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Author name: Vinod Jha

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पाकिस्तानी बॉक्सर ने कहा, मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है… बातें सुनकर हंस पड़े पीएम मोदी

Narender Berwal: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिंदुस्तान के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले बॉक्सर नरेंदर बरवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान अपने बॉक्सिंग करियर का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया. संडे को नई दिल्ली में पीएम मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों से मुलाकात की. इसी दौरान नरेंदर ने 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में पाकिस्तान के एक बॉक्सर को हराने के बाद हुई मजेदार बातचीत का जिक्र किया, जिसे सुनकर प्रधानमंत्री मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक सके. ‘मुझे नरेंद्र नाम से नफरत’ नरेंदर बरवाल ने पीएम मोदी को बताया कि 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में उन्होंने एक पाकिस्तानी बॉक्सर को मुकाबले में हराया था. मैच के बाद दोनों के बीच हुई बातचीत को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सामने वाला बॉक्सर उनकी जिंदगी में बार-बार ‘नरेंद्र’ नाम आने से हैरान था. बरवाल ने कहा, ‘पाकिस्तानी बॉक्सर ने मुझसे कहा- आपका नाम नरेंदर है, आपके कोच का नाम नरेंदर है, आपके पीएम का नाम नरेंद्र है. मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है…’ नरेंदर के इस किस्से को सुनकर पीएम मोदी भी मुस्कुराते और हंसते नजर आए. बॉक्सिंग में हिंदुस्तान का शानदार प्रदर्शन नरेंदर बरवाल ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के 90+ किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर हिंदुस्तान के शानदार प्रदर्शन में योगदान दिया. इस बार हिंदुस्तानीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक अपने नाम किए, जो कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में हिंदुस्तान का बॉक्सिंग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा. Also Read: WTC टेबल में सबसे ऊपर ऑस्ट्रेलिया, हिंदुस्तान को क्वालिफाई करने के लिए जीतने होंगे 9 में से 8 मैच हिंदुस्तान के नाम रहें थे 39 मेडल हिंदुस्तान ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 39 पदक जीते थे. इसमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे. वहीं हिंदुस्तान पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा. 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के समापन के साथ ही 2030 में होने वाले अगले बड़े संस्करण की मेजबानी हिंदुस्तान को मिली. स्कॉटलैंड ने कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज और सेरेमोनियल बैटन हिंदुस्तान को सौंपा. 2030 में अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स की शताब्दी संस्करण आयोजित किया जाएगा. Also Read: IND vs SL Xl: प्रैक्टिस मैच में ऋषभ पंत स्पोर्ट्सने लगे फुटबॉल, वीडियो देखकर आपकी भी छूट जाएगी हंसी The post पाकिस्तानी बॉक्सर ने कहा, मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है… बातें सुनकर हंस पड़े पीएम मोदी appeared first on Naya Vichar.

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बीजेपी विधायक विधानसभा सत्र में नहीं हो पाए शामिल, बाबूलाल मरांडी समेत सभी नेता खेलगांव में डिटेन

नवीन शर्मा की रिपोर्ट BJP Leaders Detained: झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच आज सियासी हलचल भी तेज हो गई. छात्रों के विधानसभा घेराव कार्यक्रम के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक, नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंचे. इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की. मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, भाजपा विधायकों और अन्य नेताओं-कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. सभी को रांची के स्पोर्ट्सगांव ले जाया गया, जहां उन्हें डिटेन किया गया है. हिरासत में लिए गए BJP विधायक विधानसभा सत्र में नहीं पहुंच सके भाजपा विधायकों के हिरासत में लिए जाने का असर विधानसभा की कार्यवाही पर भी पड़ा. पार्टी के सभी विधायक हिरासत में होने के कारण आज विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके. भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य प्रशासन छात्रों के मुद्दे पर पूरी तरह विफल रही है. प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की. ये भी पढ़ें-  The post बीजेपी विधायक विधानसभा सत्र में नहीं हो पाए शामिल, बाबूलाल मरांडी समेत सभी नेता स्पोर्ट्सगांव में डिटेन appeared first on Naya Vichar.

