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Author name: Vinod Jha

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Awarapan 2 Review: OG शिवम is back, लेकिन vibe वही है या नहीं?

शिवम की वापसी का इंतजार उनके फैंस लंबे समय से कर रहे थे. आवारापन के गाने हों या मीम्स, मिलेनियल्स ने इस फिल्म की यादों को खूब जिया है. अब जब आवारापन 2 रिलीज हो चुकी है, एक जेन-ज़ी नजरिए से जानिए, मिलेनियल्स की इस फेवरेट कहानी की वापसी कैसी लगी. वहीं से शुरू होती है OG शिवम की कहानी अगर आपने आवारापन को पहली बार थिएटर में नहीं, बल्कि बाद में YouTube, सोशल मीडिया, मीम्स और गानों के जरिए जाना है, तो आवारापन 2 आपके लिए एक दिलचस्प एक्सपीरियंस हो सकती है. एक Gen-Z के नजरिए से कहूं तो फिल्म की सबसे बड़ी USP यही है कि यह पुराने शिवम को वापस लाती है, लेकिन उसकी कहानी को एक नए मिशन से जोड़ती है. आवारापन 2 पहली फिल्म की घटनाओं के बाद शुरू होती है. शिवम आज भी आलिया की यादों में जी रहा है. उसकी जिंदगी में बदलाव तब आता है, जब उसे आलिया की कब्र के पास एक नवजात बच्ची मिलती है. वह बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और उसका नाम भी आलिया रख देता है.धीरे-धीरे शिवम और बच्ची के बीच एक गहरा रिश्ता बन जाता है. लेकिन जब उसे पता चलता है कि आलिया ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल में फंस चुकी है, तो उसकी पूरी जिंदगी का मकसद बदल जाता है. अब वह उसे बचाने के लिए बैंकॉक के अंडरवर्ल्ड और इंटरपोल की दुनिया में उतरता है. यानी इस बार शिवम की लड़ाई सिर्फ प्यार के लिए नहीं, बल्कि एक बच्ची को बचाने और इंसानियत के लिए है. इमोशन, एक्शन, बदला और दर्द को कहानी में साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है. परफॉर्मेंस और एक्सप्रेशन Gen-Z के लिए शायद शिवम उतना personal character न हो, जितना मिलेनियल्स के लिए है, लेकिन इमरान हाशमी की स्क्रीन प्रेजेंस आज भी कमाल की है. लंबे बाल, इंटेंस आंखें और चेहरे पर वही दर्द—OG शिवम की vibe को बरकरार रखा गया है.इमरान की सबसे बड़ी ताकत उनकी इंटेंस एक्टिंग है. शिवम का दर्द और गुस्सा कई जगह सीधे कनेक्ट करता है. हालांकि पहली फिल्म जैसी इमोशनल डेप्थ हर जगह नहीं मिलती, लेकिन इमरान अकेले कई कमजोर हिस्सों को संभाल लेते हैं. अगर फिल्म में कोई किरदार इमरान को टक्कर देता है, तो वह है जोरावर. उसकी स्क्रीन प्रेजेंस, क्रूरता और बैकस्टोरी फिल्म को काफी इंट्रेस्टिंग बनाती है.कई सीन्स में जोरावर की एंट्री और उसका अंदाज शिवम से भी ज्यादा लाइम लाइट ले जाता है. उसका किरदार टिपिकल फिल्मी विलेन से थोड़ा ज्यादा लेयर्ड है और यही फिल्म के सबसे अच्छे हिस्सों में से एक है. दिशा पाटनी स्क्रीन पर बेहद ग्लैमरस नजर आती हैं, लेकिन एक्टिंग के मामले में फिल्म उन्हें बहुत ज्यादा एक्सप्लोर नहीं करती. इमोशनल सीन्स में उनके एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलिवरी काफी फ्लैट लगते हैं.शबाना आजमी का स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी इंपैक्टफुल है.बता दें, उनका किरदार ये हिंट भी देता है कि फिल्म के सीक्वल की गुंजाइश है. वहीं पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली समेत बाकी कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में ठीक काम करते हैं. nostalgia फैक्टर लाने में सक्सेसफुल रही म्यूजिक आवारापन की बात हो और म्यूजिक को इग्नोर कर दिया जाए, ऐसा हो ही नहीं सकता.सीक्वल में म्यूजिक और BGM (बैकग्राउंड म्यूजिक) फिल्म के इमोशनल मोमंट को मजबूत करते हैं. आतिफ असलम की आवाज आते ही मिलेनियल दर्शकों के लिए nostalgia स्वीच ऑन हो सकता है. Gen-Z के लिए भी ये गाने कहानी के मूड को समझने में मदद करते हैं. VFX: यहां थोड़ा और काम चाहिए था फिल्म की सबसे बड़ी टेक्निकल इसके कुछ VFX और एक्शन सीक्वेंस हैं. कई जगह एक्शन आर्टिफिसियल सा लगता है.कुछ मारधाड़ वाले सीक्वेंस और खासकर शिवम के बच निकलने वाले moments थोड़े ओवर द टॉप लगते हैं. फिल्म के 140 मिनट के रनटाइम को भी थोड़ी और क्रिस्प एडिटिंग का फायदा मिल सकता था. डायलॉग कभी दिल छूते हैं, कभी cringe लगते हैं फिल्म में शिवम के दर्द और उसकी सोच को एक्सप्रेस करने वाले कुछ अच्छे डायलॉग्स हैं. लेकिन कई जगह मेकर्स ने डायलॉग्स को जरूरत से ज्यादा फिलॉसिफिकल बनाने की कोशिश की है.जहां सिंपल और नैचुरल ज्यादा असर करता, वहां कुछ लाइन्स थोड़ी जबररन लगती हैं. Gen-Z ऑडियंस के लिए ये हिस्सा थोड़ा ज्यादा ड्रामैटिक लग सकता है. फाइनल वर्डिक्ट एक Gen-Z व्यूवर के तौर पर आवारापन 2 को देखना थोड़ा अलग एक्सपीरियंस है. यह वह फिल्म नहीं है जिसे सिर्फ nostalgia के भरोसे देखा जाए. इसमें एक नई कहानी, नया ट्विस्ट और शिवम का एक नया मिशन है.OG शिवम की वापसी, इमरान हाशमी music और जोरावर का दमदार किरदार फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. वहीं VFX, कुछ एक्शन सीक्वेंस, ओवर ड्रामैटिक डायलॉग्स और दिशा पाटनी की एक्टिंग इसकी कमजोरियां हैं. तो क्या आवारापन 2 OG आवारापन की बराबरी कर पाती है? पूरी तरह नहीं. लेकिन क्या यह शिवम की कहानी को दोबारा देखने की वजह देती है? बिल्कुल. कुल मिलाकर, आवारापन 2 एक इंपरफेक्ट लेकिन इमोशनल सीक्वल है. मिलेनियल्स के लिए यह nostalgia ट्रिप हो सकती है और Gen-Z के लिए OG शिवम की दुनिया को जानने का मौका. और हां, क्लाइमैक्स साफ इशारा करता है कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है.शायद अगली बार शिवम का चैप्टर और बड़ा हो. इनपुट : कीर्ति चौहान ये भी पढ़ें: Exclusive: जॉनी लीवर का 13 साल का दर्द: बोले- स्पॉटलाइट हटी तो अंधेरा दिखा, बुरे वक्त में कोई तस्वीर तक नहीं खिंचवाता The post Awarapan 2 Review: OG शिवम is back, लेकिन vibe वही है या नहीं? appeared first on Naya Vichar.

