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Author name: Vinod Jha

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पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल

कभी-कभी इतिहास में कोई एक साल ऐसा आता है, जिसके असर को समझे बिना आने वाले दशकों की नेतृत्व समझना मुश्किल हो जाता है. पाकिस्तान के मामले में वह साल था- 1979 एक ही साल में तीन बड़े घटनाक्रम हुए- सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में सैनिक भेजे. ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई. मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर हथियारबंद लोगों ने कब्जा कर लिया. इन तीनों घटनाओं का आपस में सीधा संबंध नहीं था. लेकिन इनका असर उस समय के मुस्लिम विश्व, शीत युद्ध (cold war) और दक्षिण एशिया की नेतृत्व पर पड़ा. खासकर अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप ने पाकिस्तान को अमेरिका, सऊदी अरब और अफगान मुजाहिदीन के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कड़ी बना दिया. यहीं से वह प्रक्रिया तेज हुई, जिसमें ‘जिहाद’ की धार्मिक अवधारणा को राज्य की सुरक्षा और विदेश नीति के उद्देश्यों से जोड़ने की कोशिश की गई. पाकिस्तान पर मेरी किताब पढ़ें यहां से 1979: जब अफगानिस्तान शीत युद्ध का नया मैदान बना दिसंबर 1979 के आखिर में सोवियत सैनिक अफगानिस्तान में दाखिल हुए. सोवियत नेतृत्व काबुल की कम्युनिस्ट प्रशासन को बचाए रखना चाहता था और उसे डर था कि अफगानिस्तान में चल रहा विद्रोह उसके लिए रणनीतिक खतरा बन सकता है. अमेरिकी विदेश विभाग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, सोवियत सेना ने दिसंबर के अंत में अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर प्रवेश किया और काबुल समेत महत्वपूर्ण इलाकों पर नियंत्रण स्थापित किया. अमेरिका के लिए यह सिर्फ अफगानिस्तान की कहानी नहीं थी. यह Cold War था. वॉशिंगटन के सामने सवाल था- क्या सोवियत संघ से सीधे भिड़ा जाए? या फिर- ऐसी ताकत तैयार की जाए जो अफगानिस्तान में सोवियत सेना को लगातार चुनौती देती रहे? अमेरिका ने दूसरा रास्ता चुना. यहीं से शुरू हुआ वह गुप्त अभियान, जिसे बाद में Operation Cyclone के नाम से जाना गया. अमेरिका का पैसा, पाकिस्तान की ISI और अफगान मुजाहिदीन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. अमेरिका ने अफगानिस्तान में सीधे अपनी सेना उतारकर सोवियत संघ से युद्ध नहीं किया. उसने अफगान विद्रोहियों को समर्थन देने का रास्ता अपनाया. CIA के ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि जुलाई 1979 में ही अमेरिकी प्रशासन ने अफगान विद्रोहियों के लिए गुप्त सहायता को मंजूरी दी थी- यानी सोवियत सेना के बड़े पैमाने पर प्रवेश से पहले ही. शुरुआती सहायता सीमित थी, लेकिन बाद में यह अभियान काफी बड़ा हुआ. और यहां पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई. ISI यानी Inter-Services Intelligence अफगान लड़ाकों और बाहरी सहायता के बीच प्रमुख माध्यम बनी. सरल भाषा में समझें- अमेरिका → धन और हथियारों का समर्थन सऊदी अरब → आर्थिक और वैचारिक समर्थन पाकिस्तान/ISI → प्रशिक्षण, वितरण और नेटवर्किंग में प्रमुख भूमिका अफगान मुजाहिदीन → सोवियत सेना के खिलाफ लड़ाई इस व्यवस्था ने पाकिस्तान को अचानक ऐसी रणनीतिक अहमियत दे दी, जो 1979 से पहले उसके पास इस स्तर पर नहीं थी. पाकिस्तान को क्या मिला? सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं रहा. वह Cold War की एक frontline state बन गया. अफगान सीमा के पास प्रशिक्षण शिविर, शरणार्थी शिविर, हथियारों की आवाजाही और विभिन्न militant factions के बीच नेटवर्क विकसित होने लगे. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से स्वयंसेवक भी अफगान युद्ध में शामिल होने पहुंचे. यहीं एक नया बदलाव आया. स्थानीय युद्ध धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप लेने लगा. धर्म, भू-नेतृत्व, पैसा, हथियार और anti-Soviet नेतृत्व एक ही संघर्ष में मिल गए. यही वह ecosystem था जिसने आगे चलकर transnational jihadist networks के लिए जमीन तैयार की. लेकिन क्या अमेरिका ने ‘अल-कायदा’ बनाई थी? यहां इतिहास को बहुत सरल बनाकर देखने से बचना जरूरी है. यह कहना सही नहीं होगा कि CIA ने सीधे अल-कायदा बनाई. अफगान जिहाद के दौरान विभिन्न देशों और संगठनों से आए लड़ाकों के अलग-अलग नेटवर्क बने. अल-कायदा का गठन 1988 के आसपास हुआ, जब सोवियत-अफगान युद्ध अपने अंतिम चरण में था. इसलिए ज्यादा सटीक बात यह है कि- अफगान जिहाद के लिए बनाया गया अंतरराष्ट्रीय militant ecosystem बाद में उन नेटवर्कों के लिए महत्वपूर्ण आधार बना, जिनमें अल-कायदा भी शामिल थी. यानी यह कहानी किसी एक संस्था की बनाई हुई योजना से ज्यादा कई नेटवर्कों, विचारधाराओं और राज्य-हितों के मिलन की कहानी है. मदरसों और विचारधारा की भूमिका युद्ध सिर्फ बंदूक से नहीं लड़ा जाता. उसके लिए कहानी और विचारधारा भी चाहिए. अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान में धार्मिक संस्थानों और मदरसों की भूमिका बढ़ी. सऊदी अरब से आने वाली धार्मिक और आर्थिक सहायता ने भी इस प्रक्रिया को प्रभावित किया. Brookings के अनुसार, 1970 के दशक से पाकिस्तान के Ahl-e-Hadith और Deobandi मदरसों में सऊदी प्रभाव और निजी वित्तीय सहायता बढ़ी थी. अफगान मुजाहिदीन को प्रशिक्षित करने वाले कई मदरसे इसी व्यापक नेटवर्क से जुड़े थे. यहां एक और सावधानी जरूरी है. हर मदरसा militant training center नहीं था और न ही हर धार्मिक छात्र militant बना. लेकिन कुछ संस्थानों, संगठनों और militant networks के बीच जो संबंध विकसित हुए, उन्होंने पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र की नेतृत्व पर लंबे समय तक असर डाला. उधर ईरान में हो रही थी इस्लामिक क्रांति 1979 का दूसरा बड़ा घटनाक्रम था ईरानी क्रांति. अयातुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में राजशाही समाप्त हुई और इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हुई. इसका संदेश पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण था- धार्मिक विचारधारा सिर्फ सामाजिक या आध्यात्मिक शक्ति नहीं; वह नेतृत्वक सत्ता को भी चुनौती दे सकती है. हालांकि ईरान की क्रांति शिया नेतृत्वक आंदोलन की अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से निकली थी और इसे अफगान जिहाद या सुन्नी militant networks के साथ सीधे जोड़ना गलत होगा. लेकिन इसने पूरे पश्चिम एशिया और मुस्लिम दुनिया में धर्म और नेतृत्व के संबंध पर बहस को जरूर बदल दिया. और फिर मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर हमला 20 नवंबर 1979 को हथियारबंद लोगों ने मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा कर लिया. यह घटना सऊदी शासन के लिए बेहद बड़ा झटका थी. सऊदी नेतृत्व को यह एहसास हुआ कि कट्टर धार्मिक विचारधारा केवल विदेश नीति का साधन नहीं है- वह खुद सत्ता के लिए चुनौती भी बन सकती है. इसके बाद सऊदी धार्मिक नीति और वैश्विक धार्मिक प्रभाव को लेकर कई बदलाव हुए. पाकिस्तान में धार्मिक संस्थानों को मिलने वाली सऊदी सहायता का इतिहास हालांकि 1979 से पहले का भी है और 1980 के दशक के अफगान जिहाद