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NCDC Amendment Bill आज लोकसभा में हो सकता है पेश, जानें क्या बदलेगा और क्यों है खास

केंद्र प्रशासन सोमवार, 10 अगस्त को नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) अमेंडमेंट बिल, 2026 लोकसभा में पेश करने जा रही है. इस बिल का मकसद NCDC को सहकारी क्षेत्र के लिए फंडिंग करने में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देना है. प्रस्तावित बदलावों के बाद NCDC सिर्फ सहकारी समितियों के जरिए ही नहीं, बल्कि सहकारी क्षेत्र के विकास से जुड़े दूसरे संस्थानों को भी सीधे लोन और ग्रांट दे सकेगा. इसका मतलब साफ है कि सहकारी क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए पैसा पहुंचाने का दायरा पहले से ज्यादा व्यापक हो सकता है. NCDC क्या है और अभी क्या करता है? नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) सहकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक वैधानिक संस्था है. इसकी स्थापना 1963 में नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एक्ट, 1962 के तहत हुई थी. अभी NCDC मुख्य तौर पर कृषि उपज, खाद्य सामग्री और दूसरी अधिसूचित वस्तुओं से जुड़े उत्पादन, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, स्टोरेज और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कार्यक्रमों की प्लानिंग, प्रमोशन और फाइनेंसिंग करता है. इसमें सहकारी समितियों की अहम भूमिका रहती है. प्रशासन अब इसी दायरे को बढ़ाने की तैयारी कर रही है. बिल पास हुआ तो NCDC के काम में क्या बदलेगा? प्रस्तावित संशोधन में NCDC की भूमिका को सिर्फ सहकारी समितियों के जरिए चलने वाले कार्यक्रमों से आगे बढ़ाकर कोऑपरेटिव डेवलपमेंट से जुड़े कार्यक्रमों तक करने का प्रस्ताव है. इसके तहत NCDC सीधे उन संस्थाओं को भी लोन और ग्रांट दे सकेगा, जो खुद रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव सोसाइटी नहीं हैं, लेकिन सहकारी क्षेत्र के विकास में काम कर रही हैं. शर्त यह रहेगी कि मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कोऑपरेटिव कामों के लिए किया जाए. प्रशासन के मुताबिक, आज सहकारी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कामों में राज्य प्रशासन की एजेंसियां, वैधानिक संस्थाएं और स्पेशलाइज्ड संस्थाएं भी शामिल हैं. मौजूदा नियमों के तहत रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव सोसाइटी नहीं होने पर ऐसी संस्थाओं को सीधे NCDC से वित्तीय मदद मिलने में दिक्कत हो सकती है. ये भी पढ़ें: साबुन-बिस्किट खरीदना पड़ेगा महंगा, FMCG कंपनियां सितंबर में फिर बढ़ा सकती हैं दाम क्या NCDC सहकारी संस्थाओं में निवेश भी कर सकेगा? हां. बिल में NCDC को कोऑपरेटिव और कोऑपरेटिव डेवलपमेंट से जुड़ी दूसरी संस्थाओं के शेयर कैपिटल में हिस्सा लेने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है. हालांकि, इसके लिए केंद्र प्रशासन की मंजूरी जरूरी होगी. प्रशासन का कहना है कि सहकारी समितियां आगे भी NCDC की मुख्य लाभार्थी रहेंगी. बदलाव का मकसद सिर्फ उन संस्थागत रास्तों को बढ़ाना है, जिनके जरिए सहकारी क्षेत्र तक वित्तीय मदद पहुंचाई जा सके. और कौन-कौन से बदलाव प्रस्तावित हैं? बिल में कई दूसरे बदलाव भी शामिल हैं: “फूडस्टफ्स” की परिभाषा को बढ़ाने का प्रस्ताव है. इसमें केंद्र प्रशासन की ओर से अधिसूचित किए जाने वाले दूसरे खाद्य पदार्थ भी शामिल हो सकेंगे. इंडस्ट्रियल गुड्स से जुड़ी मौजूदा भौगोलिक पाबंदी हटाने का प्रस्ताव है. इससे ऐसी गतिविधियों के लिए NCDC की सहायता जगह की सीमा से बंधी नहीं रहेगी. NCDC को अपने कामकाज के लिए जरूरी अतिरिक्त अधिकार देने का भी प्रस्ताव है. प्रशासन अभी बदलाव क्यों चाहती है? प्रशासन ने इन बदलावों को सहकारी क्षेत्र के लगातार फैलते दायरे से जोड़ा है. खास तौर पर जून 2021 में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद कोऑपरेटिव सेक्टर में कई तरह की संस्थाओं की भागीदारी बढ़ी है. बिल के स्टेटमेंट ऑफ ऑब्जेक्ट्स एंड रीजन के मुताबिक, सहकारी क्षेत्र अब पहले से ज्यादा विविध हो चुका है. इसलिए NCDC को भी ऐसा कानूनी ढांचा देने की जरूरत है, जिससे वह बदलती जरूरतों के हिसाब से समय पर और सीधे वित्तीय मदद दे सके.  NCDC एक्ट में इससे पहले 1973, 1974 और 2002 में भी संशोधन हो चुके हैं. इन बदलावों के जरिए NCDC के फंड के स्रोत बढ़ाने और उसकी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए थे. ये भी पढ़ें: सैलरी बढ़ेगी या फिर करना होगा इंतजार? 8th Pay Commission की बैठक में इन मांगों पर जोर The post NCDC Amendment Bill आज लोकसभा में हो सकता है पेश, जानें क्या बदलेगा और क्यों है खास appeared first on Naya Vichar.

