प्रेशर बनता है, जो इस ताकत को ब्रेक कैलिपर तक पहुंचाता है. इसके बाद ब्रेक पैड्स डिस्क रोटर को मजबूती से पकड़ लेते हैं. इससे बाइक की स्पीड धीरे-धीरे कम होती है या वह पूरी तरह रुक जाती है. अगर यह रिजर्वायर और इसके अंदर मौजूद ब्रेक फ्लूइड न हो, तो हाइड्रोलिक ब्रेकिंग सिस्टम सही तरीके से काम ही नहीं कर पाएगा. यानी सेफ ब्रेकिंग के लिए यह छोटा-सा हिस्सा बेहद जरूरी होता है. ब्रेक फ्लूइड रिजर्वायर हैंडलबार के पास ही क्यों लगाया जाता है?  दरअसल, इसकी एक खास वजह होती है. असल में यह रिजर्वायर सीधे मास्टर सिलेंडर से जुड़ा होता है, जो ब्रेक लीवर असेंबली के अंदर लगा रहता है. हैंडलबार के पास होने से जब भी राइडर ब्रेक दबाता है, तो ब्रेक फ्लूड तुरंत और आसानी से ब्रेक लाइनों के जरिए आगे बढ़ता है. इससे ब्रेक सही तरीके से काम करते हैं. साथ ही, यह जगह ऐसी होती है जहां राइडर या मैकेनिक के लिए ब्रेक फ्लूड को चेक करना और मेंटेनेंस करना भी आसान हो जाता है. कई बाइक में इस रिजर्वायर पर एक छोटा-सा ट्रांसपेरेंट विंडो या लेवल मार्क भी होता है. इससे बिना ढक्कन खोले ही फ्लूड का लेवल देखा जा सकता है. ब्रेक फ्लूइड का सही लेवल बनाए रखना क्यों जरूरी?  दरअसल, सेफ ब्रेकिंग के लिए इसका सही लेवल में होना बेहद जरूरी है. अगर ब्रेक फ्लूइड कम हो जाए, तो ब्रेक की पकड़ कमजोर पड़ सकती है और खतरे वाली स्थिति में ब्रेक ठीक से काम भी नहीं कर सकते. समय के साथ ब्रेक पैड के घिसने या सिस्टम में हल्की-फुल्की लीकेज की वजह से ब्रेक फ्लूइड धीरे-धीरे कम हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ब्रेक फ्लूइड का लेवल समय-समय पर जरूर चेक करते रहें और रेगुलर सर्विस के दौरान इसे बदलवाना भी न भूलें. यह भी पढ़ें: ट्रक के टायरों के पास क्यों लटकाई जाती हैं रबर की पट्टियां? कई लोग नहीं जानते वजह The post कुछ बाइक्स के ब्रेक के पास दिखने वाला छोटा बॉक्स क्या होता है? जानिए इसका असली काम appeared first on Naya Vichar.

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नवंबर में बनी प्लानिंग, 6 महीने बाद खामेनेई को मारना है; तो फरवरी में क्यों हुआ अटैक? इजरायली रक्षामंत्री का खुलासा