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एक्सप्लेनर : हाजीपुर में ठेकेदार हत्याकांड की पूरी कहानी, शूटरों ने 10 सेकेंड में मारी थी 5 गोलियां, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ?

Hajipur Contractor Murder Case :  हाजीपुर में गुरुवार को सुबह सुबह कंस्ट्रक्शन ठेकेदार राम नरेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बाइक से आए 5 शूटरों ने महज 10 सेकेंड में ठेकेदार पर पांच गोलियां बरसाई. इस घटना में मौके पर ही ठेकेदार की मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. बीते गुरुवार को पूरे दिन इलाके में पुलिस की तैनाती रही. पुलिस ने मात्र कुछ ही घंटे में एक नामजद आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया. आइए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या क्या हुआ? क्या है पूरा मामला दरअसल, पूरा मामला हाजीपुर जिला के सदर थाना क्षेत्र के दिग्घी नया टोला का है. जहां गुरुवार की सुबह अपराधियों ने कंस्ट्रक्शन ठेकेदार राम नरेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी. अपराधियों ने ठेकेदार को नजदीक से ताबड़तोड़ पांच गोलियां मारीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए एक नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. सुबह टहलने निकले थे ठेकेदार, तभी पहुंच गए हमलावर बता दें कि, रामनरेश राय रोजाना की तरह गुरुवार की सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे. आम दिनों में उनके साथ करीब पांच से छह लोग भी सुबह की सैर पर रहते थे, लेकिन गुरुवार को वह अकेले ही निकले थे. इसी दौरान दिग्घी नया टोला इलाके में बाइक सवार अपराधी उनके पास पहुंचे. बाइक रोककर उनसे बातचीत करते दिखाई देते हैं. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया. कुछ पल की बातचीत के बाद भागने लगे रामनरेश राय CCTV फुटेज में दिखाई दे रही गतिविधियों के मुताबिक बाइक सवार अपराधियों और रामनरेश राय के बीच कुछ देर बातचीत हुई. इसके बाद ठेकेदार को खतरे का अंदाजा हुआ और उन्होंने वहां से भागने की कोशिश की. ठेकेदार जंगल की ओर भागे और बाइक पर पीछे बैठे दो अपराधी नीचे उतरे और रामनरेश राय का पीछा करने लगे. दोनों उनका पीछा करते हुए पास के जंगल की तरफ पहुंचे. इसी दौरान ठेकेदार पर गोलियां चलाई गईं. View on Instagram 10 सेकेंड में पांच गोलियां, मौके पर ही मौत हमलावरों ने बेहद नजदीक से रामनरेश राय को निशाना बनाया. बताया जा रहा है कि करीब 10 सेकेंड के भीतर उन पर पांच गोलियां चलाई गईं. गोलियां लगने के बाद ठेकेदार की मौके पर ही मौत हो गई. वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी वहां से फरार हो गए. सुबह के समय हुई इस हत्या के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. आसपास के लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई. CCTV फुटेज बनी पुलिस जांच की अहम कड़ी घटनास्थल के पास लगे CCTV कैमरों में वारदात से पहले की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं. फुटेज में बाइक सवार संदिग्धों का ठेकेदार के पास पहुंचना, बातचीत करना और फिर उनका पीछा करना दिखाई दे रहा है. पुलिस CCTV फुटेज के साथ तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का आधार बना रही है. फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान और घटना में उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है. घर में माता-पिता के साथ रहते थे रामनरेश राय रामनरेश राय कंस्ट्रक्शन का काम करते थे और दिग्घी कला में अपने माता-पिता के साथ रहते थे. उनकी पत्नी रेखा देवी पटना में रहकर अपने इकलौते बेटे की पढ़ाई-लिखाई संभाल रही हैं. ठेकेदार की हत्या की समाचार मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. अचानक हुई हत्या से इलाके के लोग भी सकते में हैं. View on Instagram पत्नी के बयान पर तीन नामजद और चार अज्ञात पर केस मामले में मृतक की पत्नी रेखा देवी के बयान पर सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. FIR में तीन नामजद आरोपियों के अलावा चार अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी सहदेव राय को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके बयानों के आधार पर दूसरे आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है. जमीन विवाद और रंगदारी की मांग को हत्या की वजह बताया प्राथमिकी में हत्या की वजह जमीन विवाद और रंगदारी की मांग से जुड़ी बताई गई है. रेखा देवी के अनुसार, दिग्घी कला स्थित कुमहिया पोखर के पास परिवार की करीब 55 डिसमिल निजी जमीन है. इसी जमीन पर राम बाबू राय वेयर हाउस के नाम से गोदाम संचालित है. बताया गया है कि यह गोदाम एनबीएचसी कॉरपोरेशन के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र स्थित विजय फ्लावर मिल्स को किराये पर दिया गया है. यहां खाद्य सामग्री से जुड़े वाहनों का आवागमन होता है. परिजनों का आरोप है कि इसी जमीन और गोदाम को लेकर आरोपियों की ओर से रंगदारी की मांग की जा रही थी. हालांकि, इन आरोपों और हत्या के वास्तविक कारण की पुलिस जांच अभी जारी है. View on Instagram मई में भी धमकी देने का लगाया गया आरोप रेखा देवी के बयान के अनुसार, सहदेव राय की ओर से मई महीने में भी धमकी दी गई थी. आरोप है कि 1 और 2 मई को सहदेव राय ने गोदाम के प्रबंधक और किरायेदार के मोबाइल फोन पर कॉल कर वाहनों के आने-जाने पर रोक लगाने की मांग की थी. परिजनों का आरोप है कि मांग नहीं मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी. परिवार के अनुसार, इस मामले को लेकर रामनरेश राय ने मई में ही सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने कुछ ही घंटे में एक आरोपी को दबोचा हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेजी से शुरू की. CCTV फुटेज, प्राथमिकी में दर्ज आरोपों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कुछ ही घंटे में नामजद आरोपी सहदेव राय को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश कैसे रची गई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों का आरोपियों से क्या संबंध है. View on Instagram बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी सहदेव राय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब दूसरे नामजद और अज्ञात आरोपियों तक पहुंचने पर केंद्रित है. पुलिस संभावित

