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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में खेला होगा या बिदक जाएगा घोड़ा?

Rajya Sabha Election: झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. राज्य के सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है. अब सबकी नजरें मतगणना और नतीजों पर टिकी हैं. शाम चार बजे से मतों की गिनती शुरू होगी और करीब सात बजे तक तस्वीर साफ हो जाएगी. अगले चार घंटे झारखंड की नेतृत्व के लिए सबसे बेचैन करने वाले साबित हो सकते हैं, क्योंकि दावे बहुत हैं और गणित उससे भी ज्यादा दिलचस्प है. तीन उम्मीदवारों के बीच है मुकाबला राज्यसभा चुनाव में कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. झामुमो ने बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाया है, कांग्रेस की ओर से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी मैदान में हैं. दो सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में मुकाबला संख्या बल, रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग के इर्द-गिर्द घूम रहा है. यही वजह है कि मतदान समाप्त होने के बावजूद नेतृत्वक हलचल थमी नहीं है. रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी रही चर्चा में इस बार राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी चर्चा का विषय बनी रही. मंगलवार से कांग्रेस और एनडीए के कई विधायकों को रांची के विभिन्न होटलों में ठहराया गया था. इसका मकसद विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी तरह की नेतृत्वक उठापटक से दूर रखना बताया गया. हालांकि झामुमो ने अपने विधायकों को किसी होटल या रिसॉर्ट में नहीं रखा. पार्टी नेतृत्व का कहना रहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका पर भी नजर राज्यसभा चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं ने भी नेतृत्वक माहौल को गर्म रखा. कई नेताओं ने साफ कहा कि यदि इंडिया गठबंधन के निर्धारित 56 वोटों से अधिक या एनडीए के 24 वोटों से काफी ज्यादा मत सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर सवाल उठेंगे. यही कारण है कि मतगणना शुरू होने से पहले ही नेतृत्वक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में कोई “स्पोर्ट्सा” होता है या फिर चुनावी मैदान में कोई “घोड़ा बिदक” जाता है. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन 81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं. इसी संख्या बल के आधार पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को जीत दिलाने का दावा इंडिया गठबंधन लगातार कर रहा है. एनडीए के पास 24 वोट, नथवानी पर दांव दूसरी तरफ एनडीए के पास कुल 24 वोट हैं. भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक हैं. इसी समर्थन के आधार पर एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी का समर्थन किया है. हालांकि मौजूदा संख्या के आधार पर नथवानी की राह आसान नहीं मानी जा रही है. ऐसे में उनकी जीत की संभावना काफी हद तक अतिरिक्त समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर मानी जा रही है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: वोटिंग के बाद बीजेपी विधायकों का दावा, ‘दिल्ली जा रहे हैं परिमल नथवानी’ 28 वोट का जादुई आंकड़ा करेगा फैसला राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोट का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है. बैजनाथ राम की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और परिमल नथवानी के बीच असली मुकाबला माना जा रहा है. अब शाम सात बजे तक झारखंड की नेतृत्व की धड़कनें तेज रहेंगी. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन राज्यसभा जाएगा, बल्कि यह भी है कि क्या संख्या का गणित जीत जाएगा या फिर नेतृत्व का रसायन एक बार फिर सबको चौंका देगा. आखिर लोकतंत्र में बैलेट बॉक्स खुलने तक हर दावा सिर्फ दावा ही होता है, नतीजा नहीं. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: महुआ मांझी का बड़ा खुलासा, जेएमएम विधायकों को रिसॉर्ट में रखने का भी आया था प्रस्ताव The post चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में स्पोर्ट्सा होगा या बिदक जाएगा घोड़ा? appeared first on Naya Vichar.