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भगवान शिव को क्यों प्रिय है गंगाजल? हलाहल विष से जुड़ा है इसका रहस्य

शुभंकर, सुलतानगंज, भागलपुर Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है. भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव को गंगाजल इतना प्रिय क्यों है? इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समुद्र मंथन से जुड़ी एक ऐसी पौराणिक कथा है, जिसमें हलाहल विष, नीलकंठ महादेव और मां गंगा का गहरा संबंध बताया गया है.  जब संकट में पड़ी थी सृष्टि, तब शिव ने बचाया था संसार धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अमृत प्राप्त करने के लिए देवताओं और असुरों ने मंदार पर्वत को मथनी बनाकर समुद्र मंथन किया था. लेकिन अमृत निकलने से पहले समुद्र से भयंकर हलाहल विष प्रकट हुआ. विष की ज्वाला इतनी प्रचंड थी कि तीनों लोकों में त्राहिमाम मच गया और पूरी सृष्टि विनाश के कगार पर पहुंच गई. ऐसे समय में देवताओं ने भगवान शिव की शरण ली. लोककल्याण के लिए महादेव ने बिना किसी हिचकिचाहट के हलाहल विष का पान कर लिया. उन्होंने विष को न निगला और न ही बाहर निकाला, बल्कि अपने कंठ में ही धारण कर लिया. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे ‘नीलकंठ महादेव’ कहलाए. गंगा की शीतल धारा ने शांत की महादेव की दाह पौराणिक मान्यता के अनुसार, विषपान के बाद भगवान शिव के शरीर में भयंकर ताप उत्पन्न हो गया. तब उनकी जटाओं में विराजमान मां गंगा की शीतल धारा ने उस ताप को शांत किया. इसी मान्यता के कारण गंगाजल को भगवान शिव के लिए विशेष प्रिय माना जाता है. विशेष रूप से उत्तरवाहिनी गंगा के जल को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है. यही वजह है कि सावन के पूरे महीने शिवभक्त उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह पवित्र जल केवल शिवलिंग पर नहीं चढ़ता, बल्कि उनके जीवन के दुख, रोग, शोक और संकट भी अपने साथ बहा ले जाता है. यह भी पढ़ें: कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न करें ये काम, जानें क्या है सही नियम सुलतानगंज से शुरू होती है आस्था की अनूठी यात्रा देश के कई हिस्सों में गंगा नदी बहती है, लेकिन सुलतानगंज की विशेष धार्मिक पहचान यहां गंगा के उत्तरवाहिनी स्वरूप से जुड़ी है. इसी कारण यह स्थान शिवभक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यहीं स्थित बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और संकल्प लेने के बाद लाखों कांवरिये कांवर में गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर प्रस्थान करते हैं. करीब 98 किलोमीटर की इस यात्रा में न थकान उन्हें रोक पाती है और न ही मौसम की चुनौती. हर कदम पर गूंजता ‘बोल बम’ का जयघोष उनके लिए नई ऊर्जा का स्रोत बन जाता है. कांवर में सिर्फ गंगाजल नहीं, आस्था लेकर चलते हैं भक्त धर्माचार्यों के अनुसार, कांवर में भरा जल श्रद्धालुओं के लिए केवल पानी नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास, तपस्या और समर्पण का प्रतीक है. कांवरिये इसे पूरी पवित्रता, संयम और नियमों के साथ बाबा बैद्यनाथ के चरणों तक पहुंचाते हैं. मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन, निर्मल भाव और पूर्ण आस्था के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी विश्वास के साथ हर साल देश के कोने-कोने से लाखों शिवभक्त सुलतानगंज पहुंचते हैं. कोई संतान सुख की कामना लेकर आता है, कोई रोगमुक्ति के लिए, कोई परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करता है, तो कोई केवल भोलेनाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह कठिन यात्रा करता है. सावन में क्यों बढ़ जाता है गंगाजल से अभिषेक का महत्व? सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विशेष धार्मिक मान्यता है. ऐसे में सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक पहुंचने वाली कांवर यात्रा श्रद्धा का अनूठा उदाहरण बन जाती है. सावन के पूरे महीने उत्तरवाहिनी गंगा के तट से उठने वाली आस्था की यह अविरल धारा और ‘बोल बम’ का अनंत जयघोष यही संदेश देता है कि जब श्रद्धा सच्ची हो, संकल्प अटूट हो और विश्वास भोलेनाथ पर हो, तो कठिन से कठिन यात्रा भी आसान लगने लगती है. यह भी पढ़ें: दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा The post भगवान शिव को क्यों प्रिय है गंगाजल? हलाहल विष से जुड़ा है इसका रहस्य appeared first on Naya Vichar.

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‘अलविदा भारत… चीन में मिलेंगे’अरुणाचल के युवक के भावुक पोस्ट पर अखिलेश यादव बोले- ‘परिसीमन की नहीं, सीमाओं की चिंता करो’