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सुबह-सुबह शेयर बाजार का मूड खराब, सेंसेक्स 300+ अंक गिरा, निफ्टी 24400 के नीचे

शुक्रवार को हिंदुस्तानीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 75 अंक से अधिक नीचे फिसल गया. बाजार में बिकवाली का दबाव दिखा और निफ्टी 24,400 के स्तर से नीचे आ गया. सुबह कारोबार के दौरान BSE Sensex 316.95 अंक यानी 0.41 फीसदी गिरकर 77,763.01 पर पहुंच गया. वहीं NSE Nifty 50 75.45 अंक यानी 0.31 फीसदी की गिरावट के साथ 24,320.40 पर कारोबार कर रहा था. बाजार में गिरावट की वजह क्या है? Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा है. निफ्टी 23,800 से 24,400 के बीच बना हुआ है और अभी ऐसा कोई मजबूत कारण नहीं दिख रहा, जिससे यह इस दायरे से ऊपर निकले या नीचे जाए. उनके मुताबिक, अभी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गतिविधि देखने को मिल रही है. वहीं लंबे समय के नजरिए से चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर बैंकों में खरीदारी का मौका बन सकता है. कच्चे तेल का बाजार पर कितना असर? बाजार में पहले तेजी की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच संभावित डील नहीं होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई. इससे निफ्टी की 24,400 के ऊपर जाने की उम्मीद को झटका लगा. हालांकि अब कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, जो शेयर बाजार के लिए राहत की बात है. Brent crude: 87.14 डॉलर प्रति बैरल Crude oil: 81.42 डॉलर प्रति बैरल वीके विजयकुमार ने कहा कि FPI की बिकवाली की रफ्तार कम हुई है और हाल में वे खरीदार भी बने हैं, लेकिन FII की गतिविधियों से बाजार में अभी कोई साफ ट्रेंड सामने नहीं आया है. ये भी पढ़ें: क्रूड ऑयल में फिर गिरावट, 2% से ज्यादा लुढ़का भाव, ईरान-ओमान की डील पर सबकी नजर अमेरिकी बाजार के संकेत कैसे रहे? दिलचस्प बात यह है कि हिंदुस्तानीय बाजार की कमजोरी के बावजूद अमेरिकी बाजार से संकेत सकारात्मक रहे. शुक्रवार को Dow Jones Futures 0.09 फीसदी ऊपर 53,886.07 पर था. S&P 500 Futures 0.65 फीसदी चढ़कर 7,798.99 और Nasdaq Futures 0.81 फीसदी बढ़कर 26,803.03 पर पहुंच गया. यानी ग्लोबल संकेत पूरी तरह कमजोर नहीं थे, लेकिन घरेलू बाजार पर कच्चे तेल और सीमित दायरे में कारोबार का दबाव बना रहा. सोने की कीमत भी क्यों फिसली? सोने की कीमत में भी शुक्रवार को दबाव देखने को मिला. यह 10 हफ्ते के ऊंचे स्तर से नीचे आया, हालांकि लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की राह पर बना हुआ है. Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीद कम हुई है. जुलाई के PPI आंकड़े भी उम्मीद से नरम रहे. फिलहाल सितंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब एक-तिहाई मानी जा रही है. आगे अमेरिका के रोजगार आंकड़े, फेड चेयर केविन वार्श के जैक्सन होल भाषण और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम सोने और कच्चे तेल की दिशा तय करने में अहम रहेंगे. रिपोर्टिंग के समय सोना 22.97 डॉलर यानी 0.53 फीसदी गिरकर 4,326.58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था. ये भी पढ़ें: बाजार की सुबह रही फीकी, सेंसेक्स 93 अंक लुढ़का, निफ्टी 72 पॉइंट्स डाउन The post सुबह-सुबह शेयर बाजार का मूड खराब, सेंसेक्स 300+ अंक गिरा, निफ्टी 24400 के नीचे appeared first on Naya Vichar.