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शिवसेना(यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत ने कहा-गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी

Shiv Sena UBT : शिवसेना(उद्धव बालासाहेब ठाकुर गुट) की संसदीय दल की मीटिंग के बाद पार्टी के शीर्ष नेता संजय राउत ने कहा कि व्हिप जारी किए जाने के बाद भी 6 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे. हम उन सांसदों को गद्दार मानते हैं और हम उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए कदम उठाएंगे. बेईमानी कर रहे हैं गद्दार सांसद : संजय राउत संजय राउत ने मीडिया के सामने यह कहा कि जो सांसद पार्टी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. उन्हें पार्टी कारण बताओ नोटिस जारी करेगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. राउत ने कहा कि पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करना अनुशासनहीनता है. वे बेईमानी कर रहे हैं और धोखा कर रहे हैं. पार्टी के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि उन्हें शोकाॅज नोटिस आज ही भेजा जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी की बैठक में क्यों नहीं आए. #WATCH | Delhi: After Shiv Sena (UBT) parliamentary party meeting, party MP Arvind Sawant says, “Absent MPs have betrayed the party…We are going to issue showcause notice to them. They will get the notice by the evening. If they do not respond within 7 days of receiving the… pic.twitter.com/Ic7yHsnDi3 — ANI (@ANI) June 18, 2026 गंदी नेतृत्व का परिणाम भुगतना पड़ेगा संजय राउत ने मीडिया के सामने यह कहा कि एकनाथ शिंदे और बीजेपी जिस तरह की गंदी नेतृत्व कर रही है उसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा. संजय राउत ने बृहस्पतिवार को भी मीडिया के सामने बागी सांसदों के लिए अपशब्द कहे. उन्होंने कहा कि ये लोग बेईमान और धोखेबाज हैं, इसके साथ ही उन्होंने अपशब्द भी कहे. बुधवार को संजय राउत ने यह दावा किया था कि उनके सांसदों को 50-50 करोड़ देकर खरीदा जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि जो जाना चाहते हैं वो जाएं, लेकिन इस्तीफा देकर जाएं. इससे पीछे तर्क यह है कि वे शिवसेना के नाम पर जीतकर आएं हैं, तो जनता के साथ धोखेबाजी नहीं चलेगी. जिन छह सांसदों के अलग ग्रुप बनाने की संभावना है, उनके नाम हैं-संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट). ये भी पढ़ें : शिवसेना में फूट पर बोले जयराम रमेश-2/3 मेजॉरिटी के लिए सभी पार्टियों को तोड़ने में जुटे हैं पीएम मोदी-अमित शाह संजय राउत का दावा-50-50 करोड़ में खरीदे जा रहे हैं सांसद, 15 करोड़ दिया एडवांस, बौखलाहट में मीडिया के सामने दी गाली The post शिवसेना(यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत ने कहा-गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी appeared first on Naya Vichar.

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100 साल पहले जहां से अमेरिका बना ‘सुपर पावर’, ट्रंप ने वहीं किया ‘सरेंडर’, क्या ईरान-यूएस डील से यहूदी फिर खतरे में?