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स्क्रीन नहीं, फिर भी हर धड़कन पर नजर! Google Fitbit Air अक्टूबर में भारत में देगा दस्तक, जानें कीमत और फीचर्स

स्मार्टवॉच में स्क्रीन, ऐप्स और नोटिफिकेशन देखने की आदत अब शायद बदलने वाली है. गूगल ने अपने बेहद छोटे और स्क्रीनलेस फिटनेस वियरेबल फिटबिट एयर को हिंदुस्तान लाने का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने 13 अगस्त को पिक्सल 11 सीरीज और पिक्सल वॉच 5 के लॉन्च इवेंट के दौरान इसकी हिंदुस्तान में एंट्री की पुष्टि की. मई 2026 में ग्लोबली पेश किया गया यह डिवाइस अक्टूबर में हिंदुस्तानीय बाजार में उपलब्ध होगा. खास बात यह है कि आकार बेहद छोटा होने के बावजूद फिटबिट एयर 24 घंटे हार्ट रेट, हार्ट रिदम, एएफआईबी अलर्ट, ब्लड ऑक्सीजन, नींद और कई हेल्थ मेट्रिक्स की निगरानी कर सकता है. Fitbit Air क्या है और इसमें स्क्रीन क्यों नहीं है? फिटबिट एयर को पारंपरिक स्मार्टवॉच की तरह इस्तेमाल करने के बजाय एक छोटे हेल्थ ट्रैकर के रूप में डिजाइन किया गया है. इसमें डिस्प्ले नहीं दिया गया है, इसलिए यूजर को नोटिफिकेशन देखने या स्क्रीन पर ऐप चलाने की सुविधा नहीं मिलेगी. इसके बजाय डिवाइस लगातार हेल्थ और फिटनेस से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करता है, जिसे फोन पर मौजूद गूगल हेल्थ ऐप में देखा जा सकता है. गूगल के मुताबिक, यह कंपनी का अब तक का सबसे छोटा फिटबिट वियरेबल है. इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन उन यूजर्स के लिए खास तौर पर आकर्षक हो सकता है, जिन्हें बड़ी स्मार्टवॉच पहनना पसंद नहीं है या जो सोते समय हल्का डिवाइस चाहते हैं. हार्ट रेट से लेकर नींद तक, कई हेल्थ फीचर्स छोटे आकार के बावजूद फिटबिट एयर में हाई-फिडेलिटी सेंसर लगाए गए हैं. यह लगातार हार्ट रेट और हार्ट रिदम की निगरानी कर सकता है. इसके अलावा एएफआईबी अलर्ट, एसपीओ2 यानी ब्लड ऑक्सीजन लेवल, रेस्टिंग हार्ट रेट और हार्ट रेट वैरिएबिलिटी जैसे डेटा भी ट्रैक किए जा सकते हैं. नींद की निगरानी भी इस डिवाइस की बड़ी खासियत है. यह स्लीप स्टेज और सोने की अवधि जैसी जानकारी रिकॉर्ड करता है. यूजर इन सभी आंकड़ों को स्मार्टफोन पर गूगल हेल्थ ऐप के जरिए विस्तार से देख सकेगा. यानी फिटबिट एयर खुद स्क्रीन पर जानकारी नहीं दिखाएगा, बल्कि बैकग्राउंड में हेल्थ डेटा जुटाने का काम करेगा. एक बार चार्ज करने पर चलेगा करीब एक हफ्ते फिटबिट एयर की बैटरी लाइफ भी इसे सामान्य स्मार्टवॉच से अलग बनाती है. कंपनी के अनुसार, फुल चार्ज होने पर यह डिवाइस एक सप्ताह तक चल सकता है. स्क्रीन और लगातार नोटिफिकेशन जैसी बैटरी खपत वाली चीजें नहीं होने की वजह से इतनी लंबी बैटरी लाइफ संभव होती है. फिटनेस के लिए अलग-अलग बैंड भी उपलब्ध होंगे. परफॉर्मेंस लूप बैंड रिसाइकिल्ड मटेरियल से बनाया गया है और इसे जरूरत के हिसाब से माइक्रो-एडजस्ट किया जा सकता है. वहीं एक्टिव बैंड सिलिकॉन से बना है और पसीने तथा पानी के संपर्क में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है. Android और iPhone दोनों के साथ करेगा काम फिटबिट एयर की एक और खासियत इसकी व्यापक कम्पैटिबिलिटी है. यह एंड्रॉयड के साथ-साथ आईफोन के साथ भी काम करेगा. यानी इसे इस्तेमाल करने के लिए यूजर का गूगल पिक्सल स्मार्टफोन खरीदना जरूरी नहीं होगा. अमेरिकी बाजार में फिटबिट एयर की शुरुआती कीमत 99.99 डॉलर है, जबकि स्पेशल एडिशन की कीमत 129.99 डॉलर रखी गई है. हिंदुस्तान में इसकी आधिकारिक कीमत अभी सामने नहीं आई है. हालांकि, मौजूदा अमेरिकी कीमत और हिंदुस्तानीय बाजार की स्थिति को देखते हुए इसकी कीमत करीब 15,000 रुपये या उससे कम रहने की संभावना जताई जा रही है. यह सिर्फ अनुमान है और अंतिम कीमत गूगल की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी. अक्टूबर में हिंदुस्तान आएगा Fitbit Air हिंदुस्तान में फिटबिट एयर की एंट्री ऐसे समय पर हो रही है जब यूजर्स के बीच हेल्थ ट्रैकिंग वियरेबल्स की मांग लगातार बढ़ रही है. स्क्रीनलेस डिजाइन इसे स्मार्टवॉच से अलग कैटेगरी में खड़ा करता है. खासकर वे लोग जो बिना डिस्ट्रैक्शन के सिर्फ हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंग चाहते हैं, उनके लिए यह एक दिलचस्प विकल्प बन सकता है. फिलहाल गूगल ने हिंदुस्तान में इसकी सटीक लॉन्च डेट और कीमत की घोषणा नहीं की है. अक्टूबर में इसकी बिक्री शुरू होने पर इन दोनों सवालों का जवाब मिल जाएगा. अगर कीमत 15 हजार रुपये के आसपास रहती है, तो फिटबिट एयर हिंदुस्तान में प्रीमियम हेल्थ ट्रैकिंग डिवाइस के तौर पर अपनी अलग जगह बना सकता है. ये भी पढ़ें: Samsung की नई Galaxy Watch 9 और Ultra 2 में क्या है नया? खरीदने से पहले जान लें दोनों में अंतर ये भी पढ़ें: फोन के Type-C चार्जर से भी चार्ज हो जाएंगी ये 2 स्मार्टवॉच, देखें कीमत-खासियत The post स्क्रीन नहीं, फिर भी हर धड़कन पर नजर! Google Fitbit Air अक्टूबर में हिंदुस्तान में देगा दस्तक, जानें कीमत और फीचर्स appeared first on Naya Vichar.

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गया जी में जहरीली गैस से पिता-पुत्र समेत चार की मौत, कुएं में मोटर ठीक करने उतरे थे, बचाने पहुंचा फायर ब्रिगेड कर्मी भी बेहोश