UP News : अरुणाचल प्रदेश के एक युवक की सोशल मीडिया पोस्ट को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शेयर किया है. पोस्ट में युवक ने चीन के अरुणाचल प्रदेश में कथित हस्तक्षेप और जमीन पर कब्जे को लेकर चिंता जताते हुए भावुक पोस्ट लिखा है. वीडियो में युवक कह रहा है कि ‘अलविदा हिंदुस्तान… बहुत दुख हो रहा है दोस्तों, चीन में मिलेंगे’. अगर स्थिति ऐसी ही रही तो चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश पर कब्जा कर सकता है. अखिलेश यादव ने शेयर किया पोस्ट समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अरुणाचल प्रदेश के एक युवक की पोस्ट साझा की है. युवक ने अपनी पोस्ट में हिंदुस्तान-चीन सीमा और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है. अखिलेश यादव ने पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “परिसीमन की नहीं, सीमाओं की चिंता करो!”उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर नेतृत्वक बहस तेज हो गई है. युवक ने पोस्ट में क्या लिखा? अरुणाचल प्रदेश के युवक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश में गतिविधियां कर रहा है और यहां की जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है. युवक ने प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. पोस्ट में युवक ने आशंका जताई कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले वर्षों में चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर सकता है. इसी आशंका को जाहिर करते हुए उसने लिखा कि भविष्य में अरुणाचल प्रदेश के लोगों को चीन में देखा जा सकता है. ‘अलविदा हिंदुस्तान… चीन में मिलेंगे’ युवक ने अपनी पोस्ट में भावुक अंदाज में लिखा, “अलविदा हिंदुस्तान, बहुत दुख हो रहा है दोस्तों, चीन में मिलेंगे.”उसने आगे कहा कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में परिस्थितियां और गंभीर हो सकती हैं. पोस्ट में युवक ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि फिलहाल उसे ऐसा नहीं दिख रहा कि इस मुद्दे पर पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं. इसी वजह से उसने अपनी पोस्ट के अंत में “अग्रिम विदाई” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. परिसीमन को लेकर अखिलेश यादव ने साधा निशाना अखिलेश यादव ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए केंद्र प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि प्रशासन को परिसीमन की नेतृत्व के बजाय देश की सीमाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए. अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को आगामी नेतृत्वक बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में अरुणाचल प्रदेश में जमीन पर कब्जे और चीन की गतिविधियों को लेकर किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में पोस्ट में किए गए दावों को तथ्य के तौर पर देखने के बजाय युवक की चिंता और आरोप के रूप में देखना जरूरी है. हिंदुस्तान-चीन सीमा से जुड़े मामलों में आधिकारिक