Trump Iran MoU Versailles History: अमेरिका कब दुनिया में एक ताकतवर देश के रूप में स्थापित हुआ? सवाल के कई उत्तर हो सकते हैं. इतिहास में देखें तो, 1776 में अमेरिका को स्वतंत्रता मिली, फिर उसने तेजी से अपना क्षेत्र और वित्तीय स्थिति बढ़ाई. औद्योगिक क्रांति के प्रभाव से अमेरिकी उद्योग, रेल नेटवर्क और व्यापार में तेज विस्तार की बदौलत 1890 के दशक तक अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय स्थितिओं में शामिल हो चुका था. 1898 के स्पैनिश अमेरिकी वॉर को अक्सर अमेरिका के वैश्विक शक्ति बनने की शुरुआत माना जाता है. इस युद्ध के बाद अमेरिका का प्रभाव कैरेबियाई क्षेत्र और प्रशांत महासागर तक फैल गया. इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका की आर्थिक ताकत को और मजबूत किया. आज से लगभग 100 साल पहले हुए इस युद्ध ने अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता और प्रमुख औद्योगिक देश बनाया. हाँ, यहां रुकना होगा. क्योंकि इस लेख में हम यही बात करने वाले हैं. 100 साल पहले, जिस जगह ने अमेरिका को दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया. उसी जगह से अमेरिका के पराभव की शुरुआत हो रही है. हम यहां यह साफ कर दें कि यह केवल आंकलन मात्र है. यह गलत भी हो सकता है. लेकिन इसके सही होने के पीछे कुछ कारण हैं, जो इसे जस्टिफाई कर रहे हैं. कैसे? इसी को समझते हैं.   प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका को दुनिया का सुपर पावर बनाने के बीज डाले प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद अमेरिका विश्व मंच पर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा, हालांकि वह तत्काल अकेली महाशक्ति नहीं बना था. उसकी आर्थिक, औद्योगिक और वित्तीय ताकत में जबरदस्त वृद्धि हुई, जिसने आगे चलकर उसे वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाया. प्रथम विश्व युद्ध से पहले यूरोप की शक्तियां विशेषकर युनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), फ्रांस और जर्मनी विश्व नेतृत्व और वित्तीय स्थिति पर हावी थीं. लेकिन युद्ध ने यूरोप की वित्तीय स्थितिओं को बुरी तरह कमजोर कर दिया. इसके उलट, अमेरिका का मुख्य भूभाग युद्ध से लगभग अछूता रहा और उसने मित्र देशों को हथियार, खाद्यान्न और अन्य सामग्री बेचकर भारी आर्थिक लाभ कमाया. युद्ध के बाद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता देश बन गया. पहले यूरोपीय देश अमेरिका को कर्ज देते थे, लेकिन 1918 के बाद स्थिति उलट गई और कई यूरोपीय देश अमेरिकी ऋण पर निर्भर हो गए. इससे न्यूयॉर्क वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में उभरने लगा और लंदन की पारंपरिक वित्तीय प्रधानता को चुनौती मिलने लगी. औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में भी अमेरिका की स्थिति मजबूत हुई. युद्ध के दौरान अमेरिकी कारखानों ने बड़े पैमाने पर उत्पादन किया, जिससे उसकी विनिर्माण क्षमता और तकनीकी बढ़त बढ़ी.  1920 के दशक को अक्सर ‘रोरिंग ट्वेंटीज’ कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान अमेरिकी वित्तीय स्थिति तेज गति से बढ़ी. हालांकि, नेतृत्वक और सैन्य दृष्टि से अमेरिका अभी भी कुछ हद तक अलगाववादी नीति अपनाए हुए था. उसने युद्ध के बाद बनी लीग ऑफ नेशंस में भी सदस्यता नहीं ली. इसलिए प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका आर्थिक महाशक्ति तो बन गया, लेकिन उसने अभी वैश्विक नेतृत्वक नेतृत्व की पूरी जिम्मेदारी नहीं संभाली थी. कई इतिहासकारों का मानना है कि प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका को महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ाया, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वह वास्तव में दुनिया की दो प्रमुख महाशक्तियों में से एक बनकर उभरा. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप और जापान की तबाही तथा अमेरिकी आर्थिक-सैन्य शक्ति के विस्तार ने उसे वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचा दिया. इसलिए निष्कर्ष यह है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा और यही हमारा आधार बिंदु है. भले ही उसका पूर्ण महाशक्ति का दर्जा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुआ. अब बात करते हैं 100 साल पहले क्या हुआ था और आज क्या हुआ? प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने के लिए करीब 107 साल पहले, 28 जून 1919 को फ्रांस के वर्साय पैलेस में संधि हुई थी.  उस समय अमेरिका विजेता देशों में शामिल था और तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन नई वैश्विक व्यवस्था के प्रमुख शिल्पकारों में गिने जाते थे. अब उसी महल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक 14 बिंदुओं वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. लेकिन इस बार बहस यह है कि क्या अमेरिका ने अपनी शर्तें मनवाईं या फिर ईरान को बड़ी रियायतें दे दीं? 1919 का वर्साय और वुडरो विल्सन के ‘14 सूत्र’ प्रथम विश्व युद्ध के बाद फ्रांस के वर्साय में आयोजित शांति सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली की भूमिका सबसे अहम थी. उस समय समझौते पर हस्ताक्षर से करीब छह महीने पहले वुडरो विल्सन ने वर्साय में कहा था, ‘आखिरकार दुनिया अब अमेरिका को दुनिया के उद्धारक के रूप में जानती है.’ विल्सन के प्रसिद्ध ’14 सूत्र’ युद्ध के बाद की नई विश्व व्यवस्था का आधार बने थे. यही वजह है कि जब 2026 में ट्रंप ने ईरान के साथ 14 बिंदुओं वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो इतिहास से तुलना होना लगभग तय है. वर्साय में ट्रंप के हस्ताक्षर और शुरू हुई नई बहस फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में ट्रंप समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कुछ क्षण रुकते हैं और आसपास मौजूद लोगों से कहते हैं, ‘यह आसान नहीं था, मैं आपको बता सकता हूं.’ Le Président Trump a signé ce soir à Versailles l’accord entre l’Iran et les États-Unis. Cet accord ouvre la voie à une paix durable et permet la réouverture du détroit d’Ormuz. C’est un pas important dans la bonne direction pour nos compatriotes… pic.twitter.com/b1XgZrBv0m — Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) June 18, 2026 अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद जब ट्रंप वर्साय से बाहर निकले, तो पत्रकारों ने उनसे पूछा, ‘क्या आपने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए?’ तो उन्होंने चिल्लाकर कहा, ‘हां, समझौता हो गया. मैंने वर्साय में इस पर हस्ताक्षर किए हैं.’ इसके बाद उन्होंने हवा में हस्ताक्षर करने का इशारा भी किया. pic.twitter.com/eMuer3F1Q2 — Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) June 18, 2026 अब सवाल उठा कि जिस महल में कभी जर्मनी को झुकने पर मजबूर किया गया था,