Ali Khamenei Death: इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के ऊपर एयरस्ट्राइक की. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. इजरायल ने यह हमला इतनी सटीकता के साथ किया कि किसी को भनक नहीं लगी. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने गुरुवार को खुलासा किया कि खामेनेई को मारने का फैसला पिछले साल नवंबर में ही कर लिया था. इस ऑपरेशन को लगभग छह महीने बाद अंजाम देने की योजना बनाई गई थी. गुरुवार को काट्ज़ ने बताया कि यह रणनीतिक लक्ष्य पिछले साल के अंत में हुई एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक के दौरान तय किया गया था. उन्होंने कहा, ‘नवंबर में ही प्रधानमंत्री के साथ एक बेहद सीमित बैठक हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खामेनेई को खत्म करने का लक्ष्य तय किया था.’ काट्ज़ के मुताबिक शुरुआत में इस ऑपरेशन को लगभग छह महीने बाद, यानी 2026 के मध्य तक अंजाम देने की योजना थी. लेकिन बाद में ईरान में आंतरिक अशांति बढ़ने के बाद इस योजना के समय में बदलाव कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने अपनी इस रणनीति की जानकारी वॉशिंगटन को भी दी और जनवरी के आसपास ऑपरेशन को आगे बढ़ाने का फैसला किया. काट्ज़ ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि आशंका थी कि तेहरान का दबाव झेल रहा धार्मिक नेतृत्व मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर हमले शुरू कर सकता है.  क्या है ईरान पर हमले का कारण? खामेनेई की हत्या अमेरिका-इजरायल के साझा हवाई अभियान में की गई. इस कार्रवाई को इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया. हाल कि दिनों में यह किसी संप्रभु देश के सर्वोच्च नेता को हवाई हमले में मार गिराने की पहली घटना मानी जा रही है. इजरायल का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु परियोजना से पैदा हो रहे ‘अस्तित्वगत खतरे’ को खत्म करना है. इसके साथ ही वह ईरान में ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन का भी समर्थन करता है. हालांकि काफी हमले झेलने के बाद भी ईरान के शासकों ने अब तक सत्ता छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है. ये भी पढ़ें:- जंग में फंसे ईरान ने अजरबैजान पर हमला क्यों किया? एक और देश से मोल ली दुश्मनी; अटैक का खतरा युद्ध के 7 दिन बीते, अब क्या हाल हैं? इस संयुक्त हवाई अभियान को अब एक सप्ताह हो चुके हैं. शुरुआती हमलों में ईरान के शीर्ष नेताओं की मौत हो गई, जिसके बाद क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई. इसके बाद ईरान ने इजरायल, खाड़ी देशों और इराक में हमले किए, जबकि इजरायल ने ईरान और लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह पर भी हमले किए. इस शुरुआती हमले के बाद इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने ईरान पर अपने हवाई हमलों को और तेज कर दिया है. गुरुवार को आईडीएफ ने बताया कि उसने तेहरान में हमलों की 12वीं लहर पूरी कर ली है, जिसमें ईरान की सुरक्षा और सैन्य ढांचे से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया. ये भी पढ़ें:- ईरान युद्ध में US और 5 देश यूक्रेन की मदद चाहते हैं, जेलेंस्की ने इस शर्त पर दी रजामंदी इन हमलों में अलबोर्ज प्रांत में स्थित एक विशेष यूनिट के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया, जो आंतरिक सुरक्षा बलों का संचालन करती है. इजरायली एयरफोर्स ने बताया कि इसके अलावा आईआरजीसी और बासिज फोर्स के ठिकानों पर भी हमले किए गए. आईएएफ ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा बलों के एक केंद्रीय कमांड सेंटर को भी निशाना बनाया. इसके अलावा हथियारों के भंडारण और निर्माण से जुड़े दर्जनों अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए. The post नवंबर में बनी प्लानिंग, 6 महीने बाद खामेनेई को मारना है; तो फरवरी में क्यों हुआ अटैक? इजरायली रक्षामंत्री का खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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Crude Oil Crisis : रसोई गैस की किल्लत रोकने के लिए सरकार का फैसला, अब रिफाइनरियों को माननी होंगी ये शर्तें

Crude Oil Crisis: दुनियाभर में मची हलचल और खाड़ी देशों (West Asia) में बढ़ते तनाव को देखते हुए हिंदुस्तान प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गई है. आम आदमी की रसोई पर महंगाई या गैस की कमी की मार न पड़े, इसके लिए प्रशासन ने पेट्रोलियम रिफाइनरियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. सिर्फ रसोई गैस बनाने पर जोर इंडिया टूडे के एक रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने तेल रिफाइनरियों (Oil Refineries) को साफ कहा है कि वे अपनी क्षमता का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा LPG (Liquefied Petroleum Gas) बनाने में करें. आमतौर पर रिफाइनरी गैस के साथ-साथ अन्य केमिकल भी बनाती हैं, लेकिन अभी प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ घरेलू कुकिंग गैस को दी जाएगी. पेट्रोकेमिकल के लिए नो एंट्री LPG मुख्य रूप से प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) के मिश्रण से बनती है. कई बार कंपनियां इन गैसों का इस्तेमाल प्लास्टिक या अन्य पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए कर लेती हैं. प्रशासन ने अब इस पर रोक लगा दी है. आदेश के मुताबिक, अब इन गैसों को औद्योगिक इस्तेमाल के बजाय सीधे रसोई गैस बनाने के लिए सुरक्षित रखा जाएगा. प्रशासनी कंपनियों को ही बेचना होगा स्टॉक प्राइवेट और प्रशासनी, सभी रिफाइनरियों को यह आदेश दिया गया है कि वे अपना बनाया हुआ सारा LPG स्टॉक केवल तीन प्रशासनी कंपनियों को ही बेचें. Indian Oil (IOC) Bharat Petroleum (BPCL) Hindustan Petroleum (HPCL) इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह प्रशासन के नियंत्रण में रहे और कालाबाजारी या कमी की गुंजाइश न रहे. क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत ? विदेशी तनाव: मध्य-पूर्व (West Asia) में तनाव बढ़ रहा है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे समुद्री रास्ते, जहां से हिंदुस्तान का काफी तेल और गैस आता है, वहां युद्ध जैसे हालात होने पर सप्लाई रुकने का खतरा रहता है. आयात पर निर्भरता: हिंदुस्तान अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG दूसरे देशों से खरीदता है. अगर दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई बाधित होती है, तो हिंदुस्तान में किल्लत हो सकती है. बढ़ती मांग: उज्ज्वला योजना के बाद देश के करोड़ों नए घरों में सिलेंडर पहुंच चुके हैं. आज LPG कोई लग्जरी नहीं, बल्कि आम आदमी की जरूरत है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 तक हिंदुस्तान की पेट्रोलियम खपत 250 मिलियन टन तक पहुंच सकती है. Also Read: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना-चांदी सस्ता, जानें 6 मार्च के ताजा भाव The post Crude Oil Crisis : रसोई गैस की किल्लत रोकने के लिए प्रशासन का फैसला, अब रिफाइनरियों को माननी होंगी ये शर्तें appeared first on Naya Vichar.