जानकारी और प्रशासनी बयानों को ही अंतिम आधार माना जाता है. Also Read : यूपी में बीजेपी को चुनौती देगी करणी सेना, 50-70 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान, अम्मू बोले- घमंड चूर करेंगे The post ‘अलविदा हिंदुस्तान… चीन में मिलेंगे’अरुणाचल के युवक के भावुक पोस्ट पर अखिलेश यादव बोले- ‘परिसीमन की नहीं, सीमाओं की चिंता करो’ appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL Xl: प्रैक्टिस मैच में ऋषभ पंत खेलने लगे फुटबॉल, वीडियो देखकर आपकी भी छूट जाएगी हंसी

Rishabh Pant Viral Ball Kicking Video: हिंदुस्तान और श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बीच स्पोर्ट्से गए अभ्यास मैच के तीसरे दिन ऋषभ पंत ने अपनी बल्लेबाजी के साथ एक मजेदार अंदाज से भी फैंस का खूब मनोरंजन किया. पंत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह बल्लेबाजी के दौरान गेंद को बल्ले से स्पोर्ट्सने के बजाय पैर से किक करते नजर आए. उनका यह फुटबॉल वाला अंदाज देखकर मैदान पर मौजूद लोग भी हंस पड़े. वाइड गेंदों को पैर से किया किक दरअसल, दूसरी पारी में पंत शुरुआत में बेहद संभलकर बल्लेबाजी कर रहे थे. उन्होंने अपनी पहली 21 गेंदों पर कोई रन नहीं बनाया. इसी बीच स्पिनर दिलुम सुदीरा ने लेग साइड की तरफ लगातार कुछ गेंदें वाइड फेंकीं. पंत ने इन गेंदों को जाने देने के बजाय मजेदार अंदाज में पैर से किक करना शुरू कर दिया. वीडियो हुआ इंटरनेट पर वायरल ऋषभ पंत का यह अंदाज देखकर मैदान में मौजूद कमेंटेटर्स भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. देखते ही देखते उनकी यह ‘फुटबॉल’ क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी. फैंस सोशल मीडिया पर इससे रिलेटेड वीडियो देखने के बाद लोग इसे जमकर एक-दूसरे को शेयर कर रहें है. पंत के लिए यह पल इसलिए भी खास रहा क्योंकि वह पहली पारी में सस्ते में आउट होने के बाद दूसरी पारी में काफी सतर्क होकर स्पोर्ट्स रहे थे. Also Read: प्रैक्टिस मैच से बेहतर तैयारी नहीं हो सकती… जानें श्रीलंका के खिलाफ जीत पर हिंदुस्तानीय बैटिंग कोच ने क्या कहा 21 गेंद डॉट स्पोर्ट्सने के बाद बदला अंदाज शुरुआत में पंत के डिफेंसिव रवैये पर ड्रेसिंग रूम में मौजूद मुख्य कोच गौतम गंभीर की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली. हालांकि, कुछ ही देर बाद पंत अपने पुराने आक्रामक अंदाज में लौट आए. उन्होंने केशरा नुवांता की गेंद पर जोरदार छक्का जड़ा. इसके बाद दिलुम सुदीरा को भी पंत ने निशाना बनाया और उनके दूसरे ही ओवर में छक्का लगा दिया. पंत ने अपनी पारी में कुल तीन छक्के लगाए. इस तरह उन्होंने पहले धैर्य दिखाया और फिर अपने ट्रेडमार्क आक्रामक अंदाज में लौटकर फैंस का मनोरंजन किया. Also Read: बीच मैदान पर आखिर श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने क्यों किया सिराज का बैट चेक, जानें क्या था पूरा मामला The post IND vs SL Xl: प्रैक्टिस मैच में ऋषभ पंत स्पोर्ट्सने लगे फुटबॉल, वीडियो देखकर आपकी भी छूट जाएगी हंसी appeared first on Naya Vichar.