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अरूप विश्वास ने तोड़ा ममता बनर्जी का विश्वास, फ्रीज होगा तृणमूल कांग्रेस का अकाउंट

कोलकाता से मनोरंजन सिंह की रिपोर्ट Arup Biswas: तृणमूल पार्टी के कोषाध्यक्ष व राज्य के पूर्व स्पोर्ट्स मंत्री अरूप विश्वास ने एचडीएफसी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को पत्र लिखकर पार्टी के सभी अकाउंट फ्रीज करने और लेनदेन रोकने की मांग की है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि पार्टी में भारी गड़बड़ी चल रही है. कई सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, विधायक बगावत कर रहे हैं. अकाउंट चलाने को लेकर है विवाद अकाउंट चलाने को लेकर विवाद है. उन्होंने डर जताया कि ऑफिस में उनके साइन वाले चेक का गलत इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए जब तक आंतरिक विवाद सुलझ न जाये, सारे लेन-देन बंद रखे जाये. इस पत्र के बाद तृणमूल पार्टी और मुश्किल में है. पहले से ही वोट के बाद टूटी पार्टी अब ममता-अभिषेक की लीडरशिप भी चैलेंज में है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें तृणमूल को फंड का संकट अब सैकड़ों करोड़ के फंड पर संकट आ गया है. मालूम हो कि इधर, मेसी इवेंट केस में आयोजक शताद्रु दत्त ने पूर्व स्पोर्ट्स मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए विधाननगर कमिश्नरेट को ई-मेल किया है. अरूप विश्वास को मिले राहत के आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट डिवीजन बेंच में चुनौती दी है. Also Read: कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं अभिषेक बनर्जी, HC ने अरेस्ट वारंट पर लगी रोक हटायी The post अरूप विश्वास ने तोड़ा ममता बनर्जी का विश्वास, फ्रीज होगा तृणमूल कांग्रेस का अकाउंट appeared first on Naya Vichar.

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पुराने घरों के बीच में क्यों होता था आंगन? वजह जानकर कहेंगे- हमारे पूर्वज कितने समझदार थे