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चमोली टनल हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत, पांच घायलों का अस्पताल में चल रहा इलाज

बिपिन की रिपोर्ट Uttarakhand Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली टनल हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है. मरनेवालों में दो मजदूर झारखंड के हैं. टीएचडीसी द्वारा निर्माणाधीन विष्णुगढ़ पीपलकोटि जल विद्युत परियोजना की गुरुवार की शाम करीब सात बजे अचानक सुरंग में भू-धंसाव होने से कई मजदूर अंदर फंस गए थे. रात भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में 21 लोगों को बाहर निकाला जा सका है. सुरंग हादसे में 21 मजदूर रेस्क्यू बीती रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के सीएम से फोन पर बात कर जानकारी ली थी. साथ ही हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया था. सीएम पुष्कर सिंह धामी भी हालात पर नजर रखे हुए हैं. सुरंग में भू धंसाव होने से काफी मात्रा में मलवा आ गया था जिससे राहत कार्य चलाने में परेशानी हो रही है. राज्य आपातकालीन सेवा के ड्यूटी ऑफिसर अनिल काला ने बताया कि अभी तक कुल 21 मजदूर रेस्क्यू कर लिए गए हैं, जिनमें 7 की मौत की पुष्टि हो गयी है, जबकि 14 मजदूरों का इलाज उत्तराखंड के गोपेश्वर जिला अस्पताल में चल रहा है. हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत झारखंड से जिनकी मौत हुई है, उनमें 28 वर्षीय विजय कुमार और दूसरे मजदूर का नाम जितेंद्र कुमार का नाम शामिल है. कुछ मजदूरों के अभी भी टीआरटी टनल के अंदर फंसे होने की बात कही जा रही है. अस्पताल में भर्ती मजदूरों को हल्की तो कुछ को गंभीर चोटें आई हैं. मृतकों का विवरण विजय कुमार, उम्र 28 वर्ष, झारखंड जितेंद्र कुमार, उम्र ज्ञात नहीं, झारखंड यह भी पढ़ें: चमोली सुरंग हादसा: सात लोगों की मौत, कई घायल, रेस्क्यू जारी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराये गये कर्मचारियों का विवरण हाबिल गुडिया, पिता रेजन गुडिया, उम्र-27 वर्ष, गांव तपरा कमड़ा थाना तपकरा, जिला खूंटी निस्तर भिगंरा, पिता-राफेल भिगरां उम्र-24 वर्ष, पायरा किन्सू-टोली, थाना-तपकरा जिला खूंटी विनोद रावना, पिता- तुनिया रवाना, उम्र-46 वर्ष, गुमला दीना बेगरा, पिता-श्री केला बैगरा, उम्र-26 वर्ष, श्रोने थाना तोरपा जिला खूंटी स्पोर्ट्सा राम बिसरा, पिता श्री मोनसा बिसरा, उम्र-22 वर्ष, थाना डुमरिया, पूर्वी सिंहभूम ये भी पढ़ें: चमोली में भारी बारिश के बाद HCC टनल में अचानक घुसा पानी, 18 मजदूर बचाए गए; राहत-बचाव कार्य जारी The post चमोली टनल हादसे में झारखंड के दो मजदूरों की मौत, पांच घायलों का अस्पताल में चल रहा इलाज appeared first on Naya Vichar.

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बिहार : स्कूल बढ़े पर 38.5% ही 12वीं तक पहुंचे, पढ़ाई छोड़कर कहां जा रहे हैं बच्चे?