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नीतीश कुमार ने JDU विधायकों और सांसदों की बुलाई बैठक, सीएम फेस पर हो सकती है चर्चा

Bihar Politics: सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की समाचार के बाद सियासत में हलचल तेज है. इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार की शाम 5 बजे बैठक बुला ली है. इस बैठक में जेडीयू के विधायकों, सांसदों और एमएलसी की उपस्थिति रहेगी. यह बैठक आज शाम 1 अन्ने मार्ग सीएम हाउस में होगी. इस मुद्दे पर हो सकती है चर्चा? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का अगला सीएम कौन होगा, इस पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. ऐसे में आज की बैठक में संभावना जताई जा रही है कि सीएम फेस पर चर्चा हो सकती है. चर्चा थी कि अगर जेडीयू के कोई नेता सीएम बनते हैं तो बीजेपी के दो डिप्टी सीएम होंगे. अगर बीजेपी के सीएम होंगे तो जेडीयू के दो डिप्टी सीएम होंगे. ऐसे में आज बैठक में क्या कुछ फैसले लिए जाते हैं, इसका इंतजार किया जा रहा है. बीजेपी से इन नामों की चर्चा सम्राट चौधरी- बीजेपी में मुख्यमंत्री पद के लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम लिया जा रहा है. वे फिलहाल राज्य प्रशासन में दूसरे नंबर की स्थिति रखते हैं और उनके पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है. यादवों के बाद बड़ी आबादी माने जाने वाले कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को सामाजिक समीकरणों के दृष्टिकोण से भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है. नित्यानंद राय– एक और प्रमुख नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का भी लिया जा रहा है. यादव बिरादरी से आने वाले नित्यानंद राय को अगर बिहार की कमान सौंपी जाती है तो इससे यादव मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने की रणनीति को बल मिल सकता है. विजय सिन्हा– सीएम पद के लिए विजय कुमार सिन्हा का भी नाम सामने आ रहा है. अगड़ी जाति से आने वाले विजय कुमार सिन्हा की नजदीकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रही है और संगठन के भीतर भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पार्टी इनके नाम पर भी विचार कर सकती है नीतीश मिश्रा– बीजेपी के संभावित चेहरों में एक नाम नीतीश मिश्रा का भी चर्चा में है. वे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे हैं और पिछली प्रशासन में उद्योग मंत्री रह चुके है. नई प्रशासन में उन्हें मंत्री पद नहीं मिलने के बाद उनके नाम को लेकर अटकलें और तेज हो गई है. जेडीयू से इन नामों की चर्चा विजय कुमार चौधरी– जेडीयू में मुख्यमंत्री पद के लिए वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी का नाम लिया जा रहा है. विजय कुमार चौधरी कई विभागों के मंत्री रहने के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके है. श्रवण कुमार– जेडीयू खेमे में एक और प्रमुख नाम मंत्री श्रवण कुमार का भी लिया जा रहा है. नालंदा जिले से आने वाले श्रवण कुमार लगातार चुनाव जीतते रहे हैं और उन्हें भी मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है. श्रेयसी सिंह– स्त्री चेहरे की बात करें तो, मंत्री श्रेयसी सिंह का नाम भी संभावितों में लिया जा रहा है. वे युवा हैं और स्पोर्ट्स की दुनिया में भी चर्चित हैं. अगर उनके नाम पर सहमति बनी तो बिहार को एक युवा, पढ़ी-लिखी और स्वच्छ छवि वाली स्त्री मुख्यमंत्री मिल सकती है. गायत्री देवी– सीतामढ़ी जिले से आने वाली विधायक गायत्री देवी का नाम भी चर्चा में है. वे लगातार तीसरी बार विधायक बनी हैं. Also Read: JDU कार्यकर्ताओं ने लगाए पोस्टर, सीएम नीतीश के राज्यसभा जाने पर हुए नाराज The post नीतीश कुमार ने JDU विधायकों और सांसदों की बुलाई बैठक, सीएम फेस पर हो सकती है चर्चा appeared first on Naya Vichar.