Gaya News : गया जी में कुएं में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से चार लोगों की मौत हो गयी है. बताया जा रहा है कि चारों लोग 30 फीट गहरे कुएं में मोटर ठीक करने के लिए उतरे थे. इसी दौरान कुएं के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया. घटना डोभी प्रखंड के गढ़ करमौनी गांव की है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुएं के अंदर जहरीली गैस जमा होने के कारण यह हादसा हुआ. मोटर ठीक करने के दौरान चारों ग्रामीण इसकी चपेट में आ गये. प्रशासन की ओर से घटना की विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है. घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण डीएसपी शेरघाटी ने बताया हादसे का घटनाक्रम डीएसपी शेरघाटी ने बताया कि कुएं की गहराई करीब 30 फीट है. कुएं में मोटर से संबंधित काम करने के लिए लोग नीचे उतरे थे. इसी दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से हादसा हुआ. घटना की सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गयी. View on Instagram डीएसपी ने बताया कि कुएं के अंदर ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने की वजह से बचाव अभियान में भी सावधानी बरतनी पड़ी. शुरुआती जानकारी के अनुसार, दो लोगों को बाहर निकाला गया है, जबकि अन्य लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य जारी रहा. डीएसपी शेरघाटी आपदा राहत कोष से मिलेगा चार-चार लाख का मुआवजा डोभी बीडीओ ने बताया कि जीआरपी की टीम मौके पर पहुंच गयी है. हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोगों के परिजनों को आपदा राहत कोष के माध्यम से प्रति व्यक्ति चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जायेगी. उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध करायी जा सके. गया जी: टिकारी में दिनदहाड़े किसान की धारदार हथियार से हत्या, आरोपी गिरफ्तार, परिवार में मचा कोहराम The post गया जी में जहरीली गैस से पिता-पुत्र समेत चार की मौत, कुएं में मोटर ठीक करने उतरे थे, बचाने पहुंचा फायर ब्रिगेड कर्मी भी बेहोश appeared first on Naya Vichar.

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फुकेत-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस: चार सेकंड तक विमान पर नहीं रहा कंट्रोल, FDR डिकोडिंग में सामने आई वजह

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम होने के मामले में शुरुआती तकनीकी जानकारी सामने आई है. एयरबस ने विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) को डिकोड करने के बाद कहा है कि घटना की वजह फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर की खराबी नहीं, बल्कि हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव का कुछ समय के लिए कम होना हो सकता है. 4 अगस्त को अचानक नीचे आया था विमान यह घटना 4 अगस्त 2026 को हुई थी. एयर इंडिया का एयरबस A320 विमान फुकेत से दिल्ली आ रहा था, तभी ओडिशा के ऊपर उसकी ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई. कुछ समय बाद पायलटों ने विमान को दोबारा नियंत्रित कर लिया और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई. विमान में तीन बच्चों समेत 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे. इनमें दो पायलट और छह केबिन क्रू शामिल थे. घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल हुए थे. हाइड्रोलिक प्रेशर अचानक हुआ कम शुरुआती जांच के अनुसार, विमान के ग्रीन, ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम में कुछ समय के लिए दबाव कम हो गया था. ये सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल को चलाने में मदद करते हैं. इनमें एलिवेटर, एइलरॉन और स्पॉइलर जैसे हिस्से शामिल हैं. एलिवेटर विमान की फ्रंट पॉइंट (Nose)को ऊपर-नीचे करने में मदद करता है, जबकि एइलरॉन और स्पॉइलर विमान को दाएं-बाएं झुकाने और नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं. चार सेकंड तक प्रभावित रहे फ्लाइट कंट्रोल आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हाइड्रोलिक प्रेशर कम होने के बाद करीब चार सेकंड तक एलिवेटर और एइलरॉन सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाए. इसी दौरान विमान की पिच में अचानक बदलाव आया और ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया. कुछ ही समय बाद सिस्टम सामान्य हुआ और पायलटों ने मैन्युअल कंट्रोल संभाल लिया. इसके बाद विमान को स्थिर किया गया. एयरबस ने कंप्यूटर में खराबी से किया इनकार एयरबस के शुरुआती तकनीकी आकलन में प्राथमिक फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर में किसी खराबी के संकेत नहीं मिले हैं. कंपनी का मानना है कि विमान का व्यवहार उस स्थिति से मेल खाता है, जब हाइड्रोलिक प्रेशर कम हो जाता है. इस दौरान फ्लाइट कंट्रोल सतहें डैम्पिंग मोड में चली गई थीं, जिसके कारण विमान की प्रतिक्रिया में अचानक बदलाव आया. एयर इंडिया को कई तकनीकी जांच के निर्देश एयरबस ने एयर इंडिया को ग्रीन, येलो और ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम की विस्तृत जांच करने की सलाह दी है. इसके साथ ही प्रेशर स्विच और ट्रांसड्यूसर की भी जांच करने को कहा गया है. कंपनी ने कुछ खास प्रेशर ट्रांसड्यूसर और लीक मापने वाले स्विच को निकालकर अलग से जांचने का सुझाव भी दिया है. मेंटेनेंस रिकॉर्ड भी मांगा गया एयरबस ने एयर इंडिया से विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम के हाल के मेंटेनेंस का पूरा रिकॉर्ड मांगा है. इसके अलावा घटना के समय फ्लाइट गाइडेंस और फ्लाइट ऑग्मेंटेशन कंप्यूटर में दर्ज डेटा भी साझा करने के लिए कहा गया है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हाइड्रोलिक प्रेशर क्यों कम हुआ और क्या इसके पीछे किसी पुर्जे या रखरखाव से जुड़ी समस्या थी. विमान की संरचना की भी होगी जांच अचानक ऊंचाई कम होने के कारण विमान के ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है. इसे देखते हुए एयरबस ने विमान की संरचना की भी पूरी जांच करने की सिफारिश की है. इसके अलावा पायलटों और केबिन क्रू से भी घटना के दौरान देखी और महसूस की गई स्थितियों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. हाइड्रोलिक सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोल और विमान की संरचना की विस्तृत जांच की जा रही है. तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि हाइड्रोलिक प्रेशर में अचानक कमी किस वजह से आई थी. Also Read: चमोली सुरंग हादसा: सात लोगों की मौत, कई घायल, रेस्क्यू जारी The post फुकेत-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस: चार सेकंड तक विमान पर नहीं रहा कंट्रोल, FDR डिकोडिंग में सामने आई वजह appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