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भारत तक पहुंचने के लिए कोई भी विकल्प मंजूर, होर्मुज को बायपास करने के लिए रूस ने बनाया जमीनी प्लान

2022 से शुरू हुए यूक्रेन युद्ध ने रूस के सामने कई मोर्चों पर मुश्किलें खड़ी कीं. वैश्विक वित्तीय स्थिति की आर्थिक नाकेबंदी, तो वह पहले ही झेल रहा था, युद्ध के बाद उसके ऊपर व्यापारिक सैंक्शन भी डाल दिए गए. अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने होर्मुज संकट पैदा कर दिया है. इसने दुनिया के सामने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिम बढ़ा दिए हैं. ऐसे हालात में रूस अब ऐसे वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुटा है, जिनके जरिए वह रणनीतिक समुद्री मार्गों पर अपनी निर्भरता कम कर सके. हिंदुस्तान तक पहुंच रूस के लिए क्यों है इतनी अहम? रूस के लिए तेल सबसे महत्वपूर्ण निर्यात उत्पादों में से एक है. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए. हिंदुस्तान और चीन जैसे बड़े खरीदार भी अमेरिकी और पश्चिमी दबाव के दायरे में आए. चीन के मामले में रूस को भौगोलिक फायदा मिलता है, क्योंकि दोनों देश जमीन से जुड़े हुए हैं. लेकिन हिंदुस्तान तक रूसी सामान और ऊर्जा पहुंचाने के लिए समुद्री मार्ग की भूमिका काफी अहम है. अब होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने से समुद्री रास्ते की अनिश्चितता रूस के लिए एक नई चुनौती बन गई है. यही वजह है कि मॉस्को हिंदुस्तान तक पहुंचने के लिए जमीन आधारित विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. इसी कड़ी में रूस ने हिंद महासागर तक पहुंचने के लिए रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावना पर विचार शुरू किया है.  रूस ने सुझाया हिंदुस्तान तक पहुंचने वाला नया रेल रूट रूसी उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कहा है कि हिंदुस्तान तक पहुंच बनाने वाले नए रेल मार्ग की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. खुसनुलिन ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और बॉस्फोरस जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने के लिए रूस को हिंद महासागर तक रेल मार्ग बनाने की जरूरत है. खुसनुलिन की यह टिप्पणी पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की पृष्ठभूमि में आई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. होर्मुज जलडमरूमध्य एक अहम जलमार्ग है, जिससे सामान्य दिनों में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन होता है. खुसनुलिन ने बृहस्पतिवार को रूस की प्रशासनी समाचार एजेंसी ‘तास’ से बातचीत में कहा, ‘हिंद महासागर तक रेल संपर्क की संभावना भी तलाशी जानी चाहिए. बॉस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के कारण तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजरने वाले वैकल्पिक रास्तों की जरूरत पड़ सकती है. हिंदुस्तान तक पहुंच प्रदान करने वाला कोई भी विकल्प स्वीकार्य है.’ ये भी पढ़ें:- ईरान की अमेरिका को धमकी, कहा- सेना पूरी तरह तैयार, हमारी जमीन पर कदम रखा तो देंगे करारा जवाबहोर्मुज और बोस्फोरस क्यों हैं रूस के लिए चिंता? रूस के इस विचार के पीछे सबसे बड़ी वजह दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता रणनीतिक जोखिम माना जा रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. किसी भी तरह का सैन्य तनाव या यहां जहाजों की आवाजाही में बाधा आने से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है. दूसरी ओर, बोस्फोरस जलडमरूमध्य काला सागर को मरमारा सागर से जोड़ता है. यह रूस के लिए भी महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, लेकिन इस जलमार्ग पर तुर्की का नियंत्रण है. ऐसे में मॉस्को लंबे समय से अपने व्यापार और परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्गों को रणनीतिक महत्व देता रहा है. पहले भी किया गया है ऐसा प्रयास रूस, ईरान और हिंदुस्तान के बीच इस तरह की कनेक्टिविटी का प्रयास पहले भी किया गया था. 2020 में तीनों देशों ने मिलकर नॉर्थ साउथ ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने की पहल की थी. इसके तहत 7200 किमी का मल्टीमॉडल शिप, रेल और रोड नेटवर्क बनाने की योजना थी. इसमें रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से ईरान के बंदर अब्बास और फिर हिंदुस्तान के मुंबई पोर्ट तक आगे बढ़ाया जाता. लेकिन 6 साल भी यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी. अब होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए नए तरह के संकट ने नई मुश्किल पैदा की है. इसलिए अब रोड नेटवर्क बनाने की योजना पर काम किया जा सकता है. अमेरिकी टैरिफ की धमकी के बीच आई रूस की टिप्पणी यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब रूस के ऊर्जा निर्यात को लेकर पश्चिमी देशों का दबाव बढ़ रहा है. अमेरिकी सीनेट ने 29 जुलाई को एक विधेयक आगे बढ़ाया है, जिसके तहत हिंदुस्तान समेत उन देशों पर भारी शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान है, जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखते हैं. ऐसे माहौल में रूस के लिए केवल नए ग्राहक ढूंढना ही पर्याप्त नहीं है. उसे अपने व्यापार के लिए ऐसे परिवहन रास्ते भी चाहिए, जो नेतृत्वक तनाव या समुद्री प्रतिबंधों के कारण अचानक बाधित न हों. ये भी पढ़ें:- बदलता एशिया और हिंदुस्तान की नई कूटनीति -1: कहां चीन, कहां हम? हिंदुस्तान के लिए भी खुल सकता है नया रास्ता इस रेल कोरिडोर प्रस्ताव के बड़े भू-नेतृत्वक निहितार्थ भी हो सकते हैं, क्योंकि इसके ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजरने तथा रूस को हिंद महासागर तक जमीन के रास्ते एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग प्रदान करने की संभावना है.  अगर रूस की यह योजना भविष्य में वास्तविक रेल कॉरिडोर में बदलती है, तो इसका फायदा सिर्फ रूस को ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान को भी मिल सकता है. रूस को हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंचने के लिए समुद्री रास्तों के अलावा एक वैकल्पिक जमीन आधारित नेटवर्क मिल सकता है. वहीं, हिंदुस्तान के लिए रूस और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने का एक नया रास्ता खुल सकता है. यह कॉरिडोर भविष्य में माल ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को लेकर देश समुद्री मार्गों के विकल्प तलाश रहे हैं. लेकिन रास्ते में हैं कई बड़ी चुनौतियां इस प्रस्ताव को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा. प्रस्तावित रेल नेटवर्क को कई देशों से होकर गुजरना होगा और हर देश में अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा,

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बदलता एशिया और भारत की नई कूटनीति -2: कहां चीन, कहां हम?