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विवाह का पहला निमंत्रण इन 5 को दें, मिलेगा सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद

Wedding invitation: विवाह हिंदू जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ संस्कार माना जाता है. इसलिए शादी की तैयारियों में सिर्फ भौतिक व्यवस्थाएं ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. हमारे धर्म में मान्यता है कि विवाह का पहला निमंत्रण कुछ विशेष देवताओं और पितरों को अवश्य देना चाहिए, ताकि पूरा विवाह समारोह बिना किसी बाधा के संपन्न हो और नवदंपति का जीवन सुखी रहे. सबसे पहला निमंत्रण भगवान गणेश को भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं. इसलिए जैसे ही शादी के कार्ड छपकर घर आएं, सबसे पहले घर के गणेश जी के सामने दीपक जलाएं और मोदक या कोई मिठाई चढ़ाएं. इसके बाद शादी का कार्ड उनके सामने रखकर प्रार्थना करें कि विवाह में कोई विघ्न न आए. परंपरा के अनुसार मंगलवार या बुधवार को गणेश जी को निमंत्रण देना सबसे शुभ माना जाता है. दूसरा निमंत्रण भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को विवाह को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, और इनका आशीर्वाद विष्णु-लक्ष्मी से जुड़ा होता है. घर के पूजा स्थान में उनकी मूर्ति या तस्वीर के सामने पीले फूल, हल्दी और कुमकुम अर्पित करें और शादी का कार्ड रखें. उनसे प्रार्थना करें कि नवविवाहित जोड़े को जीवन भर सुख, वैभव और समृद्धि मिले. गुरुवार का दिन इसके लिए सबसे शुभ माना जाता है. तीसरा निमंत्रण हनुमान जी को हनुमान जी को संकटमोचन और रक्षक माना जाता है. वे नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से रक्षा करते हैं. इसलिए मंगलवार या शनिवार को हनुमान मंदिर जाकर या घर में हनुमान चालीसा पढ़कर उनके सामने विवाह का कार्ड चढ़ाया जाता है. साथ में लाल फूल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित किया जाता है और उनसे विवाह की रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है. चौथा निमंत्रण कुलदेवी या कुलदेवता को हर परिवार के अपने कुलदेवता या कुलदेवी होते हैं, जिन्हें परिवार का रक्षक माना जाता है. मान्यता है कि उनके आशीर्वाद के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता. इसलिए उनके मंदिर में जाकर या घर में उनकी तस्वीर के सामने लाल कपड़ा बिछाकर शादी का कार्ड रखा जाता है. कुलदेवी को चुनरी और नारियल, जबकि कुलदेवता को जनेऊ अर्पित किया जाता है. पांचवां निमंत्रण पितरों को पितरों का आशीर्वाद भी हर शुभ कार्य के लिए बहुत जरूरी माना गया है. इसके लिए शादी का कार्ड पीपल के पेड़ के नीचे या घर की दक्षिण दिशा में रखकर पितरों से आशीर्वाद मांगा जाता है. यदि यह कार्य अमावस्या या पितृ पक्ष में किया जाए, तो इसे और भी शुभ माना जाता है. इन सभी को निमंत्रण देते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि कार्ड हमेशा लाल या पीले कपड़े पर रखा जाए. निमंत्रण देने से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और श्रद्धा के साथ प्रार्थना करें. मान्यता है कि इन पांच को सबसे पहले निमंत्रण देने से विवाह बिना किसी बाधा के संपन्न होता है और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है. The post विवाह का पहला निमंत्रण इन 5 को दें, मिलेगा सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद appeared first on Naya Vichar.

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Viral Video: माही भाई…धोनी को देख हार्दिक से नहीं हुआ कंट्रोल मैदान में चिल्लाए