Bihar Education System: बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर UDISE 2025-26 रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि बिहार में प्रशासनी स्कूलों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन बड़ी संख्या में स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं और स्कूल से शिशु काफी संख्या में ड्रॉपआउट कर रहे हैं. पहले की तुलना में स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ हद तक सही हुआ, लेकिन अभी भी कई स्कूलों के अपने भवन नहीं हैं. शिक्षकों की संख्या कुछ स्कूलों में सही है लेकिन कई ऐसे हैं जहां अभी भी कमी है. स्थिति ऐसी है कि एक शिक्षक के भरोसे सैकड़ों शिशु हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि माध्यमिक स्तर तक पहुंचने वाले बच्चों में सिर्फ 38.5 प्रतिशत ही 12वीं तक पहुंच पाते हैं. काफी संख्या में शिशु ड्रॉपआउट कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर स्कूल तक बच्चों के नहीं पहुंचने और ड्रॉपआउट करने की वजह क्या हो सकती है? स्कूल के बच्चों की तस्वीर बच्चों के स्कूल छोड़ने पर क्या कहना है जानकारों का? पूर्व आईएएस अधिकारी और बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश का कहना है कि जिस तरह से स्कूलों में बच्चों को नियमित तरीके से मिड डे मील, साइकिल, कपड़े और किताब उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ठीक वैसे ही पढ़ाई पर भी फोकस करने की जरूरत है. ऐसा नहीं होने से शिशु स्कूल छोड़ रहे. ऐसे में नॉन-एकेडमिक चीजों पर भी ध्यान दिया जा सकता है. रोचक तरीके से बच्चों के स्कूल जाने के लिए प्ररित किए जाने की जरूरत है. आगे उन्होंने यह भी बताया कि शैक्षणिक आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में व्यवस्था नहीं की गई. स्कूलों में अगर रीजनल लैंग्वेज यानी कि बच्चों की जो अपनी भाषा है उसी में पढ़ाई (जैसे कि- भोजपुरी, मैथिली, मगही या अन्य) में की जाए तो शिशु स्कूल में टिके रह सकते हैं. इसके साथ ही स्कूलों में गांव के स्पोर्ट्सों को भी शामिल किए जाने की जरूरत है. उनका यह भी कहना है कि कई स्कूलों में लैब की स्थिति सही नहीं है. कुछ स्कूलों में कंप्यटर लैब नहीं है और जहां हैं वहां बच्चों को पढ़ाया नहीं जा रहा है. लैब में कंप्यूटर ऐसे ही पड़े हैं. इस तरह से पढ़ाई पर फोकस और कई तरह के स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के आयोजन करने से भी बच्चों के ड्रॉपआउट को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसी तरह से एएन सिन्हा इंस्टीच्यूट के पूर्व निदेशक डीम दिवाकर ने प्रशासनी स्कूलों में बच्चों के नहीं पहुंचने की कई वजहें बताईं. उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जो शिक्षक हैं उनमें प्रशिक्षण का अभाव, अरुचिकर पाठ्यक्रम, शिक्षकों को कई अन्य काम में शामिल करना, बीईओ और डीईओ की उदासीनता और उनमें पारदर्शिता की कमी, संवेदनशील प्रशासन का अभाव, तकनीकी प्रशासन पर अधिक जोर, प्रशासनी सेवक और शिक्षक के बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में नामांकन, साईकिल पोशाक, पुस्तक प्रकाशन और वितरण में व्याप्त भ्रष्टाचार, अकुशल शिक्षकों की नियुक्ति, निष्ठावान शिक्षकों पर भरोसा की कमी, नौकरशाही का प्रभुत्व समेत कई कारण हो सकते हैं, जिसकी वजह से प्रशासनी स्कूलों की यह स्थिति है. प्रशासनी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम अब भी सपना बिहार के केवल 8,892 स्कूलों यानी करीब 11.6% स्कूलों में ही स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध हैं. यानी करीब 88% स्कूल अभी भी स्मार्ट बोर्ड की सुविधा से बाहर हैं. लेकिन बिहार के प्रशासनी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और तकनीक आधारित शिक्षा को लेकर प्रशासन लगातार जोर दे रही है. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक, डिजिटल बोर्ड, ई-कंटेंट और ऑनलाइन मॉड्यूल के बाद अब AI आधारित लाइव स्मार्ट क्लास की भी शुरुआत की गई है. धीरे-धीरे राज्य के ज्यादातर प्रशासनी स्कूलों में मॉडर्न सुविधाएं होंगी. मिथिलेश तिवारी ने की थी 7900 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग बिहार में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने केंद्र से मदद मांगी थी. शिक्षा मंत्री ने केंद्र से 7,900 करोड़ रुपये के विशेष शिक्षा पैकेज की मांग की थी. जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी इंप्लीटेशन और बिहार की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह मांग की गई. नई दिल्ली के आईसीएआर सभागार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में दो दिवसीय प्रगति समीक्षा बैठक हुई थी. बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मांग रखते हुए कहा था कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए केंद्र के विशेष सहयोग की आवश्यकता है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को समय से हासिल करने के लिए आधारभूत संरचना, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश की जरुरत है. आगे उन्होंने माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के भवनों, अतिरिक्त कक्षाओं, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों आदि के विकास के लिए 3000 करोड़ रुपये की विशेष केंद्रीय सहायता मांगी थी. आकांक्षी जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, स्मार्ट क्लास आदि को मजबूत करने के लिए 2000 करोड़ रुपये का अनुरोध किया था. डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1000 करोड़ रुपये की सहायता की मांग और संस्कृत शिक्षा के सुदृढ़ीकरण पर भी बिहार प्रशासन ने विशेष जोर दिया था. सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री प्रशासन के सामने ये है चुनौती बिहार प्रशासन की तरफ से छात्रों और युवाओं के लिए कई जरूरी योजनाओं के ऐलान किए गए हैं. इसमें स्मार्ट क्लासरूम से लेकर एआई ट्रेनिंग तक शामिल है. लेकिन ये सभी योजनाएं धरातल पर उतारना ही प्रशासन की बड़ी चुनौती मानी जा रही है. जानकारों का मानना है कि जिस तरह से प्रशासन बिहार की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की प्लानिंग कर रही है, अगर उसे सही तरीक से इंप्लीमेंट किया जाए तो काफी हज तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है. दूसरी तरफ UDISE के आंकड़ों को भी इग्नोर नहीं किया जा सकता है. आंकड़ों से साफ है कि शिशु शुरुआत में स्कूली शिक्षा ही सही तरीके से नहीं ले पा रहे हैं. खासकर बच्चों का ड्रॉपआउट करना बड़ा चिंता का विषय माना जा रहा है. ऐसे में बिहार प्रशासन अपनी योजनाओं के जरिए किस हद तक बच्चों को स्कूल जाने के लिए मोटिवेट और शिक्षा में सुधार कर पाती है, यह देखने वाली बात होगी. 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बिहार पंचायत चुनाव: परिसीमन के बाद ही तय होगी चुनाव की तारीख, जानिए कब तक हो सकता है मतदान