Indian Traditional Homes: पुराने समय के घरों की बात होते ही सबसे पहले आंगन की तस्वीर आंखों के सामने उभर आती है. घर के बीचों-बीच बना यह खुला हिस्सा सिर्फ वास्तु या परंपरा का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण भी छिपे थे. उस दौर में आंगन घर की पहचान माना जाता था और परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का केंद्र भी होता था. सुबह की पूजा-पाठ से लेकर शाम की बैठकी तक, आंगन घर के हर सदस्य को एक साथ जोड़ने का काम करता था. आज भले ही आधुनिक फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में आंगन लगभग गायब हो गया हो, लेकिन इसकी उपयोगिता आज भी कम नहीं हुई है. प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का स्रोत पुराने समय में बिजली और आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम नहीं होते थे. ऐसे में घर के बीच में आंगन बनाने से सूरज की रोशनी आसानी से अंदर तक पहुंचती थी. साथ ही ताजी हवा का प्रवाह भी बना रहता था, जिससे घर ठंडा और आरामदायक महसूस होता था. यही वजह थी कि गर्मियों में भी ऐसे घर अपेक्षाकृत ठंडे रहते थे. परिवार को जोड़ने वाली जगह आंगन सिर्फ एक खुला हिस्सा नहीं था, बल्कि परिवार के लोगों के मिलने-जुलने की जगह भी था. शिशु यहीं स्पोर्ट्सते थे, बड़े-बुजुर्ग बैठकर बातचीत करते थे और स्त्रीएं घर के कई काम यहीं करती थीं. इससे परिवार के बीच आपसी जुड़ाव मजबूत बना रहता था. स्त्रीओं के लिए सुरक्षित और खुला स्थान पुराने दौर में स्त्रीओं का अधिकतर समय घर के अंदर ही बीतता था. ऐसे में आंगन उन्हें खुली हवा और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करने का अवसर देता था. यह घर के भीतर ही एक सुरक्षित और निजी जगह की तरह काम करता था. त्योहारों और समारोहों का केंद्र शादी-ब्याह, पूजा, त्योहार और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों का आयोजन अक्सर आंगन में ही किया जाता था. यह स्थान परिवार और रिश्तेदारों को एक साथ लाने का माध्यम बनता था. प्रकृति से जुड़ाव बनाए रखता था आंगन की सबसे खास बात यह थी कि इससे लोग प्रकृति के करीब महसूस करते थे. यहां बैठकर बारिश का आनंद लिया जा सकता था, खुले आसमान को निहारा जा सकता था और रात में तारों को देखा जा सकता था. यही वजह है कि पुराने घरों का आंगन सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा था. यह भी पढ़ें: बच्चों से बुजुर्गों तक, हर उम्र के लिए फायदेमंद हैं ये 5 आसान योगासन The post पुराने घरों के बीच में क्यों होता था आंगन? वजह जानकर कहेंगे- हमारे पूर्वज कितने समझदार थे appeared first on Naya Vichar.

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वो दो कौन, जो झारखंड से जाएंगे राज्यसभा? ऐसे समझिए आंकड़ों का पूरा खेल

Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी मुकाबला बेहद रोचक हो गया है. इंडिया गठबंधन की ओर से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी चुनाव लड़ रहे हैं. अब सारा स्पोर्ट्स विधायकों की संख्या, प्राथमिकता वोट और रणनीति पर टिका हुआ है. नेतृत्व में गणित का महत्व ऐसा है कि कई बार जोड़-घटाव की एक छोटी सी गलती बड़े-बड़े दावों को ध्वस्त कर देती है. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं. इसी ताकत के दम पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार उतारे हैं. झामुमो ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रणव झा मैदान में हैं. एनडीए के पास 24 वोट, नथवानी के सहारे दांव दूसरी तरफ एनडीए के पास कुल 24 वोट हैं. भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक हैं. इस संख्या बल के आधार पर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी चुनावी मैदान में हैं. हालांकि उनके लिए जीत की राह आसान नहीं मानी जा रही है. जीत के लिए 28 वोट का जादुई आंकड़ा राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोट का आंकड़ा जरूरी है. ऐसे में तीनों उम्मीदवारों की रणनीति इसी संख्या के इर्द-गिर्द घूम रही है. सबसे मजबूत स्थिति झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की मानी जा रही है. बैजनाथ राम की जीत लगभग तय झामुमो के पास अकेले 34 विधायक हैं. पार्टी चाहें तो 29 या 30 वोट बैजनाथ राम के पक्ष में डलवा सकती है. इस तरह 28 के आवश्यक आंकड़े से एक-दो वोट अधिक मिलने से किसी प्रकार के जोखिम की संभावना भी कम हो जाएगी. यही वजह है कि बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है. प्रणव झा के सामने तीन बड़ी शर्तें कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की राह थोड़ी कठिन दिखाई दे रही है. सबसे पहले उन्हें कांग्रेस, राजद और माले के सभी 22 वोट मिलने जरूरी हैं. दूसरी शर्त यह है कि बैजनाथ राम को वोट देने के बाद झामुमो के बचे हुए चार या पांच वोट भी उनके खाते में जाएं. तीसरी और सबसे अहम शर्त दूसरी प्राथमिकता के वोटों की है. यदि झामुमो 30 वोट बैजनाथ राम को देता है, तो अतिरिक्त दो वोटों की दूसरी प्राथमिकता का मूल्य 299-299 होगा. ऐसे में चार अतिरिक्त वोटों के साथ कुल 26 वोट मिलने पर दूसरी प्राथमिकता के मतों की मदद से प्रणव झा 28.1 के आंकड़े तक पहुंच सकते हैं और उनकी जीत का रास्ता साफ हो सकता है. नथवानी को चाहिए इंडिया गठबंधन में सेंध परिमल नथवानी के पास फिलहाल 24 वोट हैं. जीत के लिए उन्हें कम से कम चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. यानी उन्हें इंडिया गठबंधन में सेंध लगानी होगी. दूसरी प्राथमिकता का सहारा उनके लिए जोखिम भरा माना जा रहा है. इसे भी पढ़ें: झारखंड राज्यसभा चुनाव के लिए रांची में हाई अलर्ट, सादे लिबास में घूम रहे स्पेशल ब्रांच के कर्मचारी जयराम महतो बन सकते हैं गेम चेंजर जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का एक वोट इस चुनाव में बेहद अहम माना जा रहा है. उन्होंने न तो इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया और न ही एनडीए की बैठक में पहुंचे. उनका कहना है कि जो क्षेत्र के विकास के लिए काम करेगा, वह उसी का समर्थन करेंगे. ऐसे में उनका एक वोट चुनावी गणित का सबसे दिलचस्प अध्याय बन गया है. इसे भी पढ़ें: झारखंड राज्यसभा चुनाव: विधानसभा में मतदान जारी, एनडीए ने किया जीत का दावा The post वो दो कौन, जो झारखंड से जाएंगे राज्यसभा? ऐसे समझिए आंकड़ों का पूरा स्पोर्ट्स appeared first on Naya Vichar.

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ICAI CA Final Result 2026: आज जारी हुआ CA फाइनल रिजल्ट, पटियाला के नूर सिंगला बने टॉपर

ICAI CA Final Result 2026: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने आज, 18 जून 2026 को CA Final May 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. परीक्षा में शामिल हुए कैंडिडेट्स, अब ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं. नूर सिंगला (Noor Singla)- रैंक 1यश जैन (Yash Jain)- रैंक 2लक्ष्य गोयल (Lakshya Goyal)- रैंक 3 समाचार अपडेट हो रही है… The post ICAI CA Final Result 2026: आज जारी हुआ CA फाइनल रिजल्ट, पटियाला के नूर सिंगला बने टॉपर appeared first on Naya Vichar.

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IPL 2027 में होने जा रहा है बड़ा बदलाव, तारीखों से लेकर मैचों की संख्या पर आया BCCI का फाइनल फैसला