तिरंगा लेकर निकले छात्र-छात्राएं, देशभक्ति के नारों से गूंजा मुसरीघरारी

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन (समस्तीपुर) । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत शुक्रवार को मुसरीघरारी नगर पंचायत क्षेत्र में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी राकेश कुमार रंजन के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा में अल्फा मध्य विद्यालय, बी. एलौथ के छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक-शिक्षिकाएं, नगर पंचायत के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर निकले बच्चों और लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाए। इससे पूरा क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। तिरंगा यात्रा की शुरुआत अल्फा मध्य विद्यालय, बी. एलौथ के प्रांगण से हुई। विद्यालय परिसर से छात्र-छात्राएं कतारबद्ध होकर हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर निकले। विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं भी बच्चों के साथ यात्रा में शामिल हुए। यात्रा में शामिल शिशु हिंदुस्तान माता की जय, वंदे मातरम् सहित अन्य देशभक्ति के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। बच्चों में तिरंगा यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। यात्रा विद्यालय परिसर से निकलकर समस्तीपुर-मुसरीघरारी मुख्य मार्ग से होते हुए मुसरीघरारी नगर पंचायत कार्यालय पहुंची। इसके बाद यात्रा बी. एलौथ गांव की ओर रवाना हुई। मुख्य मार्ग से गुजरने के दौरान सड़क के दोनों ओर मौजूद लोगों ने तिरंगा यात्रा को देखा और बच्चों का उत्साह बढ़ाया। पूरे रास्ते देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंजता रहा। कार्यक्रम में मुसरीघरारी नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी राकेश कुमार रंजन के अलावा मुख्य पार्षद दिव्या कुमारी, उपमुख्य पार्षद मंजू देवी, अल्फा मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार चौधरी सहित सभी वार्ड पार्षद मौजूद रहे। नगर पंचायत के अधिकारी एवं कर्मियों ने भी तिरंगा यात्रा में भाग लिया। विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ यात्रा में अपनी भागीदारी निभाई। कार्यपालक पदाधिकारी राकेश कुमार रंजन ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा का उद्देश्य लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और स्वतंत्रता दिवस के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान के कारण देश को आजादी मिली है। नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के इतिहास और राष्ट्रीय एकता के महत्व की जानकारी देना जरूरी है। मुख्य पार्षद दिव्या कुमारी ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान लोगों को राष्ट्रीय ध्वज से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराकर देश के प्रति सम्मान और गौरव व्यक्त करना चाहिए। उपमुख्य पार्षद मंजू देवी ने कहा कि बच्चों की भागीदारी से इस अभियान का संदेश घर-घर तक पहुंच रहा है। विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित होने से बच्चों में देशप्रेम, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है। प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि विद्यालय के छात्र-छात्राओं में तिरंगा यात्रा को लेकर काफी उत्साह था। बच्चों ने पूरे अनुशासन के साथ यात्रा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद करने और उनके आदर्शों को अपनाने का दिन भी है। तिरंगा यात्रा के दौरान नगर पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी, वार्ड पार्षद, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं पूरे उत्साह के साथ शामिल रहे। यात्रा के समापन पर सभी ने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करने तथा देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प लिया।

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CJI सूर्यकांत का NALSAR छात्रों पर कार्रवाई को लेकर BCI को नोटिस, बोले- उनका कोई लेना-देना नहीं है

CJI Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR (National Academy of Legal Studies and Research) के छात्रों से जुड़े मामले में हिंदुस्तानीय बार काउंसिल (BCI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर छात्र कानूनी तरीके से विरोध कर रहे हैं, तो BCI को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है. सीजेआई ने कहा, “इस मामले में बीसीआई का कोई लेना-देना नहीं है. हम आपके साथ हैं. छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है. यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है. उन्हें बेवजह परिपत्र जारी करने का क्या अधिकार है? जब मैं कॉलेज में था, तब मैं छात्रों की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था. कभी-कभी, भले ही वे गलत बात कह रहे हों, अगर वे कानूनी रूप से अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो इसकी अनुमति दी जानी चाहिए.” वरिष्ठ अधिवक्ता ने कार्रवाई के आदेश को बताया अवैध छात्रों पर कार्रवाई के मामले के वापस लिए जा चुके फैसले पर वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, “एक नियामक के तौर पर उन्हें पहले यह जांचना चाहिए था कि क्या वह ऐसा आदेश जारी कर सकते हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो चेयरमैन को किसी विशेष बैच के नामांकन पर रोक लगाने जैसा व्यापक आदेश जारी करने की शक्ति देता हो. इसलिए यह आदेश पूरी तरह अवैध था. ये भी पढ़ें: UP में जिस पनीर और खोवा को असली समझकर खरीद रहे थे, उसमें मिलाया जा रहा था कपड़े धोने वाला केमिकल छात्रों के नामांकन पर रोक का था मामला दरअसल, NALSAR यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाने का विरोध किया था. छात्रों का आक्रोश युवाओं पर किए गए एक टिप्पणी को लेकर था. जिसके चलते कुछ छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत से अपनी डिग्री नहीं लेने की बात कही थी. इस विरोध से नाराज होकर BCI ने एक सर्कुलर जारी कर छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने और कार्रवाई की बात कही थी. ये भी पढ़ें: उम्र का अंतर कम होने पर भी स्त्री कर्मचारी को मिलेगा मातृत्व अवकाश,लखनऊ हाई कोर्ट का फैसला परिषद ने आदेश वापस लिया हालांकि, BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि परिषद ने अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया है और बताया कि छात्रों के खिलाफ कोई जांच नहीं होगी. उन्होंने कहा कि BCI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कानून के छात्र को न्यायिक इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो. The post CJI सूर्यकांत का NALSAR छात्रों पर कार्रवाई को लेकर BCI को नोटिस, बोले- उनका कोई लेना-देना नहीं है appeared first on Naya Vichar.