Panchayat Chunav : बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन चुनाव की तारीख को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक परिसीमन के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे. परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या में बदलाव हो सकता है. परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक साल लगने की संभावना है. ऐसे में इस साल चुनाव होने की संभावना नहीं दिख रही है. जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव अगले साल यानी 2027 के जुलाई-अगस्त से पहले संभव नहीं माना जा रहा है. पंचायतों के परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े पर होंगे. साथ ही इसी के अनुसार पंचायतों की सीमाओं और जनसंख्या से जुड़े बदलाव तय किए जाएंगे. पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम चल रहा फिलहाल राज्य में पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम चल रहा है. जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की मैपिंग के साथ कम्युनिकेशन प्लान भी तैयार किया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 8 अगस्त तक पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम पूरा किया जा चुका है. अब पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है. परिसीमन के बाद ही चुनाव की तस्वीर होगी साफ पंचायतों के परिसीमन को लेकर जारी हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार राजस्व ग्रामों की सीमाओं, जनसंख्या में अंतर और मानचित्रों से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर समय-सीमा तय कर दी गई है. इन कामों के पूरा होने के बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. परिसीमन के दौरान राजस्व ग्रामों की वास्तविक स्थिति और जनसंख्या के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा. इसके साथ ही नक्शे में दर्ज नहीं होने या सीमा से जुड़ी गड़बड़ियों को भी ठीक किया जाएगा. प्रशासन की कोशिश है कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को तय समय के भीतर पूरा किया जाए, ताकि आगे की चुनावी तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो. बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी इस संबंध में जल्द ही पूरी जानकारी जारी किए जाने की उम्मीद है. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले साल जुलाई-अगस्त से पहले पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा है. मुखिया की सीटों की संख्या में भी होगा बदलाव माना जा रहा है कि मुखिया की सीटों की संख्या भी बढ़ सकती है. इसमें करीब 60 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है. मौजूदा व्यवस्था में परिसीमन के लिए जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में मुखिया की कुल संख्या करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. जीआईएस मैपिंग से लेकर डेटाबेस तैयार करने तक का काम परिसीमन की तैयारी के लिए जीआईएस मैप की त्रुटियों को ठीक करने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. राजस्व ग्राम की जनसंख्या और मैप पर अंकित सीमाओं से जुड़ी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा रहा है. जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समेत कुल जनसंख्या का सटीक संकलन कर डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल पंचायतों की सीमाओं और परिसीमन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन की ऐतिहासिक स्थिति और जातिगत सर्वेक्षण 2022-2023 के आंकड़ों के बीच भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है. संबंधित अभिलेखों की प्रविष्टि सुनिश्चित करने पर भी काम चल रहा है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी निगरानी परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को सुचारु तरीके से लागू करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत कम्युनिकेशन प्लान तैयार किया जा रहा है. इसका मकसद अलग-अलग स्तर पर चल रहे काम की निगरानी और जरूरी निर्देशों को समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना है प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, प्रशासनिक अनुमोदन, सत्यापन और प्रकाशन से जुड़े सभी जरूरी अभिलेखों को क्रमबद्ध तरीके से तैयार किया जा रहा है. इससे परिसीमन की प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी. उम्मीदवारों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी इसके बावजूद संभावित उम्मीदवारों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. गांवों में लोगों से संपर्क बढ़ाया जा रहा है. बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है. कई लोग अपनी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा कर रहे हैं. मुखिया बनने के लिए तैयार कर ले दस्तावेज अगर आप भी मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं तो दस्तावेज अभी से तैयार कर लें. नामांकन के समय कागजों की कमी परेशानी बढ़ा सकती है. आखिरी समय में प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भागदौड़ करनी पड़ सकती है.  जैसे- मतदाता सूची में नाम, प्रस्तावक का नाम, उम्र का प्रमाण, शपथ-पत्र, फोटो और पहचान पत्र, आरक्षित सीट है तो जाति प्रमाण-पत्र रखें, निवास प्रमाण-पत्र भी रखें. पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. यही वजह है कि फिलहाल चुनाव से ज्यादा जोर पंचायतों की सीमाओं, जनसंख्या के आंकड़ों और जीआईएस मैपिंग से जुड़ी तैयारियों को पूरा करने पर है. परिसीमन का काम अंतिम रूप लेने के बाद ही पंचायत चुनाव को लेकर अगली बड़ी तस्वीर सामने आएगी. Also Read: पटना: बेली रोड पर दौड़ने लगीं 10 नई इलेक्ट्रिक बसें, पीएम ई-बस योजना के पहले चरण में शुरू हुआ परिचालन The post बिहार पंचायत चुनाव: परिसीमन के बाद ही तय होगी चुनाव की तारीख, जानिए कब तक हो सकता है मतदान appeared first on Naya Vichar.