Highlights धोनी-हार्दिक का वायरल वीडियो हिंदुस्तान-इंग्लैंड मैच का हाल महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) का क्रेज क्रिकेट में कितना ज्यादा है इसको सभी जानते हैं, लेकिन फैंस के अलावा खिलाड़ियों के बीच भी वह उनको लेकर काफी उत्साह देखने को मिलता है. मुंबई में हिंदुस्तान और इंग्लैंड (IND vs ENG) के बीच स्पोर्ट्से गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 (T20 World Cup 2026) के सेमीफाइनल के मुकाबले को देखने के लिए कैप्टन कूल पहुंचे थे, जहां मैच के दौरान एक ऐसा पल कैमरे में कैद हुआ जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. वीडियो में हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) और धोनी नजर आ रहे हैं. सेमीफाइनल में हिंदुस्तान ने इंग्लैंड को 7 रन से हराकर चौथी बार फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है. धोनी-हार्दिक का वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियों में ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और पूर्व कप्तान एमएस धोनी नजर आ रहे है. हार्दिक मैदान से बाहर जा रहे होते हैं तभी वह स्टैंड्स में महेंद्र सिंह धोनी को देखते हैं और डगआउट की तरफ जाते वक्त सीढ़ियों से आवाज लगाते हैं माही भाई, जिसके बाद धोनी पंड्या की तरफ देखते हैं और हाथ हिलाते हैं. इसके बाद वीडियो में दिखता है कि हार्दिक कुछ सवाल पूछते हैं जिसपर धोनी अपना सिर हिलाकर जवाब देते हुए नजर आते हैं. वहीं स्टैंड में धोनी के पास हार्दिक पांड्या की गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा और बेटा अगस्त्य पंड्या भी मौजूद थे. लेकिन हार्दिक ने उनसे पहले अपने सीनियर महेंद्र सिंह धोनी को आवाज लगाई. वहीं इस वीडियों में दिख रहा है कि धोनी ने अगस्त्य को अपने पास बुलाया और हार्दिक की ओर इशारा करते बोले देखों पापा.. जिसके बाद छोटे पंड्या ने अपने पिता की तरफ देखा. जिसके बाद हार्दिक हवा में दोबारा हाथ दिलाते हुए दिखें. Hardik Pandya be like Heyy Mahi bhaii…. . He is forever Dhoni Paglu ❤️– But why Augustya doesn’t look happy.– And ignore Maheika pic.twitter.com/QCfgVxpVR2 — Gagan Choudhary (@choudhary_99415) March 6, 2026 हिंदुस्तान-इंग्लैंड मैच का हाल मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में हिंदुस्तान और इंग्लैंड ने बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला स्पोर्ट्सा गया. इस मैच को टीम इंडिया ने 7 रन से जीतकर अपने नाम कर लिया. हिंदुस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 253 रन बनाए. जिसके जवाब में जैकब बैथल की शानदार सेंचुरी के चलते इंग्लैंड की टीम 246 रन बना सकी. वहीं हिंदुस्तान की ओर से इस मैच में संजू सैमसन ने सबसे ज्यादा 89 रन की पारी स्पोर्ट्सी. जिसके चलते वह प्लेयर ऑफ द मैच भी बने. हिंदुस्तान की ओर से हार्दिक पंड्या ने सबसे ज्यादा दो विकेट निकाले. ये भी पढ़ें- साक्षी धोनी के सेलिब्रेशन पर MS Dhoni का क्यूट रिएक्शन, वीडियो वायरल वानखेड़े में धोनी और रोहित का जलवा, स्टैंड में बैठकर देखा हिंदुस्तान का मैच The post Viral Video: माही भाई…धोनी को देख हार्दिक से नहीं हुआ कंट्रोल मैदान में चिल्लाए appeared first on Naya Vichar.

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विदेश में Data Science पढ़ना चाहते हैं, स्वीडन के ये कॉलेज हैं बेस्ट