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Pakistan Day Special -2: सिर्फ एक देश नहीं… एक Process भी क्यों है पाकिस्तान?

पाकिस्तान को हम आमतौर पर एक Nation-State के रूप में देखते हैं. एक देश, जिसकी अपनी प्रशासन, सेना, संविधान, सीमाएं और संस्थाएं हैं. लेकिन पाकिस्तान की नेतृत्व को समझने का एक दूसरा तरीका भी है. पाकिस्तान को एक ‘Process’ की तरह देखिए. यानी ऐसा नेतृत्वक प्रोजेक्ट, जिसकी राष्ट्रीय पहचान, सुरक्षा नीति और सत्ता की संरचना समय के साथ लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करती रही हैं. इस नजरिए से देखें तो पाकिस्तान की कहानी सिर्फ हिंदुस्तान-पाकिस्तान विवाद की कहानी नहीं रह जाती. यह पहचान, सुरक्षा, सेना, धर्म, नेतृत्व और Proxy Warfare के बीच बने एक जटिल रिश्ते की कहानी बन जाती है. पाकिस्तान पर मेरी किताब यहां से पढ़ें 1. पहचान का सवाल: ‘हम कौन हैं?’ हर राष्ट्र अपनी पहचान बनाने की कोशिश करता है. हिंदुस्तान की राष्ट्रीय पहचान को समझने के लिए उसकी हजारों वर्षों की सभ्यतागत परंपराओं, भाषाओं, संस्कृतियों, धर्मों और सामाजिक विविधता को देखा जा सकता है. पाकिस्तान की स्थिति कुछ अलग रही. 1947 में पाकिस्तान का निर्माण एक अलग मुस्लिम नेतृत्वक पहचान और उपमहाद्वीप के मुस्लिमों के लिए अलग नेतृत्वक व्यवस्था की मांग के संदर्भ में हुआ. लेकिन आजादी के बाद उसके सामने एक बड़ा सवाल था- एक नए देश की पहचान क्या होगी? क्या वह सिर्फ एक मुस्लिम राष्ट्र होगा? क्या उसकी पहचान इस्लाम से तय होगी? क्या वह पंजाबी, सिंधी, बलोच, पश्तून और बंगाली जैसी क्षेत्रीय पहचानों को साथ लेकर चलेगा? या उसकी राष्ट्रीय पहचान का सबसे बड़ा आधार हिंदुस्तान से अलग होना होगा? यहीं से पाकिस्तान की Identity Politics की जटिलता शुरू होती है. इसे ‘Negative Identity’ के रूप में समझा जा सकता है- जहां किसी पहचान का एक हिस्सा यह बताने से बनता है कि हम कौन नहीं हैं. हालांकि, पाकिस्तान की पहचान को सिर्फ हिंदुस्तान-विरोध तक सीमित करना भी सही नहीं होगा. वहां इस्लामी पहचान, क्षेत्रीय संस्कृतियां, भाषाई विविधता और अलग-अलग नेतृत्वक विचारधाराएं भी महत्वपूर्ण रही हैं. लेकिन हिंदुस्तान के साथ उसका संबंध उसकी राष्ट्रीय नेतृत्व का एक स्थायी तत्व जरूर बन गया. 2. हिंदुस्तान: पड़ोसी से ‘Security Threat’ तक 1947 के बाद हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुए. कश्मीर विवाद बना रहा और दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे. इस माहौल ने पाकिस्तान की नेतृत्व में National Security को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया. धीरे-धीरे एक विचार मजबूत हुआ- हिंदुस्तान एक संभावित और स्थायी सुरक्षा चुनौती है. यहीं से Pakistan का Security State वाला चरित्र मजबूत होने लगा. जब किसी देश की नेतृत्व में सुरक्षा का मुद्दा लगातार सबसे ऊपर रहता है, तो सेना और सुरक्षा संस्थाओं की भूमिका भी बढ़ती है. पाकिस्तान में सेना सिर्फ सीमा की रक्षा करने वाली संस्था नहीं रही. उसने कई बार सीधे सत्ता संभाली और लंबे समय तक नेतृत्वक व्यवस्था पर निर्णायक प्रभाव बनाए रखा. यानी एक चक्र बनता गया- हिंदुस्तान से सुरक्षा चिंता → मजबूत सैन्य भूमिका → Security State → सेना की नेतृत्वक भूमिका → फिर Security Narrative की मजबूती. यही चक्र पाकिस्तान की नेतृत्व को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है. 