दुनिया की नेतृत्व का अगला निर्णायक अध्याय एशिया में लिखा जा रहा है. चीन की आर्थिक और सैन्य ताकत,  नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप नहीं, चीन के लिए जाल ‌बिछा रहे हैं नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Qatar : जब रेगिस्तान से निकला पेट्रोल और गैस से भी बड़ा खजाना… कहानी Qatar, Al-Jazeera और Sheikh Hamad की नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : अमेरिका-ईरान में फिर बमबारी… दूसरा ‘रूस-यूक्रेन’ बनाने पर आमादा क्यों है अमेरिका? The post बदलता एशिया और हिंदुस्तान की नई कूटनीति -2: कहां चीन, कहां हम? appeared first on Naya Vichar.

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Jharkhand Vidhan Sabha March Live: देवेंद्र महतो एंबुलेंस से विधानसभा रवाना, प्रदर्शन में गुलाब लेकर पहुंचा छात्र

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन ते हो गया है. आज, 10 अगस्त को छात्र विधानसभा का घेराव करने रांची पहुंच रहे हैं. The post Jharkhand Vidhan Sabha March Live: देवेंद्र महतो एंबुलेंस से विधानसभा रवाना, प्रदर्शन में गुलाब लेकर पहुंचा छात्र appeared first on Naya Vichar.

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JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में अब ED की एंट्री, PMLA के तहत केस दर्ज

रांचीः 14वीं JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षा में अनियमितता के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो गई है. केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले में PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत केस दर्ज किया है. ईडी की ओर से यह कार्रवाई JPSC परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े आर्थिक लेन-देन और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए की गई है. अब एजेंसी मामले में आर्थिक गतिविधियों और कथित अवैध लेन-देन की जांच करेगी. ये भी पढ़ें- झारखंड विधानसभा मॉनसून सत्र का तीसरा दिन आज, सदन में हंगामे के आसार रांची की यूनिट से पांच सदस्यीय टीम पहुंची मामले की जांच के लिए ED की रांची यूनिट से पांच सदस्यीय टीम पहुंच गई है. जिसमें एक असिस्टेंट डायरेक्टर और 4 इंस्पेक्टर शामिल हैं. यह टीम परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच करेगी और आवश्यकतानुसार मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल भी की जा सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, JPSC परीक्षा में धांधली के मामले को लेकर ED ने एक सप्ताह पहले ही केस दर्ज कर लिया था. इस पूरे मामले में पैसों के लेन-देन और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की ED जांच करेगी. ये भी पढ़ें- रामगढ़ में कुजू के श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट के फर्नेस में धमाका, नौ घायल, 2 की हालत गंभीर वार्ता में प्रशासन ने दिया था ईडी से जांच का आश्वासन बता दें कि रविवार (9 अगस्त 2026) को रांची में JPSC परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलनरत छात्रों और प्रशासन के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब पांच घंटे तक वार्ता हुई थी. इस दौरान प्रशासन की ओर से छात्रों को बताया गया था कि परीक्षा में हुई धांधली की CID जांच कर रही है. छात्रों से यह भी कहा गया था कि जांच के दौरान यदि वित्तीय घोटाले से संबंधित कोई मामला सामने आता है, तो प्रशासन उसकी जांच ED से कराने का अनुरोध करेगी. हालांकि, ED ने प्रशासन के इस आश्वासन से पहले ही मामले में ECIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. The post JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में अब ED की एंट्री, PMLA के तहत केस दर्ज appeared first on Naya Vichar.

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