Data Science in Sweden: आज के डिजिटल दौर में डेटा साइंस सबसे तेजी से बढ़ने वाले करियर सेक्टर में से एक बन चुका है. दुनिया भर की कंपनियां बड़े डेटा (Big Data) का एनालिसिस करके बेहतर डिसीजन लेने के लिए डेटा साइंटिस्ट की मांग कर रही हैं. यही कारण है कि कई स्टूडेंट्स विदेश में इस क्षेत्र की पढ़ाई करना चाहते हैं. यूरोप का देश Sweden टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन के लिए जाना जाता है. यहां की यूनिवर्सिटीज मॉडर्न लैब, रिसर्च फैसिलिटी और इंडस्ट्री से जुड़े सिलेब्स प्रोवाइड करते हैं. स्वीडन में Data Science से जुड़े कई मास्टर प्रोग्राम इंग्लिश में पढ़ाए जाते हैं, जिससे इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई करना आसान हो जाता है. अगर आप डेटा साइंस की पढ़ाई के लिए स्वीडन जाना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि स्वीडन के टॉप यूनिवर्सिटीज कौन-कौन से हैं. Data Science in Sweden: स्वीडन के टॉप यूनिवर्सिटी 1. KTH Royal Institute of Technology यह स्वीडन की सबसे पॉपुलर टेक्निकल यूनिवर्सिटीज (Data Science in Sweden) में से एक है. यहां Biostatistics and Data Science जैसे मास्टर प्रोग्राम पढ़ाए जाते हैं, जिसमें स्टूडेंट्स को स्टैटिस्टिक्स, प्रोग्रामिंग और डेटा एनालिटिक्स की गहरी समझ दी जाती है. यहां मॉडर्न टेक्नोलॉजी लैब, इंडस्ट्री से जुड़े सिलेब्स और वर्ल्ड लेवल रिसर्च कराए जाते हैं. 2. Uppsala University यह यूरोप की सबसे पुरानी और फेमस यूनिवर्सिटीज़ में से एक है. डेटा साइंस रिसर्च और एजुकेशन के फील्ड में इसका स्थान काफी ऊंचा माना जाता है. इस कॉलेज में मशीन लर्निंग एंड स्टैटिस्टिक्स पर मजबूत कोर्स उपलब्ध है. साथ ही यहां रिसर्च और इनोवेशन पर विशेष ध्यान दिया जाता है. 3. Lund University स्वीडन की यह यूनिवर्सिटी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज (Data Science in Sweden) में गिनी जाती है. यहां डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा से जुड़े कई एडवांस कोर्स उपलब्ध हैं. इस कॉलेज को ग्लोबल रैंकिंग में अच्छा स्थान मिला है. यहां इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए बेहतर माहौल है और इंडस्ट्री पार्टनरशिप का मौका भी मिलता है. 4. Chalmers University of Technology यह यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के लिए पॉपुलर है. यहां Data Science और AI पर आधारित मास्टर प्रोग्राम छात्रों को इंडस्ट्री के लिए तैयार करते हैं. टेक्नोलॉजी और रिसर्च में मजबूतपहचान है. इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स और इंटर्नशिप इस कॉलेज की खासियत है. 5. Linkoping University यह यूनिवर्सिटी डेटा साइंस और मशीन लर्निंग (Data Science in Sweden) के क्षेत्र में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यहां पढ़ाई के साथ-साथ रिसर्च और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स पर भी जोर दिया जाता है. यहां AI और Machine Learning पर विशेष फोकस दिया जाता है. इस यूनिवर्सिटी में इंटरडिसिप्लिनरी कोर्स और अच्छा इंडस्ट्री कनेक्शन है. यह भी पढ़ें: किस कोर्स के लिए है फेमस कनाडा, ये रही टॉप 5 कॉलेज के लिस्ट The post विदेश में Data Science पढ़ना चाहते हैं, स्वीडन के ये कॉलेज हैं बेस्ट appeared first on Naya Vichar.

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भारत को राहत, रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट, अमेरिका ने क्यों किया ये फैसला

Russian Oil : ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका ने कहा कि वह हिंदुस्तानीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए अस्थायी रूप से 30 दिनों की छूट दे रहा है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यह बात कही है. उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एनर्जी एजेंडे के कारण तेल और गैस का उत्पादन अब तक के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है. ग्लोबल मार्केट में तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए वित्त मंत्रालय हिंदुस्तानीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए अस्थायी रूप से 30 दिन की छूट दे रहा है. स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह सोच-समझकर उठाया गया शॉर्ट टर्म स्टॉक है. इससे रूसी प्रशासन को कोई बड़ा फाइनेंशियल बेनिफिट्स नहीं मिलेगा, क्योंकि यह केवल तेल के उन लेनदेन को ऑथराइज्ड करता है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल से जुड़े हैं. बेसेंट ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर करके कहा कि हिंदुस्तान, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है. हमें पूरी उम्मीद है कि नयी दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा. यह अस्थायी कदम ईरान द्वारा ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को ब्लॉक करने की कोशिश से पैदा हुए दबाव को कम करेगा. पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाया था टैरिफ इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर हिंदुस्तान पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था. अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि हिंदुस्तान रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को इनडायरेक्ट तौर पर मदद मिल रही है. इसलिए अमेरिका ने हिंदुस्तान के इस कदम पर सख्त रुख अपनाते हुए यह शुल्क लगाया था. यह भी पढ़ें : श्रीलंका ने दूसरे ईरानी जहाज का लिया कंट्रोल, 208 की बची जान, IRIS Dena पर US हमले से मुर्दाघर फुल पिछले महीने अमेरिका और हिंदुस्तान ने बताया था कि दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा तय हो गई है. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर हिंदुस्तान पर लगाया गया 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ हटा दिया. ट्रंप ने यह भी कहा कि हिंदुस्तान ने मॉस्को से एनर्जी इम्पोर्ट रोकने और अमेरिका से एनर्जी प्रोडक्ट की खरीद बढ़ाने का भरोसा दिया है. The post हिंदुस्तान को राहत, रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट, अमेरिका ने क्यों किया ये फैसला appeared first on Naya Vichar.