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महिला एशिया कप 2026 के लिए श्रीलंका टीम का ऐलान, चमारी अटापट्टू को मिली कप्तानी

Sri Lanka Women Asia Cup Team: आगामी एशिया कप के लिए श्रीलंका ने अपनी 15 सदस्यीय स्त्री टीम का ऐलान कर दिया है. डिफेंडिंग चैंपियन श्रीलंका इस बार भी खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगा. टीम की कमान अनुभवी ऑलराउंडर चमारी अटापट्टू के हाथों में रहेगी, जबकि हर्षिता समरविक्रमा उपकप्तान की भूमिका निभाएंगी. मिथाली अयोध्या की टीम में वापसी श्रीलंका की टीम में तेज गेंदबाज मिथाली अयोध्या की वापसी हुई है. अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाली अयोध्या ने कम समय में अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया है. 2026 स्त्री टी20 विश्व कप में उन्होंने चार विकेट हासिल किए थे और वह श्रीलंका की दूसरी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रही थीं. उनके प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है. देवमी विहंगा को पहली बार टी20 टीम में मौका लेग स्पिनर और ऑलराउंडर देवमी विहंगा को पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है. वह इससे पहले श्रीलंका की ओर से 12 वनडे मैच स्पोर्ट्स चुकी हैं. उनकी स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी करने की क्षमता टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगी. इसके अलावा गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत करने के लिए चेतना विमुक्ति की भी टीम में वापसी हुई है. इसे भी पढ़े- फ्लेमिंग के बाद कौन होगा CSK का नया कोच? धोनी को लेकर अश्विन ने बताया पूरा प्लान बल्लेबाजी में अटापट्टू और समरविक्रमा पर जिम्मेदारी श्रीलंका की बल्लेबाजी की अगुवाई कप्तान चमारी अटापट्टू और उपकप्तान हर्षिता समरविक्रमा करेंगी. इनके अलावा हसिनी परेरा, विष्मी गुणारत्ने और निलाक्षिका सिल्वा जैसे बल्लेबाज टीम को मजबूती देंगे. 17 वर्षीय संजना कविंदी को भी टीम में बरकरार रखा गया है. उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था. वहीं इमेशा दुलानी ने भी टीम में अपनी जगह बनाए रखी है. पाकिस्तान के खिलाफ उसी सीरीज में दुलानी ने शानदार शतक जड़कर इतिहास रचा था और वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक बनाने वाली श्रीलंका की केवल दूसरी स्त्री खिलाड़ी बनी थीं. चमारी अटापट्टू (कप्तान) ग्रुप बी में श्रीलंका के साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया और यूएई एशिया कप में श्रीलंका को ग्रुप बी में रखा गया है. इस ग्रुप में उसके साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की टीमें हैं. श्रीलंका अपने अभियान की शुरुआत 29 अगस्त को यूएई के खिलाफ करेगा. डिफेंडिंग चैंपियन होने के कारण श्रीलंका पर खिताब बचाने का दबाव भी होगा. अटापट्टू की अगुवाई में टीम का अनुभव और युवा खिलाड़ियों का उत्साह उसे एक बार फिर मजबूत दावेदार बनाता है. श्रीलंका की 15 सदस्यीय टीम चमारी अटापट्टू (कप्तान), मिथाली अयोध्या, कविशा दिलहारी, इमेशा दुलानी, विष्मी गुणारत्ने, काव्या कविंदी, संजना कविंदी, सुगंधिका कुमारी, कौशिनी नुथ्यांगना, हसिनी परेरा, चामुडी प्रभोदा, हर्षिता समरविक्रमा, निलाक्षिका सिल्वा, देवमी विहंगा और चेथना विमुक्ति. इसे भी पढ़े- विश्व कप के लिए तैयार है हिंदुस्तानीय स्त्री हॉकी टीम, गोलकीपर सविता पूनिया ने कहा- मैदान पर आत्मविश्वास से उतरेंगे The post स्त्री एशिया कप 2026 के लिए श्रीलंका टीम का ऐलान, चमारी अटापट्टू को मिली कप्तानी appeared first on Naya Vichar.

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एक साल में मिलेगी MA की डिग्री, IGNOU के इन 9 विषय के लिए फटाफट करें अप्लाई

IGNOU One Year MA Course: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने चार साल का ग्रेजुएशन कार्यक्रम (FYUP) पूरा कर चुके छात्रों के लिए एक साल का मास्टर्स डिग्री शुरू किया है. टोटल 9 विषय में एक साल की डिग्री ऑफर की जाएगी. IGNOU ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत ये पहल की, जिसका उद्देश्य है तेजी से पोस्टग्रेजुएट डिग्री कराना. इस कोर्स का फायदा उन कैंडिडेट्स को मिलेगा जो वर्किंग प्रोफेशनल हैं और डिग्री हासिल करके किसी अन्य नौकरी के लिए अप्लाई करना चाहते हैं. कब तक कर सकते हैं अप्लाई? इस प्रोग्राम के लिए आवेदन किए जा रहे हैं. अप्लाई करने की लास्ट डेट 16 अगस्त 2026 है. अप्लाई करने से पहले अपनी APAAR ID तैयार रखें. वहीं एलिजिबल कैंडिडेट्स नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर जाकर स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई कर सकते हैं. किन छात्रों को मिलेगा फायदा? ये कार्यक्रम खासतौर पर उन छात्रों के लिए हैं जिन्होंने Four-Year Undergraduate Programme (FYUP) पूरा किया है. इसके जरिए छात्र सिर्फ एक वर्ष में मास्टर्स डिग्री प्राप्त कर सकेंगे. IGNOU के अनुसार यह व्यवस्था NEP 2020 के तहत उच्च शिक्षा को अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक कदम है. ऑफिशियल रिकॉर्ड और साइन में नहीं हो पाएगा बदलाव IGNOU ने साफ किया है कि एक बार ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स, फोटो और साइन अपलोड हो जाने के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. संस्थान ने क्लियर किया है कि इन डिटेल्स को भरने से पहले अच्छी तरह से जांच लें. ये भी पढ़ें: सितंबर में होगी UPSC NDA NA परीक्षा, देखें पूरा शेड्यूल कौन-कौन से कोर्स शुरू किए गए हैं? IGNOU ने कुल 9 वन-ईयर मास्टर्स प्रोग्राम लॉन्च किए हैं- MA Economics MA Sociology MA History M Com MA Journalism & Mass Communication MA English MA Hindi MA Sanskrit MA Urdu इन प्रोग्राम्स की खास बातें FYUP ग्रेजुएट्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए. सिर्फ एक साल में मास्टर्स डिग्री पूरी करने का अवसर. NEP 2020 के अनुरूप लचीला और छात्र-केंद्रित मॉडल. मल्टीडिसिप्लिनरी और लर्नर-सेंट्रिक अप्रोच. UGC के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित. क्यों खास है यह पहल? नई शिक्षा नीति 2020 में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय मास्टर्स का प्रावधान किया गया है. इसी दिशा में IGNOU ने यह कदम उठाया है, जिससे छात्रों को कम समय में उच्च शिक्षा हासिल करने और करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. ये भी पढ़ें: UPSSSC Auditor और Assistant Accountant का फाइनल रिजल्ट जारी, ऐसे करें चेक The post एक साल में मिलेगी MA की डिग्री, IGNOU के इन 9 विषय के लिए फटाफट करें अप्लाई appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO: भरत तिवारी के परिवार को मिलेगी सरकारी नौकरी, जांच आयोग ने सौंपी रिपोर्ट, जानिए अब आगे क्या?