3. जब युद्ध महंगा हो, तो Proxy क्यों? अब आते हैं तीसरे चरण पर: Proxy Warfare. सीधे युद्ध में सैनिक, हथियार, पैसा और नेतृत्वक जोखिम सब कुछ लगता है. इसलिए कई राज्य ऐसे संगठनों या समूहों का समर्थन करते हैं, जिनके जरिए वे अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जबकि औपचारिक रूप से सीधे युद्ध में शामिल होने से बचते हैं. इसे ही broadly Proxy War कहा जाता है. पाकिस्तान के संदर्भ में यह रणनीति खास तौर पर अफगानिस्तान और कश्मीर के संदर्भ में चर्चा में रही है. 1979 के बाद अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान पाकिस्तान अमेरिका और अन्य देशों के समर्थन से बने anti-Soviet jihadist network का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना. इस अनुभव ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया. बाद के दशकों में कश्मीर में भी विभिन्न militant और extremist संगठनों को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर हिंदुस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर आरोप और बहस होती रही. इसका सबसे बड़ा फायदा यह था कि राज्य प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय कम तीव्रता वाले संघर्ष के जरिए अपने विरोधी पर दबाव बनाए रख सकता था. लेकिन यहां एक बड़ा खतरा भी था- Proxy को पैदा करना आसान हो सकता है, नियंत्रित करना हमेशा आसान नहीं होता. Read more: पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल 4. हथियार से ज्यादा ताकतवर होती है कहानी किसी भी लंबे संघर्ष को सिर्फ हथियारों से नहीं चलाया जा सकता. उसके पीछे एक Narrative चाहिए. यही कारण है कि पाकिस्तान में शिक्षा, मीडिया और नेतृत्वक विमर्श में National Security, Kashmir और हिंदुस्तान के साथ संबंधों को लेकर विशेष प्रकार के narratives लंबे समय तक प्रभावशाली रहे हैं. स्कूल की किताबों से लेकर नेतृत्वक भाषणों तक, इतिहास और राष्ट्रीय पहचान की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं. इससे एक संदेश मजबूत हो सकता है- हम खतरे में हैं. और जब किसी समाज में खतरे की भावना लगातार बनी रहती है, तो सुरक्षा संस्थाओं की भूमिका भी अधिक स्वीकार्य दिखाई दे सकती है. हालांकि, पाकिस्तान के समाज को एक ही विचारधारा से संचालित मानना गलत होगा. वहां लोकतांत्रिक आंदोलनों, उदार विचारों, क्षेत्रीय पहचानों, धार्मिक विविधताओं और सेना की भूमिका पर सवाल उठाने वाली आवाजों की भी लंबी परंपरा रही है. यानी Pakistan का समाज और Pakistan का State एक ही चीज नहीं हैं. Read more: Strategic Depth: जब अफगानिस्तान बना पाकिस्तान की रणनीति का केंद्र 5. तो क्या पाकिस्तान सचमुच एक ‘Process’ है? यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. पाकिस्तान को केवल एक असफल या अस्थिर देश के रूप में देखना समस्या को बहुत सरल बना देता है. वह एक ऐसा राज्य है, जहां Identity, Security, Military Power और Political Institutions ने दशकों से एक-दूसरे को प्रभावित किया है. इसे एक चक्र की तरह समझिए- Identity → Threat Perception → Security State → Military Influence → Proxy Strategy → National Narrative → फिर वही Identity. यही कारण है कि पाकिस्तान को समझने के लिए केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि वहां प्रशासन कौन चला रहा है. हमें यह भी पूछना होगा- राज्य की प्राथमिकताएं क्या हैं? खतरे की उसकी परिभाषा क्या