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ईरान का बहरीन पर बड़ा हमला, ऑयल रिफाइनरी पर दागीं मिसाइलें, धू-धूकर जली

Iran Attack Bahrain Oil Refinery: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब खाड़ी देशों तक साफ दिखाई देने लगा है. बहरीन ने दावा किया है कि ईरान की एक मिसाइल उसके राज्य संचालित तेल रिफाइनरी BAPCO पर आकर गिरी. हालांकि अधिकारियों के अनुसार गुरुवार रात लगी आग को जल्द ही बुझा लिया गया. रिफाइनरी का कामकाज सामान्य रूप से जारी है. इस हमले में किसी के हताहत होने की समाचार नहीं है. बहरीन के राष्ट्रीय संचार केंद्र के अनुसार यह रिफाइनरी देश के पूर्वी तट पर स्थित सितरा आईलैंड में है, जो राजधानी मनामा के दक्षिण में पड़ता है. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमलों की रफ्तार बढ़ा दी है. विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति और बाजार पर असर पड़ सकता है.  इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे दो मिसाइलें रिफाइनरी पर गिरती हैं. आसमान में बहरीन का एंटी मिसाइल सिस्टम अगली मिसाइलों को रोकने का प्रयास करता है. वहीं हमले के बाद लोग अपने घरों की छतों पर आते दिख रहे हैं. यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र का तेल उद्योग इन देशों की वित्तीय स्थिति की मुख्य आधारशिला है. ऐसे में तेल ढांचे को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. İran’ın, Bahreyn’de ulusal petrol şirketi BAPCO’ya ait ana rafineriye ve yakınındaki diğer altyapı tesislerine balistik füze saldırısı düzenlediği bildirildi Can kaybı veya yaralanmanın yaşanmadığı saldırı sonrası çıkan yangın, çevredekiler tarafından kaydedildi pic.twitter.com/qHWvKhxBkB — Anadolu Ajansı (@anadoluajansi) March 5, 2026 तेल और गैस रिफाइनरी को निशाना बना रहा है ईरान इससे पहले ईरान ने सऊदी अरब और कतर के एनर्जी रिफाइनरी को निशाना बनाया था. सऊदी अरब में रास तनुरा ऑयर रिफाइनरी और कतर में  रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी (LNG प्रोडक्शन प्लांट)  पर ईरान ने ड्रोन अटैक किया. ये हमले इतने घातक थे कि दोनों देशों ने फिलहाल इन जगहों से ऑपरेशंस बंद हो चुके हैं. वहीं, अजरबैजान ने भी आरोप लगाया कि ईरान ने उस पर ड्रोन से हमला किया, हालांकि तेहरान ने इस आरोप से इनकार किया है. ईरान ने गुरुवार को इन देशों को निशाना बनाया-  1. सऊदी अरब: राजधानी रियाद में स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका दूतावास परिसर पर ड्रोन हमला हुआ. सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने कई ड्रोन और तीन क्रूज मिसाइलों को अल‑खारज शहर के पास ही नष्ट कर दिया. 2. संयुक्त अरब अमीरात: राजधानी अबू धाबी में कई धमाकों की आवाज सुनी गई, जहां वायु रक्षा प्रणाली ने संभावित मिसाइल हमलों को रोकने की कोशिश की. फुजैराह अमीरात में भी मिसाइल खतरे को देखते हुए एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया गया. इससे पहले अबू धाबी में हुए हमले में छह विदेशी नागरिक घायल हुए थे. 3. कतर: राजधानी दोहा की ओर दागी गई 13 बैलिस्टिक मिसाइलों को कतर की वायु रक्षा प्रणाली ने इंटरसेप्ट कर दिया. एक मिसाइल कतर के समुद्री क्षेत्र में गिर गई. इसके अलावा चार ड्रोन भी मार गिराए गए. 4. कुवैत: कुवैत तट के पास समुद्र में एक तेल टैंकर के निकट जोरदार विस्फोट हुआ. इस घटना के बाद समुद्र में तेल रिसाव की जानकारी सामने आई. ये भी पढ़ें:- श्रीलंका ने दूसरे ईरानी जहाज का लिया कंट्रोल, 208 की बची जान, IRIS Dena पर US हमले से मुर्दाघर फुल ईरान ने IRIS Dena पर हमले के बाद दी है कड़ी चेतावनी मिडिल ईस्ट का यह युद्ध अब सातवें दिन में पहुंच चुका है और इसका असर मध्य पूर्व से बाहर तक फैलता दिख रहा है. गुरुवार को ईरान ने क्षेत्र में हमलों की एक नई लहर शुरू की. उसने इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों और कई अन्य देशों को निशाना बनाया. ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि उसके युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की घटना पर अमेरिका को कड़वा पछतावा होगा. दरअसल एक दिन पहले अमेरिका ने दावा किया था कि उसने श्रीलंका के पास समुद्र में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena को डुबो दिया.  तेल यातायात पर पड़ा है बुरा असर इस संघर्ष का असर तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय यातायात पर भी पड़ रहा है. ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों में जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनसे होकर दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. इसके चलते वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है. खाड़ी के अन्य देशों ने भी सुरक्षा घटनाओं की जानकारी दी है. यूएई में अल धफरा एयर बेस के पास एक ड्रोन मार गिराया गया, जबकि कतर और सऊदी अरब ने भी ड्रोन और मिसाइल खतरों को लेकर अलर्ट जारी किया. ये भी पढ़ें:- अभी फोकस ईरान युद्ध पर, फिर उसको देखेंगे… ट्रंप ने इस देश को बनाया अगला टारगेट प्रशासनी आंकड़ों के अनुसार इस युद्ध में अब तक ईरान में 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि लेबनान और इजरायल में भी कई लोगों की जान गई है. बढ़ते हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह संघर्ष अब लंबे समय तक जारी रहने की आशंका जताई जा रही है. The post ईरान का बहरीन पर बड़ा हमला, ऑयल रिफाइनरी पर दागीं मिसाइलें, धू-धूकर जली appeared first on Naya Vichar.