IPL 2027: हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने आईपीएल के आगामी सीजन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि अगले सीजन (IPL 2027) से टूर्नामेंट को थोड़ा पहले शुरू किया जा सकता है ताकि अंतिम चरणों में खराब मौसम और भीषण गर्मी से बचा जा सके. इसके साथ ही उन्होंने मैचों की संख्या बढ़ाए जाने की अटकलों पर भी विराम लगा दिया है. STORY | BCCI eyes Mar 10-May 15 IPL window next season amid heat concerns: Devajit Saikia In its bid to beat the extreme May heat in most parts of the country, the BCCI is contemplating an early start to the IPL, eyeing a March 10-May 15 window for future editions starting next… https://t.co/3oKYr3Vso5 — Press Trust of India (@PTI_News) June 18, 2026 आईपीएल 2027 को लेकर बोर्ड का खास प्लान इस साल 29 मार्च से 31 मई तक चले आईपीएल के दौरान आखिरी दौर (15 मई के बाद) में देश के कई हिस्सों में मौसम ने बड़ी चुनौती खड़ी की. एक तरफ जहां प्री-मानसून बारिश का साया रहा, वहीं दूसरी तरफ अत्यधिक गर्मी और उमस ने खिलाड़ियों और स्टेडियम पहुंचने वाले प्रशंसकों को बेहाल कर दिया. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए बीसीसीआई ने कमर कस ली है. बोर्ड के गेम डेवलपमेंट जनरल मैनेजर को एक नई और सुरक्षित ‘विंडो’ तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. मकसद साफ है कि टूर्नामेंट को मई के बीच तक समेट लिया जाए, ताकि प्लेऑफ और फाइनल जैसे हाई-प्रोफाइल मुकाबले सुहावने मौसम में स्पोर्ट्से जा सकें. बीसीसीआई इस नए बदलाव को आईपीएल 2027 से लागू करने की योजना बना रहा है. IPL में मैचों की संख्या बढ़ाने पर BCCI का फैसला आईपीएल में मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 होने की अटकलें अब खत्म हो चुकी हैं. संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया है कि मैचों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. इसके पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का व्यस्त शेड्यूल और विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता है. बीसीसीआई अन्य क्रिकेट बोर्ड्स की द्विपक्षीय सीरीज (Bilateral Series) के समय को प्रभावित किए बिना टूर्नामेंट का आयोजन करना चाहता है, इसलिए मौजूदा फॉर्मेट को ही बरकरार रखा गया है. क्या होगा बदलाव का असर अगर आईपीएल को दो महीने से भी कम समय (लगभग 65 दिन) में समेटना है और मैच 74 ही रखने हैं, तो बीसीसीआई को शेड्यूल में कुछ बदलाव करने होंगे. देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए टूर्नामेंट के शुरुआती और मध्य दौर में ‘डबल हेडर’ (एक दिन में दो मैच) की संख्या को बढ़ाया जाएगा. इसे भी पढ़े- गली क्रिकेट से ग्लोबल स्टेज तक, 17 जून 2026 को जब इन उभरते सितारों ने लिया करियर का पहला विकेट The post IPL 2027 में होने जा रहा है बड़ा बदलाव, तारीखों से लेकर मैचों की संख्या पर आया BCCI का फाइनल फैसला appeared first on Naya Vichar.

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Batwara 1947 Teaser: नफरत के बीच उम्मीद की रोशनी बने सनी देओल, टीजर में दिखीं प्रीति जिंटा-शबाना आजमी

Batwara 1947 Teaser: साल 2026 की चर्चित फिल्मों में शामिल ‘बंटवारा 1947’ को लेकर दर्शकों के बीच लगातार उत्साह बना हुआ है. फिल्म के मोशन पोस्टर और किरदारों के लुक सामने आने के बाद से ही इसकी चर्चा तेज हो गई थी. अब मेकर्स ने फिल्म का टीजर जारी कर दिया है, जिसने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है. टीजर में दिखी आजादी और बंटवारे की भावुक कहानी रिलीज हुए टीजर में हिंदुस्तान की आजादी और 1947 के विभाजन के दौर की झलक दिखाई गई है. यह वह समय था जब देश ने स्वतंत्रता हासिल की, लेकिन साथ ही लाखों लोगों को बिछड़ने और दर्द का सामना भी करना पड़ा. टीजर में कई इमोशनल सीन, दमदार डायलॉग्स और दिल को छू लेने वाले बैकग्राउंड म्यूजिक के जरिए उस दौर की चुनौतियों और संघर्ष को दिखाने की कोशिश की गई है. कहानी एक ऐसे साहसी किरदार के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है, जो मुश्किल हालात में भी मानवता और हिम्मत का साथ नहीं छोड़ता. View this post on Instagram A post shared by Aamir Khan Productions (@aamirkhanproductions) फिल्म में नजर आएंगे कई बड़े सितारे ‘बंटवारा 1947’ में बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे. फिल्म में शबाना आजमी, सनी देओल, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार शामिल हैं. इस फिल्म के जरिए निर्देशक राजकुमार संतोषी और सनी देओल की लंबे समय बाद एक साथ वापसी भी हो रही है. ए.आर. रहमान के संगीत से सजेगी फिल्म फिल्म का निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी ने इसका निर्देशन किया है. वहीं, फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है और गीतों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं. आमिर खान और अपर्णा पुरोहित द्वारा निर्मित यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी. यह भी पढ़ें- Cocktail 2 First Review: रिलीज से पहले सामने आया ‘कॉकटेल 2’ का पहला रिव्यू, जानें फिल्म को मिले कितने स्टार The post Batwara 1947 Teaser: नफरत के बीच उम्मीद की रोशनी बने सनी देओल, टीजर में दिखीं प्रीति जिंटा-शबाना आजमी appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड राज्यसभा चुनाव: विधानसभा में मतदान जारी, एनडीए ने किया जीत का दावा