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राहुल गांधी के बयान पर भड़के नड्डा, कहा- ऐसा विपक्षी नेता देखना ही बाकी रह गया था

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किए गए हमले के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पलटवार किया है. नड्डा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे विपक्षी नेता को देखना देश का दुर्भाग्य है. देश के लोकतंत्र का दुर्भाग्य जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी पर हमला करते हुए लिखा- अब बस विपक्ष के ऐसे नेता को देखना ही बाकी रह गया था, यह देश का दुर्भाग्य है. कांग्रेस के लिए भी राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना कितने दुख की बात होगी. नड्डा का यह बयान राहुल गांधी की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा था. गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि देश में कई लोग लंबे समय से भाजपा और आरएसएस के सामने डरकर व्यवहार करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन लोगों से मुकाबला कर रहा है, उन्हें हिंदुस्तान के दर्शन और इतिहास की समझ नहीं है. बोले राहुल गांधी- मोदी और शाह के हटने तक लड़ाई जारी रहेगी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा. उन्होंने कहा- आप लिख लो, जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते और गृह मंत्री हट नहीं जाते, तब तक हम उनको सोने नहीं देंगे, हम इन्हें जगाकर रखेंगे. राहुल गांधी ने पीएम मोदी की मिमिक्री की राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया था. मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि गले मिलना ही विदेश नीति है. इस दौरान संदीप दीक्षित ने मजाकिया लहजे में पूछा कि कहीं राहुल ने उन्हें जॉर्जिया मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगाया. इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और कुछ लोगों ने इसे स्त्री विरोधी बताया. Also Read: PM मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी का तंज, बोले- ‘नेताओं को गले लगाना विदेश नीति नहीं’ The post राहुल गांधी के बयान पर भड़के नड्डा, कहा- ऐसा विपक्षी नेता देखना ही बाकी रह गया था appeared first on Naya Vichar.