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CM रहते राज्यसभा जाने वाले पहले नेता बने नीतीश कुमार, अब बिहार की राजनीति में क्या-क्या होगा?

Bihar Politics: गुरुवार की सुबह सीएम नीतीश कुमार का पोस्ट आया, जिसमें उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा जताई. इस पोस्ट के सामने आते ही बिहार की सियासत में खलबली मच गई. इसी से साफ हो गया कि अब वे बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे. इसके बाद दोपहर तक उन्होंने राज्यसभा जाने के लिए नामांकन भी कर दिया. मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा जाने वाले पहले नेता नीतीश कुमार बन गए हैं. इसके अलावा बिहार के लिए ऐतिहासिक फैसलों से लेकर कई रिकॉर्ड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने नाम किए. देश में सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड भी इन्हीं के नाम शामिल है. साल 2025 में एनडीए प्रशासन की जीत के बाद गांधी मैदान में नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. अब तक किसी ने नहीं तोड़ा सीएम नीतीश का रिकॉर्ड जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह भी 6-6 बार मुख्यमंत्री बने. इसके अलावा सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे पवन कुमार चामलिंग और ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक भी 5-5 बार मुख्यमंत्री बने. लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रिकॉर्ड अब तक कोई भी नहीं तोड़ पाए हैं. बिहार की सियासत में आगे क्या होगा? नेतृत्वक गलियारों में कई तरह की चर्चा चल रही है, जिसकी माने तो 16 मार्च के मतदान के फैसले के बाद बिहार में नई प्रशासन बनाने को लेकर आगे की गतिविधि होगी. एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा. इसके पहले भाजपा और जदयू विधायक दल की अलग-अलग बैठक होगी. दोनों दल अपने नए और उप नेता का चुनाव करेंगे. इसके बाद एनडीए विधायक दल की एकसाथ बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चुनाव सर्वसम्मत से किया जाएगा. नेता चुन लेने के बाद राज्यपाल के यहां नई प्रशासन बनाने का दावा पेश होगा. संख्या बल की संतुष्टि के बाद राज्यपाल एनडीए विधायक दल के नेता को प्रशासन बनाने का न्योता देंगे. बिहार के अगले सीएम के लिए इन नामों की चर्चा सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री कौन होंगे, इसकी चर्चा तेज है. कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. नेतृत्वक जानकारों की माने तो, मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी चौंकाने वाले नाम का ऐलान कर सकती है. नए नेता का चुनाव एनडीए के दो बड़े घटक दल जदयू और भाजपा की आपसी सहमति से होगा. भाजपा से मुख्यमंत्री बनाए गए तो उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. दूसरा नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का चर्चा में है. Also Read: ‘बिहार के मुख्यमंत्री को शेल्टर होम भेज दिया गया…’ JDU विधायक ने क्यों कही इतनी बड़ी बात The post CM रहते राज्यसभा जाने वाले पहले नेता बने नीतीश कुमार, अब बिहार की नेतृत्व में क्या-क्या होगा? appeared first on Naya Vichar.

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