Bharat Tiwari Encounter : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब नया मोड़ सामने आया है. सीएम सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार को लेकर फैसला लिया है कि भरत तिवारी केे परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को प्रशासनी नौकरी दी जाएगी. वीडियो में सुनिए अब इस मामले में आगे क्या होगा? सीएम सम्राट का ऐलान भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में गठित जांच आयोग ने अपनी अंतरिम (इंटरिम) रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट सामने आने के बाद बिहार की सम्राट प्रशासन ने पीड़ित परिवार के हित में बड़ा फैसला लिया है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर लिखा, “न्यायिक जांच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार प्रशासन द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को प्रशासनी नौकरी प्रदान की जाएगी.” क्या है मामला बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में मौत हुई थी. पुलिस का कहना था कि भरत ने पुलिस टीम पर अवैध हथियार से हमला किया. इसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलाई गई. परिवार और कुछ ग्रामीणों ने इस कहानी पर सवाल उठाए और इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया था. The post VIDEO: भरत तिवारी के परिवार को मिलेगी प्रशासनी नौकरी, जांच आयोग ने सौंपी रिपोर्ट, जानिए अब आगे क्या? appeared first on Naya Vichar.

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“हम गर्मी से मर रहे हैं, तो आप भी पंखे में नहीं रहेंगे”, गुस्साए छात्रों ने काटी प्रिंसिपल रूम की बिजली

Behera College News: बहेड़ा महाविद्यालय, दरभंगा में बुधवार को डिग्री फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान भीषण गर्मी से परेशान परीक्षार्थियों ने जमकर हंगामा किया. जिस कमरे में परीक्षा ली जा रही थी, वहां पंखे की व्यवस्था नहीं होने के कारण परीक्षार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. गर्मी और उमस के बीच पसीने से बेहाल परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ने के बजाय व्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया. View on Instagram बिना पंखे के परीक्षा देने को मजबूर हुए परीक्षार्थी परीक्षार्थियों ने बताया कि जिस भवन में उनकी परीक्षा ली जा रही थी, वहां पंखे की व्यवस्था नहीं है. भीषण गर्मी के बीच बिना पंखे के परीक्षा देने में काफी परेशानी हो रही थी. पसीने के कारण परीक्षार्थियों का बुरा हाल था और उनका ध्यान परीक्षा से अधिक गर्मी की परेशानी पर जा रहा था. इससे नाराज परीक्षार्थी प्रधानाचार्य कक्ष में पहुंचे और उसका घेराव कर दिया. उन्होंने परीक्षा हॉल में पंखे की व्यवस्था कराने की मांग की. प्रधानाचार्य कक्ष की बिजली भी काटी पंखे की व्यवस्था नहीं होने से आक्रोशित परीक्षार्थियों ने कुछ देर के लिए प्रधानाचार्य कक्ष की बिजली आपूर्ति भी काट दी. इससे कॉलेज परिसर में अफरातफरी की स्थिति बन गयी. परीक्षार्थियों का कहना था कि जब परीक्षा केंद्र में पर्याप्त संख्या में परीक्षार्थियों को बैठाया गया है तो परीक्षा देने के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करायी जानी चाहिए. क्षमता से अधिक परीक्षार्थी बने परेशानी की वजह बहेड़ा महाविद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य विनोदानंद चौधरी ने बताया कि नेहरा महाविद्यालय, प्रशासनी डिग्री महाविद्यालय बेनीपुर और गोय मिश्र लगमा महाविद्यालय के करीब 2000 परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्र बहेड़ा महाविद्यालय को बनाया गया है. उन्होंने बताया कि क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों के आवंटन के कारण नए भवन में भी परीक्षा ली जा रही है. नए भवन में फिलहाल पंखे की व्यवस्था नहीं है. इसी वजह से परीक्षार्थियों को परेशानी हुई. सचिव को दी गयी जानकारी, पंखा लगवाने का आग्रह प्रभारी प्रधानाचार्य ने बताया कि मामले की जानकारी महाविद्यालय के सचिव को दे दी गयी है. संबंधित भवन में पंखा लगवाने का आग्रह किया गया है, ताकि आगे होने वाली परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को गर्मी के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े. यह भी पढ़ें दरभंगा में 17 अगस्त से पूरी तरह डिजिटल होगी जमीन-मकान की रजिस्ट्री, जानिए नई व्यवस्था The post “हम गर्मी से मर रहे हैं, तो आप भी पंखे में नहीं रहेंगे”, गुस्साए छात्रों ने काटी प्रिंसिपल रूम की बिजली appeared first on Naya Vichar.

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