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गया जी में जहरीली गैस से चार लोगों की मौत, मोटर ठीक करने के दौरान हुआ हादसा

Gaya News : डोभी प्रखंड अंतर्गत गढ़ करमौनी गांव में कुएं में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से चार ग्रामीणों की मौत हो गयी. बताया जा रहा है कि चारों ग्रामीण कुएं में मोटर ठीक करने के लिए उतरे थे. इसी दौरान कुएं के अंदर जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया. दो शव कुएं से बाहर निकाले गये घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी. अब तक दो लोगों के शव कुएं से बाहर निकाले जा चुके हैं, जबकि दो अन्य ग्रामीणों की तलाश जारी है. स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है. घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण जहरीली गैस से दम घुटने की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुएं के अंदर जहरीली गैस जमा होने के कारण यह हादसा हुआ. मोटर ठीक करने के दौरान चारों ग्रामीण इसकी चपेट में आ गये. प्रशासन की ओर से घटना की विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है. गया जी: टिकारी में दिनदहाड़े किसान की धारदार हथियार से हत्या, आरोपी गिरफ्तार, परिवार में मचा कोहराम The post गया जी में जहरीली गैस से चार लोगों की मौत, मोटर ठीक करने के दौरान हुआ हादसा appeared first on Naya Vichar.

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7 घराने, 7.52 लाख करोड़ संपत्ति, जानिए देश के सबसे अमीर परिवारों में यूपी के किन दिग्गजों का नाम

UP News: बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स और हुरुन इंडिया की ताजा सूची में उत्तर प्रदेश से जुड़े सात कारोबारी घरानों को जगह मिली है. इन सभी समूहों की संयुक्त नेटवर्थ करीब 7.52 लाख करोड़ रुपये है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, गाजियाबाद और अमरोहा जैसे शहर इन कारोबारों के प्रमुख केंद्र हैं. एचसीएल टेक्नोलॉजीज सबसे आगे शिव नाडर और रोशनी नाडर के नेतृत्व वाला एचसीएल टेक्नोलॉजीज यूपी से जुड़ा सबसे मूल्यवान कारोबारी समूह है. इसकी वैल्यू करीब 2.91 लाख करोड़ रुपये है और राष्ट्रीय सूची में यह आठवें स्थान पर है. कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है. डाबर इंडिया की मजबूत मौजूदगी मोहित बर्मन की अगुवाई वाले डाबर इंडिया का मूल्यांकन करीब 1.03 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी की कॉरपोरेट मौजूदगी कौशांबी, साहिबाबाद और गाजियाबाद में है. गाजियाबाद में उसका कार्यालय और शोध एवं विकास केंद्र भी मौजूद है. जुबिलेंट भरतिया समूह श्याम एस. भरतिया के नेतृत्व वाले जुबिलेंट भरतिया समूह की नेटवर्थ करीब 82,700 करोड़ रुपये है. इसका कॉरपोरेट कार्यालय नोएडा में है, जबकि जुबिलेंट फार्मोवा का पंजीकृत कार्यालय अमरोहा के गजरौला में है. समूह दवा, रसायन और कृषि समेत कई क्षेत्रों में सक्रिय है. जेके सीमेंट का बड़ा कारोबार जेके सीमेंट का मूल्यांकन करीब 74,400 करोड़ रुपये है। समूह की प्रमुख कारोबारी मौजूदगी कानपुर से जुड़ी है. इसके अलीगढ़, हमीरपुर और प्रयागराज समेत कई स्थानों पर संयंत्र हैं। सीमेंट उद्योग में समूह की मजबूत पकड़ है. हैवेल्स, पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट और जैक्सन अनिल राय गुप्ता की हैवेल्स इंडिया की वैल्यू करीब 72,800 करोड़ रुपये है और इसका कार्यालय नोएडा में है. ग्रेटर नोएडा स्थित पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट की नेटवर्थ 15,300 करोड़ रुपये, जबकि समीर गुप्ता के नेतृत्व वाले जैक्सन समूह की हैसियत करीब 13,000 करोड़ रुपये है. नए शहरों में बढ़ रहा कारोबार हुरुन इंडिया के मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद के मुताबिक नए शहरों में नए कारोबारी परिवार तेजी से उभर रहे हैं. यूपी की सूची में मजबूत मौजूदगी प्रदेश के बढ़ते कारोबारी आधार और मजबूत होती वित्तीय स्थिति का संकेत है. हुरुन इंडिया का मुख्यालय मुंबई में है. Must Read: यूपी के 52 मॉडल स्कूलों में बनेंगे मिनी स्टेडियम The post 7 घराने, 7.52 लाख करोड़ संपत्ति, जानिए देश के सबसे अमीर परिवारों में यूपी के किन दिग्गजों का नाम appeared first on Naya Vichar.

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