Jharkhand Rajya Sabha Election: रांची स्थित झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार 18 जून 2026 को मतदान जारी है. मतदान को लेकर नेतृत्वक गतिविधियां तेज हैं और सभी दलों के विधायक निर्धारित समय पर विधानसभा पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. बीजेपी के विधायक बस से विधानसभा पहुंचे और मतदान में हिस्सा लिया. विधानसभा के कमरा नंबर 42 में मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है. हिंदुस्तानीय लोकतंत्र की यही खूबी है कि सत्ता की लड़ाई भी कतार में खड़े होकर बैलेट से तय होती है, हालांकि जीत का दावा हर दल मतदान से पहले ही कर देता है. परिमल नथवानी ने किया जीत का दावा राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार परिमल नथवानी भी विधानसभा पहुंचे और जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त है और उन्हें अपनी जीत का पूरा विश्वास है. नथवानी ने कहा कि सभी आवश्यक समर्थन उनके पक्ष में है और परिणाम सकारात्मक होंगे. रागिनी सिंह बोलीं, जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त झरिया से बीजेपी विधायक रागिनी सिंह ने भी मतदान के दौरान कहा कि पार्टी की स्थिति मजबूत है और वे जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं. उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी विधायक एकजुट हैं और गठबंधन के पक्ष में माहौल है. जेडीयू विधायक बोले, मेरा वोट सुरक्षित है जेडीयू विधायक ने मतदान के बाद कहा कि उनका वोट पूरी तरह सुरक्षित है और उन्होंने किसी प्रकार के दबाव या दूसरी बातों पर ध्यान नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उन्होंने अपने विवेक के अनुसार मतदान किया है. पूर्णिमा साहू और राज सिन्हा ने जताया भरोसा पूर्वी जमशेदपुर की विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि एनडीए के आंकड़े पूरी तरह सुरक्षित हैं और गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत तय है. वहीं धनबाद विधायक राज सिन्हा ने मतदान के बाद कहा कि वे अभी से अपनी जीत को लेकर बधाई दे रहे हैं. उनके अनुसार, एनडीए के पक्ष में पर्याप्त समर्थन मौजूद है और परिणाम उनके पक्ष में आएंगे. कमरा नंबर 42 में चल रही मतदान प्रक्रिया झारखंड विधानसभा के कमरा नंबर 42 में मतदान की प्रक्रिया जारी है. बीजेपी विधायक प्रदीप प्रसाद ने मतदान किया. वरिष्ठ बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इसके अलावा बीजेपी विधायक शशिभूषण मेहता, जेडीयू विधायक सरयू राय और धनबाद विधायक राज सिन्हा ने भी मतदान किया. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव से पहले एनडीए ने दिखाई ताकत, होटल रेडिशन ब्लू से 24 विधायकों की तस्वीर जारी एनडीए के सभी विधायकों ने डाला वोट नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी भी मतदान कक्ष पहुंचे और चुनाव प्रक्रिया का जायजा लिया. एनडीए के सभी विधायकों ने मतदान कर दिया है. मतदान के दौरान गठबंधन के नेताओं और विधायकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला. अब सभी की निगाहें मतगणना और अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि नेतृत्व में जीत की घोषणा पहले और आधिकारिक मुहर बाद में लगती है. इसे भी पढ़ें: झारखंड राज्यसभा चुनाव के लिए रांची में हाई अलर्ट, सादे लिबास में घूम रहे स्पेशल ब्रांच के कर्मचारी The post झारखंड राज्यसभा चुनाव: विधानसभा में मतदान जारी, एनडीए ने किया जीत का दावा appeared first on Naya Vichar.

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